Sunday, 31 December 2017

ना भी नहीं...हां भी नहीं---जहा तक जाती है नज़र,वहा तक तेरी बेवफाई के निशाँ कही भी नहीं----

पलट कर तेरा मुझे देखना,पर लब पे मुस्कराहट कही भी नहीं---तेज़ कदमो से मेरी तरफ लौटना

पर बिना देखे मुझे रफ़्तार से चले जाना...मुहब्बत का एहसास अभी भी नहीं----रुखसती के वक़्त

पलकों का नम होना,पर आंखे मिलाने की हिम्मत कही भी नहीं..कही भी नहीं-----

Saturday, 30 December 2017

कांच के टुकड़ों पे जो पाँव फिसला,दलदल के गहरे पानी मे भी संभल नहीं पाया---आंसुओ का सैलाब जो

बहा,इतना बहा कि समंदर भी इस को पचा ना सका----इज़्ज़त के नाम पे,मेरे वज़ूद की धज़्ज़िया उड़ाने

वाले...बेबसी मेरी पे इतना हॅसे कि लौट के जहाँ मे फिर सर उठा ना सके---घुंघरू की जगह जब बेड़ियों

ने ली,तो रास्ते खुलने तो क्या..बंद नज़र आने लगे----धीमे धीमे ज़ख़्म नासूर बने,और यह ज़ख़्म ताउम्र

भर ही नहीं पाया------

Friday, 29 December 2017

यू ही कभी नज़र झुक गई,और ऐसी नज़र को वो इकरार हमारा समझ बैठे----किसी बात पे जो हस

दिए,हमारी हसी को वो प्यार हमारा समझ बैठे----किसी बात से खौफ खा कर ,जो खुद मे सिमट बैठे

शर्मों-हया की मूरत हम को मान बैठे----जब रो दिए अपनी ही बेबसी पे,मनाने के लिए अपने कदमो से

हमी पे निसार हो बैठे---  या अल्लाह....तेरी नज़र से खुद को बचाए या खुद से खुद की नज़र उतार ले

कि वो तो हमारी हर बात को अपनी मुहब्बत का हक़दार समझ बैठे----




Wednesday, 27 December 2017

कुछ बिखर गए .... कुछ सिमट गए .... कुछ बेखौफ तेरी बातो मे उलझ गए-----तेरे मेरे दरमियान

गुफ़तगू का वो सिलसिला ......कभी हसी तो कभी नाराज़गी का वो उलाहना -----राज़ तो आज भी

खोल देती है झुकी पलकों की गुस्ताखियाँ -----पाँव के अंगूठे से वो ज़मी को कुरेदना..... फिर कभी

तिलमिला कर हमी पे बरसना----याद तो आज भी करते है तेरी नरम  कलाइयों की वो अठखेलिया

जवाब देने के लिए,जवाब पाने के लिए....लफ्ज़...जो कुछ बिखर गए तो कुछ सिमट गए----

Monday, 25 December 2017

यादो का हर झरोखा तेरी सूरत की याद दिलाता है---गौर करते है जब भी तेरी सूरत पे,अपनी सूरत मे

तेरा अक्स नज़र आता है---दुनिया के लिए बेशक तुम इतिहास सही,पर मुझे आज भी तुम मे आगे का

साथ दिखाई देता है---यह तो सोच है दुनिया वालो की,हवा के रुख से रिश्तो को भुला जाते है---पर तेरी

यह दुल्हन हर याद को,अपने जीवन मे आज भी तुझे दूल्हा समझ...... रिश्ते को निभाती है----

Sunday, 24 December 2017

तहजीब से भरा आप के बोलने का यह लहज़ा..दिल मेरे को अंदर तक छू गया----मासूम सा चेहरा और

मोती की तरह बिखरते आप के होठो से यह लफ्ज़....खुदा की बनाई कोई मूरत है आप----सुना है और

देखा भी इस दुनिया मे,कि सूरत और सीरत कभी साथ नहीं मिलते----खूबसूरती का दंभ अक्सर मोहिनी

मूरत को नज़रअंदाज़ कर जाता है---पर कमाल कुदरत का देखा आप मे हम ने,हर कमी को दूर कर दिल

जीत लिया मेरा आप की सादगी का यह रुतबा----

Saturday, 23 December 2017

टूटने के लिए जरुरी तो नहीं कि ज़ार ज़ार रोया जाए---खुश होने के लिए क्या जरुरी है कि पैरो को

थिरकने को मजबूर किया जाए---लब मुस्कुराते है कभी तो यह आंख क्यों भर आती है---और कभी

आंखे बरसती है सावन की तरह, तो लब क्यों मुस्कुरा देते है----अज़ब खेल है ज़िंदगानी भी,यहाँ हॅसते

है तो दर्द दिल मे छुपा जाते है---और रो रो कर बेहाल जब होते है तो रहम की भीख पा जाते है---या खुदा

मेरे,तेरी दुनिया मे ज़िंदा रहने के लिए..क्या किया जाए..क्या ना किया जाए----
मेरे पास तेरी खामोशियो का कोई जवाब तो नहीं,पर तेरे लब कभी खुले इकरार के लिए,इस का वादा

मेरे दिल के हिजाब मे है तो कही----खामोशिया कभी रुला दिया करती है तो कभी दिलो को भारी भी

कर जाती है---बेवजह जीने की तमन्ना इंसानी फितरत की कोई कला तो नहीं,तू कभी कुदरत से ना

रूठे इस लिए साथ तेरे चलना..मेरी किस्मत मे है तो कही----अब बोल तो दे कुछ लफ्ज़ मुहब्बत के

लिए,कि अब तेरी इन खामोशियो का मेरे पास कोई जवाब ही नहीं----

Friday, 22 December 2017

शब्द निखरते रहे,लफ्ज़ अपनी बुलंदियों पे थिरकते रहे---कभी डूबे दर्द मे,कभी महके प्यार मे तो

कभी उन की आगोश का सपना लिए,पन्नो को मुबारकबाद करते रहे---ज़माना देता रहा तारीफ की,

हौसला-अफ़ज़ाई की निशानियां----दर्द के लफ्ज़ो मे ढूंढ़ता रहा हमारी तन्हाईया,कभी मुहब्बत के अंश

मे,खुद का नाम तलाशता रहा---पर यह शब्द,यह लफ्ज़--अपनी मुहब्बत की तलाश मे दिन-ब-दिन

निखरते रहे,बस सवरते रहे----

Sunday, 17 December 2017

तेरी यादो ने आज क्यों फिर कहर ढाया है---तेरी ही बाहों मे सिमटने के लिए यह दिल क्यों भर आया

है---तेरे पास आने के लिए यह जिस्म क्यों रूह से अलग होने को रोने रोने को आया है----जज्बात है

कि तड़प रहे है तेरी दुनिया मे तेरे पास आने के लिए----किस से कहे कि ज़िंदगी का यह सफर अब

कटता नहीं तेरे बिना----कोई भी रिश्ता भाता नहीं अब तेरे बिना----क्यों आज फिर तेरी उन्ही यादो ने

मेरी रूह पे कहर ढाया है----

Saturday, 16 December 2017

तू कही से भी पुकारे गा मुझे,बेखौफ चले आए गे---दुनिया===इस को छोड़ चुके है बरसो पहले,क्यों

इस के नाज़ उठाएं गे----तूने वास्ता दिया है अपनी पाक मुहब्बत का,पर किया है दुःख ज़ाहिर कि दौलत

के ख़ज़ाने ना लुटा पाए गे----कैद रहो गी मेरी मासूम मुहब्बत की राहो मे,सिमटने के लिए जियो गी मेरी

बाहों मे---ओह--बहुत खुशनसीब हू मैं,इस पाक मुहब्बत को  पाने के लिए---दौलत की राहो मे वो ख़ुशी,वो

सकूँ कहाँ मिलता ---इसलिए तेरी ही दुनिया मे..तेरे पास  बेखौफ चले आए है---- 
लोग कहते है बहुत मगरूर हो तुम...किसी एक जगह रुकते ही नहीं,बहुत बेवफा हो तुम.....प्यार का

दावा करने के लिए,एक हसीं दिल के मालिक नहीं हो तुम....टूटते अल्फाज़ो को शातिर अदा से,घायल

करने मे माहिर हो तुम.....तेरे मगरूर होने की सजा,कदम कदम पे बेवफाई का जाल बिछाने की कला

अब हम से मिले हो,तो बताए गे तुम्हे.....मगरूर भले हो मगर पाक मुहब्बत के हकदार कही नहीं हो

तुम.... 

Sunday, 10 December 2017

भरी नज़र पूछती है ज़िंदगी तुझ से,आखिर ख़ुशी के मायने क्या है----क्या दौलत या कदम कदम पे

बिखरती खूबसूरती की चमक....कभी नकाब ओढ़े हुए झूठे रिश्तो की हसी,तो कभी आंसू पलकों मे

छिपाए मुस्कुराती सी छवि....ना चाहते हुए भी साथ जीने की सजा,तो कभी साथ हो कर भी अलग

होने की खता...टूटे दिल भी अक्सर जुड़ने की बात करते है,तो कही दिल जुड़ कर सदा के लिए जुदा

हो जाते है---अब तो जवाब दे ज़िंदगी,इस दुनिया मे आखिर ख़ुशी के मायने क्या है----

Saturday, 9 December 2017

राज़ कभी जो खोले दिल के हम ने,तेरी ज़िंदगी की तस्वीर बन जाए गे---ना कर इल्तज़ा बार बार मेरे

खामोश लब गुस्ताखियाँ कर जाए गे----मुहब्बत बेजुबान होती है,किसी राह पे कोई मिल जाए तो दूर

कही शहनाइयों की गूंज दस्तक पे दस्तक दे जाती है----मेरी हर अदा पे खुद की अदाएं कुर्बान करने

वाले,तुझे पाने के लिए ज़मीं-आसमां हम एक कर जाए गे-----

Thursday, 7 December 2017

हवाओ की रुखसती और यह बरसता पानी----कुछ मीठी कुछ खट्टी यादो के साथ ज़िन्दगी की प्यारी

सी मेहरबानी---तेरे आने की खबर से हर तरफ रौनक क्यों है----तेरे कदमो की आहट से पहले खामोशिया

गुनगुनाती क्यों है----शाखों से टूट कर यह फूल तेरी राहो मे बिछने के लिए राज़ी क्यों है----अरे..खिल

गई है यह धूप,तुझे मेरे घर का रास्ता दिखाने के लिए......बादलों को चीर कर तेरा ही सज़दा करने बस

आई है यह धूप----

Wednesday, 6 December 2017

आप के लफ्ज़ो की अदायगी का वो जादू....कलम लिए हाथ मे,बस हमी पे नज़म लिख देने का वो जादू....

हमारे चलने पे,हमारे ही कदमो पे निसार होने का यही तेरा जादू....हमारी ही हसी पे,हम को ही लूट लेने

का तेरा यह कातिलाना जादू....कौन हो तुम......गर्दिश मे सितारे आप के है,पर आसमां की बुलंदियों पे

हम को ले जाने का तेरा जादू.....कहे क्या आप से.....फरिश्ता हो या ज़िंदगी का रुख बदलने का कोई

नामचीन जादू.....

Tuesday, 5 December 2017

हटा दे अपने गालों से इन गेसुओं को,बस यू ही लहरा दे इन्हे खुले आसमां के दायरे मे ज़रा ----पलके ना 

झुका नज़रे तो उठा,कही  दूर बजती शहनाइयों की गूंज मे मेरे लफ्ज़ो का मतलब तो बता----कब तल्क

हा..कब तल्क तेरे इंतज़ार मे तेरे आने की घड़ियां मै गिनू----क्या वक़्त से कहू कि रुक जा ज़रा,मेरे

मेहबूब मे अब तक प्यार का ज़ज़्बा ही तो नहीं जगा---लबो को अब तो खुलने दे ज़रा,ज़िंदगी के इन

लम्हो को अब तो ज़ी ले ज़रा----

बहुत नरम सी चादर है तेरी यादो की तन्हाई की---कही दूर कोई बेखबर है,उसी की यादो की तन्हाई से---

बड़ी मुश्किल से नींद कभी जो आ जाती है,तेरा फिर मेरे खवाबो मे आ कर मुझे जगा जाना...यही तो

तेरी मुहब्बत की कातिलाना रुसवाई है----मेरे पास से तेरा ख़ामोशी से निकल जाना,और अपनी ही

मुस्कराहट को होठो मे दबा जाना----किस से कहे कि यही अदाएं तेरी मेरी रातो की तन्हाई है-----

Monday, 4 December 2017

धड़कनो को आहिस्ता से सुना तो तेरे नाम की आवाज़ आती है----आँखों को जो बंद किया तो तेरी ही

तस्वीर उभर आती है------बरबस नज़र पड़ी जो खुद की हथेलियों पर,इन्ही लकीरो मे मुझे अक्स तेरा

ही नज़र आया है --लोग कहते है कि मांगो तो खुदा भी मिल जाता है,पर हम ने  तो तुझी मे अपना खुदा

पाया है --पायल बजती है बेखबर रात भर,चूड़ियाँ खनक खनक जाती है बार बार----जो धड़कनो की सुने

तो आवाज़ सिर्फ तेरे ही नाम की आती है----

Thursday, 30 November 2017

चाहत की दुनिया से दूर,बहुत दूर.......खुले आसमान मे निकल आए है हम....तमाम बंदिशों से परे,खुद

की दुनिया मे मशरूफ हो गए है हम....ज़माना पूछता है हम से,क्यों इतना बदल गए है हम....पुराने

लिबास को छोड़ कर,खुदा की दुनिया मे समा गए है अब....पलकों मे नमी नहीं,पलकों के किनारे सूख

चुके है अब....मज़िल को पाने के लिए,मंज़िल की और बढ़ते जा रहे है हम....खुद से खुद का नाम पाने

के लिए,हज़ारो दुआओ का सहारा ले रहे है हम....
आँखों की नमी और दिल की ख़ुशी...सीने का यह दर्द और तेरे मिलने की घड़ी....कुछ मेल नहीं पर मेल

तो है,तुम साथ मेरे नहीं पर फिर भी आने का अहसास तो है.....बिजली की चमक और गुस्ताख़ नज़रो

का यह खौफ,मेल नहीं पर मेल तो है....तेरे चेहरे पे नफरत की झलक पर दिल मे मुहब्बत की खलिश

क्या कहते है इसे,याद आता है मगर कुछ, फिर कुछ याद आता ही नहीं...दिल के टुकड़े कई बार हुए,

यह दिल घायल फिर भी है मगर...कुछ मेल नहीं पर मेल तो है....

Sunday, 26 November 2017

 आप के सपनो को उड़ान देने के लिए,खुद के पंख देने आए है---उन मे मुहब्बत का नशा भरने के लिए

अपनी चाहत की गागर ले आए है----छलक रहा है हमारी आँखों से इक बरकत का हिसाब,जो चला है

चले गा..बरसो बरस आप के इन्ही सपनो के साथ----कभी लगे जो आप को,हमारी दुआओं मे कही कमी

आई है...भूल कर खुद को आप की ज़िंदगी मे आप ही का नज़राना बन के आ जाए गे-----

Thursday, 23 November 2017

दोस्तों...कल मेरी संस्था मे रहने वाले एक बच्चे ने मुझे से पूछा...मैडम..आप हमेशा इतनी खुश कैसे रहती है..हर पल मुस्कुराती हुई...क्या आप के पास कोई दुःख नहीं ???? उस बच्चे का सवाल मुझे सब कहने पे मज़बूर कर गया.....बेटा..जब आप जीवन के बेहद कठिन दौर,बेहद दर्द और अपमान से बार बार गुजरते है और कई बार आप ईश्वर से हाथ जोड़ कर यह भी कहते है कि अब और नहीं...अब सहा नहीं जाता...तब आप मे एक नई ताकत,नई शक्ति जनम लेती है..यह वो वक़्त होता है जब आप भगवन  के करीब और करीब होने लगते है..पूजा मे जब हमारा मन रमने लगे,धयान मे बैठे तो वक़्त का अहसास ही ना हो..तो समझ लीजिये कि अब वो रिश्ते,वो लोग ज़िन्हो ने आप को दुःख-दर्द दिए..वो तमाम परिस्तिथिया ...अब आप के लिए कुछ भी मायने नहीं रखती...जब कही से भी प्यार,सम्मान लेने की इच्छा तक ना रहे तो अपमान का कोई मायने नहीं रहते..बेटा..याद रखे कि जब भी आप का समय अच्छा ना हो तो रोने मे खुद को संताप ना दे बल्कि इस वक़्त हम को धैर्य की बहुत जरुरत होती है...खुद को इस अग्नि-परीक्षा के लिए तैयार कीजिये..पुस्तके पढ़े,उन महान विद्वानों की,लेखकों की...जो इस वक़्त हमारे साथी,हमारी प्रेरणा बन जाते है...बेटा..मेरे दुखो ने ही मुझे जीना सिखाया है..हम सब को कोई ना कोई दुःख दर्द होता ही है..बस जरुरत है खुद को सँभालने की..कि आप कौन सा रास्ता चुनते है...मैंने पूजा का,किताबो का,भगवन का साथ चुना...तुम सब की खुशियों मे अपने दुखो को होम कर दिया..अब मे खुद को भूल कर आप सब के अंदर जीती हु...इसलिए हमेशा खुश रहती हु...हमेशा...उस बालिका ने मेरे हाथो को अपने माथे से लगाया और कहा ...मैडम ..आज से आप मेरी प्रेरणा हो...दोस्तों..आज सही मायने मे मैंने अपने दुखो पे विजय पा ली......शुभ रात्रि....

Sunday, 12 November 2017

तेरी हर ज़िद को पूरा करते आए है...तेरे दिल को कही ठेस ना पहुंचे,इस का ख्याल भी रखते आए है 

कभी यह ज़िंदगी जो दे गई दग़ा,साँसों का यह पहरा जो हो गया जुदा...पलक झपकते ही तुझ से दूर

हो जाए गे....तेरी बाहो मे सिमटने का सुख फिर ना पाए गे....तुझ से जुदाई के एहसास भर से रूह

मेरी डर जाती है...इसी लिए तेरी ज़िंदगी को सकून देने के लिए,तेरे हर अरमान को पूरा करते आए है  

Saturday, 11 November 2017

शुक्रिया ना करू ..इबादत भी ना करू...तेरी तारीफ़ मे मेरे मालिक गर सज़दा ना करू....यक़ीनन इस

ज़िंदगी का कोई मायने ही नहीं होगा...दौलत मिले या शौहरत मिले या ज़माने की हज़ारो खुशिया भी

क्यों ना मिले....तू अगर मेरे साथ नहीं,तेरा मेरे सर पर अगर हाथ नहीं..क्या करू गी इन तमाम चीज़ो

का...तेरी पूजा का अगर वरदान मिले,तुझे दिल मे बसाने का बस एक ख्याल मिले तो मेरे दाता,इस

जीवन मे इस से बड़ी नियामत और क्या होगी...अब भी तुझे याद ना करू तो यह ज़िंदगी कुछ नहीं होगी...

Friday, 10 November 2017

तेरे नाम से जीते,तेरे नाम से ही मर जाते...तूने जो ज़रा सा अपना माना होता,खुदा की कसम सब

कुछ छोड़ देते....हसरते बहुत जय्दा तो ना थी,गुलामी की ज़ंजीरो की वो सजा तो ना देते...तेरे चेहरे

की वो नमी,तेरी आँखों की वो हसी...तेरे ही आगोश मे रफ्ता रफ्ता वो जीने का सिला...उन खूबसूरत

लम्हो की इंतज़ार लिए,तेरी ही चौखट पे सर रख देते...यक़ीनन...तूने हम को जो दिल से चाहा होता

कसम खुदा की सब कुछ पल मे ही छोड़ देते....

Thursday, 9 November 2017

हर छोटी बात पे अक्सर रो देते थे हम...बिना कोई खता किए ही उसे अपनी खता मान लेते थे हम

ज़माना करता रहा गुस्तखियाँ हम से,और नादानी से भरे उस को अपनी किस्मत मानते रहे हम

अक्सर अकेले मे बेवजह उन्ही दुखो को झेलते रहे हम,जो गुनाह कभी किए ही नहीं..उन के इलज़ाम

भी सहते रहे हम..जब थका दिया इन दुखो ने,तो बस बगावत पे ही उतर गए हम...आज यह आलम

है दुखो से पूछते है....कौन हो तुम ? तुम को छोड़ कर अपनी छोटी से दुनिया मे अब  बस गए है हम....

बहुत ही ख़ामोशी से वो लिख रहे थे नज़्मे हमारी वफाओ पे...घंटो मसरूफ थे हमारी ही दास्ताँ लिख

रहे थे,हमारी नज़रो से दूर हमारी ही अदाओ पे....हम से नज़रे मिली तो ख़ौफ़ज़दा क्यों हो गए,क्यों

पन्नो को छिपाया और बेहद खामोश हो गए....इकरार तो कभी खुल कर किया नहीं,हम से बाते वफ़ा

की कभी की नहीं..माशाअल्लाह....तेरी मुहब्बत की यह खामोश अदा,हम तो यू ही मर मिटे है तुम पे

पन्नो का हिसाब नहीं,नज़्मों की कोई बात नहीं..बस हम ज़िंदा है तेरी इसी लियाकत के लिए...

Wednesday, 8 November 2017

यू तो तेरे लिए दुनिया अपनी छोड़ आए है...बेख़ुदी मे बढ़ाया जो हम ने कदम,यक़ीनन ज़माने को ही

मात दे आए है....नक़्शे-कदम पे तेरे चलने के लिए,तेरी ही  राहो मे तेरा साथ देने चले आए है...खुद्दार

बहुत है लेकिन यकीं तुझ पे कर के,फिर भी तेरी ज़िंदगी मे तेरे हमसफ़र बनने चले आए है....बदल गई

किसी रोज़ जो  निगाहे तेरी,टूटे गे बहुत बहुत मगर...अपनी इसी खुद्दारी को साथ लिए इसी दुनिया को

छोड़ जाए गे...

Tuesday, 7 November 2017

तुझ से गिला क्या करू,कोई शिकायत भी कैसे करू....हर कदम पे ले रही ज़िंदगी इम्तिहाँ मेरे....दर्द

को खुद मे समेटे हुए,लबो पे मुस्कराहट का लबादा ओढे हुए...कभी जिए इस के लिए तो कभी जिए 

उस  के लिए....सपने कुर्बान करते रहे, कभी किसी की ज़िद के लिए तो कभी किसी की ख़ुशी के लिए ...

खुद के लिए हम कब जिए...खुद के लिए हम कब हॅसे...ढूढ़ते रहे लम्हे अपने लिए...साँसों की डोर

टूटे कभी,इस से पहले खुदा को याद कर बस शुक्रिया कहे...सिर्फ शुक्रिया ही कहे......

Monday, 6 November 2017

किस्मत की लकीरो को देखा और कहा...तुझ से कोई शिकवा नहीं मुझ को....तेरे हर फैसले को मन से

कबूल किया मैंने...तेरी दी हर नियामत को रूह से शुक्रिया किया मैंने...आंसू जब जब भी छलके इन

आँखों से,खुद के ही कर्मो का हिसाब माना मैंने....खुशियाँ जब भी दी तूने,इन्ही बूंदो से नमन किया

तुझे मैंने...मेरी हिम्मत की दाद तो दे ना अरे किस्मत मेरी,हर मोड़ पे खुश हू यह सोच कर....लकीरो

का यह खेल बहुत खूबसूरत दिया तूने मुझ को....

Sunday, 5 November 2017

करते है तागीद कितनी ही बार उन से,किसी रोज़ हम को मिलने आ जाओ...बीत रहे साल दर साल

कभी तो सूरत दिखा जाओ...किसी दिन जो रुक गई यह धड़कन हमारी,लौट के ना आए गे फिर ज़िंदगी

मे तुम्हारी...बुलाते रहो गे हज़ारो बार फिर तुम्ही हम को,ना उठ पाए गे तुझे इतने करीब से भी देख कर

मेरी हर बात को हवा मे उड़ा देने वाले,उड़े गे जिस रोज़ हवा मे हम ऐसे...तेरे आंसू पुकारे गे कि लौट आओ

बीते गे फिर साल दर साल,हम लौट के ना आए गे....

Saturday, 4 November 2017

शर्त है अगर प्यार मे तो यह प्यार कहा होगा....हर बात पे एक नया सवाल है तो इकरार भला कहा होगा

पलके भीग जाती है बिना वजह,दिल यू ही उदास हो जाता है...यह खौफ है तो मुहब्बत का निशाँ कहा होगा

तेरे आने पे दिल धड़कता तो है,पर यह धक् धक् किसी डर का आगाज़ है तो यह दिल बेताब कहा होगा

ना रख कोई शर्त प्यार मे,जब चाहा तुझी को टूट कर तो किसी और का दाखिले-अंदाज़ कहा होगा ....
दोस्तों..मेरी शायरी के हर रूप को पसंद करने के लिए..आप सभी का तहे-दिल से शुक्रिया...दोस्तों..मेरी शायरी कभी भी किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं लिखी जाती..यह सिर्फ और सिर्फ शायर की कल्पना की उड़ान है....आप सभी का आभार,अभिनन्दन...शुक्रिया....

Thursday, 2 November 2017

मेरे पास जीने की वजह क्या होगी...तेरी यादो के सिवा यह ज़िन्दगी अब और क्या होगी....बहुत मिला

इस जहाँ मे शोहरत का  मुकाम मुझ को,जहा जहा कदम पड़े वही सलाम किया इस दुनिया ने मुझ को

मेरी मुस्कराहट पे फ़िदा हो गई कायनात सारी,खामोश कभी हुए सवाल उठा दिए दुनिया ने मुझ पर

यह आंखे जब जब भी डबडबाई है तेरे लिए,रातो ने नींद उड़ाई है जब भी तेरे लिए....रूह ने कहा तुझ से

यह ज़िन्दगी तेरी यादो के सिवा अब कुछ भी नहीं,कुछ भी तो नहीं...

Sunday, 29 October 2017

इन कागज़ के फूलो से अक्सर,महकती खुशबू क्यों महसूस होती है....बगीचे मे रखते है कदम,किसी

अनजानी ताकत को पास पाते है....कभी लगता है यह वहम हमारा होगा,भला इन बेजान फूलो ने

कभी खशबू बिखेरी है.....इस दुनिया मे जहा इंसान साथ नहीं देते,एक अनजानी ताकत क्यों साथ

होगी मेरे....बार बार जब किसी को महसूस करते है,फूलो से यही खुशबु खुद से लिपटी पाते है..यक़ीनन

खुदा के सज़दे मे शुक्रिया कहते जाते है.....
तुम जब भी मिलने आती हो माँ,मन को एक सकून दे जाती हो...यह बात और है कि इन आँखों को

बरसने पे मजबूर कर जाती हो...मेरा लाडला जो तुझ को सौपा मैंने,वो अभी भी तेरे साथ है...यह देख

कर एक गहरा सकून मुझे मिल जाता है....कही न कही तुम हर पल जुड़ी हो आज भी मुझ से,तेरी इन्ही

दुआओ ने दुनिया की बुरी नज़रो से बचाया है हम को....नमन कितना भी करू,कम लगता है,तुझे कितना

भी प्यार करू माँ ,कम लगता है....तेरा मेरा रिश्ता जन्मो जनम रहे,यही उम्मीद मुझे तेरे और पास ले आती है 

Saturday, 28 October 2017

बात नहीं तो फिर बात क्या है...खफा नहीं तो फिर इतनी ख़ामोशी क्यों है...पिघलते है ज़ज़्बात मेरे

नज़दीक आने से,यू अब फेरी है नज़र मुझ से...वजह क्या है....कहने के लिए और सुनने के लिए,

ज़ुबाँ ने कभी कुछ कहा था ही नहीं...सिर्फ एहसास ही थे पर अब वो एहसास कहाँ है...ज़िन्दगी को

अपनी ही शर्तो पे जीने वाले,इस कदर इसी ज़िन्दगी पे इतनी ख़ामोशी.....आखिर वजह क्या है....

Thursday, 26 October 2017

तेरे एहसास बदल गए...हमें चाहने का वो अंदाज़ भी बदल गया...टूट के चाहते है तुझे,इस चाहत का

वज़ूद क्यों तेरे ज़ेहन से गुम हो गया....हसीं और भी है इस ज़माने मे हमारे सिवा,तेरे इश्क की दास्तां

नई राह पे मोड़ ले जाए गी....नई मुहब्बत और साथी भी नया,हसरतो की एक कहानी फिर शुरू हो जाए

गी....हम खड़े है उसी मोड़ पे,जहा छोड़ा था तुम ने हमे....एहसास बदले है तेरे,चाहत तेरी ने दम तोड़ा

है....तेरी इबादत का दिया जो जलाया है हम ने,साँस टूटे गी मगर मुहब्बत ना बदल पाए गी......

Wednesday, 25 October 2017

सुर्खियों मे रहा है हमारी कलम का जादू....लफ्ज़ निखरते है,अदाओ मे हस देते है और कभी पन्नो पे

यूं ही बिखर बिखर जाते है...लिखते है कभी दास्तां मुहब्बत की तो कभी दर्द को अपना कर बेवजह इन्ही

पन्नो मे सिमट जाते है....दुनिया दाद देती है लफ्ज़ो की अदायगी पे हम को,सलाम करती है पन्नो की

रोशनाई पे हम को...हम कोई आफताब नहीं,बस एक बाशिंदे है उस मालिक के...जिस ने दे दी कलम इस

हाथ मे और सर पे हाथ रख दिया हमारे हुनर के ख़िताब पे.....
धड़कने....जो हमेशा  तेरे मिलने पे,अक्सर बेलगाम हो जाया करती है....और यह जुबाँ.....बोलने की

जगह खामोश हो जाया करती है....पाँव जो हमेशा तेरी राह देखने के लिए,बेहताशा भागा करते है और

फिर तेरे आने पे जड़ हो जाया करते है....और यह जिस्म तेरे इश्क की ताकत से,तेरी ही रूह को खुद ही

समर्पित हो जाया करता है...पाक साफ़ रहे तेरा मेरा दामन,रूह से रूह का मिलन खुदा के दरबार मे बस

फ़ना हो जाया करता है...
हमारे हुस्न  का जादू उन पे चढ़ गया...वो मिले हम से और हमारे सज़दे मे,न जाने क्यों उन का सर

झुक गया....भीगी पलके हमारी यह देख कर,ऐसा क्या किया हम ने जो सीधा उतरे उन के  दिल के 

मुकाम पे ....राहे मुहब्बत की कभी आसां होती नहीं,बहुत छोटी छोटी हसरते हमारी जो कभी किसी

के दिल को चोट देती नहीं...हाथ थामा उस फ़रिश्ते ने और कहा तुम नूर हो मेरी ज़िन्दगी का,ऐसा सादा

हुस्न कभी देखा नहीं..यक़ीनन तेरे इसी हुस्न का जादू हम पे बस हावी हो गया...

Monday, 23 October 2017

कही से महक आ रही है....कही से किसी की धड़कनो की आवाज़ सुन रही है...कभी लगता है दबे पाँव

किसी ने आहट की है...रूह ने कहा मुझ से,सज ले..सवर ले और कर ले सोलह श्रृंगार.....पायल की रुनझुन

से तुझे जीत लेना है अपने साजन का सारा प्यार.....हाथो के कंगना ले गे बलाए उस की,और तेरी मुस्कान

उड़ा दे गी होश तेरे मेहबूब के.....चाहत पाने के लिए जरुरी तो नहीं कि जश्न मनाया जाए,यह सिलसिला

है कुछ ऐसा कि कुछ कहा भी नहीं और सब सुन लिया हम ने.....

Saturday, 21 October 2017

तूने जो दिया ज़िंदगी मुझे,वो क्यों मुझे रास नहीं आया....हर तरफ है धुआँ धुआँ,हर इंसान पाक साफ़

क्यों नहीं दिया...चाहतें है बहुत महगी,प्यार दुलार किसी को समझ क्यों नहीं आया....हर बात से बात

निकालने वाले,मन की अनमोल कथा को इन्हे पढ़ना क्यों नहीं आया...बूंद आंसू की क्या कहती है,दर्द

की परिभाषा इन की किताब मे शायद कभी कोई बयां कर ही नहीं पाया...कभी पत्थर,कभी दौलत तो

कभी बेजान सवालो का हिसाब खतम ना हो पाया..सच मे ज़िंदगी,यह सब मुझे बिलकुल रास नहीं आया...

Friday, 20 October 2017

फूलो की वादियों मे जो धरा आज पाँव हम ने,ज़िन्दगी के खुशनुमा होने का एहसास ताज़ा हो गया---

गुजरे जब महकती खुशबू के पैगाम से,खुद के खूबसूरत होने का एहसास हो गया----वो कहते है कि

निकला ना करो सर्द मौसम मे,यह वादिया कभी कभी बहक भी जाती है----छू ले गी मेरे महबूब को

और इलज़ाम किसी के नाम कर बैठे गी----हम तो यह सुन कर भी मदहोश है,कि हमारे कदमो की

चाप भर से उन्हें हमारी फ़िक्र का एहसास तो हो गया---- 

Monday, 16 October 2017

दोस्तों...हमारी हिन्दू संस्कृति मे त्योहारो का बहुत महत्व है..दीपावली राम जी के आगमन की ख़ुशी के लिए मनाई जाती है...क्या अब इन त्योहारो के मायने सच मे हमारी संस्कृति या भगवान के नियमो के अनुसार होते है..कदापि नहीं...अब यह त्योहार रुतबे और दौलत को मद्देनज़र रख कर निभाए जाते है...तोहफे भी दिए जाते है तो दूसरे इंसान के रुतबे के हिसाब से कि जो हम दे गे उस के बदले मे वो कितना लौटाए गा...लोग खूब खरीददारी कर रहे है,खुद को दुसरो से बेहतर जताने के लिए पैसो को बहाया जा रहा है....उस मे कही भी संस्कारो की छाप नज़र नहीं आती..आप दुकान पे है और एक गरीब भूखा इंसान गिड़गिड़ा कर आप से कह रहा है कि कुछ खिला दो..हम मे से कितने लोग होंगे जो उस गरीब को भरपेट बढ़िया सा खाना खिलाये गे ??या सम्मान से उस को पैसे ही दे दे गे ? दोस्तों..मेरी नज़र मे उस गरीब को भरपेट खाना खिलाना ही त्योहार मानना है..बजाय इस के कि उन लोगो को तोहफे बाटे जाये जहा सिर्फ और सिर्फ दिखवा भरा है..झूटी हसी मे जलन भरी है..एक दूसरे की बुराइओं मे वक़्त और त्योहार मनाया जाता है...दोस्तों..मेरी बातो से किसी को बुरा लगा हो तो माफ़ी चाहती हु ...आप जो मर्ज़ी कीजिये बस मेरी गुज़ारिश है आप सब से कि कम से कमएक गरीब को भरपेट भोजन जरूर खिलाये...इतना काफी है इस समाज को ऊपर  उठाने के लिए...शुभ रात्रि दोस्तों..शुभ कामनाये ...

Sunday, 15 October 2017

हमारी शोख अदाओ पे उन का यह कहना कि उर्वशी बन कर मेरी जिंदगी मे आ जाओ अब----रातो की

नींद उड़ा चुकी,अब दिन का चैन उड़ाओ मत---तन्हा तन्हा रहते है,कुछ खुद से खफा खफा भी रहते है---

तेरे कदमो की चाप अक्सर दिल मेरा घायल कर जाती है----फूलो की खुशबू तेरे जिस्म की गंध याद दिला

जाती है---देखी अपनी सूरत जो आईने मे,खुद पे ही प्यार आ गया----यक़ीनन तेरी जिंदगी मे उर्वशी बन

आने का वक़्त भी आ गया-----

Saturday, 14 October 2017

कह दिया ज़िन्दगी तुझ से,तेरी नियामतों के हम तो कायल हो गए....करते है शुक्रिया तुम को,कि लफ्ज़

अब और ज़ेहन मे ख़तम हो गए.....हर सुबह होती है जब,नई साँसों के आगाज़ से....खिल जाता है

तन-मन और इबादत मे जुड़ते है हाथ खुद-ब-खुद  विश्वास से.....बहुत है दर्द-बहुत परेशानिया भी है

लेकिन दाद देते है तुझे फिर भी ज़िन्दगी,देती है कुछ ऐसा खूबसूरत कि कहना पड़ता है..तेरी नियामतों

के हम तो कायल हो गए....

खुदा तो किसी इंसा मे फर्क नहीं करता....मुकम्मल बनाता है सभी को,इबादत का हक़ भी सब को देता है --यह तो इंसा है जो खुद को खुदा से जय्दा उम्दा मान लेता है....गुनाह की आड़ मे खुद को बेकसूर कहता है...ओह ...परवरदिगार मेरे .... रहम कर अपने इन बन्दों पे,दौलत और हवस की आग मे यह भूल जाता है कि आखिर जाना तो एक दिन तेरे ही पास है...दौलत के ढेर पे बैठ कर खुद को शहंशाह मानने लगता है...यहह अल्लाह...ना यहाँ कोई दोस्त है ना अपना कोई साथी है...तेरी दुनिया मे सिर्फ और सिर्फ धोखा है.....

Wednesday, 11 October 2017

बांध ना बंधन मे मुझे,आसमाँ को छूना अभी बाकी है----कुछ खाव्हिशे अधूरी है अभी,कुछ रस्मे अदा

करनी अभी बाकी है---ख़ाली  ख़ाली है यह ज़िन्दगी अभी,कुछ रंग भरने अभी भी बाकी है----इंतज़ार की

हद होगी कितनी,तन्हाइयो मे इस का हिसाब करना बाकी है----सजने सवरने के दिन कभी तो आए गे

उस से पहले किसी की नज़र उतार ले,यह अहम् मौका आने को अभी तो बाकी है-----

Tuesday, 10 October 2017

हज़ारो पर्दो मे छुपा लो खुद को बेशक,तेरे रूप की चांदनी फिर भी बिखर जाती है---सूरज करता है

सज़दा और चाँद....और चाँद तो बस तुझी को निहारा करता है---पाँव जहा जहा रख देती हो,फूल खुद

ही शाख से टूट कर तेरे कदमो मे बिखर जाते है---मेहँदी  हाथो मे सजाने के लिए,यह पत्ते खुद ब खुद

रंगत का नशा लिए तेरी हथेलियों पे मिटने चले आते है---जब रूप सवरता है तेरा,दीवाने तो खुद ही तेरी

और चले आते है----

Monday, 9 October 2017

कहानी तेरी लिख दे या अपनी लिख ले..फर्क बहुत नहीं शायद---बेबाक ज़िन्दगी की असलियत रख

दे सब के सामने या पन्नो मे ढाले,फर्क बहुत नहीं शायद---कुछ राहें अनकही कुछ जानी पहचानी सी

छोड़ दे इन को या कदम इस पे रख दे,कोई फर्क नहीं अब शायद---- टुकड़े टुकड़े इस ज़िन्दगी को जिए

या बिंदास इन साँसों को खुल के ज़ी ले....फर्क बहुत है अब शायद----

Friday, 6 October 2017

आ...तेरे इश्क मे डूब जाए,तेरी इन आँखों का सहारा लिए....मुद्दत हुई इस दिल को, तुझे आवारगी से

पुकारे हुए...ओह यह पलके है या बिछावन है मेरे दीदार का...कुछ तो बोल दीजिये हज़ूर कि दिन यह

कभी फिर ना आए गा,मुखातिब तो हो पर मेरी किस्मत का सितारा बुलंदी पे कब आए गा....दिल तो

शायद कभी खामोश हो जाए गा,पर धड़कने...वल्लाह.... फिर भी धड़कती रहे गी किसी और जिस्म का

सहारा लिए....
तू भूल जा ..कभी चाहा था मुझे-----तू भूल जा कि मुझी से मुझी को मांगा था कभी----यादो के

झुरमुट मे आज भी एक आवाज़ सुनाई देती है मुझे,फ़ना हो जाना है तेरे लिए जन्मो जनम खुदा की

खुदाई के लिए---आज भी अँगड़ाइयाँ लेती है ख्वाइशों की मचलती हुई बेताबियाँ,खुदा ग़वाह है उन

रोशन दिनों की गुफ्तगू का आज भी---नम हो जाती है यह पलके सब याद कर के---फिर भी तुझे वास्ता

देते है'''कि भूल जा तूने कभी चाहा था मुझे-----

Wednesday, 4 October 2017

माँ ....  तुझे रुखसत हुए ज़माना बीत गया....कुछ यादो के साथ तेरा जीवन मुझ से दूर हो गया....

आज का दिन तेरा दुनिया से चले जाना,दिल को दर्द तकलीफ देता है.....पर तेरा एहसास,तेरी मौजूदगी

मेरे आस पास आज भी नज़र आता है....कोई नहीं,कोई भी नहीं इस एहसास को महसूस कर पाए गा...

दुनिया बेशक मुझे दीवाना समझ ले,पर तेरे घर मे तेरी ही आहटों का पैगाम मुझे कुछ कहने करने का

हुकम दे जाता है...वादा है माँ तुम से,तेरा हर हुकम सर आँखों पे...तेरे चरणों मे मेरा नमन...आज भी

मेरी साँसों पे तेरा ही पहरा है माँ....

Monday, 2 October 2017

काश यह तेरी खुदगर्ज़ी ही होती,तो यूँ हम परेशां ना होते-----तेरे अलविदा के लफ्ज़ो को दिल के मोड़ पे

ना लेते---हाथो मे तेरे हाथो का यूँ मज़बूती से पकड़ना,बेवजह धड़कनो को इलज़ाम ना देते----रफ्ता

रफ्ता तेरे चलते रुकते यह कदम,मेरी रूह को यूँ पशेमान ना करते----सलाम करे या तेरी राहो से दूर हो

जाए,मुंतज़र है तेरी हर बात पे हम....डूब जाए या किनारे को अपनी मंज़िल मान ले -----

Sunday, 1 October 2017

तेरी मुहब्बत की कशिश जो कम होगी,तेरी वफाओ की गिनती जो मुनासिब होगी----तेरे किए एहसानो

को जो कभी ज़मीर की तख्ती पे लिख पाए गे,तभी तो आस पास के नज़ारों पे नज़र उठा पाए गे----हाथ

जब भी उठाते है दुआओ के लिए,मन्नत मे तुझे ही मांगते है अपनी तक़दीर की रोशनाई के लिए---वो तो

तुम हो,जिस ने पलकों पे हम को बिठाया है---चांदनी की शीतल छाया मे हमारे हुस्न को निहारा है----हां

इस ज़मीर की तख्ती को मुकम्मल कर पाए,तभी तो एक और जन्म ले पाए गे -------

Saturday, 30 September 2017

यु ना कर अठखेलिया मेरे ज़ज़्बातो से,यक़ीनन प्यार  हो जाए गा----ना बड़ा धड़कनो की रफ्तार,दिल

बेताब होने पे मज़बूर हो जाए गा----तेरी इन गुस्ताखियों पे तेरे ही नाज़ उठाते है,और तुम पूछते हो कि

मेरे प्यार को कोई नाम मिल पाए गा----नज़र धोखा खा सकती है मगर,तेरी मासूम आँखों मे झांके तो

खुद की तक़दीर पे नाज़ हो जाए गा---अब इशारो को इशारो मे रहने दो ज़रा,कहते है तुम से ज़ाना.......

यक़ीनन प्यार हो जाए गा-----

Friday, 29 September 2017

बार बार ना पूछ कि मेरी रज़ा क्या है----तेरी ही इबादत मे ढली एक अनजान सही,मगर अपनी पहचान

तो है----रात ढलती है मगर तेरे नाम के साथ,दिन शुरू होता है तेरी नूरानी सूरत के तहत----मंज़िल की

तलाश मे दूर बहुत दूर चलते ही रहे,तुझे सरे-राह देखा तो रूह ने सवाल किया..बता अब तेरा इरादा क्या

है----मन्नतो की चाह मे,खुले आसमाँ की पनाह मे...अब तू फिर मुझ से ना पूछ कि मेरी रज़ा क्या है---

Thursday, 28 September 2017

कभी दुआओ मे ज़ी लिए तो कभी वफाओ मे खुश हो लिए.....दर्द जब जब दस्तक देता रहा,आंसुओ

को कहा अलविदा और ज़िन्दगी को साथ ले लिया...खुशियाँ कहाँ कब हमेशा साथ चलती है,पल दो

पल का सुख दे कर किसी नई राह पे निकल जाती है....कभी सन्नाटा पसर जाता है मन के इस आंगन

मे,तो कभी किसी आहट पे इंतज़ार का मुकाम मिल जाता है...खुद से खुद को वादा दिया,तू कुछ भी

दे मेरी ज़िन्दगी..हम ने हर हाल मे तेरा शुक्राना करना सीख लिया...

Sunday, 24 September 2017

हसरतो का ज़नाज़ा ना निकले,इस डर से उस ने हमारा दामन थाम लिया---लोग बेवजह सवाल

उठा दे गे,इसी खौफ से अदब से हमें सर पे बिठा लिया---कदम जहाँ जहाँ पड़े हमारे,फूलो को नाज़

से राह मे हमारी बिछा दिया----नूरानी चेहरे को नज़र ना लगे ज़माने की,यह कह कर काजल का टीका

हमारे माथे पे ही सजा दिया---देखते ही रह गए,इस शख्स की क्या पहचान है..खुद को ज़नाज़े से बचाने

के लिए हमीं को हमारे ही दामन मे थमा दिया---

Saturday, 23 September 2017

तेरे साथ नहीं तो तेरे बाद भी नहीं---किसी और के लिए अब इस दिल मे जगह कही भी नहीं---भर

गया है इस दिल का आशियाना इतना कि इस जन्म तो किसी और के रहने की गुंजायश ही नहीं---

दिल के दरवाज़े पे दस्तक मिलती है कई बार,पर यह दस्तक अब मुझे सुनाई देती ही नहीं---तेरे प्यार

का सरूर छाया है इस कदर मुझ पे,कि बिजलिया गिरती है बार बार मुझ पर ,पर उन की चमक मेरे

जीवन को अब रोशन करती ही नहीं -----

Friday, 22 September 2017

वो मेहरबाँ क्यों हो गए हमारी नादानियों पे----खिलखिला कर उन्ही पे हंस दिए,वो फिर भी हम पे क्यों

कुर्बान हो गए----कुछ नहीं समझा उन्हें सिर्फ एक बेगाने से इंसान से,फिर क्यों हमारी ही तारीफ़ करते

करते वो एक मसीहा,एक भगवान बन गए---फ़िक्र नहीं हुई कि कौन है और क्यों नाज़ उठा रहे है हमारे

हम तो बस उम्र के अल्हड़पन पर ज़िन्दगी को बेफिक्र जीते रहे---और वो हमारी इन्ही शोख अदाओ पे

हमारी बलाए बस लेते रहे....लेते रहे.....
मुहब्बत तो मुहब्बत है...बदरा बरस जाए कितना या फिर बिजली खौफ बरसाए कितना----बहुत

भिगोया है इस बरखा ने हद की हद से परे...पर यह आंखे नहीं भीगी बरसते पानी के तले---कायम है

इन मे तेरे प्यार की वही हलकी सी खलिश,बस रही है साँसों मे अभी भी तेरी वफ़ा की वोही नमी---

शायद यह बरखा ले आए कभी सैलाब गहरा..ना बुझा है ना बुझे गा  कभी तेरे मेरे प्यार का दीया---

कहे गे हर बार यही कि मुहब्बत तो मुहब्बत है--------..........----------
  

Thursday, 21 September 2017

सुर्ख लब गवाही दे रहे है तेरे प्यार मे मदहोश होने की---कहने की जरुरत तो कुछ भी नहीं,बात है

सिर्फ होश खो देने की---आंखे जब भी इशारा देती है किसी फ़साने का,लब लगा देते है पहरा खामोश

हो जाने का----यू ना  कीजिये हसरतो को खुद से जुदा,राज़ है गहरे जरा रात को होने तो दो---चाँद खफा

ना  हो जाए कही,चांदनी को उस की गिरफत से आज़ाद होने तो दो---

Monday, 18 September 2017

यह कलम जब जब तेरा नाम लिखती है....आँखों मे आंसू आ जाते है और ज़ुबाँ खामोश हो जाती है

बिखरे है अनगिनत शब्द मेरी लिखी हर किताब मे....गरूर से भरा है प्यार मेरा तेरा, मखमली भरे

किसी अनोखे से जवाब से.....मुस्कुरा देते है जब जब तेरा नाम,सुनहरे सपनो से जोड़ लेते है.....क्या

कहे इस कलम से,कि पास हो हमेशा तेरा वज़ूद और यु ही तेरी ज़िन्दगी को अपनी ज़िन्दगी से जोड़

लेते है...

Sunday, 17 September 2017

कभी हसरते,कभी जलजले,कभी सैलाब बनते है आंसुओ से यहाँ----कही कोई उदास है ज़िन्दगी से यहाँ

तो कही रेत के महल ढह रहे है यहाँ---मुश्किलों के दौर मे रो रो कर बेहाल हो रहा है कोई----तो कही

बेवफा ज़िन्दगी का जश्न मना रहा है कोई----मायने समझ लेते जो जीने के,तो यू तन्हा न रहते---

इम्तिहाँ बहुत बहुत लेती है यह ज़िन्दगी,फिर क्यों न कहे कि ज़िन्दगी तुझ से शिकवा तो कोई भी

नहीं----जीने का अंदाज़ जो सीखा होता तो कोई सदमे मे ना रहता,न ही सैलाब बनते आंसुओ से यहाँ 

Friday, 15 September 2017

छन छन छन छन ----- यह पायल तेरी क्यों सोने नहीं देती ---- बजते है कंगन और चूड़ियाँ... दिल को

चैन लेने क्यों नहीं देती ----- यह बिखरे बिखरे काले गेसू... सुबह को आने क्यों नहीं देते ---- यह तेरी

हॅसी जान ले जाए गी मेरी...फिर ना कहना कि तू तो जान थी मेरी ----कुछ रुके से कदम कुछ बहके से

अंदाज़ ....रफ़्तार तेरे चलने की क्यों मुझे सम्भलने  ही नहीं देती -----

Thursday, 14 September 2017

आप जीने की वजह बनते रहे और हम--- साँसों की मोहलत लिए आप से मुहब्बत करते रहे---हवा के

झोको मे ऐसी कशिश देखी नहीं,बादल जो अब बरसे वैसी बूंदे तो कभी बरसी ही नहीं----किसी ने दे कर

वजह जीने की,मुस्कुराना हमे सिखा दिया----आईना देखते है बार बार,कि सूरत अपनी से ही प्यार करना

सिखा दिया---यू तो ज़ी रहे थे बेवजह,आप के प्यार मे डूबे इतना कि मुहब्बत को मुहब्बत की नज़र से

दीदार बस करते रहे----

Wednesday, 13 September 2017

आ पलट कर देख ज़रा,कि ज़िन्दगी फिर लौट कर ना आए गी---ज़माना क्या कहता है,लोगो की नज़र

क्या कहती है----कोई मुकम्मल नहीं होता,कोई खुदा भी नहीं होता---कदम कदम पे राहे रोक देते है यह

दुनिया वाले,रोने पे कभी भी मज़बूर कर देते है यही ज़माने वाले---उदास ना हो कि खुशिया झोली फैलाए

आज भी मुखातिब है हम से,दिल के आँगन मे रूह से बंधी खुशबुए खड़ी है ज़िन्दगी बन के----तभी तो

कहते है कि पलट कर देख ज़रा....पलट कर देख तो ज़रा------

Sunday, 10 September 2017

पायल बजी भी नहीं,पर झंकार सुनाई दे गई---कंगना पहने भी नहीं,पर आवाज़ क्यों सुनाई देने लगी---

आंखे तो अभी झपकी भी नहीं क्यों सपनो की आहट आने लगी---अज़नबी राहो पे थे क्यों लगा कि

हमनवां कही साथ है---बरखा कही बरसी नहीं बस भीगे है किसी अहसास से,ऐसा गुमा बस होने लगा---

खिल उठे बिन बात के,मुस्कुरा दिए बिना ज़ज़्बात के----यारा क्या यही प्यार है कि कोई बोला भी नहीं

और आवाज़ सुनाई दे गई---

Saturday, 9 September 2017

हवाएं दस्तक नहीं देती,बस बहा करती है----कभी आसमां से सितारों की तरफ तो कभी ज़मी को चूम

लेती है---सर्द हवाएं  अक्सर रिश्तो को पास ले आती है,गर्म सांसो को मुहब्बत मे पनाह दे जाती है----

बदले बदले रुख से ज़माने को बेखबर कर जाती है,यू ही नहीं कहते कि हवाओ के रुख से अक्सर लोग

गुमराह हो जाते है---कभी बेबसी मे तो कभी नशे मे चूर इन्ही हवाओ मे बह जाते है-----

Tuesday, 5 September 2017

लब थरथराए पर जुबां खामोश ही रह गई----पलके झुकाए बैठे रहे पर आंखे फिर भी सब कह गई ----

वो इम्तिहाँ लेते रहे हमारे प्यार का,ख़ामोशी से हम मगर उन की अदा पे बस मरते रहे-----इम्तिहाँ लेते

रहो गे कब तल्क इस प्यार का,यह वो शमा है जो जले गी जन्मो जनम बेहिसाब सा-----कहने को हम

खामोश है,कहने को वो भी खामोश है----जब मचले गी हसरते,खामोशिया दम तोड़ जाए गी----क्या कहे

होगा क्या,बस वादिया मुस्कुराती जाए गी-----


Monday, 4 September 2017

ना कहा कभी,ना माँगा कभी---सफर यू ही चलता रहा----हसरतो के नाम पे,कभी ना खुश हुए ना दर्द

को पनाह दी कभी---खामोशिया तो कभी सरगोशियां,कभी चुपके से दिल को छू गई कही किसी के

अल्फाज़ो की गहराईयां----दुआओ से भर गया आंचल इतना,कि कहे क्या उस खुदा से कि अब हमे

क्या चाहिए---सज़दे मे झुकना था,बस झुक गए---अब दिन कहाँ और रात कहाँ,इतनी दुआओ का साथ

है फिर क्यों ना कहे शुक्रिया...शुक्रिया और सिर्फ शुक्रिया---

Sunday, 3 September 2017

बहुत ही.. बहुत ही ख़ामोशी से इस दिल मे उतर गए है आप---संभाले तो संभाले खुद को कैसे कि रूह मे

ही सीधे समा गए है आप----बिखरी बिखरी जुल्फे,बहकी सी अदा...क्या कहिए जनाब आँखों मे शराब

बन आ चुके है आप----मदहोशियाँ कही जान ना ले जाए,जान आप को बना कर पास अपने रख चुके है

आज ----नज़र तो नज़र ही है,लग जाए ना किसी की कभी..शीशे की तरह दिल मे कब से उतार चुके है

आज -----
तेरा मान रखने के लिए,तुझे सदा पास अपने रखने के लिए----तेरी गुफ्तगू को हमराज़ बनाया है मैंने

धड़कने कभी जो रुकने को हुई,तेरी बाहों के घेरे को अपना सरताज बनाया है मैंने----खवाब जो रह गए

अधूरे,मन्नते जो पूरी हुई नहीं,उन को बसाने के लिए तेरी ही मुहब्बत को परवान बनाया है हम ने----

टुकड़े कभी इस दिल के ना हो जाए,तेरे दिल को इस की हिफाज़त के लिए पास रख लिया हम ने----

Sunday, 20 August 2017

तेरी हां सुनने के लिए बहुत दूर से आए है....दुनिया तेरी मासूम सूरत पे फ़िदा है,पर हम तो तेरी मासूम

रूह से गुफ्तगू करने आए है....रेत का घर बनाया था कभी,तुझ से मिलने से पहले इसी घर को हज़ारो बार

गिराया था कभी....क्या पता था किसी खूबसूरत मोड़ पे तुम से मुलाकात हो जाए गी....भरभरा कर फिर

से इस घर को गिराया है मैंने,तेरे पाँव सोने की चौखट पे पड़े...इसलिए आज तुझ को बुलाया है मैंने....

तेरी हां मे शामिल है जीने की वजह,हकीकत में .... इस घर मे तुझे लेने बहुत दूर से आए है......
हज़ारो दुआओ के मालिक है हम.....खुदा की नियामत है,उस के हर इशारे को समझ जाते है हम....करे

कितना शुक्रिया उस मालिक का,कि हर सांस भी लेते है तो दुआ निकलती है हर सांस के साथ....जब जब

बिखरे है किसी मोड़ पर,थामा है अपनी ताकत से हमें....लोग कहते है कि खुदा कभी नज़र नहीं आता

हम कहते है,कि नज़र साफ़ है तो हर शख्स मे मिल जाते है वो...

Saturday, 19 August 2017

तेरे दर से जो निकले,याद आया अपना सब कुछ तो तेरे पास छोड़ आए है.....ज़हाँ का सामना कैसे कर

पाए गे कि अपनी ज़िन्दगी तो तेरे पास गिरवी रख आए है....खुद ही खुद से बेखबर है,अपनी साँसों का

हिसाब तेरे खाते मे जोड़ आए है....तेज़ कदमो से कोशिश की जो चलने की,पायल की छन छन तो तेरी

चौखट पे रख के आए है...सोचते है अब क्या है जो पास है मेरे,यह जिस्म.ओ.जान अब पूरी तरह तेरे

हवाले करने फिर से चले आए है....




बरसा तो बरसा आज इतना बादल कि तन मन को भिगो गया....गेसुओं को जो खोला,क्यों तेरा ईमान

डोल गया...बारिश की बूंदे देखी जो हमारे चेहरे पर,क्यों गुस्ताखियाँ तेरी नज़रो ने कर डाली....ना कर

शरारत इस मौसम मे कि अफसाना कोई बन जाए गा....लोग बदनाम करे गे तेरे मेरे नाम को,मुहब्बत

को कौन समझ पाए गा....कहर ढह रहा है खामोश सा यह समां,पलके जो झुकाई तेरा वज़ूद मेरे वज़ूद मे

समा गया.....

Friday, 18 August 2017

रुनझुन रुनझुन की तरगों की तरह,नन्हे कदमो की ताल मे चलने की वो मासूम अदा....कभी रो दिए

तो कभी यूँ ही खिलखिला दिए...गोद से ना उतरने की वो ज़िद,जानभूझ कर ना सोने की वो ज़िद....

कभी चाँद को देख उसे मांग लेने का इकरार,जो मिला उस को फेंक देने का अधिकार....मिट मिट गए

उन्ही भोली सी गुस्ताखियों पे हम...नन्हे नन्हे से वो कदम आज,दुनिया से मुखतिब है....मासूम चेहरा

तो आज भी मगर,पर वो कदम बढ़ रहे है तरक्की की तरफ.....
दोस्तों....मेरी शायरी के हर रूप को पसंद करने का शुक्रिया....दर्द मे डूबी हुई,प्यार के दरिया मे लिपटी या फिर इबादत और पाक मुहब्बत के पन्नो को खोलती.....दोस्तों...मेरी शायरी किसी व्यकित विशेष के लिए नहीं होती...यह सिर्फ शायर की कल्पना के अनेको रूप को दर्शाती है....आप सभी का आभार ... शुक्रिया....शुभकामनाएं.....

Thursday, 17 August 2017

आ लौट के कही से.....तेरे गले लग के ज़ार ज़ार रो ले आज....हर ख़ुशी अधूरी है तेरे बिना आज....तेरी

हर धरोधर को संभाल कर रखा है आज भी....हाथ मे बेशक कुछ भी नहीं,पर भरा है दामन दुआओ से

आज भी....तेरा हर सपना पूरा कर सके,इस कोशिश मे उम्र का एक बड़ा दौर निकल  गया....तेरे बिना

जो कर सके,जो जो वादे निभा सके..रूह के छालो पे उस के निशान है आज भी .....बची है अभी कुछ साँसे

एक अहम् वादा बचा हुआ है आज भी......

Wednesday, 16 August 2017

खवाबो को तपिश देने के लिए,तेरा ख्याल ही काफी है....वफ़ा की राह पे चलने के लिए,तेरा नाम ही

काफी है....फासले तो रहे गे ज़िन्दगी भर,किसी मोड़ पे मिल सके यह सोचना ही काफी है....मुखातिब

तो हू तेरी बातो से,गुजरे हर लम्हा तेरे साथ यह गुजारिश करना अब बेमानी है....समंदर की लहरों मे

उतर जाए,इस से बेहतर  है किनारो से गुफ्तगू का नाता जोड़ लिया जाए...यही काफी है....

Monday, 14 August 2017

बराबरी तेरे मेरे रिश्ते की कोई नहीं कर पाए गा......सात फेरो का बंधन है,जन्मो जनम चलता जाए गा

तूने ख़िताब दिया मुझे अपनी ज़िन्दगी के साथ चलने का.....तेरे मेरे प्यार के आगे अब कोई क्या कर

पाए गा....राहे मंज़िलो मे लोग मिलते है,गुफ्तगू के दायरे से बाहर ना चल पाते है.....अदब दिया हर

शख्स को,अपने संस्कारो को ना भूल पाए है...तेरी जगह तो बस तेरी है,इस को समझाने के लिए ना

वक़्त तेरे पास है,ना ही कभी वक़्त निकल पाए गा...

Sunday, 13 August 2017

रूबरू तो नहीं हुए कभी आप से ,कभी होंगे भी तो कब होंगे....किस्मत किसी मोड़ पे क्या करती है

राहे मंज़िलो मे किस को किस से मिलाती है,खवाबो को मंज़िल देने के लिए कभी रूकती है तो कभी

खवाबो को खूबसूरत सा नाम दे जाती है...ठहराव भरा है आप की बातो मे,एक अदब मिला सालो बाद

किसी से पन्नो की किताबो मे....लोगो की नज़र मे हम क्या होंगे,आप की नज़र मे फरिश्ता है इस से

जय्दा और खुशनसीब हम कहाँ होंगे....

Saturday, 12 August 2017

कलम हाथ मे जब भी आती है,अनगिनित अल्फ़ाज़ लिखती जाती है....कभी ज़ज़्बात बिखरते है तो

कभी खुशबु बन के हवाओ मे बिखर जाते है....यू ही रो देती है यह आंखे बरबस,तो कभी इन्ही पन्नो पे

सैलाब छोड़ जाती है...मुस्कुराते है जब याद कर के किन्ही  खुशनुमा लम्हो को,हाथ लिखते है मगर

एहसास भी साथ साथ मुस्कुराते है...सोचते है कभी कभी....कमाल इस कलम का है या अल्फ़ाज़ इस

रूह से निकल कर आते है....
सज गए तेरे लिए इस सादे से लिबास मे....कंगन नहीं,बिंदिया नहीं,पायल की खनक भी साथ नहीं

एक मुस्कान चेहरे पे,चमक आँखों मे प्यार की....जब छुहा तूने मुझे,प्यार के अहसास से...हज़ारो रंग

बिखर गए खामोश भरे अल्फ़ाज़ मे.....समझने के लिए अब कुछ बचा नहीं,बयां कर गए नैना चुपके

से तेरे साथ मे,महकते लम्हो की गुनगुनाती शाम मे...

Friday, 11 August 2017

बेपरवाह बादल ने कहा,चल साथ मेरे....इन्ही झुरमुटों मे छिपा है कही चाँद शायद,आ ढूंढ उसे साथ मेरे...

दुप्पटे की आड़ मे कुछ समझ नहीं पाए,है चाँद किधर यह भी ना जान पाए...बदहवास हालत मे क्या कहे

इस बादल से,मुखातिब हो तो हो कैसे कि डर से बात कही बिगड़ ना जाए....ख़ामोशी से चलते चलते इक

हसीं मोड़ पे बादल ने कहा...इंतज़ार उस चाँद का अब क्या करना कि यह चाँद नया तो आज है पहलू मे

मेरे....

Thursday, 10 August 2017

तेरी चाहत से परे,गर कोई दुनिया होती तो दिल को समझा भी लेते....रंजिशे ना होती जो इस ज़माने मे,तो

हर मुनासिब समझौता भी कर लेते....आँखों से सैलाब बहने देते,मगर राहे मंज़िलो को निभा भी देते...

रिश्तो मे गर खार ना होती,यक़ीनन जान की बाज़ी भी लगा देते....अंगारो पे चलते चलते भी,पाँव तक

बचा लेते....अब आलम है कि ज़ज़्बातो को कुचल दिया है इन्ही पैरो के तले,दिल को बचा लिया है तेरी

ही चाहत मे बस.........रहते रहते...
दुनिया तेरे मेरे घर को मकान कहती है..ईंट पत्थर से बनी एक दुकान समझती है ..... जहा बस रही

ख्वाइशे मेरी,जहा चल रही यह साँसे भी मेरी...हर कोने मे माँ की परछाईया दिखती है...तेरे वज़ूद मे

मेरे वज़ूद का गुमा होता है....टूट के चाहा है तुझे,उस का असर हर जगह मिलता है...कोई माने या ना

माने,तेरी परछाई हु .....सदियों मे पैदा हुई,वही तेरी ही दुल्हन हु...

Tuesday, 8 August 2017

तुझे दिए वादे को निभाने के लिए ....आज भी उतना ही सवरते है जितना मुझे सवारने की ज़िद तेरी

होती थी---हर लम्हा लगू तेरी नवेली सी दुल्हन,नूरानी चेहरे पे ना देखू कही भी थोड़ी सी शिकन --- उस

बात का मान रखने के लिए उसी नूर को बचा रखा है आज भी मैंने---ज़न्नत से कभी जो देखे तू मुझे

तेरी रूह को सकूँ मिले,इस बात का ख्याल रखा है आज भी मैंने---

हवाओ को बहना ही है,समंदर को यूँ ही लहरों से लिपटना ही है----हमेशा की तरह यह चाँद,यह सूरज

निकलते  छिपते भी  रहे गे----कभी भूले से जो तेरा नाम कोई ले दे गा,बरसे गी यह आंखे और दिल रो

दे गा---साल दर साल जीते रहे इस इंतज़ार मे कि किस दिन तेरी रूह बुलाए गी अपने ज़हान मे मुझे

किस्मत की लकीरो मे साथ नहीं रहा फिर भी ज़िंदा है बस यही सोच कर,कि ताउम्र जीने के लिए यहाँ

कोई आता नहीं,तू ना भी बुलाए फिर भी खुदा का फरमान जारी तो होगा कभी----

Sunday, 6 August 2017

आ..नज़र भर देख लू तुम को ,कि तारो की झुरमुट मे फिर गुम हो जाओ गे---भरी आँखों से ढूंढे गे फिर

तुम कब नज़र आओ गे---यह दिल है कि कभी भरता नहीं,रूह को रूह से ज़ोडते जाए गे----बेताबी का

नाम मुहब्बत नहीं,मुहब्बत नाम है विश्वास का---प्यार है हवा का झोका नहीं,सदियों का लम्बा इंतज़ार

है----जिस्म एक दिन फ़ना हो जाए गा,रूह के बंधन को तब कौन तोड़ पाए गा----
वज़ूद मे तेरे आज भी समाए है...तुझे खबर भी नहीं कि तेरे आशियाने मे,तेरे ही इंतज़ार मे पलके

बिछाए तैयार बैठे है....वही रूप,वही रंगत,वही मुस्कान कायम है...तूने लिया जो वादा कभी,निभाने

को आज भी तैयार है....इंतज़ार बेशक लम्बा सही,सदियों से जय्दा क्या होगा....जिस रंग मे  तूने चाहा

उसी रंग मे बस ढल गए...बहुत बहुत दूर तेरे साथ चलने के लिए,हम आज भी तैयार है.....
तारीख मुकर्रर नहीं करते कि खुद से खफा हो जाए गे---दिन तो गुजर जाए गा,पर रातो को जागना भारी

हो जाए गा---तेरी  बेबाक अदा..उफ़ यह  बोलती सी नज़र जुदा..कहते है ए सागर थाम ज़रा अपने सैलाब

की जगह----यह आंखे जो कहर ढाह जाए गी,तेरी गहराई को भी मात दे जाए गी---मांग ना मुझे,मुझ से

इतना कि तारीख मुकर्रर करने के लिए,खुद को तेरी हमनशीं करार कर जाए गे---

Saturday, 29 July 2017

जान कर हमे क्या करो गे----दिल ही टूटे गा और हमे मजबूर सोचो गे----ज़िन्दगी कहाँ रूकती है सज़ाए

देने से,हर मोड़ पे दबोच ही लेती है----रेत के महल बनते है और अक्सर टूट जाया करते है,नम आँखों से

बिखरते देखा करते है----मुस्कुराहट आज भी दुनिया का दिल जीत लेती है,आँखों की शोख़िया दिल पे

बिजलियाँ आज भी गिरा जाती है---वल्लाह,यह ज़िन्दगी आदत से अपनी ना बाज़ आती है,और हम है

कि इस के नाज़ उठाते नहीं बस शिद्दत से मात देते रहते है-----

Thursday, 27 July 2017

ज़ज़्बातो मे पिघलते हुए अल्फ़ाज़ तेरे,दामन से लिपटे तेरे बेखबर अंदाज़ मेरे----यूँ तो मुहब्बत तेरी

बेवफा नहीं,मेरी रूह की ताकत से जयदा कही खिदमते-वफ़ा है मेरी---जन्म बार बार लेते रहे,तुझी से

तुझ को पाने के लिए---कभी रोशन हुए,कभी तन्हा रहे.. कभी यूँ ही तुझे बस निहारते ही रहे---पाक

मुहब्बत के मायने तुझे समझा जाए गे,सितारों मे कही दूर किसी रोज़ छिप जाए गे---तेरी नज़रो मे

अपना अक्स ढूंढे गे,अल्फ़ाज़ तो फिर भी पिघले गे..मगर दामन मे तेरे नज़र नहीं आए गे----
ना छेड़ तार मेरे दिल के,मेरी मुहब्बत का गुलाम हो जाए गा---ना कर गुमान अपनी पहचान पे,मेरे

मोहपाश मे बंध कर तू खुद को ही भूल जाए गा---लौटना मुमकिन नहीं पास तेरे ----यह कहना तेरा

बेकार है----कुछ इबादत मेरी,कुछ चाहत मेरी .. पलकों की चिलमन मे यह आंखे भरी हुई मुहब्बत

मे तेरी----शायद काफी है तुझे पास मेरे लौट आने के लिए---फिर ना कहना कभी कि लौटना अब

मुमकिन नहीं-----

Wednesday, 26 July 2017

ना लगाओ काजल कि यह रात गहरा जाए गी ---ना बिखराओ  गेसू कि रात शर्म से मर ही जाए गी ----

दुप्पट्टा लहराओ ना हवा मे इतना कि हवाएं रुख बदलना भूल जाए गी---ना मुस्कुराओ अब इतना यह

परियां कही की ना रह जाए गी---इतनी नज़ाकत से जो धर रही हो पाँव ज़मी पे इतना,होगा आसमां को

झुकना और यह ज़मी----यह ज़मी तो आप के कदमो मे कुर्बान हो जाए गी----
कुछ तो बोलिये मेहरबाँ मेरे,राज़ दिल के खोल दीजिये---क्यों खामोश है इतने,ज़रा ज़ुबाँ को गुफ़तगू तो

करने दीजिये----गुजर जाता है वक़्त अक्सर यूँ ही,खामोशियो मे रहते रहते---दिल जुदा हो जाते है बस

अहसासों को दबाते दबाते----नाम तुम ना ले सके,हम पर्दा-नशी क्यों रह गए---मंज़िले हो जाए गी अब

जुदा,सैलाब रुक ना पाए गे---कर दीजिये ऐलान अब प्यार का,रिश्ते को खास नाम अब दे दीजिये---

Friday, 14 July 2017

कहानी ज़िन्दगी की लिखते लिखते हज़ारो पन्ने भर दिए----हिसाब माँगा जब इसी ज़िन्दगी ने हम से

खामोश क्यों यह लफ्ज़ हो गए---टूटन भरी जब इस जिस्म मे,अश्क भी जिस्म से हिसाब मांगने लगे

लम्हा लम्हा कतरे बहे और वज़ूद से टकरा गए---कल हम रहे या ना रहे,निशाँ कुछ ऐसे छोड़ जाये गे

खुले गी परते अतीत की और हम हवाओ मे कही दूर गुम हो जाये गे ---

Wednesday, 5 July 2017

बहुत चाहा ज़ख्मो को ज़ख़्म ही रहने दे,नासूर ना बनने पाए---अश्को को आखो मे ही पी जाए,बाहर

फिसलने ना दे---चाही बस थोड़ी सी ख़ुशी,थोड़ी सी हसी और जीने के लिए ज़िन्दगी रहे इबादत से

भरी---पर हम करते रहे इबादत,कि कही दिल का  गुबार जहाँ मे तबाही ना ला दे---तोड़ने वालो को

अब खुदा हाफिज,कि अब मकसद बदल चूका जीने के लिए--टुटा है यह गुबार और अश्क......यह तो

अब निकल चुके राहे-तबाही की तरफ----

Tuesday, 4 July 2017

ज़ुबाँ  के मासूम तारो पे,कभी लफ्ज़ सिखाए थे ओस की महकती बूंदो की तरह---अल्फ़ाज़ लिखाए

थे हमेशा किसी मंदिर की पूजा की तरह---पनाहो मे अपनी रखा था हमेशा दुनिया की नज़रो से दूर

कुरान नहीं,गीता नहीं,वाहेगुरु और तमाम धर्मो की बाते,फूलो की तरह बरसाई थी हर रोज़---अंदर

तो मेरे आज भी बसा है उन का धयान,कि साँसे जब भी जाए गी तो गिला नहीं होगा कि कभी छोड़ा

नहीं खुदा,भगवान और वाहेगुरु का नाम---
प्यार तो इक  नियामत है,कुदरत का इक तोहफा हे ---दौलत के नशे मे,रुतबे  को हासिल करने के

ज़नून मे अक्सर प्यार को खो देते है लोग---वो दिल जो कभी धड़कते थे दुआओ के साथ,जो लेते थे

सांस बस इबादत के साथ---अब तो समझने के लिए ज़िन्दगी जा रही है,किसी और ही मकसद की

तरफ---जहा दुआए तो रहे गी,पर अब हज़ारो मासूम ज़िन्दगियों की तरफ ..

Sunday, 2 July 2017

कहते है खुदा जिस को,भगवान का रूप है..कही मस्जिद कभी मंदिर कभी गुरूद्वारे मे तो कभी चर्च की

जगह पूजते है लोग...मन्नंते इस विश्वास से मांगते है लोग,यकीं होता है तभी तो सर झुकाते है लोग

जब लगे कि अब रास्ता  हो गया इतना कठिन,यकीं किसी पे ना करना इस दुनिया मे...कि कदम कदम

पे दे रही यह दुनिया दगा...जब भी झुक गए हम तेरे सज़दे मे,तूने निकाला हर मुसीबत,हर परेशानी से

मुझे...आज दे रही शुक्राना तुम्हे...मै अकेली कहाँ,मेरी ताकत बने तुम बैठे हो मेरे ही अंदर कही..
खलल न डाल मेरी इबादत मे,तुझे मेरे रब दा वास्ता है---ख़ामोशी से सही पर रब से मुझे मांग ले

तुझे मेरी चाहत का वास्ता है----कभी ना किया इज़हारे-मुहब्बत कि दिल की धड़कनो ने कहा,रह जा

खामोश तुझे तेरे वज़ूद दा वास्ता है---बस खिल गए तुझे देख कर,सज़दे किये तेरे कदमो की चाप पर

अब तो मेरी इबादत मे तू खुद को शामिल कर ले,तुझे मेरे रब दा वास्ता है---

Saturday, 1 July 2017

कभी जो दे गई यह ज़िन्दगी दगा,दामन मे तो तेरे लौट आये गे---बहुत कुछ बहुत कुछ है बताने के

लिए,क्या छिपाए गे और क्या बोल पाए गे---बहुत दर्द मिला अपनों से यहाँ,बेगानो को क्या इलज़ाम

दे पाए गे---तुम होते साथ तो इल्ज़ामो के घेरे मे ना घिरे होते---इक शंहशाह की मुमताज़ बने, अपने

ताजमहल की रौनक होते--सितारों से भरा होता आज दामन हमारा,तेरी आगोश मे कही दूर बहुत दूर

ज़न्नत की सैर पे निकल जाते ----
जीवन के हर मोड़ पे,उम्र के हर दौर मे...माँ..तुम साथ थी मेरे,तेरे हर अहसास से साँसे चलती  रही मेरी

तुम ने जो चाहा,मैंने दिया तुम को...पर तेरा साथ फिर भी ना मिल सका मुझ को...जननी नहीं तुम मेरी

पर ख़िताब तो माँ का मैंने हमेशा दिया तुम को....रोई बेतहाशा जब जब रातो मे,क्यों तेरा अहसास सर

पे महसूस किया मैंने....कोई नहीं,कोई भी नहीं समझे गा तेरे एहसास की हकीकत को...पर माँ,मेरे लिए

तो है तेरी दुआओ का आँचल हमेशा से  भरा....नमन है तेरे प्यार को,नमन तेरे एहसास को....
भीगे गे जो बारिश मे,तुझे भी साथ ले डूबे गे --- बहकते कदमो की चाप मे,तेरे कदमो को भी भिगो

डाले गे----रफ्ता रफ्ता यह मुहब्बत परवान होगी,कही यह किस्मत कभी मुझ पे तो कभी तुझ पे

मेहरबान होगी ----टूट के चाह मुझे इतना,बारिश भी ना बरसी हो कभी इतना----सैलाब आते है चले

भी जाते है,पर तेरी मेरी मुहब्बत का यह सैलाब आये इतना कि आखिरी सांस तक हमारी मुहब्बत

इस मे डूब जाये इतना---
बरस गया यह मौसम तेरे भीगे आँचल की तरह....हवा जो चली यह सरक गया किसी नाज़नीन की

हसी की तरह.....देखा जो उन्हें तो बिखर गए, किसी मखमली  दुपट्टे की तरह....छुआ जो गेसुओं को

तो निखर गए किसी आईने की तरह...यह प्यार है या इसी मौसम का असर,कि भीगे है बारिश की उन

फुआरों मे,पर सांसे गर्म है पारे की तपिश की तरह....

Friday, 30 June 2017

कही बदली राहे तो कही वक़्त ही बदल गया...रेत पे पाँव धरते धरते,रेत का वो निशाँ ही बदल गया...

परिंदो की आवाज़ मे सुबह का माहौल ही बदल गया...कुछ चेहरे अनजाने से,कुछ कुछ पहचाने से ....

हालत जो बदले सब बदल गया.....टुकड़े टुकड़े ज़िन्दगी के इकठ्ठा करते करते,उम्र का दौर भी बदला

और साज़िशों के अल्फ़ाज़ बदल गए...कुछ कहती है यह धडकन,सुनने के लिए अब तो यह ज़माना

भी बदल गया....

Saturday, 24 June 2017

आज खुद से बगावत कर रहे है--क्यों ताउम्र ज़ज़्बातो के महल बनाते रहे,बनाते रहे---दुनिया की बुरी

नज़रो से,अपना आशियाना बचाते रहे,बचाते रहे---कोई साथ चले न चले मेरे,बेखोफ हर राह को मंज़िल

तक पहुंचाते रहे,पहुंचाते रहे---आज खुद से ही शिकायत है इतनी कि क्यों इतनी ख़ामोशी से दिल की

तड़प को छुपाते रहे--यह दुनिया ही रास नहीं आई हम को,बची ज़िन्दगी को निभाने के लिए इन साँसों

को क्यों ज़िंदा रखा है--खुदा के पास अब जाने के लिए,ज़ज़्बातो के यह महल बना रहे है,सिर्फ अपने

इस खुदा के है लिए---
हा...आज भी आयात अधूरी है मेरी..तेरे बगैर पूरी कहा होगी यह ज़िन्दगी भी मेरी---रुख़्सत किया तो

क्या हुआ,दिल के शामियाने मे आज भी तस्वीर लगी है तेरी--ज़ुल्फो के घनेरे साये मे,तेरी उगंलियो की

हरकत सरसराहट देती है आज भी--लिखते लिखते कही क्यों बिखरते है लफ्ज़,मेरी किताब की किसी

एक उभरती नज़्म पे तेरी---मुस्कुरा दिए फिर ज़माने की हरकतों पे आज,कि खुदा को जवाब देने के

लिए सांसे तो ज़िंदा चल रही है अभी मेरी---
पलक झपकते है तो क्यों यह पलक भर आती है---हर उस याद को साथ क्यों लाती है,जो रूह को टीस

दे जाती है--जो किया उस को अब भूल जाना चाहते है,रेत के ढेर मे सब दफ़न कर देना चाहते है--लफ्ज़

तब बेज़ुबान हो जाते है,जब टूट टूट कर पत्थर बन जाते है---बस यही से सकून का वो दौर शुरू हो जाता

है,जिस के लिए ताउम्र इंतज़ार पे इंतज़ार करते है---अब आलम है कि दर्द को कुचल चुके है इन्ही पैरो के

तले,जिन्हो ने बिखेरा उन्ही को छोड़ चुके है राहे-सफर मे अजनबी कर के--

Tuesday, 20 June 2017

दोस्तों---मेरी शायरी के हर रूप को पसंद करने का बहुत बहुत शुक्रिया..दुःख दर्द मे डूबी हुई या प्यार के धागो मे लिपटी ... फिर चाहे विरह की वेदना हो या रूहो के प्यार की दास्ताँ ... शायरी वही जो आप के दिलो को रुला दे और कभी प्यार के लम्हो से आप के दिलो मे एक अहसास पैदा कर दे---शुक्रिया आप सभी का,मुझे इतना मान सम्मान और प्यार देने के लिए...शुभ कामनाये ...
चलते चलते.. बार बार सवाल करती है यह ज़िन्दगी...कभी ज़लज़ले कभी हसरते तो कभी हर पल का

हिसाब मांग लेती है यह ज़िन्दगी--सबर  की इंतिहा  तक ले जा कर,किसी खामोश मोड़ पर फेक देती

है ये ज़िन्दगी---थोड़ी सी ख़ुशी दे कर,हज़ारो आंसुओ से भिगो देती है यह ज़िन्दगी---हर पल आगे

जाने की रफ़्तार को,एक ही झटके मे तबाह कर जाती है यही ज़िन्दगी---फिर भी साँसों की डोर को

बांधे हुए,जीने पे मज़बूर कर रही यह ज़िन्दगी--यह ज़िन्दगी----
अल्फ़ाज़...अल्फ़ाज़ और अल्फ़ाज़...हज़ारो पन्ने भर दिए इन्ही अल्फाज़ो से हम ने---बरसो बाद भी

तेरी जुदाई के एहसास को, न भर सके  यही पन्ने---जिस्म तो मिट ही जाया करते है,रूह तो आज़ाद

हो कर भी आज़ाद नहीं होती--मुझ से मिलने की खातिर तेरी रूह का यही तोहफा,आज भी साथ है

मेरे--दुनिया कहती रहे बेशक दीवाना मुझ को,तेरी मेरी इसी गुफ्तगू को पन्नो मे इस कदर भर दिया

हम ने कि पुश्त दर पुश्त रूहो के प्यार को इन्ही पन्नो मे पढ़ती जाए गी---

Monday, 19 June 2017

इस भोली मुस्कान मे,मुझे तेरी वो मुस्कान याद आती है--मेरा छिपना और तेरा मुझे ढूंढ़ना,वो प्यारे

लम्हे याद आ जाते है--जो बीत गया वो भूलना आसान नहीं मेरे लिए,कि पल पल तुझे बाहों मे झुलाना

यादो का सैलाब बन के याद आ जाता है--मै जब नहीं रहू गी तब भी साथ अपने, तेरी तमाम यादो को ले

जाऊ गी---तब तू मेरा होगा,यही सोच कर रूह को सकून से तर कर पाऊ गी---जनम कभी नहीं लेना

फिर इस दुनिया मे,कि यहाँ जुदा होने के बाद जीना दुश्वार हो जाता है--- 
अपना था कभी जो,आज बेगाना सा लगता है--छूना भी चाहे उसे,तो किसी और की अमानत लगता है---

मिलने के लम्हे होते है इतने छोटे,कि ज़ी भर देख ले उस को...तो यह भी किसी सपने जैसा लगता है---

रोते है बहुत उस को याद कर के,पर उस का जहाँ आबाद रहे..यह सोच कर दिल को पत्थर कर लेते है

यह तड़प रहे गी यू ही ज़िन्दगी भर,कि वो रिश्ता जो जनून सा था..आज इक ख़्वाब जैसा ही लगता है--

Sunday, 18 June 2017

दोस्तों-------सपने और उम्मीदें...सब के लिए इस  के मायने अपने अपने है--सपने देखने की कोई उम्र नहीं होती--और ज़रूरी नहीं कि हर सपना ढेर सारे पैसो की ज़रूरत को साथ  मे लिए हो--एक आत्म-विश्वास और हौसला--साथ मे इस ज़माने से लड़ने की ताकत--दोस्तों---आप कुछ करे गे तब भी,नहीं करे गे तब भी..लोग आप के बारे मे बाते ज़रूर करे गे--क्यों कि शायद यह उन की फितरत है--अपने सपने को पूरा करने के लिए खूब मेहनत करे--और इस विश्वास के साथ कि भगवान आप का सपना पूरा करे गे--और वही लोग जो आज आप को पहचानते नहीं,वही सब आप की कामयाबी के जश्न पे बिना बुलाये आप के पास आये गे---दोस्तों,यह ज़िन्दगी कदम कदम पर हमारा इम्तिहान लेती है--असफलता मिले तो रोये नहीं,क्यों कि बुलंदियों पर पहुंचने के लिए यह ज़िन्दगी आप से मेहनत और हौसले का हिसाब लेती रहती है--सोने से पहले भगवान का शुक्रिया अदा करे और अपने जीवन की उपलब्धि पर गौर कीजिये--शुभ रात्रि दोस्तों...

Monday, 12 June 2017

जुस्तजू तो नहीं तेरी,फिर क्यों तेरा इंतज़ार करते है---खयालो मे दूर दूर तक कही भी नहीं मगर,क्यों

रातो की नींद हराम करते है---चाँद को निहारते निहारते अक्सर क्यों तारो की चमक मे खो जाते है

बेवजह ही तन्हा है..बेवजह ही रो पड़ते है--बेकरारी के आलम मे क्यों बदहवास हो जाते है----ढूंढ रहे

है इस की वजह,दिल से कहते है अब दे गवाही कि हम मुंतज़र है उस की मुहब्बत के या अपने आप से

कोई साज़िश करते है--- 

Wednesday, 7 June 2017

महफ़िल सजी है आज कद्रदानों के साथ..हज़ारो चाहने वाले हमे सलाम बजा रहे है आज---कहने के

लिए यू तो बहुत सवरे है आज..घुँघरू की आवाज़ मे कौन सुन पा रहा  है मेरी धडकनों की फरियाद---

यह तो इक बाजार है बाशिंदो की हर ताल के साथ..जहा बिकती है रुहे हर तड़पती सांस के साथ---

इंतज़ार करते है किसी उस मसीहा का,जो करे गा आज़ाद इस महफ़िल से आज---
ना रहो इतने तन्हा कि ज़िन्दगी बहुत खूबसूरत है---पलट कर ना देखो पीछे कि राहे-गुजर बहुत ही

मुश्किल है--नियामतों को जो देखो गे तो यक़ीनन इस ज़िन्दगी से प्यार हो जाए गा---इंसा हो कोई

खुदा नहीं कि हर काम तुम्हारे हिसाब से होता जाए गा---आंसू तो इक वजह है,खुद को कमज़ोर कहने

की सजा---चल थाम ले हाथ किसी मासूम का और दिला अहसास उसे कि ज़िन्दगी खुदा की इक
  रहमत

है---

Saturday, 3 June 2017

वो तेरी सलीके से बोलने की अदा,हम तो तेरे कायल हो गए---अदब से हर गुफ्तगू पे दिल जीत लेने की

वो वफ़ा,यक़ीनन तेरे सज़दे मे हम तो झुक गए---तेरे कदमो की आहट मे किसी फ़रिश्ते के आने का

अहसास होने लगता है----तू जो रुक जाये तो लगे ऐसा हवा ने खुद को जैसे रोका है---तेरे चेहरे के नूर

से अक्सर चाँद के दिखने की खबर लगती है--तू शायद इस दुनिया की नहीं,कि यह दुनिया तो अपमान

के लफ्ज़ो से बनीं एक मुसीबत लगती है----
इतनी ख़ामोशी क्यों है तेरे दिल की धड़कनो मे आज----शोला बनी दहकती हुई वो शमा क्यों उदास

है आज---चेहरे की रंगत को क्या फूलो ने चुराया है आज---इतनी गुमसुम ना बनो कि बहारो को लाज

आने लगी है आज----तेरी  शोख  अदाओ से ना जाने कितनी ज़िंदगिया होती रही है आबाद ---कोई ज़ी

गया तेरे लबो की मुस्कान के साथ---अब तो ख़ामोशी तोड़ दे ..कही ऐसा ना हो जीते जीते कोई दम ही

तोड़ गया हो आज-----

Thursday, 1 June 2017

मौसम क्यों बरस रहा है आज...क्या तेरे गेसुओं ने इन्हे खुलने की खबर भेजी है----बादल रह रह कर

दे रहे है आवाज़े, बांध ले इस ज़ुल्फो को अब कि कहर की सीमा अब हद से गुज़री है---यूं तो निहारती

है यह दुनिया तुझे तेरे हुसन के चर्चो से,अब सारे जहाँ को यूं भिगो के क्यों मार देने पे उतरी है---धरती

पे भर रहा है सैलाब इतना.. जानम  अब तो मान ले कहना कि इसी धरती ने तुझे इस जहाँ मे उतारा है 
तेरे जिस्म से मुझे क्यों फूलो की महक आती है--तू परी तो नहीं फिर क्यों मुझे शहज़ादी नज़र आती है

तेरी गुफ्तगू मे खुदा का नूर बरसता है--तू चलती है तो यह संसार जैसे तेरे कदमो मे सज़दा करता है--

तुझे छूने के लिए ज़मीर की सदा सुनता हू,कही भूल से तुझे ज़ख़्म न दे जाऊ इस बात को ज़ेहन मे हर

पल रखता हू----मासूम है तू इतनी कि तुझे देखता हू तो ओस की बूंदो की नमी याद आ जाती है---
पलकों के शामियाने मे,तेरी मासूम सी वो कजरारी  आंखे---इसी शामियाने के हटते ही,क्या कह गई

तेरी यह बोलती आंखे----बहुत सवाल करती है तेरी भोली आंखे,फिर उन्ही सवालो के जवाब मुझ से

पूछती है तेरी यही चुलबुली आंखे---कितनी ही ग़ज़ल लिख दू तेरे हुसन और तेरे नूरानी चेहरे पे,पर

फिर भी मेरी नज़र क्यों आ कर ठहर जाती है तेरी इन्ही कजरारी से आँखों पे---

Wednesday, 31 May 2017

इरादे अगर मज़बूत हो और भावना साफ़ हो तो हर उम्र मे हर मुश्किल पर जीत हासिल की जा सकती है...और संघर्ष से हर जंग जीती जा सकती है---ज़िन्दगी हर मोड़ पे आप का इम्तिहान लेती रहती है---भगवान पे विश्वास रखे...वो हमेशा आप के साथ थे,है और रहे गे---शुभ प्रभात दोस्तों..शुभ कामनाएं---

Tuesday, 30 May 2017

तेरे शहर का मौसम अच्छा है बहुत ,पर मुझे उन हवाओ से डर लगता है---तेरे जीवन की खुशियों मे

शामिल हो जाए मगर, अपनी किस्मत से ही डर लगता है----कहते है कुछ मगर सुना जाता है कुछ

और,इतनी बदनसीबी से खौफ लगता है---लोग कहते है हमारी दुआओ मे बहुत ताकत है,खुदा का नूर

हम मे बसता है--दुआ के लिए जब भी हाथ उठाते है, अब तो अपने ही साए से बहुत डर लगता है----

पायल की खनक को सुनने के लिए वो बहुत दूर से आए है---हमे नज़र न लगे किसी की,काले टीके से

सजाने आए है---इस बुरी दुनिया मे जहा जीने के लिए,इज़ाज़त नहीं मिलती सासो को लेने की--वही

एक तुम हो जो आसमां मे उड़ाने की खवाइश देने आए हो----बरसो बाद छूटे है गुलामी की ज़ंजीरो से

खुली हवाओ मे अब रहना है तुम को,इस बात का अहसास दिलाने वो बहुत दूर से आए है----

Monday, 29 May 2017

एक ख़ामोशी मेरी.. कह रही हज़ारो लफ्ज़ो के ताने-बाने मगर--समझने के लिए आज कोई शख्स कही

भी तो नहीं---ले लिया इन पन्नो का सहारा मगर--इन को पढ़  पाना भी अब किसी के लिए जरुरी ही

नहीं---कोई लफ्ज़ कहता है कहानी मेरी ज़िन्दगी के सुनहरे खवाबो की...तो कही छलका जाता है आंसू

झरनो की तरह बहते पानी की---मासूमियत आज भी है दिल के हर कोने मे..लेकिन उन खवाबो की

तामील करने के लिए आज कही कोई भी तो नहीं----

Wednesday, 24 May 2017

यूँ ही हसी हसी मे..इक कदम बढ़ाया हम ने तो दूजा तुम ने बढ़ा दिया---हसरतो का संसार फिर कहाँ

रुका,ज़िन्दगी भर के लिए साथ तुम ने मांग लिया--वो मुलाकात छोटी सी,आँखों पे लाज बस ठहरी सी

हाथ थामा जो तुम ने,हम ने चेहरा झुका दिया---पलट कर देखते किस को,दुनिया की रंजिशों से दिल

कब से बेगाना सा हो गया---पलके झुकाई जो हम ने,तेरे होठो ने मोहर लगा कर दुल्हन हम्हे बना दिया

Monday, 15 May 2017

चुभन उन गहरे ज़ख्मो की,दिल को आज भी तार तार कर जाती है--भरने लगे है घाव लेकिन,पर टीस

फिर भी अक्सर चली आती है---हौले हौले यह दर्द जब कम होता है,यक़ीनन काम के बोझ से जीवन

का सफर फिर आगे चलता है---साँसे है कायम जब तल्क़..धड़कने बज रही है जो आज तक...हर बात

इन्ही कागज़ो पे लिखते जाए गे--नसीहते माँ की ज़ेहन मे रख कर,ज़िन्दगी के आर पार हो जाए गे---
शुभ परभात दोस्तों ...हिम्मत कभी मत हारना..जिस दिन आप टूट जाये गे,यह दुनिया आप को दबोच ले गी..

Saturday, 13 May 2017

जन्म नहीं दिया मुझे,पर तुझी को माँ कहती हूँ...सांसो का साथ भले ही कम रहा लेकिन,तेरी हर

नसीहत को आज भी पल्लू से बाँधे रखती हूँ...जब जब दुनिया की बातो से दुखी हुआ है मन मेरा,तुझ

से मिलने तेरे उसी घर मे चली आती हूँ...यह दुनिया क्या जाने कि आज भी तेरा वज़ूद उस घर के हर

कोने मे मिलता है...माँ..तेरे बताए हर राज़ को मैंने आज भी अपने सीने मे दफ़न रखा है...प्यार कैसा

होता है,नहीं जानती लेकिन आज भी तुझे नमन करने के लिए तेरे ही घर आना होता है...

Tuesday, 9 May 2017

भीगे भीगे गेसुओं मे..वो भीगा सा चेहरा---पलकों  की नमी पे रुका हुआ बस एक ओस का पहरा---

नरम लबो पे नाम सिर्फ तेरा ही लेने की यह ज़िद्द---मखमली बिछौने पे जनम तेरे संग गुजारने की

वो हलकी सी खलिश---पाँव की पायल को रोकते है अक्सर बजने के लिए..कंगन को छुपाते है आंचल

के तले--हा यारा...यही मुहब्बत है कभी तेरी बाहो मे सिमटने के लिए तो कभी मेरे आंचल मे लिपटने

के लिए----

Sunday, 7 May 2017

कलम हाथ मे  उठाते है जब जब,हज़ारो लफ्ज़ इन पन्नो पे उतर जाते है----कभी दर्द की इंतिहा के साथ

तो कभी आंसुओ से इन्हे भिगो जाते है----यादो को जब भी उतारा है लफ्ज़ो की अदायगी के साथ,कभी

मुस्कुराये है तो कभी शर्म से लाल हो जाते है----वो मखमली दुपट्टे मे हमारा हसीं चेहरा और सफ़ेद

कुर्ते मे तेरी गज़ब सी हसी का पहरा----उस लाज़वाब कहानी पे कितने भी लफ्ज़ो को उतारे,कम लगता

है----इश्क़ और हुसन की दास्ता पे आज भी मर जाए तो कम लगता है -----



Saturday, 6 May 2017

ना तोड़ बंदिशे ज़माने की,कि यह हर दम जगा रहता है---पाक मुहब्बत पे भी गलत नज़र रखता है--

आँखों मे उठते है जो पैमाने प्यार के,उन्हें हवस का नाम देता है--हाथ जो उठते है दुआओ के लिए

उन मे भी कुछ गलत पा लेने की खवाइश समझ लेता है---खुद करता है उसूलो का खून,इश्क के झुकते

कदमो को जवानी का नशा मान लेता है---पाक मुहब्बत के मायने जो जाने होते,दुनिया मे खूबसूरती

का इल्म जरूर समझा होता---
फिर वही ज़लज़ले,फिर वही धुआँ धुआँ---कह रही यह ज़िन्दगी वक़्त का कहर है रूआ रूआ ---दिन

हुआ राते ढली ग़ुरबत मे बनी यह किस्मत हो गई खुद से बेवफा बेवफा---राज़ खोले दर्द ने,आंखे बनी

उस की गवाह..चुप रहू या बोल दू...आसमाँ से चाँद ने की इल्तिज़ा ना हारना कि अब भी इन साँसों मे

है रौशनी की फैली हुई इक अधूरी सी दास्ताँ---

Tuesday, 2 May 2017

खामोशिया बहुत चुपके से गुफ़तगू कर जाती है----सरगोशियां हलके से दिल को हिला जाती है---लब

थरथराए इस से पहले मुहब्बत इशारो को जान जाती है---खुले गेसू जब तल्क़ यह रात गहरा जाती है--

इम्तिहान ना ले मेरी वफाओ के इतने कि साँसे कभी कभी यूं ही दम तोड़ जाती है---कलाइयों की यह

चूड़िया सजने के लिए बहुत बेताब होती है---तू माने या ना माने प्यार की यह इल्तज़ा कभी कभी मंज़ूर

भी हो जाती है---
हर बात पे गर रो दे गे तो इस जीवन को कैसे ज़ी पाए गे--तेरे साथ देखे उन सपनो को पूरा कैसे कर

पाए गे--कभी कभी जब यह ज़िन्दगी करती है दिल्लगी,तो दिल को लगाने की बजाय हिम्मत को साथ

बांध लेते है---पन्नो पे होती है यादे तेरी,और सपनो को पूरा करने का वादा मजबूती से याद करते है---

यह दम तो तभी निकले गा,जब सपनो की  हकीकत होगी सामने तेरे और यह ज़माना भौंचक्का सा रह

जाए गा----

Sunday, 30 April 2017

आवाज़ जो आई सीने से मेरे,लगा कि सब टूट ही गया---घबरा के जो खोली आंखे तो इक मासूम नज़ारा

दिल को कौंध गया---मुस्कुरा दिए उस भोली अदा पे हम,मिट गए उन नन्हे कदमो पे हम---दुआओ से

भर दिया आँचल उस का,ना लगे नज़र किसी की उसे सीने मे ही बसा लिया---खुशियों से भरा रहे दामन

तेरा,अपनी उम्र का हर लम्हा आज तेरे ही नाम कर दिया----

Saturday, 29 April 2017

तुझे देखे या फिर प्यार करे---तेरी मासूमियत पे मर जाए या दुआओ मे अपनी तुझे शामिल कर ले--

तेरे हर कदम पे,तेरी राह मे फूल बिछाए या इबादत के पन्नो मे तेरा सज़दा कर ले---कशमकश मे है

दीवानो की तरह खुद से बेगाने से है,शायद तेरे लिए खुद से अनजाने से है---चाँद को कहे छुपने के लिए

या तुझे अपनी आगोश मे भर ले,या रात भर तेरी नज़र उतारे और तुझे रूह अपनी मे शामिल कर ले-----
हर बात को कहने के लिए,जरुरी तो नहीं कि लफ्ज़ो मे उसे ढाला जाए---समझो जो इशारो को कभी

फिर बात करने के लिए तुम से मुखातिब क्यों हुआ जाए--गर्म सांसो की नमी को जो सीने मे छुपा लो

तो आगोश मे सिमटने के लिए क्यों कहा जाए---गेसुओं को बिखेरा है चांदनी के उजाले मे ऐसे कि तेरी

बाहो मे आने के लिए अँधेरे का इंतज़ार करना  ही क्यों पड़े---

Friday, 28 April 2017

खुला आसमां भी है,परिंदो के चहकने की इक वजह भी है---यह सुबह खुदा की नियामतों से भरी इक

दुआ ही तो है---यह ख़ामोशी,यह लय मे बहती हवा..कुछ न कह कर बहुत कुछ कहती भी तो है---तू

सुन ज़रा,पलट कर देख तो ज़रा कि ऐसी ख़ामोशी मे प्यार की इक रज़ा भी है---चल कर आए थे बहुत

दूर से हम,दामन मे चाहा प्यार तेरा,इस सुबह का इरादा कुछ ऐसा भी तो है---

Thursday, 27 April 2017

समंदर के पानी की तरह,यह ज़िन्दगी भी बस बहती रही.बहती रही--कभी टकराई काँटों से तो कभी

पत्थरो से चोट खाती रही--संभल संभल कर भी चले तो भी गुनाहो के दाग लगाती रही--मुस्कुराये जो

सब भूल के तो भी दामन को दागदार करती रही..करती रही--बहना ही जब था मंज़िल की तरफ,तो

दागो का हिसाब भूलना ही पड़ा--वाह री ज़िन्दगी,तेरी नादाँ भूलो को नज़रअंदाज़ कर के...आज अपनी

मंज़िल को पाने की खवाइश बस कामयाब होने को लगी..होने को लगी---

Monday, 17 April 2017

तन्हाईयाँ रास नहीं आई हम को...घुटन ने दबोचा और खामोशिया टकरा गई---तेरी तलाश मे जो

निकले,खुली वादियां मुखातिब हो गई---सिर्फ तेरे अहसास से सांसे खुलने लगी,गेसुओं को जो खोला

घटाएं बरसने लगी---सूखे होठो मे नमी क्यों आने लगी,चेहरा जो छुआ मखमली चादर जैसे बुलाने

लगी---मिलते मिलते आखिर मिल ही जाओ गे,आए है तन्हाइयो को मिटाने के लिए..हुआ ऐसा क्यों

की ज़िन्दगी ज़िन्दगी से बस टकरा गई---

Saturday, 15 April 2017

हज़ारो हाथ उठते है दुआ के लिए...इंसान मुक्कमल  होता है---दौलत से नहीं,शोहरत से भी नहीं...आँखों

की नमी से ज़िंदगियाँ रोशन होती है---कुछ रिश्तो के कुछ भी नाम नहीं होते लेकिन,वो ज़िन्दगी को

सकून देते है---दिल जहा रहे ख़ुशी से भरा,रूह इत्मीनान से हवा लेती है---ज़िन्दगी नाम तो है बस जीने

का,रंक रहे या कोई राजा बने---किस्मत की लकीरो के जो साथ चले,वही इंसान मुक्कमल होता है----

Thursday, 13 April 2017

हर सांस मे मेरी,एहसास अपना दिलाने के लिए शुक्रिया मेरे हमदम----पूजा के हर पल मे,साथ मेरा देने

के लिए शुक्रिया मेरे साजन----नमन करते है तुझे,ना याद आ अब इतना कि आंखे नम ना कर बैठे---

यह दिन तो तेरा है और मेरा भी,तेरे लिए ही सजने का सवरने का---मिलन के दिन मेरे पास आने के

लिए,मेरा मान रखने के लिए....शुक्रिया मेरे हमदम----
मेरे जिस्म से फूलो की महक आती है,जब तेरी रूह मेरी रूह मे समां जाती है---प्यार के धागो मे तेरे

इश्क की रज़ा होती है,तभी तो मेरे हुस्न पे नूर की चमक होती है---लोग मुझे शहज़ादी का ख़िताब देते

है,नहीं जानते कि मेरे हुस्न की चर्चा तेरी बदौलत ही होती है---बांध के रखना मेरे रूप की चांदनी को

कि तेरे बगैर मेरी हर शाम जुदा होती है----





Wednesday, 12 April 2017

ज़मी पे पाँव धरे या आसमाँ मे कही खो जाए---तेरी मौजूदगी के एहसास भर से ही,हम सुबह से ही है

महके महके..फूलो से खिले----क्या लेना क्या देना इस दुनिया से,महफूज़ है तेरे ही साथ..तेरे रिश्ते के

तले---तेरी यह दुल्हन आज भी वैसी ही है..सब कुछ वैसा ही है...सब कुछ बदला भी है----तेरी ही रूह मे

आज भी वैसे ही समाए है..बदला है तो इस दुनिया का रूप...जो ऊपर से कुछ और तो अंदर से हम्हे पूरी

तरह बर्बाद करते आए है--शायद दिल ही दिल मे तेरी दुल्हन को कमज़ोर समझते आए है-----
इंतज़ार तो इंतज़ार होता है...चाहे वो तेरे आने का हो या तेरे बताए रास्ते पे जाने का हो---हिसाब

मांगे ज़िन्दगी से अगर तो धुआँ धुआँ सब नज़र आता है--पर रौशनी मे गर तेरा चेहरा देखे तो यह

धुआँ भी शराबी आँखों सा नज़र आता है----बात करे फ़ासलो की तो बहुत दूरी तेरे मेरे बीच नज़र आती

है---रूह के तारो को जो जोड़े..तो रिश्ता सौ जन्मो का दिखाई दे जाता है---दीदार तेरा नज़रो से करे या

रूह से रूह के तारो को मिलाने का करे..रिश्ता यह ख़ास हर किसी को नज़र आ जाता है----
कहते है खामोशियाँ कभी बोला नहीं करती---पर हर ख़ामोशी मे तेरी आवाज़ क्यों सुनाई देती है----

बहुत देर गुफ्तगू होने  के बाद,हर चीज़ खूबसूरत क्यों नज़र आती है---जिस्म हल्का हो जाता है,और

रूह सकून से भर जाती है---तेरे बाद किसी और के लिए वक़्त कहाँ होता है--गर्म हवाओ मे क्यों सर्द

मौसम का अहसास होता है---तेरे जाने के बाद  क्यों गुफ्तगू करने का मन फिर हो आता है-----
बस तेरी  दीवानी हू...तेरी ही इक कहानी हू---किरदार खास हू तेरी किताब का,लोग कहते है...मै

झाँसी की रानी हू---शाही जीवन जिया था कभी,शाही रुतबे मे रहते थे---नाज़ आज भी है खुद पे इतना

भरोसा रब पे भी है इतना,की मौत भी शाही पाए गे--टूट कर कभी जिया नहीं,फिर हर पल आंसू क्यों

टपकाए गे---तेरे नाम से जुड़ा है नाम मेरा,इस कहानी को रोशन कर के ही.... तेरे पास आए गे---

Tuesday, 11 April 2017

तुझे ठेस न पहुंचे इस ख्याल से..हम रोए गे नहीं---दिन तो हमारा अपना होगा,तुझे ख़ुशी देने के लिए

पलकों को भिगोए गे भी नहीं---तेरे ही सीने मे,तेरी ही बाहो मे,मुस्कराए गे..यह बात और है कि तेरे

सपनो को मुकम्मल करने के लिए,ज़िन्दगी को बेखौफ अभी और जीते जाए गे--सब की राहो से दूर

बहुत ही दूर,एक दुनिया बसाई है मैंने..जहा ख्याल सिर्फ तेरा है,अपने टूटे दिल के लिए अब अपने

ज़ख्मो को किसी को कभी बताए गे भी नहीं----

Monday, 10 April 2017

यह भोर सुबह की कहती है..हर नियामत होगी तेरी---हर उलझन सुलझे गी..दर्द की दवा हाज़िर होगी

झुक जा खुदा के सज़दे मे..दे खुद को उस के चरणों मे--यहाँ कोई नहीं तेरा..बेगानो की दुनिया सारी है

न निभा कोई रसम-रिवाज़..ना खौफ रख दिल के खाने मे ज़रा---ना मांग खुदा से दौलत के भंडार......

बस रह हर पल उस का शुक्रगुज़ार..छोड़ के साँसों के बंधन,एक दिन उड़ जाए गा--रह जाए गी बस यादे

और तू हर शै से आज़ाद हो जाए गा---

Sunday, 9 April 2017

शाही लिबास मे,शाही अंदाज़ मे..तुझ से मिलने बहुत दूर से आए है--तड़प प्यार की तुझे देने के लिए

तेरी ही ज़िन्दगी मे दस्तक देने आए है आज--प्यार तुम्हे मुझ से नहीं है गर,तो पलके बिछाए यहाँ क्यों

बैठे है आज--दुनिया देती है सलामी मेरी हर अदा पे खास,तुम क्यों रख के बैठे हो दिल के ज़ज़्बात दिल

के दरवाज़े के पार--यह हसीं शाम बार बार नहीं आती,आँखों से मुहबत झलकाने बहुत दूर से आए है आज 
कही उलझा दामन तो कही बिखरे गेसू -- कही ज़ल्दबाज़ी मे दुपट्टा लिया थाम ---मिलन की घड़िया

आने को है,कितना सजना है सवरना है..होश मे नहीं है मेरे सुबह-शाम--माथे की बिंदिया,हाथो के

कंगन और अब तो बज उठी यह पायल लेते लेते तेरा नाम---रूह का मिलन तो होना ही है,फिर क्यों

यह धड़कन हो रही बेचैन बेचैन--दिन गिने या रातो को करवटें बदले,अब तो इंतज़ार मे है यह रूहे-खास 
दुनियाँ की परवाह जो की होती,तो आज ज़िंदा न होते--हौसले से जो कदम ना बढ़ाये होते,तो आज अपनी

शर्तो पे कहाँ ज़ी पाते--गरम रेत पे पाँव रखने से जो डर जाते,यक़ीनन दहशत की आग मे खुद ही जल

जाते--दुनियाँ समझी हम तन्हा है,वो क्या जाने मेहबूब का साथ आज भी साथ है मेरे--खुदा की नियामतों

को रोज़ सलाम करते है,झुक जाते है उस के सज़दे मे--हर सांस को लेने से पहले,उस की रज़ा सुन लेते है-- 
वो तेरी  काली  घनेरी पलके,आँखों के वो खूबसूरत शामियाने---मेरी दुल्हन हो या आसमाँ की कोई

शहज़ादी..आंचल मे समेटे हुए बेतहाशा अफ़साने...टुकर टुकर देखती हुई तेरी भोली मुस्कान की,हज़ारो

मासूम सी बिजलिया---कौन कहता है कि तुम इंसा हो..दुनिया से अलग,सदियों मे पैदा होने वाली---हो

सिर्फ मेरी ही दुल्हन---उन्ही यादो के कीमती ख़ज़ाने से,आज भी सजा है मेरा यह मन और तन..रहे थे

साथ सदा,रहे गे रूह से जुड़े..तेरे ही आंगन मे मिले गे रूह के छाँव तले----
रोने के लिए आज वक़्त नहीं है मेरे पास.....तेरे ही दिन पे,तेरे लिए सवरने के लिए बस बेताब है हम

कोई क्या कहता है..कोई क्या कहे गा-इस से परे तेरी ही दुनिया मे शिरकत करने को तैयार हो रहे है

हम--रूह मेरी मुकम्मल तो तभी होगी,जब तेरी रूह सज़दा करे गी मेरे हुसने-यार के आस पास--ना

छेड़ मेरी उन्ही धडकनो के तार,जिन्हे छुआ था तूने पहली पहली बार--तेरा वही अहसास आज भी है

मेरे दिलो-दिमाग के बहुत ही पास..बहुत ही पास---

Friday, 7 April 2017

खुशबू तेरी सांसो की है इतनी महकी महकी,कि फिज़ाओ को लाज आती है---तेरे आने की खबर से यह

दुनिया भी ज़न्नत सी नज़र आती है---तेरे छूने से इन वादियों मे एक सरसराहट सी क्यों चली आती है

गुफ्तगू करते है धीमे से मगर,चांदनी को खबर हो जाती है---चाँद को छिपाती है अपने आंचल मे,पर

दुनिया को खबर हो जाती है--तेरी सरगोशियों से मेरे जिस्मो-जान क्यों सिहर जाती है---

ना छेड़ साज़ ज़िन्दगी के मेरे,अपनी ज़िन्दगी को ही भूल जाए गा--ना कर अटखेलिया ज़ुल्फो से मेरी,

तेरा ईमान डोल जाए गा---साँसों की खुशबू मे खोने से पहले,साँसे अपनी तू कैसे ले पाए गा--मेरी जान

मे अटकी है जान तेरी,यह सोच कर तू अब किसी और का भी ना हो पाए गा--रूबरू हो जा मेरी ही रूह से

ज़रा,लाज़मी है कि अपनी ही रूह को यक़ीनन भूल जाए गा---

Wednesday, 5 April 2017

ना इंकार करते हो, ना इकरार करते हो--बला के  खूबसूरत हो,निगाहे-राज़ करते हो--अदाए मार डाले

गी,यू ही दूर जाते रहे नज़दीकिया पास आए गी--पत्थर-दिल सनम मेरे,खुदा का नूर हो लेकिन खुदा

क्यों खुद को मान बैठे हो--हुस्न से मालामाल हो लेकिन,इश्क के बिना कैसे ज़ी पाओ गे--राहो मे खुद

ही चले आओ,फिर ना कहना किसी और के हुस्न को अपना क्यों मान बैठे हो---

Monday, 3 April 2017

जय माता दी दोस्तों...ज़िन्दगी मे कल क्या होगा,कौन जाने ---हम अक्सर यही सोच कर दुखी होते रहते है...अपने अपने कर्मो का फल हम सब को भुगतना ही पड़ता है..और यही सच है..जो है बस यही आज है...हर हाल मे माँ का शुक्रिया अदा करे..पूजा मे,अपनी प्राथनाओं मे अपने मन की हर बात,हर उलझन माँ  को बताये..उन से ज्यादा हमारी कोई नहीं सुन सकता...आज अष्ठमी के अवसर पर माँ का मन से आत्मा से शुक्रिया कीजिये.....जय माता दी..जय माता दी....

Sunday, 2 April 2017

पूजा के हर धागे मे,इबादत के हर पन्ने मे....कलम की स्याही मे और मेरे दिल की किताब मे....जब

भी याद किया तो बस तुझी को याद किया..अपने घर के उस आंगन मे,हर खिड़की हर उस दरवाज़े मे

हर चोखट पे पाँव धरा जब जब....फरियाद मे खुदा से यही माँगा कि इबादत का आखिरी पन्ना तेरे ही

घर की उन्ही हवाओ से गुजरे,मेरी ही साँस का आखिरी लम्हा उसी घर के आंगन मे निकले...जो भी

निकले उस रह-गुज़र से,तेरे मेरे रिश्ते को कहानी को समझे...

Thursday, 30 March 2017

कही उन की नींद ना टूटे,इस ख्याल से हम ने पायल को बजने से रोक लिया---खलल ना हो कही उन के

सपनो मे,यह सोच कर हम ने गेसुओं को उन के चेहरे पे झुकने से रोक दिया---चूड़िया बजने लगी जो

रात के अँधेरे मे,उन की खनक को प्यार से बस चूम लिया---निहारते रहे उन को सोते हुए,मासूम सी

सूरत पे खुद को उन से प्यार करने के लिए....खुद को रोका जो रोका...पर पलकों को भिगोने से बस रोक

लिया....

Wednesday, 29 March 2017

कहने के लिए तो यह सारा जहाँ अपना है...पर अपनेपन के नाम पे अपना कोई भी तो नहीं----सितारों

से भरा यह आसमाँ भी तो अपना है,पर एक सितारा कही अपना  ही नहीं---मुझे तुम से प्यार है,यह

झूठा भुलावा मिलता है हर जगह से मगर, पर साथ चलने के लिए कोई एक शख्स भी तो नहीं---यह

दुनिया है ख़ुदग़र्ज़ो की,जहा मतलब के लिए लोग रिश्तो को ही बदल जाते  है---और दे के दुहाई बदनामी

की अपने दामन को साफ़ कर जाते है----

Saturday, 25 March 2017

बारिश तू  ज़रा थम जा,ए बादल तू बरस के अब खाली हो जा---उन की राहो को आबाद करने के लिए

सूरज को ज़रा उगने दो ---सुबह की मासूम हवाओ को ज़रा महकने दो,खिलने  दो अब उन कलियों को

जो फिज़ाओ को महकाती है--मेरे मेहबूब की राहो मे ज़रा सज़दा कर लू,ना रोको मुझे ना  टोको मुझे

बस हो जाओ सभी खामोश ज़रा,कि उन की सलामती के लिए खुद को इबादत मे ज़रा शामिल कर लू---

Tuesday, 21 March 2017

बहुत  बहुत ही खामोश सी यह रात है--कोई हल्की सी खलिश इस दिल के आस पास है---सन्नाटे को

चीरती हुई एक खामोश सी तेरी  आवाज़ मेरे साथ है---आंखे बंद है मेरी,पर नींद तेरी यादो के आस पास

है---दुनिया से दूर,बहुत ही दूर तेरे प्यार का जनून मेरी ज़िन्दगी की आस है---तुझ तक पंहुचने के लिए

इबादत के धागों मे खुद को लुटा देना मेरी मंज़िले-खास है---मेरी मुस्कुराहट को मेरी ख़ुशी समझने के

लिए,यह ज़माना आज भी मेरे सलाम का हक़दार है---
तुझे रुखसत कर दिया हम ने भरी आँखों से आज---पर तमाम यादो को साथ लिए घर लौटे थे आज---

सूना सूना सा जहाँ मेरा,अधूरे से खवाब..कोई नहीं समझ पाया मेरे दिल दिमाग की उथल-पुथल का

गहरा  राज़--तुम रहे शहंसाह मेरे,माथे का सरताज....बदली दुनिया,बदले लोग...बुझ गया उम्मीदों का

संसार---पर मैंने चुपके से अपनी रूह को जोड़ दिया तेरी रूह के साथ,सांसो को निभाने के लिए यही रास्ता

बचा है आज---

Monday, 20 March 2017

तेरी यादो के बवंडर से जो सैलाब निकला है,वो काफी है ताउम्र जीने के लिए---बरस बरस कर जो बरसा

वो तूफान काफी है,पन्नो को भरने के लिए---यू तो हर लम्हा तेरी ही यादो के साथ चलते आए है,पर

जुदाई-खास पे क़यामत की हद तक फफक फफक कर रोये है---लौटना तो तेरा अब मुनासिब ही नहीं

पर तेरी दुनियां मे कब आ जाए,यह बताना तुझे जरुरी है तेरे तसल्लीबख्श होने के लिए---

Sunday, 19 March 2017

रूह ने रूह को पुकारा यू ऐसे..कि यह ज़िन्दगी फ़ना हो गई--जिस्मे-जान नहीं रहे बेशक,पर इबादते-पाक

मे दुआ क़बूल हो गई--- दुनिया की समझ से परे है तेरे मेरे प्यार का यह अनमोल सा रिश्ता---जो टूटा

है मगर खत्म नहीं हुआ अब तक---लोग तेरे मेरे घर को जानते है ईट-पत्थर का एक घर,पर वो एक मंज़र

है रूह से  रूह को मिलाने की जगह---बस इंतज़ार है इन सांसो के टूट जाने का,फिर तो रहना है वही जो

तेरे मेरे प्यार का आशियाना है---
ना तब शिकायत थी,ना आज है--सादगी से भरा  जीवन कल भी था,तो आज भी बरक़रार है---साथ चलने

का वादा कल भी था,साथ जीने की ख्वाइश आज भी है---बरसो बीत गए साथ छूटे हुए,पर तेरे दिए उस

ताजमहल मे रहने का मन तो आज भी है----खनक चूड़ियो की आज भी बजती है कानो मे मेरे,यह बात

और है कि उन चूड़ियो की धरोहर आज भी तेरी तस्वीर के पास मौजूद है--

Wednesday, 15 March 2017

न लगा पहरा मेरी नज़रो पे,यही तो है जो तेरी मुहब्बत को सलाम करती है----तेरे कदम पड़ते है

जहाँ जहाँ,वही शिद्दत से सज़दा करती है---तू दूर रहे कितना भी मुझ से,या खफा भी हो जाए मुझ

से..पलकों के आशियाने मे छिप कर नज़रे चार कर लेती है---यह मुहब्बते-पाक है,जो तेज़ आंधियो

से भी ना रुक पाए गी..यह खुदा का नूर है,जो अपनी इबादत मे  तुझे भी याद करती है----
न छलका आँखों से मदहोशियो के यह ज़ाम,कि दिल बेताबी मे यू ही फिसल जाए गा---तुम हो जाओ गे

मेरे,और बदनामी का रंग मेरे सर पर आ जाए गा---होगा कसूर तेरे इस हुस्न का,पर मेरा इश्क तो

बेमौत मारा जाए गा---लोग दे गे सजा मुझ को,और तू फिर भी अपने ही हुस्न पे इतराये गा---यह इश्क

गुजारिश करता है,तू दूर रह इस आग से..फिर न कहना कि मुहब्बत का दाव तू हारे गा और इश्क यू

ही फ़ना हो जाए गा----




कभी दर्द तो कभी तन्हाई है,फिर क्यों यह ज़िन्दगी बेवजह मुस्कुराई है---आंसू लिए आँखों मे,ज़िन्दगी

की यह शाम ख़ुशी से क्यों हँस पाई  है----लम्हा लम्हा कतरा कतरा चुन रहे है फूल इन वादियो से,कौन

जाने कब कही वो लौट आये ---मन्नतो मे किन्ही खास दुआओ मे,हर बदलते हालात के किनारो मे वो

रात कभी तो आए  गी जिस के लिए यही ज़िन्दगी बार बार मुस्कुराई है----
कभी तो इस ज़मी पे उतर अपने शाही रसूख से परे---कभी तो देख इस दुनिया को अपनी रंगीन दुनिया

से परे---रवायत है इस दुनिया की कभी तो हम से मिलने आ जाओ---न बनो हम जैसे,पर सूरत अपनी

तो दिखाने आ जाओ----गरूर किस बात का है जानम,नकाब मे ही सही पर कभी तो खिंचे चले आओ---

नज़र कोई बुरी जो डाले गा तुम पर,वक़्ती तौर पे तुम को सँभालने आए गे--कभी तो आओ हमारी दुनिया

मे अपनी शोख अदाओ से परे----

Tuesday, 14 March 2017

दिल के इस आंगन मे,दूर दूर तक बहुत ख़ामोशी है लेकिन---प्यार की इंतिहा खत्म नहीं है अब तक---

परिंदो के चहकने की वो प्यारी सी वजह,मखमली बिस्तर पे यादो के पन्नो की वो खामोश सदा---

कुछ कहे या ना कहे,कुदरत के इशारो पे रहने की वजह---यह ज़िन्दगी बहुत ही खामोश है लेकिन,हर

साँस के साथ दुआओ मे रहने की वजह--आज भी कहती है कि इबादत ही इबादत है अब जीने की वजह

Sunday, 12 March 2017

तेरा साथ पाया है जब से,दुन