Sunday, 6 August 2017

आ..नज़र भर देख लू तुम को ,कि तारो की झुरमुट मे फिर गुम हो जाओ गे---भरी आँखों से ढूंढे गे फिर

तुम कब नज़र आओ गे---यह दिल है कि कभी भरता नहीं,रूह को रूह से ज़ोडते जाए गे----बेताबी का

नाम मुहब्बत नहीं,मुहब्बत नाम है विश्वास का---प्यार है हवा का झोका नहीं,सदियों का लम्बा इंतज़ार

है----जिस्म एक दिन फ़ना हो जाए गा,रूह के बंधन को तब कौन तोड़ पाए गा----