Monday, 26 December 2016

तेरी मासूम हँसी है या बहता हुआ झरना--लोग कहते है तेरी हँसी से सुबह होती है,तू जो खोले यह आंखे

तो रौशन यह ज़मी होती है---बंद कर ले जो यह पलके,शाम तन्हा होती है---गेसुओं को जो खोले,रात पूरे

शबाब पे हो जाती है---खुल के जो मेरे दिल मे समा जाये,मुहब्बत परवान की सीमा से  परे होती है---अब

यू अठखेलिया ना कर मेरी शोख अदाओ से, कि ज़िन्दगी बार बार तेरी ही बाहो मे फ़ना हो जाती है----
तुझे खोने के डर से,तुझी से प्यार करने से बचते रहे--ताउम्र बिन तेरे जीना ना पड़े,इस ख़ौफ़ से तुझ से

मुहब्बत करने से डरते रहे---भूल कोई ना कभी हो जाये हम से,बस तुझे छूने से भी डरते रहे..डरते रहे---

यू अचानक तेरा आज मुझ से टकराना,सारे ख़ौफ़ दूर कर गया...तेरी ही बाहों मे,तेरी ही आगोश मे,यू

सिमटना मेरे सारे खवाब पूरे कर गया--

Saturday, 24 December 2016

दोस्तों...यह ज़िन्दगी आप को हर दिन एक नया अनुभव देती है..अच्छे  अनुभव आप को आत्मविश्वास से भरते है और बुरे अनुभव आप को अंदर से बेहद मज़बूत बना देते है...जो बातें कभी आप को दुःख पहुँचाती थी,वह अब आप के लिए कोई मायने नहीं रखती..दोस्तों..परेशानिया,दुःख कितने भी क्यों ना हो...हर हाल मे अपना मानसिक संतुलन बनाये रखे..अच्छे बुरे हर इंसान के शुक्रगुज़ार रहे,यह वही लोग है जिन्हों ने आप को जीने की एक दिशा दी..चुप्पी को,ख़ामोशी को अपने जीवन का हिस्सा बना लीजिये,भले ही  लोग इस ख़ामोशी को आप की कमजोरी माने या आप की अंदरूनी ताकत..यह उन की अपनी सोच पर है..अपना अपमान बार बार मत सहे...अपने फैसलो पर किसी की भी भावनाओ को हावी मत होने दें...हर फैसला अपने आत्मसम्मान  सामने रख कर ले...लोग इस को आप की ईगो माने या फिर अहंकार..पर अब खुद को दुसरो की नज़रो से ज्यादा अपनी नज़रो मे सम्मानित करे..ताउम्र आप ने सब के लिए बहुत किया,अब तो अपने लिए ज़ी ले...जीवन के इस पडाव पर,जहा आप की अपनी भी खुशिया है,अपना भी सम्मान है...किसी की भी चिकनी-चुपड़ी बातो मे आ कर अपने फैसले ना बदले.आंखे मूंद कर किसी पे भी भरोसा मत करे...याद रखिये जो आप को सच मे प्यार करते है,वो आप के हर फैसले को मन से स्वीकार करे गे,जो ना करे उन को अपनी ज़िन्दगी मे कोई जगह ना दें..यही आप के व्यक्तित्व की सही पहचान है...खुश रहने की एक आदत बना लीजिये...भागवान मे आस्था बनाये रखे,वो हर पल आप के साथ है...शुभ प्रभात और शुभ कामनाये ---सब के लिए...

Friday, 23 December 2016

वो तेरी बातो की खलिश,वो तेरी सांसो की महक....मुझे सर से पाव तक खुशबू मे जैसे नहला जाती है...

गौर करते है जो अपने चेहरे पे,तेरे बेबाक इरादों की कहानी दिख जाती है----तेरे इश्क की दास्ताँ सुने या

अपने हुस्न के चरचे सुन ले..हर मोड़ पे बस तू है और मेरी तन्हाई है---लोग कहते है कि तू मेरे प्यार मे

पागल है..पर खुद के दिल की सुनु तो लगता है कि रातो के हर लम्हे मे तू ही तू शामिल है.....
तेरे खवाब देखे या तेरे साथ,,तेरी राहो पे चल दे---तुझे इंकार करे या तेरे साथ प्यार का इकरार कर

ले---तेरी हर खूबसूरत अदा पे मर जाए या तेरी हर खता से नाता तोड़ ले---इतनी कशमकश मे डूबे

तेरे साथ सातो वचन क्यों न निभा दे---रंगत चेहरे की है तेरे नाम से,शाम गुलाबी है तेरे पैगाम से...

आ चल हर रस्म निभा दे या दुनिया की हर ज़ंज़ीर ही तोड़ दे.....
टुकड़े कर दीजिये दिल के मेरे,,चाहे जितने---हर टुकड़ा तेरे ही प्यार की दुहाई दे गा--खून की हर

बून्द पुकारती है बस नाम तेरा..और नाम तेरे से जुड़ा है नाम मेरा---पाव की पायल बजती है जब जब..

ज़मी को छू कर घुघरू बजते है तब तब---आँखों का काजल है या तेरे नाम का जलता दिया..हाथो की

चूड़िया है या तेरे प्यार के बंधन की वजह..सब कुछ दे के तुझे,जवाब देने के लिए दिल फिर भी पुकारे

गा तुझे ....

Thursday, 22 December 2016

तेरा छूना लगा जैसे..ओस की बूंदो की तरह---महका है बदन मेरा,गुलाब की पंखुड़ियो की तरह--तेरा

शबनमी अहसास ज़न्नत की फ़िज़ा लगता है--देखा तो नहीं हम ने ज़न्नत को,पर अहसास तेरा इबादत

की तरह लगता है---पूजा के धागों  मे पिरोया है,मैंने तेरी पाक मुहब्बत को...तेरी जगह मेरे दिल मे नहीं,

रूह के वज़ूद मे है---फिर पास आ जा मेरे,खुदा के रहमो-करम की तरह---
लफ्ज़ जो निकले लब से तेरे...एक दुआ बन गए--इन्ही दुआओ मे डूबे हम तेरी ही आरज़ू बन गए---

फलसफा प्यार का यह कैसा है,चाँद तो नहीं है...पर तेरी यह चांदनी आज भी प्यार मे तेरे पागल है---

आँखों के इस शराबी हुस्न पे,कभी तुम मिटे...कभी हम मरे---आगोश मे तेरी आने के लिए,सुहानी रात

के इंतज़ार मे,कभी हम सुलगे..तो कभी तुम तपते रहे---इश्क़ के इस सफर मे आखिर तुम मेरे बन गए--

Monday, 12 December 2016

कहने को हमराज़ नहीं मेरे..पर दिल का हर राज़ है पास तेरे....बेवफा है यह दुनिया लेकिन,पर तेरी वफ़ा

का नायाब खज़ाना है पास मेरे....लहू का हर रंग जताता है,मुहब्बत की हर दौलत को....तू पास रहे या

दूर मेरे,फर्क हदो का सिर्फ है शायद....ज़माना क्या कहता है अब मुझ को,उस दौर का नाम भी याद नहीं

मुझ को...आज नहीं तो कल लेकिन,चलना है तुझे साथ मेरे और मुझे साथ तेरे......

Monday, 5 December 2016

न टूट के चाह मुझे किसी फ़रिश्ते की तरह... ना लुटा प्यार इतना मुझ पे किसी मसीहा की तरह...मै

खुद को तेरी पनाहो मे महफूज़ पाती हूं...हर गम को तेरी बाहो मे आ कर भूल जाती हूं...ज़माना क्या

कहता है,उन की बातो को अब यह दिल ना समझता है...खुशबू जो बिखेरी है तेरे इश्क ने,मेरे हुस्न के

आँचल मे...बहकने के लिए यह वजह काफी है,बस लुटा दे प्यार अपना इसी फ़रिश्ते की तरह....

Sunday, 4 December 2016

ना मिले है कभी..ना मिले गे शायद कभी..कुछ दर्द तेरे बाटे है मैंने...बहुत दर्द को हवा  मे  उड़ा दिया

मैंने....यह ज़िन्दगी बहुत हसीं है लेकिन,ज़िन्दगी को जीना दुश्वार ज़माने ने कर दिया लेकिन...जब

जब चेहरे पे शिकन आई है,एक दर्द की लहर सांसो के आर-पार आई  है...बस नाम याद किया तेरा,

और ज़िन्दगी फिर से कमाल कर पाई है...रिश्तो का नाम कुछ नहीं शायद,फिर भी लफ़्ज़ों की तहजीब

साथ साथ चली आई है...
टुकड़ो का हिसाब ना कर..बस बेहिसाब हो कर चले आओ----हर मन्नत,हर दुआ,हर पहलु से बंधे

मेरे पास चले आओ---रात है गहरी,सितारों की चमक से वाकिफ है..चाँद को ढूंढने के लिए,यह

चांदनी भी आज घायल है---बेवफा ना कह मुझ को,वफ़ा के नाम से खुद को भिगोया है---तेरी ही

इंतज़ार मे यह दिल ज़ार ज़ार रोया है---पलकों पे बिछा है,शर्म का शामियाना...बस ज़िद ना करो

मेरे पास चले आओ---
रूह ने रूह को पुकारा,और यह ज़िन्दगी फ़ना हो गई----ज़िस्म को  छूने की कोशिश मे,दो दिल क्यों

जुदा हो गए---दर्द की इंतिहा क्यों अक्सर इबादत मे ढल जाती है---दिल को बचाने के लिए,क्यों

पलकों को भिगो जाती है----सैलाब ज्यादा न रिसे,इस से पहले यह रूह ज़िस्म से क्यों निकल जाती

है----फिर यही रूह रूह को पुकारती है,और यह ज़िन्दगी बार बार फ़ना हो जाती है-------

Saturday, 3 December 2016

बहुत खूब ए ज़िन्दगी..तूने फिर मुझे सपनो के संसार मे उलझा दिया....बेवजह फिर से पन्नो के हिसाब

मे बसा दिया...लफ्ज़ जो बंद थे,दिल के दरवाजे मे..सपने जो रुके थे,पलकों के इस मयखाने मे....ना

चाहा था कि सब को बेनकाब करे...कदम दर कदम चले,ना किसी को साथ ले ...स्याही जिस जिस ने

बिखेरी है मेरे वज़ूद,मेरे अल्फ़ाज़ पे...पन्नो की कहानी मे उलझ जाये गे नाम सभी गुनाहगार के....