Friday, 30 June 2017

कही बदली राहे तो कही वक़्त ही बदल गया...रेत पे पाँव धरते धरते,रेत का वो निशाँ ही बदल गया...

परिंदो की आवाज़ मे सुबह का माहौल ही बदल गया...कुछ चेहरे अनजाने से,कुछ कुछ पहचाने से ....

हालत जो बदले सब बदल गया.....टुकड़े टुकड़े ज़िन्दगी के इकठ्ठा करते करते,उम्र का दौर भी बदला

और साज़िशों के अल्फ़ाज़ बदल गए...कुछ कहती है यह धडकन,सुनने के लिए अब तो यह ज़माना

भी बदल गया....

Saturday, 24 June 2017

आज खुद से बगावत कर रहे है--क्यों ताउम्र ज़ज़्बातो के महल बनाते रहे,बनाते रहे---दुनिया की बुरी

नज़रो से,अपना आशियाना बचाते रहे,बचाते रहे---कोई साथ चले न चले मेरे,बेखोफ हर राह को मंज़िल

तक पहुंचाते रहे,पहुंचाते रहे---आज खुद से ही शिकायत है इतनी कि क्यों इतनी ख़ामोशी से दिल की

तड़प को छुपाते रहे--यह दुनिया ही रास नहीं आई हम को,बची ज़िन्दगी को निभाने के लिए इन साँसों

को क्यों ज़िंदा रखा है--खुदा के पास अब जाने के लिए,ज़ज़्बातो के यह महल बना रहे है,सिर्फ अपने

इस खुदा के है लिए---
हा...आज भी आयात अधूरी है मेरी..तेरे बगैर पूरी कहा होगी यह ज़िन्दगी भी मेरी---रुख़्सत किया तो

क्या हुआ,दिल के शामियाने मे आज भी तस्वीर लगी है तेरी--ज़ुल्फो के घनेरे साये मे,तेरी उगंलियो की

हरकत सरसराहट देती है आज भी--लिखते लिखते कही क्यों बिखरते है लफ्ज़,मेरी किताब की किसी

एक उभरती नज़्म पे तेरी---मुस्कुरा दिए फिर ज़माने की हरकतों पे आज,कि खुदा को जवाब देने के

लिए सांसे तो ज़िंदा चल रही है अभी मेरी---
पलक झपकते है तो क्यों यह पलक भर आती है---हर उस याद को साथ क्यों लाती है,जो रूह को टीस

दे जाती है--जो किया उस को अब भूल जाना चाहते है,रेत के ढेर मे सब दफ़न कर देना चाहते है--लफ्ज़

तब बेज़ुबान हो जाते है,जब टूट टूट कर पत्थर बन जाते है---बस यही से सकून का वो दौर शुरू हो जाता

है,जिस के लिए ताउम्र इंतज़ार पे इंतज़ार करते है---अब आलम है कि दर्द को कुचल चुके है इन्ही पैरो के

तले,जिन्हो ने बिखेरा उन्ही को छोड़ चुके है राहे-सफर मे अजनबी कर के--

Tuesday, 20 June 2017

दोस्तों---मेरी शायरी के हर रूप को पसंद करने का बहुत बहुत शुक्रिया..दुःख दर्द मे डूबी हुई या प्यार के धागो मे लिपटी ... फिर चाहे विरह की वेदना हो या रूहो के प्यार की दास्ताँ ... शायरी वही जो आप के दिलो को रुला दे और कभी प्यार के लम्हो से आप के दिलो मे एक अहसास पैदा कर दे---शुक्रिया आप सभी का,मुझे इतना मान सम्मान और प्यार देने के लिए...शुभ कामनाये ...
चलते चलते.. बार बार सवाल करती है यह ज़िन्दगी...कभी ज़लज़ले कभी हसरते तो कभी हर पल का

हिसाब मांग लेती है यह ज़िन्दगी--सबर  की इंतिहा  तक ले जा कर,किसी खामोश मोड़ पर फेक देती

है ये ज़िन्दगी---थोड़ी सी ख़ुशी दे कर,हज़ारो आंसुओ से भिगो देती है यह ज़िन्दगी---हर पल आगे

जाने की रफ़्तार को,एक ही झटके मे तबाह कर जाती है यही ज़िन्दगी---फिर भी साँसों की डोर को

बांधे हुए,जीने पे मज़बूर कर रही यह ज़िन्दगी--यह ज़िन्दगी----
अल्फ़ाज़...अल्फ़ाज़ और अल्फ़ाज़...हज़ारो पन्ने भर दिए इन्ही अल्फाज़ो से हम ने---बरसो बाद भी

तेरी जुदाई के एहसास को, न भर सके  यही पन्ने---जिस्म तो मिट ही जाया करते है,रूह तो आज़ाद

हो कर भी आज़ाद नहीं होती--मुझ से मिलने की खातिर तेरी रूह का यही तोहफा,आज भी साथ है

मेरे--दुनिया कहती रहे बेशक दीवाना मुझ को,तेरी मेरी इसी गुफ्तगू को पन्नो मे इस कदर भर दिया

हम ने कि पुश्त दर पुश्त रूहो के प्यार को इन्ही पन्नो मे पढ़ती जाए गी---

Monday, 19 June 2017

इस भोली मुस्कान मे,मुझे तेरी वो मुस्कान याद आती है--मेरा छिपना और तेरा मुझे ढूंढ़ना,वो प्यारे

लम्हे याद आ जाते है--जो बीत गया वो भूलना आसान नहीं मेरे लिए,कि पल पल तुझे बाहों मे झुलाना

यादो का सैलाब बन के याद आ जाता है--मै जब नहीं रहू गी तब भी साथ अपने, तेरी तमाम यादो को ले

जाऊ गी---तब तू मेरा होगा,यही सोच कर रूह को सकून से तर कर पाऊ गी---जनम कभी नहीं लेना

फिर इस दुनिया मे,कि यहाँ जुदा होने के बाद जीना दुश्वार हो जाता है--- 
अपना था कभी जो,आज बेगाना सा लगता है--छूना भी चाहे उसे,तो किसी और की अमानत लगता है---

मिलने के लम्हे होते है इतने छोटे,कि ज़ी भर देख ले उस को...तो यह भी किसी सपने जैसा लगता है---

रोते है बहुत उस को याद कर के,पर उस का जहाँ आबाद रहे..यह सोच कर दिल को पत्थर कर लेते है

यह तड़प रहे गी यू ही ज़िन्दगी भर,कि वो रिश्ता जो जनून सा था..आज इक ख़्वाब जैसा ही लगता है--

Sunday, 18 June 2017

दोस्तों-------सपने और उम्मीदें...सब के लिए इस  के मायने अपने अपने है--सपने देखने की कोई उम्र नहीं होती--और ज़रूरी नहीं कि हर सपना ढेर सारे पैसो की ज़रूरत को साथ  मे लिए हो--एक आत्म-विश्वास और हौसला--साथ मे इस ज़माने से लड़ने की ताकत--दोस्तों---आप कुछ करे गे तब भी,नहीं करे गे तब भी..लोग आप के बारे मे बाते ज़रूर करे गे--क्यों कि शायद यह उन की फितरत है--अपने सपने को पूरा करने के लिए खूब मेहनत करे--और इस विश्वास के साथ कि भगवान आप का सपना पूरा करे गे--और वही लोग जो आज आप को पहचानते नहीं,वही सब आप की कामयाबी के जश्न पे बिना बुलाये आप के पास आये गे---दोस्तों,यह ज़िन्दगी कदम कदम पर हमारा इम्तिहान लेती है--असफलता मिले तो रोये नहीं,क्यों कि बुलंदियों पर पहुंचने के लिए यह ज़िन्दगी आप से मेहनत और हौसले का हिसाब लेती रहती है--सोने से पहले भगवान का शुक्रिया अदा करे और अपने जीवन की उपलब्धि पर गौर कीजिये--शुभ रात्रि दोस्तों...

Monday, 12 June 2017

जुस्तजू तो नहीं तेरी,फिर क्यों तेरा इंतज़ार करते है---खयालो मे दूर दूर तक कही भी नहीं मगर,क्यों

रातो की नींद हराम करते है---चाँद को निहारते निहारते अक्सर क्यों तारो की चमक मे खो जाते है

बेवजह ही तन्हा है..बेवजह ही रो पड़ते है--बेकरारी के आलम मे क्यों बदहवास हो जाते है----ढूंढ रहे

है इस की वजह,दिल से कहते है अब दे गवाही कि हम मुंतज़र है उस की मुहब्बत के या अपने आप से

कोई साज़िश करते है--- 

Wednesday, 7 June 2017

महफ़िल सजी है आज कद्रदानों के साथ..हज़ारो चाहने वाले हमे सलाम बजा रहे है आज---कहने के

लिए यू तो बहुत सवरे है आज..घुँघरू की आवाज़ मे कौन सुन पा रहा  है मेरी धडकनों की फरियाद---

यह तो इक बाजार है बाशिंदो की हर ताल के साथ..जहा बिकती है रुहे हर तड़पती सांस के साथ---

इंतज़ार करते है किसी उस मसीहा का,जो करे गा आज़ाद इस महफ़िल से आज---
ना रहो इतने तन्हा कि ज़िन्दगी बहुत खूबसूरत है---पलट कर ना देखो पीछे कि राहे-गुजर बहुत ही

मुश्किल है--नियामतों को जो देखो गे तो यक़ीनन इस ज़िन्दगी से प्यार हो जाए गा---इंसा हो कोई

खुदा नहीं कि हर काम तुम्हारे हिसाब से होता जाए गा---आंसू तो इक वजह है,खुद को कमज़ोर कहने

की सजा---चल थाम ले हाथ किसी मासूम का और दिला अहसास उसे कि ज़िन्दगी खुदा की इक
  रहमत

है---

Saturday, 3 June 2017

वो तेरी सलीके से बोलने की अदा,हम तो तेरे कायल हो गए---अदब से हर गुफ्तगू पे दिल जीत लेने की

वो वफ़ा,यक़ीनन तेरे सज़दे मे हम तो झुक गए---तेरे कदमो की आहट मे किसी फ़रिश्ते के आने का

अहसास होने लगता है----तू जो रुक जाये तो लगे ऐसा हवा ने खुद को जैसे रोका है---तेरे चेहरे के नूर

से अक्सर चाँद के दिखने की खबर लगती है--तू शायद इस दुनिया की नहीं,कि यह दुनिया तो अपमान

के लफ्ज़ो से बनीं एक मुसीबत लगती है----
इतनी ख़ामोशी क्यों है तेरे दिल की धड़कनो मे आज----शोला बनी दहकती हुई वो शमा क्यों उदास

है आज---चेहरे की रंगत को क्या फूलो ने चुराया है आज---इतनी गुमसुम ना बनो कि बहारो को लाज

आने लगी है आज----तेरी  शोख  अदाओ से ना जाने कितनी ज़िंदगिया होती रही है आबाद ---कोई ज़ी

गया तेरे लबो की मुस्कान के साथ---अब तो ख़ामोशी तोड़ दे ..कही ऐसा ना हो जीते जीते कोई दम ही

तोड़ गया हो आज-----

Thursday, 1 June 2017

मौसम क्यों बरस रहा है आज...क्या तेरे गेसुओं ने इन्हे खुलने की खबर भेजी है----बादल रह रह कर

दे रहे है आवाज़े, बांध ले इस ज़ुल्फो को अब कि कहर की सीमा अब हद से गुज़री है---यूं तो निहारती

है यह दुनिया तुझे तेरे हुसन के चर्चो से,अब सारे जहाँ को यूं भिगो के क्यों मार देने पे उतरी है---धरती

पे भर रहा है सैलाब इतना.. जानम  अब तो मान ले कहना कि इसी धरती ने तुझे इस जहाँ मे उतारा है 
तेरे जिस्म से मुझे क्यों फूलो की महक आती है--तू परी तो नहीं फिर क्यों मुझे शहज़ादी नज़र आती है

तेरी गुफ्तगू मे खुदा का नूर बरसता है--तू चलती है तो यह संसार जैसे तेरे कदमो मे सज़दा करता है--

तुझे छूने के लिए ज़मीर की सदा सुनता हू,कही भूल से तुझे ज़ख़्म न दे जाऊ इस बात को ज़ेहन मे हर

पल रखता हू----मासूम है तू इतनी कि तुझे देखता हू तो ओस की बूंदो की नमी याद आ जाती है---
पलकों के शामियाने मे,तेरी मासूम सी वो कजरारी  आंखे---इसी शामियाने के हटते ही,क्या कह गई

तेरी यह बोलती आंखे----बहुत सवाल करती है तेरी भोली आंखे,फिर उन्ही सवालो के जवाब मुझ से

पूछती है तेरी यही चुलबुली आंखे---कितनी ही ग़ज़ल लिख दू तेरे हुसन और तेरे नूरानी चेहरे पे,पर

फिर भी मेरी नज़र क्यों आ कर ठहर जाती है तेरी इन्ही कजरारी से आँखों पे---