Saturday, 30 July 2016

कहर है इस मौसम का..या तेरी तूफानी अदाओ की सजा--दिल के अरमान बने है फिर

हवाओ मे बिखरने की वजह--यह गेसू है या घने बादलो का अॅधेेरा,यह चेहरा है तेरा या

मखमली धूप का साया--निखरा निखरा सा तेरा बदन,हो जैसे बरसती ओस की बूॅदो की

खता--तुझे छू लेे या इबादत के पननो मे छुपा दे..बता दे तेरी कया हैै ऱजा---
कभी दिल टूटा तो तुम कयू याद आए--कभी बरसा यह नीर तो कयू दिल के छाले उभर

आए--मुहबबत को कभी बदगुमान नही होने दिया,पर तडपते तडपते बस बेबसी के यह

आॅसू छलक आए--राहे-उलफत मे बहुत ही अॅधेरे है,चिराग ढूॅढने के लिए पथरीली राहो

पे ही निकल आए--तुुम हो जहा,मेरी आवाज सुनो..अब तो उमर के उस दौर से भी बहुत

आगे निकल आए---
यादो के भॅवर मे आज फिर उलझे और  जी भर कर रो दिए...तडप ने फिर इतना

तडपाया कि सीने के जखम फिर उधड गए..आॅखे बरसा रही है आॅसू और हम गालो पे

अशको को महसूस करते रहे..करते रहे...दरद जो इतना जानलेवा है कि बताने के लिए

किसी काॅधे का इॅतजाऱ करते रहे...अकेले है बहुत ही तनहा है..यादो को सीने से लगा

कर मौत को बुलाते रहेे..बस बुलातेे ही रहे...

Thursday, 28 July 2016

रिवाजो की इस दुनिया से बेजाऱ है हम..जो उठाते है हर बात पे सवालात,उन नादानो से

नाऱाज है हम..खुदा की बनाई दुनिया मे,बिखरे है हजारो अफसाने...कभी सूरज की तेज

किरण सेेे जमाना जल जाता है..कभी चाॅद की आशनाई पे गजले हजारो लिख देता हैै...

इशक की राहो मे खलल डालने के लिए,दसतूरो की इॅतिहाई है..तेरे मेरे सपनो को तोडने

के लिए हर रॅजिश आजमाई है..तभी तो जमाने के रिवाजो से नाऱाज है हम....

Wednesday, 27 July 2016

बरसो बाद भी..कयू मुहबबत तेरी दिल के दरवाजे पे दसतक सी दे जाती है--उन तमाम

यादो को आज भी सीने मे छुपाए..कयूू पलको को भिगो ही जाती है--हॅसते है खिलखिला

कर इस जिॅॅदगी को जीते है..पर तेरे साथ बिताए वो शाही लमहे दरद से दिल को तार

तार कर जाते है--मिलो गे गर किसी मोड पे,तो सवाल पूछे गे...टूटन यह साझेदारी की

कया तुम को भी टीस टीस जाती है--

Sunday, 24 July 2016

ना रहे गेे हम,ना रहो गे तुम---हवाओ मे महके गी तेरी मेरी मुहबबत की खुशबू--बीत

जाए गी सदिया हजारो, पर गूजे गी फिजाओ मे पयार की कहानिया..तेरी मेरी--यह

इशक तेरा दीवाना सा,यह हुसन मेरा अफसाना सा...दे जाए गा पैगाम पयार मे बहकने

वालो को--मिसाल दे गी यही दुुनिया हमारे रूहे-जजबात की...जब ना रहे गे हम और ना

रहो गे तुम--

Tuesday, 19 July 2016

खुद को खुदा समझने की गलती  कयू करते हो--बात बात पे..दुनिया है मेरेे बस मे..यह

कहने की हिमाकत कयू करते हो--बेवफाई तो की तुम ने,पर बेवफा मुझे कह कर हमारी

मुहबबत को बरबाद कयूूू करते हो--यह जिॅदगी अमानत है ऊपर वाले की,साॅसे चलती है

बस मेरे नाम से..यह जता कर कयू मुझे खुद से दूर कर बैठेे हो---

Sunday, 17 July 2016

बरसा आज इतना पानी--कहर बन कर बरसा,पननो पे मेरे--हजारो पननो को भिगोया..

सयाही को गहरी बूॅदो नेे अलविदा कह दिया--लफज जो ढले थे जजबात की तॅहाई मे...

जजबात जो लिखे थे खून की सयाही से--कही था दरद लिखा,कही मुहबबत की कहानी

थी--आगाह करते है ऐ बरसाती मौसम तुझ को,पननो को भिगोया है तुम ने...पर दिल

रूह इबाबत को ना मिटा पाओ गे..महबूब मेरा बसता है यहा,उस की जगह तुम कभी ना

ले पाओ गे---

Saturday, 16 July 2016

तेरा आना जिॅदगी मे मेरी..एक खुशनुुुमा एहसास था---बरसो तेरा घर को महकाना..एक

इबादत..शाही रूतबे का पैगाम था--वो चेहरा,वो आॅखे..वो बेहद मासूम सी तेरी शरारते--

कभी लिपटना,कभी घॅटो मेरी नजऱो से ओझल होना..फिर अचानक गोद मे मेरी सिमट

जाना--तेरी जगह आज भी वैसी है..तेरा वजूद आज भी कायम है--सीने मे आज भी वही

तडप कायम है--हा तू कही गया ही नही,मेरे वजूद-मेरी रूह मे अब भी शामिल है---

Tuesday, 12 July 2016

हवाओ मेे घुल रहा है तेरे पयार का नशा...तभी तो महकी महकी है यह फिजा...छू कर

मेरे बदन को जब जाती है,और लौट कर जब आती है-तेरे बदन की वो खुशबू ले आती है

हजारो चिॅगारिया कौॅॅध जाती है..तडप कहती है अब इॅतजाऱ खतम करो.रातो को जगाने

का यह सिलसिला अब बस भी करो...आ जाओ शाही नवाब बन कर,कि घुलता जा रहा

है तेरे पयार का गहरा नशा....
रूहे-साथी हो मेेरे,खयाले हमराज नही--दिल की धडकन मे बसे,सरताज हो वैसे ही मेरे--

तनहाॅ जो हुए गमे-तनहाई मे,खाई चोट जब जब जमाने की आजमायश मेे--रोए है तेरे

उसी काॅधे पे,जखमो को दिया आराम तेरी उनही आॅखो ने--कौन कहता है कि तू दूर है

मुझ से,पुकारा जब जब शिददत से तुझे..दिया है साथ मेरा रूहे-साथी मेरा बन के---
वो दूर तक तेरे साथ चलने का वादा..उसी धूप मे फिर से नॅगे पाॅॅव भटकने का वोही

वादा..तपते रेगिसतान मेे हाथो मे हाथ थामे,खिलखिलाने का मासूम सा वादा..तुम ने

जो कहा..आ भीग ले बारिश की तेज फुहारो मे,हम हॅस दिए आॅचल को भिगो के, तेरी

तसलली का वो भीगा सा वादा..हाथो मे लिए तेरे चेहरे को,ताउमर तुझी पे मरने का यह

इबादती वादा...

Sunday, 10 July 2016

इजाजत कयू माॅग रहे हो, मेरी दुनिया मे आने के लिए...कयू थके हो इतना कदमे-खाक

मेरी बाहो मेे आने के लिए..जमाना रॅजिशे लेता है तो लेता ही रहे,डर कर ना जिओ साॅसे

लेनेे के लिए...मुहबबत होगी पाक तो जमाना खाक हो जाए गा...हजारो ताने देते देते ,

 खुद ही खुदा के दरबार मे जवाब-देही के लिए मजबूर हो जाए गा...आ जी ले अब खुल

के जरा..ना माॅग इजाजत अब मेरी दुनिया मे आने के लिए....



उदासी कहती है कोई नही तेरा...बरसता पानी कहता है बहा दे नीर,कि अब कोई नही

अपना...धडकने जुबाॅ दे रही है,आगे सफर पे चलने के लिए...कदम जो भरे थे थकावट

से इतना,वो जिॅदगी की तेज रफतार पे अब राजी है चलने केे लिए...ना अब आगे है कोई

ना पीछे मुडना है कभी...बस मॅजिल को पाने के लिए चलना है....चलना है अभी....
राहे बॅद होती है जहा..रिशतो का दरद जहा देता है धुआ..आॅसू जहा बरस बरस कर देते

है सदाॅ..दौलत की चकाचौॅध से दम घुटता है जहा..दिल की तडप जब बनने लगती है

खुद ही के जीने की वजह.....हम तब पाॅव रखते है खुदा की इस जमीॅ पे,खुद से खुद को

मॅजिले-ताकत की तरफ..लौट कर ना जाए गे उन दागदार राहो पे,बस पननो पे बसा ली

अब दुनिया ही यहा......

Saturday, 9 July 2016

शहजादी हू तेरी..इॅकार नही अब मुझ को--ले चल सात समॅदर पार..कही इॅकार नही अब

मुझ को--हर रसम निभाए गेे सॅग तेरे..कोई देखे ना तुझे बस इस दिल मे छुपा ले गे

तुझ को--हसरते जो उठती है तेरे मेरे सीने मे मुहबबत बन के..ताउमर निभाए गे रिशते

की इॅतिहा बन के--आॅखो से जो कभी बरसे आॅसू..कलश पूजा का समझ पलको पे बिठा

जाए गे--
शौक नवाबो के है,पर सॅग फिर भी तेरे चलने को राजी है--आदी ही नही गुरबत की इन

वीरान रातो के,पर मुहबबत मे तेरी सब सहने को राजी है--लोग कहते है दुनिया जो सज

गई सॅग तेेरे,मौत की बरबादी फिर लाजिमी है--इबादत के रॅगो मे हर बार देखा है चेहरा

तेरा,फिर कयू ना माने कि सात जनमो का सफर तेरे ही सॅग बाकी है--
मै ना भी कहू तो तुम समझ जाओ गे---दिल धडकता है कयू देख कर तुमहे...पाॅव भी

टिकते नही कयू देख कर तुमहे....बारिश की तेज फुहारे भिगोती है बदन को मेरे,पर कयू

जलता है यह बदन फिर भी आसमाॅ के तलेे..जुबाॅ बस खामोश है,पर लफजो की कहानी

कयू गुसताख है....हा मै ना भी कहू तो यकीकन तुम समझ जाओ गे---

Wednesday, 6 July 2016

हर बात पे इन आॅखो से सैलाब बहा दे..ऐसे भी नही रहे हैै हम---तेरी आगोश मे आने के

लिए पहले की तरह तडपे...वैसे जाॅ-निसार अब नही है हम---तेरी गुसताखियो पे खुद

को ही सजा दे..वो गुलामे-अॅदाज से बरी हो चुके है हम---दरद तूने दिए बेइॅॅॅतिहा जो हमेे.

उसी का नतीजा है कि रिशते-खास से महरूम हो चुुके है हम----

Tuesday, 5 July 2016

मुझे जिॅदा रखने के लिए...खुल के साॅसे लेने के लिए...तेरा वजूद काफी है---मैै जीवन के

जिस रासते से गुजरू..तेरा एहसास काफी है---बहुत कुछ जो बिखरा है तेरे जाने से..उस

को सॅवारने के लिए तेरी इक तसवीर का होना ही काफी है--लोग मुझे तेरा दीवाना कहते

है..तू माने ना माने....महजबीॅ तेरी होने के लिए..बस तू शॅहशाह है मेरा...इतना काफी है
विशवास की डोरी मे बॅॅॅधा,सीने मे लहूू बन कर बहा...कभी रोकेे सेे ना रूका,आॅॅॅखो मे इक

जजबाती सा सवाल बना....तेरे मेरे रिशते की कामयाबी का धुुआधार नशा...लोग उठाए

गेे आवाज किसी अधूरी सी कहानी की तरह...कभी बिखेरे गेेेे अलफाज फकीरी-अॅॅदाज

की तरह...फिर भी रहे गा यह नशा राजसी ठाट की शोहरत की तरह..... 
यू तो यह जिॅदगी बहुत इॅतिहान लेेती हैै..कभी देे कर खुुशी हवाओ मे उडा देती है..जीने

की राहो मे खुशनुुमा रॅग बिखेर जाती है...मै हू रॅगीने-वफा तेरी यह एहसास दिला खुद

से जोड लेती है...यकीॅ होता है जब इस की मासूम गुसताखियो पे..तभी सीने को चीरने

की सजा देती है..रूह को रूलाती है...बेखबर बन कर होश पे होश उडाती है..

Saturday, 2 July 2016

हर बरसती बूॅद मे लिपट कर आया है पैगाम तेरा..मोती की तरह सॅभाल कर रखा है हर

इबादती पैगाम तेरा....कोई छू भी ना ले इशके-पैगाम को,महफूज रखा है दिले-दरबार मे

शाही ईमान की तरह...तेरे आने से पहले पढ चुके है हर लफज बूॅदे-महबूब की तरह..अब

बचा है सॅवरना मुमताजे-शहॅॅशाह की तरह....
नासाज है मगरूर नही..हुसने-यार है पर दगाबाज नही...परछाई की तरह साथ रहते है

तेरे..पर शक के दायरे मे बॅधा यह पयार नही.....तलाश मे बिता दी सदिया कई हम ने..

तू रहे ऱाजदार मेरा,इस से जयादा खवाहिश भी नही मेरी.....रिशता तो जनमो जनमो

का है..पर सात फेरो से जुडा हो साथ...यह जरूरी तो नही.....