Wednesday, 16 August 2017

खवाबो को तपिश देने के लिए,तेरा ख्याल ही काफी है....वफ़ा की राह पे चलने के लिए,तेरा नाम ही

काफी है....फासले तो रहे गे ज़िन्दगी भर,किसी मोड़ पे मिल सके यह सोचना ही काफी है....मुखातिब

तो हू तेरी बातो से,गुजरे हर लम्हा तेरे साथ यह गुजारिश करना अब बेमानी है....समंदर की लहरों मे

उतर जाए,इस से बेहतर  है किनारो से गुफ्तगू का नाता जोड़ लिया जाए...यही काफी है....

Monday, 14 August 2017

बराबरी तेरे मेरे रिश्ते की कोई नहीं कर पाए गा......सात फेरो का बंधन है,जन्मो जनम चलता जाए गा

तूने ख़िताब दिया मुझे अपनी ज़िन्दगी के साथ चलने का.....तेरे मेरे प्यार के आगे अब कोई क्या कर

पाए गा....राहे मंज़िलो मे लोग मिलते है,गुफ्तगू के दायरे से बाहर ना चल पाते है.....अदब दिया हर

शख्स को,अपने संस्कारो को ना भूल पाए है...तेरी जगह तो बस तेरी है,इस को समझाने के लिए ना

वक़्त तेरे पास है,ना ही कभी वक़्त निकल पाए गा...

Sunday, 13 August 2017

रूबरू तो नहीं हुए कभी आप से ,कभी होंगे भी तो कब होंगे....किस्मत किसी मोड़ पे क्या करती है

राहे मंज़िलो मे किस को किस से मिलाती है,खवाबो को मंज़िल देने के लिए कभी रूकती है तो कभी

खवाबो को खूबसूरत सा नाम दे जाती है...ठहराव भरा है आप की बातो मे,एक अदब मिला सालो बाद

किसी से पन्नो की किताबो मे....लोगो की नज़र मे हम क्या होंगे,आप की नज़र मे फरिश्ता है इस से

जय्दा और खुशनसीब हम कहाँ होंगे....

Saturday, 12 August 2017

कलम हाथ मे जब भी आती है,अनगिनित अल्फ़ाज़ लिखती जाती है....कभी ज़ज़्बात बिखरते है तो

कभी खुशबु बन के हवाओ मे बिखर जाते है....यू ही रो देती है यह आंखे बरबस,तो कभी इन्ही पन्नो पे

सैलाब छोड़ जाती है...मुस्कुराते है जब याद कर के किन्ही  खुशनुमा लम्हो को,हाथ लिखते है मगर

एहसास भी साथ साथ मुस्कुराते है...सोचते है कभी कभी....कमाल इस कलम का है या अल्फ़ाज़ इस

रूह से निकल कर आते है....
सज गए तेरे लिए इस सादे से लिबास मे....कंगन नहीं,बिंदिया नहीं,पायल की खनक भी साथ नहीं

एक मुस्कान चेहरे पे,चमक आँखों मे प्यार की....जब छुहा तूने मुझे,प्यार के अहसास से...हज़ारो रंग

बिखर गए खामोश भरे अल्फ़ाज़ मे.....समझने के लिए अब कुछ बचा नहीं,बयां कर गए नैना चुपके

से तेरे साथ मे,महकते लम्हो की गुनगुनाती शाम मे...

Friday, 11 August 2017

बेपरवाह बादल ने कहा,चल साथ मेरे....इन्ही झुरमुटों मे छिपा है कही चाँद शायद,आ ढूंढ उसे साथ मेरे...

दुप्पटे की आड़ मे कुछ समझ नहीं पाए,है चाँद किधर यह भी ना जान पाए...बदहवास हालत मे क्या कहे

इस बादल से,मुखातिब हो तो हो कैसे कि डर से बात कही बिगड़ ना जाए....ख़ामोशी से चलते चलते इक

हसीं मोड़ पे बादल ने कहा...इंतज़ार उस चाँद का अब क्या करना कि यह चाँद नया तो आज है पहलू मे

मेरे....

Thursday, 10 August 2017

तेरी चाहत से परे,गर कोई दुनिया होती तो दिल को समझा भी लेते....रंजिशे ना होती जो इस ज़माने मे,तो

हर मुनासिब समझौता भी कर लेते....आँखों से सैलाब बहने देते,मगर राहे मंज़िलो को निभा भी देते...

रिश्तो मे गर खार ना होती,यक़ीनन जान की बाज़ी भी लगा देते....अंगारो पे चलते चलते भी,पाँव तक

बचा लेते....अब आलम है कि ज़ज़्बातो को कुचल दिया है इन्ही पैरो के तले,दिल को बचा लिया है तेरी

ही चाहत मे बस.........रहते रहते...
दुनिया तेरे मेरे घर को मकान कहती है..ईंट पत्थर से बनी एक दुकान समझती है ..... जहा बस रही

ख्वाइशे मेरी,जहा चल रही यह साँसे भी मेरी...हर कोने मे माँ की परछाईया दिखती है...तेरे वज़ूद मे

मेरे वज़ूद का गुमा होता है....टूट के चाहा है तुझे,उस का असर हर जगह मिलता है...कोई माने या ना

माने,तेरी परछाई हु .....सदियों मे पैदा हुई,वही तेरी ही दुल्हन हु...

Tuesday, 8 August 2017

तुझे दिए वादे को निभाने के लिए ....आज भी उतना ही सवरते है जितना मुझे सवारने की ज़िद तेरी

होती थी---हर लम्हा लगू तेरी नवेली सी दुल्हन,नूरानी चेहरे पे ना देखू कही भी थोड़ी सी शिकन --- उस

बात का मान रखने के लिए उसी नूर को बचा रखा है आज भी मैंने---ज़न्नत से कभी जो देखे तू मुझे

तेरी रूह को सकूँ मिले,इस बात का ख्याल रखा है आज भी मैंने---

हवाओ को बहना ही है,समंदर को यूँ ही लहरों से लिपटना ही है----हमेशा की तरह यह चाँद,यह सूरज

निकलते  छिपते भी  रहे गे----कभी भूले से जो तेरा नाम कोई ले दे गा,बरसे गी यह आंखे और दिल रो

दे गा---साल दर साल जीते रहे इस इंतज़ार मे कि किस दिन तेरी रूह बुलाए गी अपने ज़हान मे मुझे

किस्मत की लकीरो मे साथ नहीं रहा फिर भी ज़िंदा है बस यही सोच कर,कि ताउम्र जीने के लिए यहाँ

कोई आता नहीं,तू ना भी बुलाए फिर भी खुदा का फरमान जारी तो होगा कभी----

Sunday, 6 August 2017

आ..नज़र भर देख लू तुम को ,कि तारो की झुरमुट मे फिर गुम हो जाओ गे---भरी आँखों से ढूंढे गे फिर

तुम कब नज़र आओ गे---यह दिल है कि कभी भरता नहीं,रूह को रूह से ज़ोडते जाए गे----बेताबी का

नाम मुहब्बत नहीं,मुहब्बत नाम है विश्वास का---प्यार है हवा का झोका नहीं,सदियों का लम्बा इंतज़ार

है----जिस्म एक दिन फ़ना हो जाए गा,रूह के बंधन को तब कौन तोड़ पाए गा----
वज़ूद मे तेरे आज भी समाए है...तुझे खबर भी नहीं कि तेरे आशियाने मे,तेरे ही इंतज़ार मे पलके

बिछाए तैयार बैठे है....वही रूप,वही रंगत,वही मुस्कान कायम है...तूने लिया जो वादा कभी,निभाने

को आज भी तैयार है....इंतज़ार बेशक लम्बा सही,सदियों से जय्दा क्या होगा....जिस रंग मे  तूने चाहा

उसी रंग मे बस ढल गए...बहुत बहुत दूर तेरे साथ चलने के लिए,हम आज भी तैयार है.....
तारीख मुकर्रर नहीं करते कि खुद से खफा हो जाए गे---दिन तो गुजर जाए गा,पर रातो को जागना भारी

हो जाए गा---तेरी  बेबाक अदा..उफ़ यह  बोलती सी नज़र जुदा..कहते है ए सागर थाम ज़रा अपने सैलाब

की जगह----यह आंखे जो कहर ढाह जाए गी,तेरी गहराई को भी मात दे जाए गी---मांग ना मुझे,मुझ से

इतना कि तारीख मुकर्रर करने के लिए,खुद को तेरी हमनशीं करार कर जाए गे---

Saturday, 29 July 2017

जान कर हमे क्या करो गे----दिल ही टूटे गा और हमे मजबूर सोचो गे----ज़िन्दगी कहाँ रूकती है सज़ाए

देने से,हर मोड़ पे दबोच ही लेती है----रेत के महल बनते है और अक्सर टूट जाया करते है,नम आँखों से

बिखरते देखा करते है----मुस्कुराहट आज भी दुनिया का दिल जीत लेती है,आँखों की शोख़िया दिल पे

बिजलियाँ आज भी गिरा जाती है---वल्लाह,यह ज़िन्दगी आदत से अपनी ना बाज़ आती है,और हम है

कि इस के नाज़ उठाते नहीं बस शिद्दत से मात देते रहते है-----

Thursday, 27 July 2017

ज़ज़्बातो मे पिघलते हुए अल्फ़ाज़ तेरे,दामन से लिपटे तेरे बेखबर अंदाज़ मेरे----यूँ तो मुहब्बत तेरी

बेवफा नहीं,मेरी रूह की ताकत से जयदा कही खिदमते-वफ़ा है मेरी---जन्म बार बार लेते रहे,तुझी से

तुझ को पाने के लिए---कभी रोशन हुए,कभी तन्हा रहे.. कभी यूँ ही तुझे बस निहारते ही रहे---पाक

मुहब्बत के मायने तुझे समझा जाए गे,सितारों मे कही दूर किसी रोज़ छिप जाए गे---तेरी नज़रो मे

अपना अक्स ढूंढे गे,अल्फ़ाज़ तो फिर भी पिघले गे..मगर दामन मे तेरे नज़र नहीं आए गे----
ना छेड़ तार मेरे दिल के,मेरी मुहब्बत का गुलाम हो जाए गा---ना कर गुमान अपनी पहचान पे,मेरे

मोहपाश मे बंध कर तू खुद को ही भूल जाए गा---लौटना मुमकिन नहीं पास तेरे ----यह कहना तेरा

बेकार है----कुछ इबादत मेरी,कुछ चाहत मेरी .. पलकों की चिलमन मे यह आंखे भरी हुई मुहब्बत

मे तेरी----शायद काफी है तुझे पास मेरे लौट आने के लिए---फिर ना कहना कभी कि लौटना अब

मुमकिन नहीं-----

Wednesday, 26 July 2017

ना लगाओ काजल कि यह रात गहरा जाए गी ---ना बिखराओ  गेसू कि रात शर्म से मर ही जाए गी ----

दुप्पट्टा लहराओ ना हवा मे इतना कि हवाएं रुख बदलना भूल जाए गी---ना मुस्कुराओ अब इतना यह

परियां कही की ना रह जाए गी---इतनी नज़ाकत से जो धर रही हो पाँव ज़मी पे इतना,होगा आसमां को

झुकना और यह ज़मी----यह ज़मी तो आप के कदमो मे कुर्बान हो जाए गी----
कुछ तो बोलिये मेहरबाँ मेरे,राज़ दिल के खोल दीजिये---क्यों खामोश है इतने,ज़रा ज़ुबाँ को गुफ़तगू तो

करने दीजिये----गुजर जाता है वक़्त अक्सर यूँ ही,खामोशियो मे रहते रहते---दिल जुदा हो जाते है बस

अहसासों को दबाते दबाते----नाम तुम ना ले सके,हम पर्दा-नशी क्यों रह गए---मंज़िले हो जाए गी अब

जुदा,सैलाब रुक ना पाए गे---कर दीजिये ऐलान अब प्यार का,रिश्ते को खास नाम अब दे दीजिये---

Friday, 14 July 2017

कहानी ज़िन्दगी की लिखते लिखते हज़ारो पन्ने भर दिए----हिसाब माँगा जब इसी ज़िन्दगी ने हम से

खामोश क्यों यह लफ्ज़ हो गए---टूटन भरी जब इस जिस्म मे,अश्क भी जिस्म से हिसाब मांगने लगे

लम्हा लम्हा कतरे बहे और वज़ूद से टकरा गए---कल हम रहे या ना रहे,निशाँ कुछ ऐसे छोड़ जाये गे

खुले गी परते अतीत की और हम हवाओ मे कही दूर गुम हो जाये गे ---

Wednesday, 5 July 2017

बहुत चाहा ज़ख्मो को ज़ख़्म ही रहने दे,नासूर ना बनने पाए---अश्को को आखो मे ही पी जाए,बाहर

फिसलने ना दे---चाही बस थोड़ी सी ख़ुशी,थोड़ी सी हसी और जीने के लिए ज़िन्दगी रहे इबादत से

भरी---पर हम करते रहे इबादत,कि कही दिल का  गुबार जहाँ मे तबाही ना ला दे---तोड़ने वालो को

अब खुदा हाफिज,कि अब मकसद बदल चूका जीने के लिए--टुटा है यह गुबार और अश्क......यह तो

अब निकल चुके राहे-तबाही की तरफ----

Tuesday, 4 July 2017

ज़ुबाँ  के मासूम तारो पे,कभी लफ्ज़ सिखाए थे ओस की महकती बूंदो की तरह---अल्फ़ाज़ लिखाए

थे हमेशा किसी मंदिर की पूजा की तरह---पनाहो मे अपनी रखा था हमेशा दुनिया की नज़रो से दूर

कुरान नहीं,गीता नहीं,वाहेगुरु और तमाम धर्मो की बाते,फूलो की तरह बरसाई थी हर रोज़---अंदर

तो मेरे आज भी बसा है उन का धयान,कि साँसे जब भी जाए गी तो गिला नहीं होगा कि कभी छोड़ा

नहीं खुदा,भगवान और वाहेगुरु का नाम---
प्यार तो इक  नियामत है,कुदरत का इक तोहफा हे ---दौलत के नशे मे,रुतबे  को हासिल करने के

ज़नून मे अक्सर प्यार को खो देते है लोग---वो दिल जो कभी धड़कते थे दुआओ के साथ,जो लेते थे

सांस बस इबादत के साथ---अब तो समझने के लिए ज़िन्दगी जा रही है,किसी और ही मकसद की

तरफ---जहा दुआए तो रहे गी,पर अब हज़ारो मासूम ज़िन्दगियों की तरफ ..

Sunday, 2 July 2017

कहते है खुदा जिस को,भगवान का रूप है..कही मस्जिद कभी मंदिर कभी गुरूद्वारे मे तो कभी चर्च की

जगह पूजते है लोग...मन्नंते इस विश्वास से मांगते है लोग,यकीं होता है तभी तो सर झुकाते है लोग

जब लगे कि अब रास्ता  हो गया इतना कठिन,यकीं किसी पे ना करना इस दुनिया मे...कि कदम कदम

पे दे रही यह दुनिया दगा...जब भी झुक गए हम तेरे सज़दे मे,तूने निकाला हर मुसीबत,हर परेशानी से

मुझे...आज दे रही शुक्राना तुम्हे...मै अकेली कहाँ,मेरी ताकत बने तुम बैठे हो मेरे ही अंदर कही..
खलल न डाल मेरी इबादत मे,तुझे मेरे रब दा वास्ता है---ख़ामोशी से सही पर रब से मुझे मांग ले

तुझे मेरी चाहत का वास्ता है----कभी ना किया इज़हारे-मुहब्बत कि दिल की धड़कनो ने कहा,रह जा

खामोश तुझे तेरे वज़ूद दा वास्ता है---बस खिल गए तुझे देख कर,सज़दे किये तेरे कदमो की चाप पर

अब तो मेरी इबादत मे तू खुद को शामिल कर ले,तुझे मेरे रब दा वास्ता है---

Saturday, 1 July 2017

कभी जो दे गई यह ज़िन्दगी दगा,दामन मे तो तेरे लौट आये गे---बहुत कुछ बहुत कुछ है बताने के

लिए,क्या छिपाए गे और क्या बोल पाए गे---बहुत दर्द मिला अपनों से यहाँ,बेगानो को क्या इलज़ाम

दे पाए गे---तुम होते साथ तो इल्ज़ामो के घेरे मे ना घिरे होते---इक शंहशाह की मुमताज़ बने, अपने

ताजमहल की रौनक होते--सितारों से भरा होता आज दामन हमारा,तेरी आगोश मे कही दूर बहुत दूर

ज़न्नत की सैर पे निकल जाते ----
जीवन के हर मोड़ पे,उम्र के हर दौर मे...माँ..तुम साथ थी मेरे,तेरे हर अहसास से साँसे चलती  रही मेरी

तुम ने जो चाहा,मैंने दिया तुम को...पर तेरा साथ फिर भी ना मिल सका मुझ को...जननी नहीं तुम मेरी

पर ख़िताब तो माँ का मैंने हमेशा दिया तुम को....रोई बेतहाशा जब जब रातो मे,क्यों तेरा अहसास सर

पे महसूस किया मैंने....कोई नहीं,कोई भी नहीं समझे गा तेरे एहसास की हकीकत को...पर माँ,मेरे लिए

तो है तेरी दुआओ का आँचल हमेशा से  भरा....नमन है तेरे प्यार को,नमन तेरे एहसास को....
भीगे गे जो बारिश मे,तुझे भी साथ ले डूबे गे --- बहकते कदमो की चाप मे,तेरे कदमो को भी भिगो

डाले गे----रफ्ता रफ्ता यह मुहब्बत परवान होगी,कही यह किस्मत कभी मुझ पे तो कभी तुझ पे

मेहरबान होगी ----टूट के चाह मुझे इतना,बारिश भी ना बरसी हो कभी इतना----सैलाब आते है चले

भी जाते है,पर तेरी मेरी मुहब्बत का यह सैलाब आये इतना कि आखिरी सांस तक हमारी मुहब्बत

इस मे डूब जाये इतना---
बरस गया यह मौसम तेरे भीगे आँचल की तरह....हवा जो चली यह सरक गया किसी नाज़नीन की

हसी की तरह.....देखा जो उन्हें तो बिखर गए, किसी मखमली  दुपट्टे की तरह....छुआ जो गेसुओं को

तो निखर गए किसी आईने की तरह...यह प्यार है या इसी मौसम का असर,कि भीगे है बारिश की उन

फुआरों मे,पर सांसे गर्म है पारे की तपिश की तरह....

Friday, 30 June 2017

कही बदली राहे तो कही वक़्त ही बदल गया...रेत पे पाँव धरते धरते,रेत का वो निशाँ ही बदल गया...

परिंदो की आवाज़ मे सुबह का माहौल ही बदल गया...कुछ चेहरे अनजाने से,कुछ कुछ पहचाने से ....

हालत जो बदले सब बदल गया.....टुकड़े टुकड़े ज़िन्दगी के इकठ्ठा करते करते,उम्र का दौर भी बदला

और साज़िशों के अल्फ़ाज़ बदल गए...कुछ कहती है यह धडकन,सुनने के लिए अब तो यह ज़माना

भी बदल गया....

Saturday, 24 June 2017

आज खुद से बगावत कर रहे है--क्यों ताउम्र ज़ज़्बातो के महल बनाते रहे,बनाते रहे---दुनिया की बुरी

नज़रो से,अपना आशियाना बचाते रहे,बचाते रहे---कोई साथ चले न चले मेरे,बेखोफ हर राह को मंज़िल

तक पहुंचाते रहे,पहुंचाते रहे---आज खुद से ही शिकायत है इतनी कि क्यों इतनी ख़ामोशी से दिल की

तड़प को छुपाते रहे--यह दुनिया ही रास नहीं आई हम को,बची ज़िन्दगी को निभाने के लिए इन साँसों

को क्यों ज़िंदा रखा है--खुदा के पास अब जाने के लिए,ज़ज़्बातो के यह महल बना रहे है,सिर्फ अपने

इस खुदा के है लिए---
हा...आज भी आयात अधूरी है मेरी..तेरे बगैर पूरी कहा होगी यह ज़िन्दगी भी मेरी---रुख़्सत किया तो

क्या हुआ,दिल के शामियाने मे आज भी तस्वीर लगी है तेरी--ज़ुल्फो के घनेरे साये मे,तेरी उगंलियो की

हरकत सरसराहट देती है आज भी--लिखते लिखते कही क्यों बिखरते है लफ्ज़,मेरी किताब की किसी

एक उभरती नज़्म पे तेरी---मुस्कुरा दिए फिर ज़माने की हरकतों पे आज,कि खुदा को जवाब देने के

लिए सांसे तो ज़िंदा चल रही है अभी मेरी---
पलक झपकते है तो क्यों यह पलक भर आती है---हर उस याद को साथ क्यों लाती है,जो रूह को टीस

दे जाती है--जो किया उस को अब भूल जाना चाहते है,रेत के ढेर मे सब दफ़न कर देना चाहते है--लफ्ज़

तब बेज़ुबान हो जाते है,जब टूट टूट कर पत्थर बन जाते है---बस यही से सकून का वो दौर शुरू हो जाता

है,जिस के लिए ताउम्र इंतज़ार पे इंतज़ार करते है---अब आलम है कि दर्द को कुचल चुके है इन्ही पैरो के

तले,जिन्हो ने बिखेरा उन्ही को छोड़ चुके है राहे-सफर मे अजनबी कर के--

Tuesday, 20 June 2017

दोस्तों---मेरी शायरी के हर रूप को पसंद करने का बहुत बहुत शुक्रिया..दुःख दर्द मे डूबी हुई या प्यार के धागो मे लिपटी ... फिर चाहे विरह की वेदना हो या रूहो के प्यार की दास्ताँ ... शायरी वही जो आप के दिलो को रुला दे और कभी प्यार के लम्हो से आप के दिलो मे एक अहसास पैदा कर दे---शुक्रिया आप सभी का,मुझे इतना मान सम्मान और प्यार देने के लिए...शुभ कामनाये ...
चलते चलते.. बार बार सवाल करती है यह ज़िन्दगी...कभी ज़लज़ले कभी हसरते तो कभी हर पल का

हिसाब मांग लेती है यह ज़िन्दगी--सबर  की इंतिहा  तक ले जा कर,किसी खामोश मोड़ पर फेक देती

है ये ज़िन्दगी---थोड़ी सी ख़ुशी दे कर,हज़ारो आंसुओ से भिगो देती है यह ज़िन्दगी---हर पल आगे

जाने की रफ़्तार को,एक ही झटके मे तबाह कर जाती है यही ज़िन्दगी---फिर भी साँसों की डोर को

बांधे हुए,जीने पे मज़बूर कर रही यह ज़िन्दगी--यह ज़िन्दगी----
अल्फ़ाज़...अल्फ़ाज़ और अल्फ़ाज़...हज़ारो पन्ने भर दिए इन्ही अल्फाज़ो से हम ने---बरसो बाद भी

तेरी जुदाई के एहसास को, न भर सके  यही पन्ने---जिस्म तो मिट ही जाया करते है,रूह तो आज़ाद

हो कर भी आज़ाद नहीं होती--मुझ से मिलने की खातिर तेरी रूह का यही तोहफा,आज भी साथ है

मेरे--दुनिया कहती रहे बेशक दीवाना मुझ को,तेरी मेरी इसी गुफ्तगू को पन्नो मे इस कदर भर दिया

हम ने कि पुश्त दर पुश्त रूहो के प्यार को इन्ही पन्नो मे पढ़ती जाए गी---

Monday, 19 June 2017

इस भोली मुस्कान मे,मुझे तेरी वो मुस्कान याद आती है--मेरा छिपना और तेरा मुझे ढूंढ़ना,वो प्यारे

लम्हे याद आ जाते है--जो बीत गया वो भूलना आसान नहीं मेरे लिए,कि पल पल तुझे बाहों मे झुलाना

यादो का सैलाब बन के याद आ जाता है--मै जब नहीं रहू गी तब भी साथ अपने, तेरी तमाम यादो को ले

जाऊ गी---तब तू मेरा होगा,यही सोच कर रूह को सकून से तर कर पाऊ गी---जनम कभी नहीं लेना

फिर इस दुनिया मे,कि यहाँ जुदा होने के बाद जीना दुश्वार हो जाता है--- 
अपना था कभी जो,आज बेगाना सा लगता है--छूना भी चाहे उसे,तो किसी और की अमानत लगता है---

मिलने के लम्हे होते है इतने छोटे,कि ज़ी भर देख ले उस को...तो यह भी किसी सपने जैसा लगता है---

रोते है बहुत उस को याद कर के,पर उस का जहाँ आबाद रहे..यह सोच कर दिल को पत्थर कर लेते है

यह तड़प रहे गी यू ही ज़िन्दगी भर,कि वो रिश्ता जो जनून सा था..आज इक ख़्वाब जैसा ही लगता है--

Sunday, 18 June 2017

दोस्तों-------सपने और उम्मीदें...सब के लिए इस  के मायने अपने अपने है--सपने देखने की कोई उम्र नहीं होती--और ज़रूरी नहीं कि हर सपना ढेर सारे पैसो की ज़रूरत को साथ  मे लिए हो--एक आत्म-विश्वास और हौसला--साथ मे इस ज़माने से लड़ने की ताकत--दोस्तों---आप कुछ करे गे तब भी,नहीं करे गे तब भी..लोग आप के बारे मे बाते ज़रूर करे गे--क्यों कि शायद यह उन की फितरत है--अपने सपने को पूरा करने के लिए खूब मेहनत करे--और इस विश्वास के साथ कि भगवान आप का सपना पूरा करे गे--और वही लोग जो आज आप को पहचानते नहीं,वही सब आप की कामयाबी के जश्न पे बिना बुलाये आप के पास आये गे---दोस्तों,यह ज़िन्दगी कदम कदम पर हमारा इम्तिहान लेती है--असफलता मिले तो रोये नहीं,क्यों कि बुलंदियों पर पहुंचने के लिए यह ज़िन्दगी आप से मेहनत और हौसले का हिसाब लेती रहती है--सोने से पहले भगवान का शुक्रिया अदा करे और अपने जीवन की उपलब्धि पर गौर कीजिये--शुभ रात्रि दोस्तों...

Monday, 12 June 2017

जुस्तजू तो नहीं तेरी,फिर क्यों तेरा इंतज़ार करते है---खयालो मे दूर दूर तक कही भी नहीं मगर,क्यों

रातो की नींद हराम करते है---चाँद को निहारते निहारते अक्सर क्यों तारो की चमक मे खो जाते है

बेवजह ही तन्हा है..बेवजह ही रो पड़ते है--बेकरारी के आलम मे क्यों बदहवास हो जाते है----ढूंढ रहे

है इस की वजह,दिल से कहते है अब दे गवाही कि हम मुंतज़र है उस की मुहब्बत के या अपने आप से

कोई साज़िश करते है--- 

Wednesday, 7 June 2017

महफ़िल सजी है आज कद्रदानों के साथ..हज़ारो चाहने वाले हमे सलाम बजा रहे है आज---कहने के

लिए यू तो बहुत सवरे है आज..घुँघरू की आवाज़ मे कौन सुन पा रहा  है मेरी धडकनों की फरियाद---

यह तो इक बाजार है बाशिंदो की हर ताल के साथ..जहा बिकती है रुहे हर तड़पती सांस के साथ---

इंतज़ार करते है किसी उस मसीहा का,जो करे गा आज़ाद इस महफ़िल से आज---
ना रहो इतने तन्हा कि ज़िन्दगी बहुत खूबसूरत है---पलट कर ना देखो पीछे कि राहे-गुजर बहुत ही

मुश्किल है--नियामतों को जो देखो गे तो यक़ीनन इस ज़िन्दगी से प्यार हो जाए गा---इंसा हो कोई

खुदा नहीं कि हर काम तुम्हारे हिसाब से होता जाए गा---आंसू तो इक वजह है,खुद को कमज़ोर कहने

की सजा---चल थाम ले हाथ किसी मासूम का और दिला अहसास उसे कि ज़िन्दगी खुदा की इक
  रहमत

है---

Saturday, 3 June 2017

वो तेरी सलीके से बोलने की अदा,हम तो तेरे कायल हो गए---अदब से हर गुफ्तगू पे दिल जीत लेने की

वो वफ़ा,यक़ीनन तेरे सज़दे मे हम तो झुक गए---तेरे कदमो की आहट मे किसी फ़रिश्ते के आने का

अहसास होने लगता है----तू जो रुक जाये तो लगे ऐसा हवा ने खुद को जैसे रोका है---तेरे चेहरे के नूर

से अक्सर चाँद के दिखने की खबर लगती है--तू शायद इस दुनिया की नहीं,कि यह दुनिया तो अपमान

के लफ्ज़ो से बनीं एक मुसीबत लगती है----
इतनी ख़ामोशी क्यों है तेरे दिल की धड़कनो मे आज----शोला बनी दहकती हुई वो शमा क्यों उदास

है आज---चेहरे की रंगत को क्या फूलो ने चुराया है आज---इतनी गुमसुम ना बनो कि बहारो को लाज

आने लगी है आज----तेरी  शोख  अदाओ से ना जाने कितनी ज़िंदगिया होती रही है आबाद ---कोई ज़ी

गया तेरे लबो की मुस्कान के साथ---अब तो ख़ामोशी तोड़ दे ..कही ऐसा ना हो जीते जीते कोई दम ही

तोड़ गया हो आज-----

Thursday, 1 June 2017

मौसम क्यों बरस रहा है आज...क्या तेरे गेसुओं ने इन्हे खुलने की खबर भेजी है----बादल रह रह कर

दे रहे है आवाज़े, बांध ले इस ज़ुल्फो को अब कि कहर की सीमा अब हद से गुज़री है---यूं तो निहारती

है यह दुनिया तुझे तेरे हुसन के चर्चो से,अब सारे जहाँ को यूं भिगो के क्यों मार देने पे उतरी है---धरती

पे भर रहा है सैलाब इतना.. जानम  अब तो मान ले कहना कि इसी धरती ने तुझे इस जहाँ मे उतारा है 
तेरे जिस्म से मुझे क्यों फूलो की महक आती है--तू परी तो नहीं फिर क्यों मुझे शहज़ादी नज़र आती है

तेरी गुफ्तगू मे खुदा का नूर बरसता है--तू चलती है तो यह संसार जैसे तेरे कदमो मे सज़दा करता है--

तुझे छूने के लिए ज़मीर की सदा सुनता हू,कही भूल से तुझे ज़ख़्म न दे जाऊ इस बात को ज़ेहन मे हर

पल रखता हू----मासूम है तू इतनी कि तुझे देखता हू तो ओस की बूंदो की नमी याद आ जाती है---
पलकों के शामियाने मे,तेरी मासूम सी वो कजरारी  आंखे---इसी शामियाने के हटते ही,क्या कह गई

तेरी यह बोलती आंखे----बहुत सवाल करती है तेरी भोली आंखे,फिर उन्ही सवालो के जवाब मुझ से

पूछती है तेरी यही चुलबुली आंखे---कितनी ही ग़ज़ल लिख दू तेरे हुसन और तेरे नूरानी चेहरे पे,पर

फिर भी मेरी नज़र क्यों आ कर ठहर जाती है तेरी इन्ही कजरारी से आँखों पे---

Wednesday, 31 May 2017

इरादे अगर मज़बूत हो और भावना साफ़ हो तो हर उम्र मे हर मुश्किल पर जीत हासिल की जा सकती है...और संघर्ष से हर जंग जीती जा सकती है---ज़िन्दगी हर मोड़ पे आप का इम्तिहान लेती रहती है---भगवान पे विश्वास रखे...वो हमेशा आप के साथ थे,है और रहे गे---शुभ प्रभात दोस्तों..शुभ कामनाएं---

Tuesday, 30 May 2017

तेरे शहर का मौसम अच्छा है बहुत ,पर मुझे उन हवाओ से डर लगता है---तेरे जीवन की खुशियों मे

शामिल हो जाए मगर, अपनी किस्मत से ही डर लगता है----कहते है कुछ मगर सुना जाता है कुछ

और,इतनी बदनसीबी से खौफ लगता है---लोग कहते है हमारी दुआओ मे बहुत ताकत है,खुदा का नूर

हम मे बसता है--दुआ के लिए जब भी हाथ उठाते है, अब तो अपने ही साए से बहुत डर लगता है----

पायल की खनक को सुनने के लिए वो बहुत दूर से आए है---हमे नज़र न लगे किसी की,काले टीके से

सजाने आए है---इस बुरी दुनिया मे जहा जीने के लिए,इज़ाज़त नहीं मिलती सासो को लेने की--वही

एक तुम हो जो आसमां मे उड़ाने की खवाइश देने आए हो----बरसो बाद छूटे है गुलामी की ज़ंजीरो से

खुली हवाओ मे अब रहना है तुम को,इस बात का अहसास दिलाने वो बहुत दूर से आए है----

Monday, 29 May 2017

एक ख़ामोशी मेरी.. कह रही हज़ारो लफ्ज़ो के ताने-बाने मगर--समझने के लिए आज कोई शख्स कही

भी तो नहीं---ले लिया इन पन्नो का सहारा मगर--इन को पढ़  पाना भी अब किसी के लिए जरुरी ही

नहीं---कोई लफ्ज़ कहता है कहानी मेरी ज़िन्दगी के सुनहरे खवाबो की...तो कही छलका जाता है आंसू

झरनो की तरह बहते पानी की---मासूमियत आज भी है दिल के हर कोने मे..लेकिन उन खवाबो की

तामील करने के लिए आज कही कोई भी तो नहीं----

Wednesday, 24 May 2017

यूँ ही हसी हसी मे..इक कदम बढ़ाया हम ने तो दूजा तुम ने बढ़ा दिया---हसरतो का संसार फिर कहाँ

रुका,ज़िन्दगी भर के लिए साथ तुम ने मांग लिया--वो मुलाकात छोटी सी,आँखों पे लाज बस ठहरी सी

हाथ थामा जो तुम ने,हम ने चेहरा झुका दिया---पलट कर देखते किस को,दुनिया की रंजिशों से दिल

कब से बेगाना सा हो गया---पलके झुकाई जो हम ने,तेरे होठो ने मोहर लगा कर दुल्हन हम्हे बना दिया

Monday, 15 May 2017

चुभन उन गहरे ज़ख्मो की,दिल को आज भी तार तार कर जाती है--भरने लगे है घाव लेकिन,पर टीस

फिर भी अक्सर चली आती है---हौले हौले यह दर्द जब कम होता है,यक़ीनन काम के बोझ से जीवन

का सफर फिर आगे चलता है---साँसे है कायम जब तल्क़..धड़कने बज रही है जो आज तक...हर बात

इन्ही कागज़ो पे लिखते जाए गे--नसीहते माँ की ज़ेहन मे रख कर,ज़िन्दगी के आर पार हो जाए गे---
शुभ परभात दोस्तों ...हिम्मत कभी मत हारना..जिस दिन आप टूट जाये गे,यह दुनिया आप को दबोच ले गी..

Saturday, 13 May 2017

जन्म नहीं दिया मुझे,पर तुझी को माँ कहती हूँ...सांसो का साथ भले ही कम रहा लेकिन,तेरी हर

नसीहत को आज भी पल्लू से बाँधे रखती हूँ...जब जब दुनिया की बातो से दुखी हुआ है मन मेरा,तुझ

से मिलने तेरे उसी घर मे चली आती हूँ...यह दुनिया क्या जाने कि आज भी तेरा वज़ूद उस घर के हर

कोने मे मिलता है...माँ..तेरे बताए हर राज़ को मैंने आज भी अपने सीने मे दफ़न रखा है...प्यार कैसा

होता है,नहीं जानती लेकिन आज भी तुझे नमन करने के लिए तेरे ही घर आना होता है...

Tuesday, 9 May 2017

भीगे भीगे गेसुओं मे..वो भीगा सा चेहरा---पलकों  की नमी पे रुका हुआ बस एक ओस का पहरा---

नरम लबो पे नाम सिर्फ तेरा ही लेने की यह ज़िद्द---मखमली बिछौने पे जनम तेरे संग गुजारने की

वो हलकी सी खलिश---पाँव की पायल को रोकते है अक्सर बजने के लिए..कंगन को छुपाते है आंचल

के तले--हा यारा...यही मुहब्बत है कभी तेरी बाहो मे सिमटने के लिए तो कभी मेरे आंचल मे लिपटने

के लिए----

Sunday, 7 May 2017

कलम हाथ मे  उठाते है जब जब,हज़ारो लफ्ज़ इन पन्नो पे उतर जाते है----कभी दर्द की इंतिहा के साथ

तो कभी आंसुओ से इन्हे भिगो जाते है----यादो को जब भी उतारा है लफ्ज़ो की अदायगी के साथ,कभी

मुस्कुराये है तो कभी शर्म से लाल हो जाते है----वो मखमली दुपट्टे मे हमारा हसीं चेहरा और सफ़ेद

कुर्ते मे तेरी गज़ब सी हसी का पहरा----उस लाज़वाब कहानी पे कितने भी लफ्ज़ो को उतारे,कम लगता

है----इश्क़ और हुसन की दास्ता पे आज भी मर जाए तो कम लगता है -----



Saturday, 6 May 2017

ना तोड़ बंदिशे ज़माने की,कि यह हर दम जगा रहता है---पाक मुहब्बत पे भी गलत नज़र रखता है--

आँखों मे उठते है जो पैमाने प्यार के,उन्हें हवस का नाम देता है--हाथ जो उठते है दुआओ के लिए

उन मे भी कुछ गलत पा लेने की खवाइश समझ लेता है---खुद करता है उसूलो का खून,इश्क के झुकते

कदमो को जवानी का नशा मान लेता है---पाक मुहब्बत के मायने जो जाने होते,दुनिया मे खूबसूरती

का इल्म जरूर समझा होता---
फिर वही ज़लज़ले,फिर वही धुआँ धुआँ---कह रही यह ज़िन्दगी वक़्त का कहर है रूआ रूआ ---दिन

हुआ राते ढली ग़ुरबत मे बनी यह किस्मत हो गई खुद से बेवफा बेवफा---राज़ खोले दर्द ने,आंखे बनी

उस की गवाह..चुप रहू या बोल दू...आसमाँ से चाँद ने की इल्तिज़ा ना हारना कि अब भी इन साँसों मे

है रौशनी की फैली हुई इक अधूरी सी दास्ताँ---

Tuesday, 2 May 2017

खामोशिया बहुत चुपके से गुफ़तगू कर जाती है----सरगोशियां हलके से दिल को हिला जाती है---लब

थरथराए इस से पहले मुहब्बत इशारो को जान जाती है---खुले गेसू जब तल्क़ यह रात गहरा जाती है--

इम्तिहान ना ले मेरी वफाओ के इतने कि साँसे कभी कभी यूं ही दम तोड़ जाती है---कलाइयों की यह

चूड़िया सजने के लिए बहुत बेताब होती है---तू माने या ना माने प्यार की यह इल्तज़ा कभी कभी मंज़ूर

भी हो जाती है---
हर बात पे गर रो दे गे तो इस जीवन को कैसे ज़ी पाए गे--तेरे साथ देखे उन सपनो को पूरा कैसे कर

पाए गे--कभी कभी जब यह ज़िन्दगी करती है दिल्लगी,तो दिल को लगाने की बजाय हिम्मत को साथ

बांध लेते है---पन्नो पे होती है यादे तेरी,और सपनो को पूरा करने का वादा मजबूती से याद करते है---

यह दम तो तभी निकले गा,जब सपनो की  हकीकत होगी सामने तेरे और यह ज़माना भौंचक्का सा रह

जाए गा----

Sunday, 30 April 2017

आवाज़ जो आई सीने से मेरे,लगा कि सब टूट ही गया---घबरा के जो खोली आंखे तो इक मासूम नज़ारा

दिल को कौंध गया---मुस्कुरा दिए उस भोली अदा पे हम,मिट गए उन नन्हे कदमो पे हम---दुआओ से

भर दिया आँचल उस का,ना लगे नज़र किसी की उसे सीने मे ही बसा लिया---खुशियों से भरा रहे दामन

तेरा,अपनी उम्र का हर लम्हा आज तेरे ही नाम कर दिया----

Saturday, 29 April 2017

तुझे देखे या फिर प्यार करे---तेरी मासूमियत पे मर जाए या दुआओ मे अपनी तुझे शामिल कर ले--

तेरे हर कदम पे,तेरी राह मे फूल बिछाए या इबादत के पन्नो मे तेरा सज़दा कर ले---कशमकश मे है

दीवानो की तरह खुद से बेगाने से है,शायद तेरे लिए खुद से अनजाने से है---चाँद को कहे छुपने के लिए

या तुझे अपनी आगोश मे भर ले,या रात भर तेरी नज़र उतारे और तुझे रूह अपनी मे शामिल कर ले-----
हर बात को कहने के लिए,जरुरी तो नहीं कि लफ्ज़ो मे उसे ढाला जाए---समझो जो इशारो को कभी

फिर बात करने के लिए तुम से मुखातिब क्यों हुआ जाए--गर्म सांसो की नमी को जो सीने मे छुपा लो

तो आगोश मे सिमटने के लिए क्यों कहा जाए---गेसुओं को बिखेरा है चांदनी के उजाले मे ऐसे कि तेरी

बाहो मे आने के लिए अँधेरे का इंतज़ार करना  ही क्यों पड़े---

Friday, 28 April 2017

खुला आसमां भी है,परिंदो के चहकने की इक वजह भी है---यह सुबह खुदा की नियामतों से भरी इक

दुआ ही तो है---यह ख़ामोशी,यह लय मे बहती हवा..कुछ न कह कर बहुत कुछ कहती भी तो है---तू

सुन ज़रा,पलट कर देख तो ज़रा कि ऐसी ख़ामोशी मे प्यार की इक रज़ा भी है---चल कर आए थे बहुत

दूर से हम,दामन मे चाहा प्यार तेरा,इस सुबह का इरादा कुछ ऐसा भी तो है---

Thursday, 27 April 2017

समंदर के पानी की तरह,यह ज़िन्दगी भी बस बहती रही.बहती रही--कभी टकराई काँटों से तो कभी

पत्थरो से चोट खाती रही--संभल संभल कर भी चले तो भी गुनाहो के दाग लगाती रही--मुस्कुराये जो

सब भूल के तो भी दामन को दागदार करती रही..करती रही--बहना ही जब था मंज़िल की तरफ,तो

दागो का हिसाब भूलना ही पड़ा--वाह री ज़िन्दगी,तेरी नादाँ भूलो को नज़रअंदाज़ कर के...आज अपनी

मंज़िल को पाने की खवाइश बस कामयाब होने को लगी..होने को लगी---

Monday, 17 April 2017

तन्हाईयाँ रास नहीं आई हम को...घुटन ने दबोचा और खामोशिया टकरा गई---तेरी तलाश मे जो

निकले,खुली वादियां मुखातिब हो गई---सिर्फ तेरे अहसास से सांसे खुलने लगी,गेसुओं को जो खोला

घटाएं बरसने लगी---सूखे होठो मे नमी क्यों आने लगी,चेहरा जो छुआ मखमली चादर जैसे बुलाने

लगी---मिलते मिलते आखिर मिल ही जाओ गे,आए है तन्हाइयो को मिटाने के लिए..हुआ ऐसा क्यों

की ज़िन्दगी ज़िन्दगी से बस टकरा गई---

Saturday, 15 April 2017

हज़ारो हाथ उठते है दुआ के लिए...इंसान मुक्कमल  होता है---दौलत से नहीं,शोहरत से भी नहीं...आँखों

की नमी से ज़िंदगियाँ रोशन होती है---कुछ रिश्तो के कुछ भी नाम नहीं होते लेकिन,वो ज़िन्दगी को

सकून देते है---दिल जहा रहे ख़ुशी से भरा,रूह इत्मीनान से हवा लेती है---ज़िन्दगी नाम तो है बस जीने

का,रंक रहे या कोई राजा बने---किस्मत की लकीरो के जो साथ चले,वही इंसान मुक्कमल होता है----

Thursday, 13 April 2017

हर सांस मे मेरी,एहसास अपना दिलाने के लिए शुक्रिया मेरे हमदम----पूजा के हर पल मे,साथ मेरा देने

के लिए शुक्रिया मेरे साजन----नमन करते है तुझे,ना याद आ अब इतना कि आंखे नम ना कर बैठे---

यह दिन तो तेरा है और मेरा भी,तेरे लिए ही सजने का सवरने का---मिलन के दिन मेरे पास आने के

लिए,मेरा मान रखने के लिए....शुक्रिया मेरे हमदम----
मेरे जिस्म से फूलो की महक आती है,जब तेरी रूह मेरी रूह मे समां जाती है---प्यार के धागो मे तेरे

इश्क की रज़ा होती है,तभी तो मेरे हुस्न पे नूर की चमक होती है---लोग मुझे शहज़ादी का ख़िताब देते

है,नहीं जानते कि मेरे हुस्न की चर्चा तेरी बदौलत ही होती है---बांध के रखना मेरे रूप की चांदनी को

कि तेरे बगैर मेरी हर शाम जुदा होती है----





Wednesday, 12 April 2017

ज़मी पे पाँव धरे या आसमाँ मे कही खो जाए---तेरी मौजूदगी के एहसास भर से ही,हम सुबह से ही है

महके महके..फूलो से खिले----क्या लेना क्या देना इस दुनिया से,महफूज़ है तेरे ही साथ..तेरे रिश्ते के

तले---तेरी यह दुल्हन आज भी वैसी ही है..सब कुछ वैसा ही है...सब कुछ बदला भी है----तेरी ही रूह मे

आज भी वैसे ही समाए है..बदला है तो इस दुनिया का रूप...जो ऊपर से कुछ और तो अंदर से हम्हे पूरी

तरह बर्बाद करते आए है--शायद दिल ही दिल मे तेरी दुल्हन को कमज़ोर समझते आए है-----
इंतज़ार तो इंतज़ार होता है...चाहे वो तेरे आने का हो या तेरे बताए रास्ते पे जाने का हो---हिसाब

मांगे ज़िन्दगी से अगर तो धुआँ धुआँ सब नज़र आता है--पर रौशनी मे गर तेरा चेहरा देखे तो यह

धुआँ भी शराबी आँखों सा नज़र आता है----बात करे फ़ासलो की तो बहुत दूरी तेरे मेरे बीच नज़र आती

है---रूह के तारो को जो जोड़े..तो रिश्ता सौ जन्मो का दिखाई दे जाता है---दीदार तेरा नज़रो से करे या

रूह से रूह के तारो को मिलाने का करे..रिश्ता यह ख़ास हर किसी को नज़र आ जाता है----
कहते है खामोशियाँ कभी बोला नहीं करती---पर हर ख़ामोशी मे तेरी आवाज़ क्यों सुनाई देती है----

बहुत देर गुफ्तगू होने  के बाद,हर चीज़ खूबसूरत क्यों नज़र आती है---जिस्म हल्का हो जाता है,और

रूह सकून से भर जाती है---तेरे बाद किसी और के लिए वक़्त कहाँ होता है--गर्म हवाओ मे क्यों सर्द

मौसम का अहसास होता है---तेरे जाने के बाद  क्यों गुफ्तगू करने का मन फिर हो आता है-----
बस तेरी  दीवानी हू...तेरी ही इक कहानी हू---किरदार खास हू तेरी किताब का,लोग कहते है...मै

झाँसी की रानी हू---शाही जीवन जिया था कभी,शाही रुतबे मे रहते थे---नाज़ आज भी है खुद पे इतना

भरोसा रब पे भी है इतना,की मौत भी शाही पाए गे--टूट कर कभी जिया नहीं,फिर हर पल आंसू क्यों

टपकाए गे---तेरे नाम से जुड़ा है नाम मेरा,इस कहानी को रोशन कर के ही.... तेरे पास आए गे---

Tuesday, 11 April 2017

तुझे ठेस न पहुंचे इस ख्याल से..हम रोए गे नहीं---दिन तो हमारा अपना होगा,तुझे ख़ुशी देने के लिए

पलकों को भिगोए गे भी नहीं---तेरे ही सीने मे,तेरी ही बाहो मे,मुस्कराए गे..यह बात और है कि तेरे

सपनो को मुकम्मल करने के लिए,ज़िन्दगी को बेखौफ अभी और जीते जाए गे--सब की राहो से दूर

बहुत ही दूर,एक दुनिया बसाई है मैंने..जहा ख्याल सिर्फ तेरा है,अपने टूटे दिल के लिए अब अपने

ज़ख्मो को किसी को कभी बताए गे भी नहीं----

Monday, 10 April 2017

यह भोर सुबह की कहती है..हर नियामत होगी तेरी---हर उलझन सुलझे गी..दर्द की दवा हाज़िर होगी

झुक जा खुदा के सज़दे मे..दे खुद को उस के चरणों मे--यहाँ कोई नहीं तेरा..बेगानो की दुनिया सारी है

न निभा कोई रसम-रिवाज़..ना खौफ रख दिल के खाने मे ज़रा---ना मांग खुदा से दौलत के भंडार......

बस रह हर पल उस का शुक्रगुज़ार..छोड़ के साँसों के बंधन,एक दिन उड़ जाए गा--रह जाए गी बस यादे

और तू हर शै से आज़ाद हो जाए गा---

Sunday, 9 April 2017

शाही लिबास मे,शाही अंदाज़ मे..तुझ से मिलने बहुत दूर से आए है--तड़प प्यार की तुझे देने के लिए

तेरी ही ज़िन्दगी मे दस्तक देने आए है आज--प्यार तुम्हे मुझ से नहीं है गर,तो पलके बिछाए यहाँ क्यों

बैठे है आज--दुनिया देती है सलामी मेरी हर अदा पे खास,तुम क्यों रख के बैठे हो दिल के ज़ज़्बात दिल

के दरवाज़े के पार--यह हसीं शाम बार बार नहीं आती,आँखों से मुहबत झलकाने बहुत दूर से आए है आज 
कही उलझा दामन तो कही बिखरे गेसू -- कही ज़ल्दबाज़ी मे दुपट्टा लिया थाम ---मिलन की घड़िया

आने को है,कितना सजना है सवरना है..होश मे नहीं है मेरे सुबह-शाम--माथे की बिंदिया,हाथो के

कंगन और अब तो बज उठी यह पायल लेते लेते तेरा नाम---रूह का मिलन तो होना ही है,फिर क्यों

यह धड़कन हो रही बेचैन बेचैन--दिन गिने या रातो को करवटें बदले,अब तो इंतज़ार मे है यह रूहे-खास 
दुनियाँ की परवाह जो की होती,तो आज ज़िंदा न होते--हौसले से जो कदम ना बढ़ाये होते,तो आज अपनी

शर्तो पे कहाँ ज़ी पाते--गरम रेत पे पाँव रखने से जो डर जाते,यक़ीनन दहशत की आग मे खुद ही जल

जाते--दुनियाँ समझी हम तन्हा है,वो क्या जाने मेहबूब का साथ आज भी साथ है मेरे--खुदा की नियामतों

को रोज़ सलाम करते है,झुक जाते है उस के सज़दे मे--हर सांस को लेने से पहले,उस की रज़ा सुन लेते है-- 
वो तेरी  काली  घनेरी पलके,आँखों के वो खूबसूरत शामियाने---मेरी दुल्हन हो या आसमाँ की कोई

शहज़ादी..आंचल मे समेटे हुए बेतहाशा अफ़साने...टुकर टुकर देखती हुई तेरी भोली मुस्कान की,हज़ारो

मासूम सी बिजलिया---कौन कहता है कि तुम इंसा हो..दुनिया से अलग,सदियों मे पैदा होने वाली---हो

सिर्फ मेरी ही दुल्हन---उन्ही यादो के कीमती ख़ज़ाने से,आज भी सजा है मेरा यह मन और तन..रहे थे

साथ सदा,रहे गे रूह से जुड़े..तेरे ही आंगन मे मिले गे रूह के छाँव तले----
रोने के लिए आज वक़्त नहीं है मेरे पास.....तेरे ही दिन पे,तेरे लिए सवरने के लिए बस बेताब है हम

कोई क्या कहता है..कोई क्या कहे गा-इस से परे तेरी ही दुनिया मे शिरकत करने को तैयार हो रहे है

हम--रूह मेरी मुकम्मल तो तभी होगी,जब तेरी रूह सज़दा करे गी मेरे हुसने-यार के आस पास--ना

छेड़ मेरी उन्ही धडकनो के तार,जिन्हे छुआ था तूने पहली पहली बार--तेरा वही अहसास आज भी है

मेरे दिलो-दिमाग के बहुत ही पास..बहुत ही पास---

Friday, 7 April 2017

खुशबू तेरी सांसो की है इतनी महकी महकी,कि फिज़ाओ को लाज आती है---तेरे आने की खबर से यह

दुनिया भी ज़न्नत सी नज़र आती है---तेरे छूने से इन वादियों मे एक सरसराहट सी क्यों चली आती है

गुफ्तगू करते है धीमे से मगर,चांदनी को खबर हो जाती है---चाँद को छिपाती है अपने आंचल मे,पर

दुनिया को खबर हो जाती है--तेरी सरगोशियों से मेरे जिस्मो-जान क्यों सिहर जाती है---

ना छेड़ साज़ ज़िन्दगी के मेरे,अपनी ज़िन्दगी को ही भूल जाए गा--ना कर अटखेलिया ज़ुल्फो से मेरी,

तेरा ईमान डोल जाए गा---साँसों की खुशबू मे खोने से पहले,साँसे अपनी तू कैसे ले पाए गा--मेरी जान

मे अटकी है जान तेरी,यह सोच कर तू अब किसी और का भी ना हो पाए गा--रूबरू हो जा मेरी ही रूह से

ज़रा,लाज़मी है कि अपनी ही रूह को यक़ीनन भूल जाए गा---

Wednesday, 5 April 2017

ना इंकार करते हो, ना इकरार करते हो--बला के  खूबसूरत हो,निगाहे-राज़ करते हो--अदाए मार डाले

गी,यू ही दूर जाते रहे नज़दीकिया पास आए गी--पत्थर-दिल सनम मेरे,खुदा का नूर हो लेकिन खुदा

क्यों खुद को मान बैठे हो--हुस्न से मालामाल हो लेकिन,इश्क के बिना कैसे ज़ी पाओ गे--राहो मे खुद

ही चले आओ,फिर ना कहना किसी और के हुस्न को अपना क्यों मान बैठे हो---

Monday, 3 April 2017

जय माता दी दोस्तों...ज़िन्दगी मे कल क्या होगा,कौन जाने ---हम अक्सर यही सोच कर दुखी होते रहते है...अपने अपने कर्मो का फल हम सब को भुगतना ही पड़ता है..और यही सच है..जो है बस यही आज है...हर हाल मे माँ का शुक्रिया अदा करे..पूजा मे,अपनी प्राथनाओं मे अपने मन की हर बात,हर उलझन माँ  को बताये..उन से ज्यादा हमारी कोई नहीं सुन सकता...आज अष्ठमी के अवसर पर माँ का मन से आत्मा से शुक्रिया कीजिये.....जय माता दी..जय माता दी....

Sunday, 2 April 2017

पूजा के हर धागे मे,इबादत के हर पन्ने मे....कलम की स्याही मे और मेरे दिल की किताब मे....जब

भी याद किया तो बस तुझी को याद किया..अपने घर के उस आंगन मे,हर खिड़की हर उस दरवाज़े मे

हर चोखट पे पाँव धरा जब जब....फरियाद मे खुदा से यही माँगा कि इबादत का आखिरी पन्ना तेरे ही

घर की उन्ही हवाओ से गुजरे,मेरी ही साँस का आखिरी लम्हा उसी घर के आंगन मे निकले...जो भी

निकले उस रह-गुज़र से,तेरे मेरे रिश्ते को कहानी को समझे...

Thursday, 30 March 2017

कही उन की नींद ना टूटे,इस ख्याल से हम ने पायल को बजने से रोक लिया---खलल ना हो कही उन के

सपनो मे,यह सोच कर हम ने गेसुओं को उन के चेहरे पे झुकने से रोक दिया---चूड़िया बजने लगी जो

रात के अँधेरे मे,उन की खनक को प्यार से बस चूम लिया---निहारते रहे उन को सोते हुए,मासूम सी

सूरत पे खुद को उन से प्यार करने के लिए....खुद को रोका जो रोका...पर पलकों को भिगोने से बस रोक

लिया....

Wednesday, 29 March 2017

कहने के लिए तो यह सारा जहाँ अपना है...पर अपनेपन के नाम पे अपना कोई भी तो नहीं----सितारों

से भरा यह आसमाँ भी तो अपना है,पर एक सितारा कही अपना  ही नहीं---मुझे तुम से प्यार है,यह

झूठा भुलावा मिलता है हर जगह से मगर, पर साथ चलने के लिए कोई एक शख्स भी तो नहीं---यह

दुनिया है ख़ुदग़र्ज़ो की,जहा मतलब के लिए लोग रिश्तो को ही बदल जाते  है---और दे के दुहाई बदनामी

की अपने दामन को साफ़ कर जाते है----

Saturday, 25 March 2017

बारिश तू  ज़रा थम जा,ए बादल तू बरस के अब खाली हो जा---उन की राहो को आबाद करने के लिए

सूरज को ज़रा उगने दो ---सुबह की मासूम हवाओ को ज़रा महकने दो,खिलने  दो अब उन कलियों को

जो फिज़ाओ को महकाती है--मेरे मेहबूब की राहो मे ज़रा सज़दा कर लू,ना रोको मुझे ना  टोको मुझे

बस हो जाओ सभी खामोश ज़रा,कि उन की सलामती के लिए खुद को इबादत मे ज़रा शामिल कर लू---

Tuesday, 21 March 2017

बहुत  बहुत ही खामोश सी यह रात है--कोई हल्की सी खलिश इस दिल के आस पास है---सन्नाटे को

चीरती हुई एक खामोश सी तेरी  आवाज़ मेरे साथ है---आंखे बंद है मेरी,पर नींद तेरी यादो के आस पास

है---दुनिया से दूर,बहुत ही दूर तेरे प्यार का जनून मेरी ज़िन्दगी की आस है---तुझ तक पंहुचने के लिए

इबादत के धागों मे खुद को लुटा देना मेरी मंज़िले-खास है---मेरी मुस्कुराहट को मेरी ख़ुशी समझने के

लिए,यह ज़माना आज भी मेरे सलाम का हक़दार है---
तुझे रुखसत कर दिया हम ने भरी आँखों से आज---पर तमाम यादो को साथ लिए घर लौटे थे आज---

सूना सूना सा जहाँ मेरा,अधूरे से खवाब..कोई नहीं समझ पाया मेरे दिल दिमाग की उथल-पुथल का

गहरा  राज़--तुम रहे शहंसाह मेरे,माथे का सरताज....बदली दुनिया,बदले लोग...बुझ गया उम्मीदों का

संसार---पर मैंने चुपके से अपनी रूह को जोड़ दिया तेरी रूह के साथ,सांसो को निभाने के लिए यही रास्ता

बचा है आज---

Monday, 20 March 2017

तेरी यादो के बवंडर से जो सैलाब निकला है,वो काफी है ताउम्र जीने के लिए---बरस बरस कर जो बरसा

वो तूफान काफी है,पन्नो को भरने के लिए---यू तो हर लम्हा तेरी ही यादो के साथ चलते आए है,पर

जुदाई-खास पे क़यामत की हद तक फफक फफक कर रोये है---लौटना तो तेरा अब मुनासिब ही नहीं

पर तेरी दुनियां मे कब आ जाए,यह बताना तुझे जरुरी है तेरे तसल्लीबख्श होने के लिए---

Sunday, 19 March 2017

रूह ने रूह को पुकारा यू ऐसे..कि यह ज़िन्दगी फ़ना हो गई--जिस्मे-जान नहीं रहे बेशक,पर इबादते-पाक

मे दुआ क़बूल हो गई--- दुनिया की समझ से परे है तेरे मेरे प्यार का यह अनमोल सा रिश्ता---जो टूटा

है मगर खत्म नहीं हुआ अब तक---लोग तेरे मेरे घर को जानते है ईट-पत्थर का एक घर,पर वो एक मंज़र

है रूह से  रूह को मिलाने की जगह---बस इंतज़ार है इन सांसो के टूट जाने का,फिर तो रहना है वही जो

तेरे मेरे प्यार का आशियाना है---
ना तब शिकायत थी,ना आज है--सादगी से भरा  जीवन कल भी था,तो आज भी बरक़रार है---साथ चलने

का वादा कल भी था,साथ जीने की ख्वाइश आज भी है---बरसो बीत गए साथ छूटे हुए,पर तेरे दिए उस

ताजमहल मे रहने का मन तो आज भी है----खनक चूड़ियो की आज भी बजती है कानो मे मेरे,यह बात

और है कि उन चूड़ियो की धरोहर आज भी तेरी तस्वीर के पास मौजूद है--

Wednesday, 15 March 2017

न लगा पहरा मेरी नज़रो पे,यही तो है जो तेरी मुहब्बत को सलाम करती है----तेरे कदम पड़ते है

जहाँ जहाँ,वही शिद्दत से सज़दा करती है---तू दूर रहे कितना भी मुझ से,या खफा भी हो जाए मुझ

से..पलकों के आशियाने मे छिप कर नज़रे चार कर लेती है---यह मुहब्बते-पाक है,जो तेज़ आंधियो

से भी ना रुक पाए गी..यह खुदा का नूर है,जो अपनी इबादत मे  तुझे भी याद करती है----
न छलका आँखों से मदहोशियो के यह ज़ाम,कि दिल बेताबी मे यू ही फिसल जाए गा---तुम हो जाओ गे

मेरे,और बदनामी का रंग मेरे सर पर आ जाए गा---होगा कसूर तेरे इस हुस्न का,पर मेरा इश्क तो

बेमौत मारा जाए गा---लोग दे गे सजा मुझ को,और तू फिर भी अपने ही हुस्न पे इतराये गा---यह इश्क

गुजारिश करता है,तू दूर रह इस आग से..फिर न कहना कि मुहब्बत का दाव तू हारे गा और इश्क यू

ही फ़ना हो जाए गा----




कभी दर्द तो कभी तन्हाई है,फिर क्यों यह ज़िन्दगी बेवजह मुस्कुराई है---आंसू लिए आँखों मे,ज़िन्दगी

की यह शाम ख़ुशी से क्यों हँस पाई  है----लम्हा लम्हा कतरा कतरा चुन रहे है फूल इन वादियो से,कौन

जाने कब कही वो लौट आये ---मन्नतो मे किन्ही खास दुआओ मे,हर बदलते हालात के किनारो मे वो

रात कभी तो आए  गी जिस के लिए यही ज़िन्दगी बार बार मुस्कुराई है----
कभी तो इस ज़मी पे उतर अपने शाही रसूख से परे---कभी तो देख इस दुनिया को अपनी रंगीन दुनिया

से परे---रवायत है इस दुनिया की कभी तो हम से मिलने आ जाओ---न बनो हम जैसे,पर सूरत अपनी

तो दिखाने आ जाओ----गरूर किस बात का है जानम,नकाब मे ही सही पर कभी तो खिंचे चले आओ---

नज़र कोई बुरी जो डाले गा तुम पर,वक़्ती तौर पे तुम को सँभालने आए गे--कभी तो आओ हमारी दुनिया

मे अपनी शोख अदाओ से परे----

Tuesday, 14 March 2017

दिल के इस आंगन मे,दूर दूर तक बहुत ख़ामोशी है लेकिन---प्यार की इंतिहा खत्म नहीं है अब तक---

परिंदो के चहकने की वो प्यारी सी वजह,मखमली बिस्तर पे यादो के पन्नो की वो खामोश सदा---

कुछ कहे या ना कहे,कुदरत के इशारो पे रहने की वजह---यह ज़िन्दगी बहुत ही खामोश है लेकिन,हर

साँस के साथ दुआओ मे रहने की वजह--आज भी कहती है कि इबादत ही इबादत है अब जीने की वजह

Sunday, 12 March 2017

तेरा साथ पाया है जब से,दुनिया बदल गई है मेरी--आईना देखते है जब जब,लगता है निगाहे ही बदल

गई है मेरी--तन्हाई से प्यार करने लगे है अब,कि तन्हाइयो से खुशबू आने लगी है तेरी--न बांध अब

निगाहों से मुझे अपनी,कि इन्ही निगाहों मे ज़िन्दगी अब उलझ गई है मेरी--बहुत खूबसूरत है अंदाज़

तेरा,बिन बारिश के भीग गई है वादियां दिल की मेरी---

Friday, 10 March 2017

ना कर सके दुआ..ना कर सके वफ़ा...वादों को निभाने की कोशिश मे तुम  हम रहे दूर दूर,ज़ुदा ज़ुदा ---

तन्हाई ने कहा एक मोड पे,यह ज़िन्दगी तो है बेवफा बेवफा---ना कर यकीं इस पे,क्या पता कब हो

जाये यह खफा खफा---मुहब्बत की रंगी शाम पे कभी तुम कहाँ,कभी हम कहाँ..बरसता रहा यह पानी

मिलने के लिए हुस्न मिटता रहा,और इश्क होता रहा बस धुंआ धुंआ----

Saturday, 4 March 2017

सालो से बेज़ुबाँ है,फिर भी रोज तुझ से गुफ्तगू करते है---आंखे भरी है आंसुओ के सैलाब से,फिर भी रोज़

तेरी तस्वीर को ज़ी भर निहारते है----वीरान है दिल तेरे बिना,पर इस सूरत को आज भी तेरे लिए संवारते

है----तेरे जैसी दुल्हन सदियो मे ही जन्म लेती है,बस यही तेरी बात याद करते है और हर जन्म तेरे होने

की खुदा से दुआ करते है----तुम देख रहे हो आज भी मुझे उन्ही शरारती नज़रो से,यह जान कर हम आज

भी तेरे प्यार मे डूब जाते है---
गुजरती हवाओ ने जो छुआ आज मुझ को,तेरी मौजूदगी का अहसास  हो आया---कदम चलते रहे और

तेरा  मेरे साथ चलने का वो वादा याद हो आया---ऐसा नहीं कि ज़िया नहीं इस ज़िन्दगी को मैंने,पर हर

सांस के साथ तेरे साथ गुजरा वो ज़माना याद हो आया---कंगन नहीं,पायल नहीं,सिंगार का आलम नहीं

सादगी मे लिपटा..आज भी तेरा मुझे शोख नज़रो से देखने का वो वक़्त याद हो आया----

Friday, 17 February 2017

दोस्तों...ज़िन्दगी सुख-दुःख का संगम है..दुनिया का कोई भी इंसान ऐसा नहीं होगा जिस को कोई दुःख दर्द न हो...हर इंसान दुसरो को देख कर अक्सर यह सोचता है यह कितना खुश है,सुखी है--काश मेरा जीवन भी ऐसा होता--कदापि नहीं---जो इंसान आप को हमेशा खुशहाल नज़र आता है,उस ने सही मायने मे अपने दुखो के साथ जीना सीख़ लिया होता है--दोस्तों,अपनी परेशानियों,तकलीफो और तमाम दुखो के साथ जीने की एक आदत बना लीजिये--आप के हिस्से मे जितने सुख,ख़ुशी है,उसी मे सन्तुष्ट रहना सीख़ लीजिये---सुबह उठ कर ईश्वर को धन्यवाद जरूर दे,आप के पास बहुत कुछ ऐसा है जो दुसरो के पास नहीं है---यह ज़िन्दगी सब को सब कुछ नहीं देती,पर जो भी देती है उसी मे शांति से जीना ही ज़िन्दगी है---खुद को पूर्णतया ईश्वर को समर्पित कर दे,उन की मर्ज़ी के बिना कुछ भी नहीं हो सकता----बस खुश रहना सीखे---नई सुबह आप सब के लिए मंगलमय हो...शुभ प्रभात दोस्तों---

Sunday, 5 February 2017

मुड़ के जो पीछे देखा राहे बंद थी..आगे बढे तो बहुत अँधेरा था--गहन सा अँधेरा और बेख़ौफ से हम

तुम साथ नहीं थे,कोई साथ नहीं था..नज़रे जो कभी उठी थी हम को प्यार देने के लिए..तेरे जाने के बाद

बदल गई वो तमाम नज़रे खफा होने के लिए--कसूर सिर्फ था इतना कि तेरा साथ छूटा था,ग़ुरबत क़ी

राहों मे दुनिया का साथ भी छूटा था---समझ आया क़ि खता ना हो तो भी सजा मिलती है--देख तेरे जाने

के बाद ज़िन्दगी कितनी ही बदली है--- 
वो चिंगारी तेरी मुहब्बत की,सुलग रही है आज भी सीने मे मेरे---हल्का हल्का सा नशा,वो खोई सी

नज़र, कही आज भी है उस का असर---खुद को देखते है जब जब आईने मे,तेरी ही सूरत का अक्स

दिखता है---हाथ उठते है जब भी तुझे दुआ देने के लिए,खुदा से अपनी सांसो का सौदा भी कर लेते

है---सुबह की इस अंगड़ाई मे,तेरे मासूम सूरत पे ग़ज़ल लिखते है---कोई कुछ भी कहे,लिखते लिखते

आंसू बहते है आज भी मेरे---

बहुत कुछ है ऐसा तेरी यादो के ख़ज़ाने मे,कि बरसो बाद भी हर याद तेरी इस दिल मे समाई है...हर

रात जब भी आई है,वो तेरी बाहों की कसक दिलो-दिमाग पे छाई है...खामोश रहे या ज़िन्दगी को जिए

पर हर लम्हा तेरी रूह को खुद की रूह से बेपनाह सलामी देते आए है...कौन जाने गा मेरी बेज़ुबाँ मुहब्बत

की दासताँ को,आज भी मेरे चेहरे का नूर तेरी उसी मुहब्बत से झलकता है...वक़्त अभी बाकी है,तेरे पास

आने के लिए..पर कैसे बताये इस ज़माने को कि सफर का आखिरी पडाव बसने को अभी बाकी है...
राज़ तेरे जान कर तुझ से प्यार करना फिर भी नहीं छोड़ा...दुनिया कहती है बेवफा तुझ को,इस बात से

खफा हो कर तुझ से मिलना भी नहीं छोड़ा...तेरी रातो पे पहरा है किसी और की चाहत का,यह जान कर

तेरी इबादत करना कभी नहीं छोड़ा...मुकम्मल नहीं तेरी राहे-वफ़ा,क्या फर्क पड़ता है जो तूने हमे एक

नज़र ही नहीं देखा...लोग हो जाते है फ़ना मुहब्बत मे,हम ने तो तेरी बेरुखी के बाद भी तुझ से प्यार

करना आज भी नहीं छोड़ा....

Friday, 3 February 2017

आंखे नम ना कर कि ज़िन्दगी फिर न मिल पाए गी..टूट के इतना भी ना चाह मुझ को कि सांसे बिखर

ना पाए गी..चूड़ियो की खनक ताग़ीद करती है कि आ अब बहक ले ज़रा,मौसम यह प्यार का फिर लौट

के ना आए गा....हर वह छोटी सी ख़ुशी ज़ी ले संग मेरे, जो मेरी तेरी राहो को दूर तक साथ ले जाये गी

यह तक़दीर भी अजब शै है जानम,कभी देती है ख़ुशी तो किसी रोज़ झटके से फ़ना भी हो जाये गी .....

Friday, 27 January 2017

कल लौट जाओ गे,इस डर से रात भर तेरे सीने से लग कर बहुत रोए है----उम्र भर के लिए तन्हा रह

जाये गे,यह सोच कर रात भर तुझ से लिपट कर जागे है----तेरी नींद मे कही खलल ना हो,इस डर से

कंगन पायल सिराहने रख के बेपरवाह जागे है---निहारते रहे है हर लम्हा तुझे कि फिर यह लम्हे कभी

ना मिल पाए गे---जाओ लौट जाओ अपनी दुनिया मे कि हम ताउम्र तेरी इबादत मे तेरी ही खुशियो

के लिए तिल तिल खुद को गलाते जाये गे-----
मेरे पास मेरे ही साथ मेरी ही दुनिया मे..तेरा वज़ूद सिर्फ मुझ से है---तू इकरार कर या न कर..तेरा

नाता सिर्फ मुझ से है---नज़रे न चुरा खामोश ना रह..आँखों मे छलके इन आंसुओ को यू ना छुपा---

छोटी सी है यह दुनिया मेरी..तेरे बिना अधूरी सी हर प्यास मेरी---तुझे देखे बिना ढलती नहीं कोई रात

मेरी..ओस की बूंदो की तरह मासूम सी यह मुहब्बत है मेरी--तू माने या ना माने पर हकीकत है यही

आज भी तेरा वज़ूद सिर्फ और सिर्फ मुझ से है---

ताउम्र रात ही लिखी होती जो तक़दीर मे...तो सुबह का इंतज़ार कोई क्यों करता---दुखो का रेला जो

साए की तरह साथ चलता..तो खुशियो का इंतज़ार भला कोई क्यों करता---बेवफाई ही बेवफाई गर

प्यार मे मिलती रहती..सच्चे प्यार का तलबगार इस ज़माने मे कहा मिलता---यू ही नहीं कहते कि

सूरज डूब गया..सूरज न होता तो यह सारा जहाँ रोशन कभी न होता----

Monday, 23 January 2017

तुझे  चाहा और खवाब मेरे सजने लगे--तेरी  बाहों मे हम है और शर्म से गाल सुलगने लगे---तूने देखा

भरपूर नज़रो से मुझे  और हम दिल से तेरे होने लगे---किसी आहट ने डराया हमे और सिमट कर सीने

से तेरे लगने लगे ---रेत पे महल जो बनाया हम ने..हकीकत मे तेरे संग तेरे ही घर बस गए---यह तेरे

प्यार की शोखी है कि शहंशाह हो तुम और हम तेरी मुमताज़ बनने लगे---
हाँ भी नहीं,ना भी नहीं.....तकरार की कोई वजह भी नहीं..फिर भी क्यों लगता है तेरे दिल मे मेरी

जगह है भी, शायद नहीं भी...तेरी आँखों मे मुझे अक्स अपना दिखता है कभी तो कभी अजनबीपन

से भरा तेरा वज़ूद लगता है मुझे...ओस की बूंदो की तरह मेरी यह मासूम सी ख्वाइशे,कभी रूकती है

तो कभी धुप की तरह फ़ना हो जाती है...खुल के तो बता तेरी ज़िन्दगी मे मेरी जगह है,या फिर कही

भी नहीं....

Sunday, 22 January 2017

इतनी शिद्दत से मुझे यू चाहना तेरा,हर रोज एक नया पैगाम देना तेरा....मैं रूठू बार बार,और यू रोज  

रोज मुझे मनाना तेरा... आँखों से जो निकले आंसू मेरे,उन्हें अपनी हथेली मे छिपा लेना तेरा....मेरी

पाँव की पायल पे यू फ़िदा होना तेरा,चूड़ियों को मेरी कलाइयों मे भरना तेरा...आसमाँ के फरिश्ते हो

या मेरी किस्मत की रज़ा,सात जन्मो का साथ हो या फिर दिल की धड़कन मे बजा साज़ मेरा.....

Thursday, 19 January 2017

ना जा दूर इतना मुझ से, कि लौट के आना मुनासिब ना हो---इश्क़ क़ी मजबूरिया इतनी ना बड़ा,क़ि

हुस्न की आग मे फिर से जलने का सबब ही ना हो---रेत पे पाव धरते धरते झुलस  जाए गे तेरे अपने

ही कदम---हाथो की लकीरो को मिटाने के लिए,गर्म लावे मे इन को ना जला---नमी तो आज भी है इन

आँखों मे मेरी,अपनी आँखों को इतना ना घूमा कि मेरे पास लौट के आना मुनासिब ही ना हो----

Wednesday, 18 January 2017

मेरी मुहब्बत मे जो घुला तेरी मुहब्बत का नशा...तेरी चाहत से बना जो रिश्ता यह मेरा...घुटन के

माहौल से दूर,तेरे सकून का हल्का सा नशा...डरते डरते जीना,घबरा कर रातो को उठ जाना...तन्हाई

मे फिर सो ना पाना..जागते जागते तुझे याद करना और यू ही सुबह का हो जाना...उस बुरे वक़्त से

दूर,तेरे संग जीने का यह अधूरा सा खवाब...तेरे साथ से बंधा मेरा आज...यही है मेरी मुहब्बत मे घुला

तेरी ही मुहब्बत का नशा----
ज़िन्दगी तुझ से बहुत शिकायते करते रहे है हम---जो मिला उस को भूल कर,जो ना मिला बस उसी

का शिकवा तुझ से करते रहे है हम--फूल कितने ही खिले हमारी राहों मे,पर कांटे बहुत है चुभन देने

के लिए इस के लिए बस तुझ से लड़ते ही रहे है हम--किसी मोड पर जब भी किस्मत हम पे यक़ीनन

मुस्कुराई,अपने दुखो का रोना ही तुझ से रोते रहे है हम---माफ़ करना ज़िन्दगी,बहुत नियामते दी है

तुम ने हमे..बस शुक्राना देने के लिए आज तेरे पास आये है हम----

Tuesday, 17 January 2017

सुबह रौशन होने के लिए,रात के ढलने का इंतज़ार करती है--खिले खिले मौसम को और खुशगवार

करने के लिए,सूरज से तपन लेती है---चाँद तो चाँद है,फिर भी चांदनी के प्यार पे बसर करता है--

आसमाँ तू बहुत दूर तक फैला है मगर,सितारों के बिना फीका सा लगता है---हवाएं जब जब सर्द होती

है,सूरज के साथ के लिए तन्हा होती है---फूल खिलते है मगर,भवरें के लिए फिर भी बैचैन होते है---
जनून तेरे प्यार का,देख ना कहाँ ले आया है---इस दुनिया से बेखबर,तेरी ही बाहो मे खीच लाया है --

कुदरत के इस तोहफे पे,मासूमियत से भरे इस चेहरे पे और पास खींच लाया है--रौशन करने के लिए

तेरी राहो को,बहुत दूर से तेरे पास ले आया है--देखते है आईने मे जब खुद को,तेरा ही अक्स खुद पे

नज़र आया है--ज़नून-इश्क़ ही तो है,जो तेरे लिए मुझे खुद से भी दूर,बहुत दूर खींच लाया है----

Monday, 16 January 2017

शुक्रिया कहे या आप की मेहरबानियां---सज़दा करे या झुका दे सर आप के  अहसानो की कदरदानियो  

के लिए---दर्द की इंतेहा मे जब जब तड़पे है,आंसुओ के सैलाब मे जब भी डूबे है...वक़्त ने जब जब तोड़ा

है..मौत के शिकंजे ने हम को अपनी और खीचा है...एक मसीहा की तरह आप आए है,खुदा की रहमतो

की तरह हम को थामा है...आप के पाक इरादों पे बार बार सर झुकाते है...आप की इबादत करे या फिर

ताउम्र खुदा से आप के लिए दुआए मागते रहे....

इतने खामोश भी ना रहो कि इस ख़ामोशी से अब डर लगता है--क्यों बिखर चुके हो इतना कि इस

बिखराव से ख़ौफ़ आता है---मेरे हुस्न पे नज़्म लिखने वाले,तेरे इश्क की गुस्ताखी पे रहम आता है

तेरे इर्द गिर्द फैली है बहारो की दिलकश बाहें,यह फ़िज़ाए बताती है तेरे मेरे प्यार की हज़ारो बातें

याद करो गे तो सब याद आ जाए गा,इतने भी बेवफा ना बनो कि तेरी हर वफ़ा से बहुत डर लगता है

Sunday, 15 January 2017

यह ज़िन्दगी बेवफा भी हो जाए अगर...तेरा साथ तब भी छोड़ ना पाए गे---गुजरते रहे गे साल कितने...

पर तेरी राहो को रौशन करने फिर भी आ जाए गे ---प्यार सिर्फ ज़िस्म का होता तो शायद साथ छूट

जाता..रूह से रूह को जो मिला दे..तेरी इबादत मे जो खुद को रुला दे..तेरे टूटे सपनो को जो फिर से

सजा दे ...तेरी वीरान राहो के लिए जो खुद को भुला दे..यह वो मुकम्मल  प्यार है..जो तेरी रूह के लिए

खुद की रूह को भी भुला दे----
शराबी आंखे शराबी सी नज़र..बोलिये ना हज़ूर इरादे क्या है---बहके बहके से कदम बहकती सी यह

चाल..कह दीजिये ना क़ि यह मुहब्बत का असर है---सर्द हवाओ का यह कहर और तेरी यह गर्म सांसे

मेरे हुस्न मे डूब जाने का वक़्त है---कहते कहते क्यों रुक गए..बोल दीजिये ना साथ रहने का इरादा है

मुहब्बत बार बार नहीं मिलती...क्यों ना सातो जन्म साथ जीने का वादा कर ले---हम ने तो कह दी आज

दिल की बात..अब बोलिये हज़ूर इरादे क्या है----
यकीं करे तेरी बातो पे या तेरे प्यार के सैलाब मे डूब जाए---टुकड़ो टुकड़ो मे जिए या ताउम्र तेरे ही साथ

गुजार दे---बात बात पे रो दे या तेरे गले लग के- तेरी ही बाहो मे बस झूल जाए---मुश्किलात हालात मे

तुझे सब बता दे या फिर अकेले तन्हाई मे खो जाए---सवाल बहुत है मेरे पास-हर जवाब के लिए तुझ

से वक़्त लेने कब  कहाँ आए ----

Saturday, 14 January 2017

यह लब जो खुले लफ्ज़ कहने के लिए--तेरे लबो ने उन्हें क्यों थाम लिया---चूड़ियो की खनक मे जो

धड़का दिल..तेरे दिल ने उसे क्यों बहकने दिया---अल्फ़ाज़ पूरे भी ना कर पाए..तेरी ख़ामोशी ने हर बार

बाहो मे बस बांध लिया---इश्क मेहरबाँ क्यों है आज हम पे...हुस्न के चरचे मे तुझ से ये भी ना पूछ

पाए---खुल रहे है ये घने गेसू..अब बादलो की गरगराहट ने इन्हे क्यों संवरने दिया---

Friday, 13 January 2017

चल आ...दूर बहुत दूर कही चलते है इस दुनिया से --बेबसी का जहा ना आलम हो ना दर्द की तन्हाई

हो --जहा सुबह तेरी मर्ज़ी से हो और मेरी शाम ढले तेरी बाहों मे--ना पहरा हो ज़माने का,ना रंजिश हो

बेगानो की --तेरी बाहों मे सो जाऊ,उम्र भर के लिए खो जाऊ--किस्मत की लकीरो मे तू हो या ना हो,पर

तुझे हासिल मैं कर जाऊ--प्यार के इस जहाँ मे आ चलते है,दूर बहुत ही दूर---
वो पूछते है अक्सर हम से,कितनी मुहब्बत है मुझ से---फैला है आसमाँ जितना या गहरी है ज़मी

जितनी---हद मेरे प्यार की बताओ-- है कहाँ तक---सवाल उन के पे हम हँस दिए--कहाँ इतना सिर्फ----

हर सांस के बाद,हर सांस तक--याद करते है तुझे ---हद का तो खुद को भी पता नहीं--लहू की हर

बून्द मे बहता है बस नाम तेरा--खामोश रहे तो भी नाम लेते है तेरा-----
हवा की सरसराहट से,क्यों डर रहे है हम..बादलों की गरगराहट से,क्यों बहक रहे है हम..भीग रहा

है यह सर्द मौसम,तो क्यों सिहर रहे है हम..ज़ुल्फे जो बिखरी है,अँधेरे से बस डर रहे है हम..तूने अभी

छुआ भी नहीं,फिर भी तेरे नाम से क्यों पिघल रहे है हम..खवाबो मे तेरे आने से ही,बस हो गए है तेरे

हम...
रात भर जागते रहे..जागते ही रहे--कुछ लम्हो की याद मे..बस तुझी को याद करते रहे..करते ही  रहे--

इक हलकी सी आहट के लिए ..आँखों से बची नींद को बर्बाद करते रहे..करते ही रहे--चाँद को देखा तो

चांदनी की तड़प का अहसास करते रहे..बस करते ही रहे--सुबह कब होगी..बस इसी इंतज़ार मे रौशनी

की राह तकते रहे..हाँ तकते ही रहे--
वो तेरा हँसना..मुझे बाहो मे भर लेना---हकीकत की शाम थी या मेरे मन का धुंआ धुंआ--बेपरवाह सी

लटों को तेरे हाथो का वो छूना,कोई दिल्लगी रही या दिल की लगी थी--खोई खोई सी तेरी वो नज़रे --

वो तेरी शायराना सी अदा--मेरी ही प्यास थी या तेरी मदहोशी की सजा--बात कुछ तो थी,पर कुछ भी

नहीं--लबो पे आने सी पहले,ओस की बूंदो की तरह बस ठहरी ठहरी ---

Wednesday, 11 January 2017

कहो ना कहो..सुनो ना सुनो...तेरे  वादे से जुड़ी हर वो शाम मेरी है...रेत पे घरौदा बनाया जो हम ने,

उस की हर याद आज भी तेरी और मेरी है....कभी बिखरे सपने तो कभी आसमाँ रंगीन हो गया...यूं

मुस्कुराये कभी तो कभी आँखों ने सैलाब बहा दिया...टुकड़े टुकड़े जिए कभी ज़िन्दगी,तो कभी साथ

जीने के लिए उम्र भर का वादा कर लिया...जो भी किया,उस की गवाही के लिए यह तनहा रात तेरी भी

है,मेरी भी है....
सीने से जो उठता है यह दर्द,हवाओ मे क्यों घुलता है...तेरा नाम लेते है बहुत ख़ामोशी से,तो भी इस

ज़माने को क्यों पता चल जाता है....सजते है संवरते है,तो दुनिया की निगाहों मे क्यों चुभते है...इतनी

ही फ़िक्र है तो तेरे आने से,मुझे तेरे संग मिलाने से क्यों डरते है..यह तो प्यार है यारा,जो घुलता है इन

हवाओ मे...तो फिजाओ को भी पता चलता है...यह ज़माना क्या जाने कि तेरी इबादत मे भी खुदा का

नाम ही बसता है...
ना कर ग़ुस्ताख़ियां इस सर्द मौसम मे...कि गरम लावे क़ी तरह पिघल  ही जाए गे....ना छूना इन घनेरी

जुल्फों को,अंधेरे मे कदम तेरे बहक जाए गे...यू शरारत से ना देख मेरी सूरत को,इस नूरानी चेहरे पे

तेरी मुहब्बत के फ़साने लिख दिए जाए गे...मदहोश कदमो से जाए गे जिधर भी,पायल क़ी खनक से

लोग तेरे नाम को मेरे नाम से जोड़ते ही जाए गे.....

Monday, 9 January 2017

मेरे हर आंसू पे...हर खामोश अदा पे...दिल को तड़पा देने वाली हर मासूम खता पे.....तुम साथ रहे

मेरे...ज़ुबा क्या कहती है,पर दिल चाहता है क्या...इस बात को समझने के लिए,तुम साथ रहे मेरे....

दुनिया के बेरंग रिश्तो मे-कुछ टूटे कुछ बिखरे उन सपनो मे..समंदर की उन लापरवाह लहरो की तरह

हम तुम साथ रहे ऐसे...मैं तुम मे बसी,तुम मुझ मे समाए...बरसो तक तुम साथ रहे मेरे.....
तेरी ही बाहों में,मेरा दम निकले--यही तो ख्वाहिश थी मेरी...ना मांगी थी कभी दौलत--ना चाहिए था

कभी बड़ा सा महल...बहुत छोटी छोटी सी खुशिया थी मेरी...तुझे देखू शामे-सहर..तेरे साथ जियू उम्र

भर...तेरे कदमो मे ज़न्नत हो मेरी,तेरी बाहों मे हर रात गुजरे मेरी...दर्द की इंतहा कितनी भी हो,मेरे

होठों पे रहे मुसकुराहट की लाली वही...पर दगा तुम कर गए,मेरी बाहों मे तोड़ा दम..और मेरी ही

खवाइश तुम साथ ले गए...