Wednesday, 26 October 2016

चलते चलते इस ज़मी पे तेरी...ए ख़ुदा मेरे...मेरा यह जिस्म तो थक आया....इस दुनिया मे देखे

जो नज़ारे ऐसे कि तेरी खुदाई से ही दिल भर आया....शिकवा नहीं,शिकायत भी तो नहीं...लेकिन

दुबारा फिर यहाँ न आने के लिए,तुझ से गुजारिश करने का मन हो आया....खूबसूरत होता जो यह

जहाँ तेरा,तो यक़ीनन रूह से साँसों को आज़ाद करने के लिए...हर रोज दुआ का दिल न किया होता...
सूनी सी यह ज़िन्दगी---और कहर है उस पे तेरी यादो का --- संभाले तो खुद को संभाले कैसे,वो

इश्क का रंग आज भी है कितना गहरा--नूरे-हुस्न को चाहने के लिए कोई शहंशाह तेरे जैसा इस

दुनिया मे अब कहा होगा---जो कदर करे मेरी चाहत की,ऐसा कद्रदान अब कहा होगा ---एक फरिश्ता

तेरे जैसा पैदा नहीं दुबारा होगा,मुझे प्यार करे जो ज़ी भर के--खवाबो के इलावा और कहाँ होगा----
कभी टूटे सपने,कभी टूटे अरमाँ...टूटा कभी मेरे दिल का जहाँ....यह किस्मत क्यों हो जाती है

बार बार  धुंआ ही धुंआ ....ना अब रो  पाते है,ना इस दुनिया को खुद की दासताँ सुना पाते है...

कौन है यहाँ जो दर्द मेरा बॉट पाए गा,कौन है जो बिखरी कहानी को पूरा कर पाए गा...छू लेना

चाहते है आसमाँ की बुंलदियो को,पर यह साँसे रुक ना जाये बेवजह यूं कभी ना कभी ..सितारों के

झुरमुट मे यह अधूरा सा चाँद ना छिपता है,ना नज़र आता है किसी तमन्ना की तरह...

Tuesday, 25 October 2016

खुशबू का डेरा भरा है बातो मे तेरी..तू पलट कर देख सही,तेरी ही राहो मे रखा है यह दिल मेरा....

हज़ारो नगमे बिखरे है फिजाओ मे जैसे,कभी ज़न्नत कभी शोखी निगाहों मे भरी जैसे...हर दिन

तेरे ही इंतज़ार मे डूबा हुआ जैसे,कहते है जिसे खवाब वो देखा तेरी ही आँखों मे मैंने....टीका लगाते

है खुद को तेरी नज़रो से बचाने के लिए,क़ि अहसास क़ी महक है बस बातो मे तेरी....
तुझ से तेरी ही हद मे जीने के लिए..हज़ारो वादे निभा दिए मैंने...तू कही खफा न हो,इस डर से तेरी

बदनामी को अपना लिया मैंने...राह चलते लोगो से बेरुखी जो मिली मुझ को,तहे दिल से सर आँखों

पे रख लिया उस को....आंसुओ को छिपाया खुद की पलकों मे..तू कही बेज़ार न हो,इस डर से आँखों

से मुस्कुराना सीखा मैंने...बेवफा हो चुका है तेरा दामन,फिर भी तेरे नाम से खुद को अब तक जोड़ा

है मैंने.....

Tuesday, 18 October 2016

कुछ अरमान रहे..कुछ पैगाम रहे तेरे नाम....सजने के लिए,संवरने के लिए..तेरी ही बाहो मे टूट के

जीने के लिए..रातो को तेरी ही आगोश मे सोने के लिए..तन्हाई होती है क्या..धड़कनो की ज़ुबाँ कहती

है क्या..सब कुछ तेरे नाम,तुझी को देने के लिए..इंतज़ार करते रहे,करते रहे......जन्मो जन्म...सदियो

तलक ..रिश्ते का नाम अब कुछ नहीं लेकिन,मेरी रूह ने आज भी भेजा है यही पैगाम...तेरे नाम....

Thursday, 13 October 2016

तू कहे तो आसमाँ को धरती पे उतार लाए हम..कितने सितारों को तेरे दामन मे सजा दे हम...तेरे

लबो पे हँसी लाने के लिए,कितनी ही मुस्कुराहटें क़ुरबान कर दे गे हम...न जाने किए थे कितने वादे

तुम ने हमारे संग..तेरी वफ़ा के कायल रहे न जाने कितने जन्म...होश तो तब आया जब तुझे देखा

तेरी महज़बी के संग..बिखरे नहीं,टूटे भी नहीं..पर तेरी ख़ुशी के लिए अब कोई दुआ भी नहीं दे गे हम... 

Wednesday, 12 October 2016

बहुत दूर चलने के बाद,यह ख्याल आया ....बहुत दूर चलने के बाद,यह ख्याल आया ...

बहुत दूर चलने के बाद,यह ख्याल आया क़ि राहे-इश्क मे कही किसी की मुहब्बत को छोड़ आये है...

अपने पीछे जो देखे निशा किसी के कदमो के,खुद के हसीं होने का गुमान हो आया...लौट सकते नहीं

राहे-इश्क मे अब पीछे,बस किसी के कदमो के आगे होने का अहसास साथ साथ हो आया..पर्दानशी

इंतज़ार करे गे ताउम्र तेरा,इबादत मे रखे गे खुदा के बाद बस नाम तेरा..इन लफ़्ज़ों की याद मे फिर

से यही ख्याल आया,कोई है आज भी जिस के लिए यह सारी दुनिया छोड़ आये है...
हर राज़ खोले गे,तो बिखर जाओ गे....कही है धुँआ तो कही है दरिया पानी का....बहुत ही मुश्किलो से

रखा है खुद को जीने के काबिल...सब कुछ बता दे गे तो हमारी तक़दीर पे मायूस हो जाओ गे...वो मंज़र

जो गर देखा होता तुम ने..बिखरते सपनो का टूटा हुआ जहाँ मेरा, जो देखा होता तुम ने...मुस्कुराते हो

कम क्यों इतना,यह खामोश सा सवाल न पूछा होता तुम ने..

Monday, 10 October 2016

 ना जुबाँ ही खुली,ना इशारा आँखों ने दिया..बात बनने के लिए साथ तेरी वफ़ा ने दिया....य़ू तो बिखरे

है ज़ज्बात हज़ारो सीने मे मेरे,लिखते है लफ़्ज़ों की कहानी धड़कन की जुबानी...फिर कोई दुआ दी है

किसी अपने ने मेरी सलामती के लिए...मेरी ही ख़ुशी को मुकर्रर करने के लिए....मुहब्बत मेरी राहो

मे बस चली आई है..तूने जो समझा है मुझे अपनी तकदीरे-वफ़ा बनाने के लिए...

Saturday, 1 October 2016

दुख,दर्द,परेशानिया..और इस से जुड़ा एक खास शब्द सकूंन..दोस्तों,जीवन के पथरीले रास्तो पे चलते चलते एक मोड  जरूर आता है जहा एक छोटी संकरी पगडण्डी नज़र आती है..बस इस संकरी पगडण्डी पे सावधानी से चलिए..यक़ीनन सब दुःख भूल जाये गे..डर कर मत चले..पथरीली रहो से ज्यादा सुरक्षित यही पगडण्डी है--मौत और ज़िन्दगी दोनों तरफ है..दोस्तों जिस दिन आप अपने मन से मौत के ख़ौफ़ को पूरी तरह निकल दे गे तभी आप इस जीवन को सकून से जी पाए गे..जो लोग आप को प्यार नहीं करते,पसंद भी नहीं करते..उन की परवाह मत कीजिये..है खुल कर हँसे,खुल कर जिए,भरपूर जिए..उन के साथ जो आप की कदर करते है,आप को पसंद करते है और प्यार भी करते है..हर किसी को खुश करने के चक्कर मे खुद को बर्बाद मत करे..खास कर तब जब आप जीवन के उस मोड पर आ गए है,जहा जीवन का आखिरी सफर बचा है..अकेले रह गए है या फिर साथी के साथ है..अब जरूर खुल कर जिए..किसी का बुरा मत सोचे...शांत रहे---बहार से ही नहीं,अंदर से भी..सकून आप के साथ साथ चले गा...शुभ प्रभात दोस्तों--मंगल कामनाये....