Sunday, 30 April 2017

आवाज़ जो आई सीने से मेरे,लगा कि सब टूट ही गया---घबरा के जो खोली आंखे तो इक मासूम नज़ारा

दिल को कौंध गया---मुस्कुरा दिए उस भोली अदा पे हम,मिट गए उन नन्हे कदमो पे हम---दुआओ से

भर दिया आँचल उस का,ना लगे नज़र किसी की उसे सीने मे ही बसा लिया---खुशियों से भरा रहे दामन

तेरा,अपनी उम्र का हर लम्हा आज तेरे ही नाम कर दिया----

Saturday, 29 April 2017

तुझे देखे या फिर प्यार करे---तेरी मासूमियत पे मर जाए या दुआओ मे अपनी तुझे शामिल कर ले--

तेरे हर कदम पे,तेरी राह मे फूल बिछाए या इबादत के पन्नो मे तेरा सज़दा कर ले---कशमकश मे है

दीवानो की तरह खुद से बेगाने से है,शायद तेरे लिए खुद से अनजाने से है---चाँद को कहे छुपने के लिए

या तुझे अपनी आगोश मे भर ले,या रात भर तेरी नज़र उतारे और तुझे रूह अपनी मे शामिल कर ले-----
हर बात को कहने के लिए,जरुरी तो नहीं कि लफ्ज़ो मे उसे ढाला जाए---समझो जो इशारो को कभी

फिर बात करने के लिए तुम से मुखातिब क्यों हुआ जाए--गर्म सांसो की नमी को जो सीने मे छुपा लो

तो आगोश मे सिमटने के लिए क्यों कहा जाए---गेसुओं को बिखेरा है चांदनी के उजाले मे ऐसे कि तेरी

बाहो मे आने के लिए अँधेरे का इंतज़ार करना  ही क्यों पड़े---

Friday, 28 April 2017

खुला आसमां भी है,परिंदो के चहकने की इक वजह भी है---यह सुबह खुदा की नियामतों से भरी इक

दुआ ही तो है---यह ख़ामोशी,यह लय मे बहती हवा..कुछ न कह कर बहुत कुछ कहती भी तो है---तू

सुन ज़रा,पलट कर देख तो ज़रा कि ऐसी ख़ामोशी मे प्यार की इक रज़ा भी है---चल कर आए थे बहुत

दूर से हम,दामन मे चाहा प्यार तेरा,इस सुबह का इरादा कुछ ऐसा भी तो है---

Thursday, 27 April 2017

समंदर के पानी की तरह,यह ज़िन्दगी भी बस बहती रही.बहती रही--कभी टकराई काँटों से तो कभी

पत्थरो से चोट खाती रही--संभल संभल कर भी चले तो भी गुनाहो के दाग लगाती रही--मुस्कुराये जो

सब भूल के तो भी दामन को दागदार करती रही..करती रही--बहना ही जब था मंज़िल की तरफ,तो

दागो का हिसाब भूलना ही पड़ा--वाह री ज़िन्दगी,तेरी नादाँ भूलो को नज़रअंदाज़ कर के...आज अपनी

मंज़िल को पाने की खवाइश बस कामयाब होने को लगी..होने को लगी---

Monday, 17 April 2017

तन्हाईयाँ रास नहीं आई हम को...घुटन ने दबोचा और खामोशिया टकरा गई---तेरी तलाश मे जो

निकले,खुली वादियां मुखातिब हो गई---सिर्फ तेरे अहसास से सांसे खुलने लगी,गेसुओं को जो खोला

घटाएं बरसने लगी---सूखे होठो मे नमी क्यों आने लगी,चेहरा जो छुआ मखमली चादर जैसे बुलाने

लगी---मिलते मिलते आखिर मिल ही जाओ गे,आए है तन्हाइयो को मिटाने के लिए..हुआ ऐसा क्यों

की ज़िन्दगी ज़िन्दगी से बस टकरा गई---

Saturday, 15 April 2017

हज़ारो हाथ उठते है दुआ के लिए...इंसान मुक्कमल  होता है---दौलत से नहीं,शोहरत से भी नहीं...आँखों

की नमी से ज़िंदगियाँ रोशन होती है---कुछ रिश्तो के कुछ भी नाम नहीं होते लेकिन,वो ज़िन्दगी को

सकून देते है---दिल जहा रहे ख़ुशी से भरा,रूह इत्मीनान से हवा लेती है---ज़िन्दगी नाम तो है बस जीने

का,रंक रहे या कोई राजा बने---किस्मत की लकीरो के जो साथ चले,वही इंसान मुक्कमल होता है----

Thursday, 13 April 2017

हर सांस मे मेरी,एहसास अपना दिलाने के लिए शुक्रिया मेरे हमदम----पूजा के हर पल मे,साथ मेरा देने

के लिए शुक्रिया मेरे साजन----नमन करते है तुझे,ना याद आ अब इतना कि आंखे नम ना कर बैठे---

यह दिन तो तेरा है और मेरा भी,तेरे लिए ही सजने का सवरने का---मिलन के दिन मेरे पास आने के

लिए,मेरा मान रखने के लिए....शुक्रिया मेरे हमदम----
मेरे जिस्म से फूलो की महक आती है,जब तेरी रूह मेरी रूह मे समां जाती है---प्यार के धागो मे तेरे

इश्क की रज़ा होती है,तभी तो मेरे हुस्न पे नूर की चमक होती है---लोग मुझे शहज़ादी का ख़िताब देते

है,नहीं जानते कि मेरे हुस्न की चर्चा तेरी बदौलत ही होती है---बांध के रखना मेरे रूप की चांदनी को

कि तेरे बगैर मेरी हर शाम जुदा होती है----





Wednesday, 12 April 2017

ज़मी पे पाँव धरे या आसमाँ मे कही खो जाए---तेरी मौजूदगी के एहसास भर से ही,हम सुबह से ही है

महके महके..फूलो से खिले----क्या लेना क्या देना इस दुनिया से,महफूज़ है तेरे ही साथ..तेरे रिश्ते के

तले---तेरी यह दुल्हन आज भी वैसी ही है..सब कुछ वैसा ही है...सब कुछ बदला भी है----तेरी ही रूह मे

आज भी वैसे ही समाए है..बदला है तो इस दुनिया का रूप...जो ऊपर से कुछ और तो अंदर से हम्हे पूरी

तरह बर्बाद करते आए है--शायद दिल ही दिल मे तेरी दुल्हन को कमज़ोर समझते आए है-----
इंतज़ार तो इंतज़ार होता है...चाहे वो तेरे आने का हो या तेरे बताए रास्ते पे जाने का हो---हिसाब

मांगे ज़िन्दगी से अगर तो धुआँ धुआँ सब नज़र आता है--पर रौशनी मे गर तेरा चेहरा देखे तो यह

धुआँ भी शराबी आँखों सा नज़र आता है----बात करे फ़ासलो की तो बहुत दूरी तेरे मेरे बीच नज़र आती

है---रूह के तारो को जो जोड़े..तो रिश्ता सौ जन्मो का दिखाई दे जाता है---दीदार तेरा नज़रो से करे या

रूह से रूह के तारो को मिलाने का करे..रिश्ता यह ख़ास हर किसी को नज़र आ जाता है----
कहते है खामोशियाँ कभी बोला नहीं करती---पर हर ख़ामोशी मे तेरी आवाज़ क्यों सुनाई देती है----

बहुत देर गुफ्तगू होने  के बाद,हर चीज़ खूबसूरत क्यों नज़र आती है---जिस्म हल्का हो जाता है,और

रूह सकून से भर जाती है---तेरे बाद किसी और के लिए वक़्त कहाँ होता है--गर्म हवाओ मे क्यों सर्द

मौसम का अहसास होता है---तेरे जाने के बाद  क्यों गुफ्तगू करने का मन फिर हो आता है-----
बस तेरी  दीवानी हू...तेरी ही इक कहानी हू---किरदार खास हू तेरी किताब का,लोग कहते है...मै

झाँसी की रानी हू---शाही जीवन जिया था कभी,शाही रुतबे मे रहते थे---नाज़ आज भी है खुद पे इतना

भरोसा रब पे भी है इतना,की मौत भी शाही पाए गे--टूट कर कभी जिया नहीं,फिर हर पल आंसू क्यों

टपकाए गे---तेरे नाम से जुड़ा है नाम मेरा,इस कहानी को रोशन कर के ही.... तेरे पास आए गे---

Tuesday, 11 April 2017

तुझे ठेस न पहुंचे इस ख्याल से..हम रोए गे नहीं---दिन तो हमारा अपना होगा,तुझे ख़ुशी देने के लिए

पलकों को भिगोए गे भी नहीं---तेरे ही सीने मे,तेरी ही बाहो मे,मुस्कराए गे..यह बात और है कि तेरे

सपनो को मुकम्मल करने के लिए,ज़िन्दगी को बेखौफ अभी और जीते जाए गे--सब की राहो से दूर

बहुत ही दूर,एक दुनिया बसाई है मैंने..जहा ख्याल सिर्फ तेरा है,अपने टूटे दिल के लिए अब अपने

ज़ख्मो को किसी को कभी बताए गे भी नहीं----

Monday, 10 April 2017

यह भोर सुबह की कहती है..हर नियामत होगी तेरी---हर उलझन सुलझे गी..दर्द की दवा हाज़िर होगी

झुक जा खुदा के सज़दे मे..दे खुद को उस के चरणों मे--यहाँ कोई नहीं तेरा..बेगानो की दुनिया सारी है

न निभा कोई रसम-रिवाज़..ना खौफ रख दिल के खाने मे ज़रा---ना मांग खुदा से दौलत के भंडार......

बस रह हर पल उस का शुक्रगुज़ार..छोड़ के साँसों के बंधन,एक दिन उड़ जाए गा--रह जाए गी बस यादे

और तू हर शै से आज़ाद हो जाए गा---

Sunday, 9 April 2017

शाही लिबास मे,शाही अंदाज़ मे..तुझ से मिलने बहुत दूर से आए है--तड़प प्यार की तुझे देने के लिए

तेरी ही ज़िन्दगी मे दस्तक देने आए है आज--प्यार तुम्हे मुझ से नहीं है गर,तो पलके बिछाए यहाँ क्यों

बैठे है आज--दुनिया देती है सलामी मेरी हर अदा पे खास,तुम क्यों रख के बैठे हो दिल के ज़ज़्बात दिल

के दरवाज़े के पार--यह हसीं शाम बार बार नहीं आती,आँखों से मुहबत झलकाने बहुत दूर से आए है आज 
कही उलझा दामन तो कही बिखरे गेसू -- कही ज़ल्दबाज़ी मे दुपट्टा लिया थाम ---मिलन की घड़िया

आने को है,कितना सजना है सवरना है..होश मे नहीं है मेरे सुबह-शाम--माथे की बिंदिया,हाथो के

कंगन और अब तो बज उठी यह पायल लेते लेते तेरा नाम---रूह का मिलन तो होना ही है,फिर क्यों

यह धड़कन हो रही बेचैन बेचैन--दिन गिने या रातो को करवटें बदले,अब तो इंतज़ार मे है यह रूहे-खास 
दुनियाँ की परवाह जो की होती,तो आज ज़िंदा न होते--हौसले से जो कदम ना बढ़ाये होते,तो आज अपनी

शर्तो पे कहाँ ज़ी पाते--गरम रेत पे पाँव रखने से जो डर जाते,यक़ीनन दहशत की आग मे खुद ही जल

जाते--दुनियाँ समझी हम तन्हा है,वो क्या जाने मेहबूब का साथ आज भी साथ है मेरे--खुदा की नियामतों

को रोज़ सलाम करते है,झुक जाते है उस के सज़दे मे--हर सांस को लेने से पहले,उस की रज़ा सुन लेते है-- 
वो तेरी  काली  घनेरी पलके,आँखों के वो खूबसूरत शामियाने---मेरी दुल्हन हो या आसमाँ की कोई

शहज़ादी..आंचल मे समेटे हुए बेतहाशा अफ़साने...टुकर टुकर देखती हुई तेरी भोली मुस्कान की,हज़ारो

मासूम सी बिजलिया---कौन कहता है कि तुम इंसा हो..दुनिया से अलग,सदियों मे पैदा होने वाली---हो

सिर्फ मेरी ही दुल्हन---उन्ही यादो के कीमती ख़ज़ाने से,आज भी सजा है मेरा यह मन और तन..रहे थे

साथ सदा,रहे गे रूह से जुड़े..तेरे ही आंगन मे मिले गे रूह के छाँव तले----
रोने के लिए आज वक़्त नहीं है मेरे पास.....तेरे ही दिन पे,तेरे लिए सवरने के लिए बस बेताब है हम

कोई क्या कहता है..कोई क्या कहे गा-इस से परे तेरी ही दुनिया मे शिरकत करने को तैयार हो रहे है

हम--रूह मेरी मुकम्मल तो तभी होगी,जब तेरी रूह सज़दा करे गी मेरे हुसने-यार के आस पास--ना

छेड़ मेरी उन्ही धडकनो के तार,जिन्हे छुआ था तूने पहली पहली बार--तेरा वही अहसास आज भी है

मेरे दिलो-दिमाग के बहुत ही पास..बहुत ही पास---

Friday, 7 April 2017

खुशबू तेरी सांसो की है इतनी महकी महकी,कि फिज़ाओ को लाज आती है---तेरे आने की खबर से यह

दुनिया भी ज़न्नत सी नज़र आती है---तेरे छूने से इन वादियों मे एक सरसराहट सी क्यों चली आती है

गुफ्तगू करते है धीमे से मगर,चांदनी को खबर हो जाती है---चाँद को छिपाती है अपने आंचल मे,पर

दुनिया को खबर हो जाती है--तेरी सरगोशियों से मेरे जिस्मो-जान क्यों सिहर जाती है---

ना छेड़ साज़ ज़िन्दगी के मेरे,अपनी ज़िन्दगी को ही भूल जाए गा--ना कर अटखेलिया ज़ुल्फो से मेरी,

तेरा ईमान डोल जाए गा---साँसों की खुशबू मे खोने से पहले,साँसे अपनी तू कैसे ले पाए गा--मेरी जान

मे अटकी है जान तेरी,यह सोच कर तू अब किसी और का भी ना हो पाए गा--रूबरू हो जा मेरी ही रूह से

ज़रा,लाज़मी है कि अपनी ही रूह को यक़ीनन भूल जाए गा---

Wednesday, 5 April 2017

ना इंकार करते हो, ना इकरार करते हो--बला के  खूबसूरत हो,निगाहे-राज़ करते हो--अदाए मार डाले

गी,यू ही दूर जाते रहे नज़दीकिया पास आए गी--पत्थर-दिल सनम मेरे,खुदा का नूर हो लेकिन खुदा

क्यों खुद को मान बैठे हो--हुस्न से मालामाल हो लेकिन,इश्क के बिना कैसे ज़ी पाओ गे--राहो मे खुद

ही चले आओ,फिर ना कहना किसी और के हुस्न को अपना क्यों मान बैठे हो---

Monday, 3 April 2017

जय माता दी दोस्तों...ज़िन्दगी मे कल क्या होगा,कौन जाने ---हम अक्सर यही सोच कर दुखी होते रहते है...अपने अपने कर्मो का फल हम सब को भुगतना ही पड़ता है..और यही सच है..जो है बस यही आज है...हर हाल मे माँ का शुक्रिया अदा करे..पूजा मे,अपनी प्राथनाओं मे अपने मन की हर बात,हर उलझन माँ  को बताये..उन से ज्यादा हमारी कोई नहीं सुन सकता...आज अष्ठमी के अवसर पर माँ का मन से आत्मा से शुक्रिया कीजिये.....जय माता दी..जय माता दी....

Sunday, 2 April 2017

पूजा के हर धागे मे,इबादत के हर पन्ने मे....कलम की स्याही मे और मेरे दिल की किताब मे....जब

भी याद किया तो बस तुझी को याद किया..अपने घर के उस आंगन मे,हर खिड़की हर उस दरवाज़े मे

हर चोखट पे पाँव धरा जब जब....फरियाद मे खुदा से यही माँगा कि इबादत का आखिरी पन्ना तेरे ही

घर की उन्ही हवाओ से गुजरे,मेरी ही साँस का आखिरी लम्हा उसी घर के आंगन मे निकले...जो भी

निकले उस रह-गुज़र से,तेरे मेरे रिश्ते को कहानी को समझे...