Wednesday, 29 June 2016

जिॅदगी की तलाश मे जो निकले..तो तुम मिल गए--साॅसे जो उखडी उखडी सी थी..उन

मे धडकन बन के तुम समा गए--आॅखे जब जब नम हुई..तेरी पलको ने इनहे थाम

लिया--थके थके कदमो से जो ढूॅढने लगे खुशी..तेरी बाहो के सहारे ने मेरे आॅचल को

दुआओ से बाॅध दिया--अब समझे जननत तो तुम मे थी..हम बेवजह वीराने मे भटकते

रहे--

Sunday, 26 June 2016

हर बेताब तमनना की तरह कयू दिल मे उतर गए हो तुम--इक बेमौसम बरसात की

तरह अकसर इन आॅखो से बरस जाते हो तुम--कभी खिलखिलाती हॅसी बन कर मेरे ही

जीवन मे उतर जाते हो तुम--ना याद करना चाहू तुमहे तो भी मेरे खवाबो मे दुआ बन

कर छा जाते हो तुम--अब कहते है शुकरीया हमदम..गुलिसता  बन कर साॅसो मे घुल

गए हो तुम---

Saturday, 25 June 2016

वो पूछते है हम से अकसर..मुहबबत की इतॅिहा है कहा तक--वजूद मेरा जो ना रहा कभी

चाहत का दौर रहे गा कहा तक--जमाने के डर से किसी और के हो जाओ गे या पयार मे

मेरे तडप कर रह जाओ गे--यह जिॅदगी है अब अमानत बस तेरे नाम की..ना तडपे गे ना

किसी के हो पाए गे..रूह मे रूह को समेटे तेरी दुनिया मे चले आए गे--

Thursday, 23 June 2016

इतने बेगैरत तो नही कि बिन बुलाए तेरे दर पे चले आए...दौलत की चकाचौॅध मे खुद

के वजूद को ही झुठला जाए--इबादत की रसमो से जुडा है इस दिल का आशियाना--दूर

दूर तक नही है जिॅदगी के उलझे सवालो का ताना बाना--वो मुहबबत ही कया जो चॅद

सिकको मे बिक जाए--कभी तेरे दिल से उठे गर इशक का पाक दरिया..तो मेरे इॅतजाऱ

को दुलहन का लिबास पहना जाना--
मै ना भी रहू जब इस दुनिया मे..मेरे लफजो मे मुझे पाओ गे--जब भी ढूॅढो गे नाम

मुहबबत का..मेरे चेहरेे पे लिखा पाओ गे--रूह को छूने के लिए पास आना ना मेेरेे..रूह

की तनहाई से परेशाॅ हो जाओ गे--दरद के आॅचल मे बिताया जीवन सारा..खुशी की इक

लहर के लिए इन हवाओ मे कही गुम हो जाए गे--आॅख नम हो कभी तो मेरेे लफजो मे

ही मुझे पा जाओ गे---
कलम जब भी लिखती है कागज के पननो पे..टुकडे दिलो के हजार कर देती है--सूखती

है सयाही जब तक..तब तक कितने दिलो को जोड भी देती है--हर पल बिखरेती है ना

जाने कितने ही अफसाने..हवाओ मे गुम रिशतो को ढूॅढ लाती है--पल पल खिलते हुए

सॅसार को बॅधन मे बाॅध जाती है--हा यह कलम जब भी लिखती है..पननो पे गजब ढा

जाती है---
 कहने को तेरी मासूम अदा ही सही..पर हम तो उस पे वारी वारी है---खॅजर कितने भी

चुुभा सीने मे मेरे..लहू से भीगा यह दिल तेरे नखरो पे वारी वारी है---बुझते है दिए तेज

हवाओ से बेशक..पर तेरे हुसने-अदा को साथ लिए यह जमाना तुझी पे ही भारी हैै---हॅसी

को यू ना छुपा आॅचल मे ऐसेे..तकदीरे-फरमान को हथेेली मे लिखा यह दीवाना आज भी

तुझ सॅग राजी राजी है---

Tuesday, 21 June 2016

फूल बरसा दिए हम पे..यह कह कर--मेरा बनने के लिए रिवाजो की कया जरूरत है---

नरम ओस की बूॅदे हम पे बिखरा कर..खोला इक सच ऐसा कि इस हुसने-हसीॅ को गहनो

की जरूरत कया है---हाथो को चूमा और कहा..कलाईयो को सजाने के लिए अब कॅगन

की जरूरत कया है--माशा अललाह इॅतिहा पयार की जब है इतनी तो इस दुनिया की

जरूरत कया है--- 

Monday, 20 June 2016

इकरार करो ना अपनी मुहबबत का मुझ से..कब तक हमे यू तरसाओ गे---रेतीली

वादियो मे भी,अब बरस गए है बादल..हमे जानम तुम कब तक सताओ गे---पल पल

का यह इॅतजाऱ तो मार डाले गा हमे..साॅसे जो रूकी तब आए कया जिॅदगी मेरी लौटा

पाओ गेे---हॅसी हॅसी मे मुहबबत को खेल मानने वाले..यह तो इबादते-इशक है,खुदा के

दरबार से भी माॅॅगो गे हमे..खाली हाथ लौट आओ गे--- 

Sunday, 19 June 2016

चलने के  लिए कोई राह तो नही..बस तेेरे कदम काफी है--सुनू किस की कहा कितनी..

तेरेे दिल की धडकन ही सुनने के लिए काफी है--शहनाईया बजती है कहा कैसे..बिन

रिशते तेरे हो कर जिए,इतना ही मेरे लिए काफी है--तेरी रूह से जुडा है वजूद मेरा..दिल

के एहसास से बना है सॅसार मेरा..फिर कयू ना कहू तू मेरा है..जमानेे को जलाने केे लिए

मेेरा नूूरे-नशीॅॅ होना काफी है--

Friday, 17 June 2016

ना देख शोख निगाहो से मुझे..दुनिया से बेखबर हो जाए गे--ना उठा नाज इतने मेरे..

तेरी इस आदत के मशगूल हो जाए गे--तेरी चाहत मे तडपना सीखा है मैने..दूर जाना

नही बिखर जाए गे--हर ऱाज तेरा है मेेरे सीने मे,मेरी हर खता को छुपाया है तुम नेे--वो

पल जो भीगे है मुहबबत के शाही रॅगो मे..बाॅध ले रूहे-वफा मे अपनी..कि जुदा हो कभी

इस से पहले....मर जाए गे...हा मर जाए गे---
चाहत मे उलझे है तेरी इस कदर..कि चेहरा कोई और दिखता नही--तू गुजरता है जिन

राहो से..उन तमाम राहो से ऱशक होता है मुझे--यह हवाए जब जब छूती है तुझे..पूरी

फिजाओ से खौफ होता है मुुझे--जी चाहता है छुपा के रख लेेे सीने मे तुझे..पर यहा भी

तेरे दिल का हुकम चलता है--आ बॅद कर ले अब इन आॅखो मे तुुझे..पर आॅसूओ की इन

ऱवानगी से..तुझे कयूू खोने का डर लगता है----
मेेरे लिए तेरी इक नजऱ ही काफी है..फिर तकरार की साजिश कैसी--सजदे करते है तेरेे

आने पे हर बार..फिर सजा पाने के लिए यह जुलम अब भारी है--ताकते-इशक से तेरे

बेहाल रहते है..फिर हुसनेे-वफा पे पहरे की  आजमायशे कयू आई है--तडपते है मुहबबत

की आग मे दोनो..फिर खतावार कहलाने केे लिए हम ही कयू गुनहगारी है--
कलाईया जो पकडी तुम ने..कयू जजबात निखर गए--बेशक टूटी है चूडिया..पर खवाब

तो तेेरे साथ तेरी ही आगोश मे सिमट गए--हर टुकडा टूटा हुआ,तेरी मेरी मुहबबत को

जोडता जाए गा--हर सपना हर टुकडेे मे तबदील होता जाए गा--दुनिया इसे तेेरे मेरे

पयार की नाकामी समझे गी..हम खुश है कि दुनिया की बुरी नजऱ से हमारा इकरार

सॅवर गया---- 
हसरते कहा खामोश रहती है..जिॅदगी को जगाने के लिए चुपके से कदम रख जाती है---

महकने के लिए दिल का आॅगन है बहुत..फिर भी जमाने को हवा दे जाती है---मुहबबत

के निशाॅॅ जहा दिख जाते है..आग को चिॅगारी की खबर बता जाती है---बहकने दो..अब

सॅवरने भी दो..साजन के आने की खबर,उस के आने से पहलेे ही दे जाती है--- 

Tuesday, 14 June 2016

बादल बरसे तो फिर बरसते ही चले गए..एहसास दिला के किसी के पयार का,तूफाॅ बन

हम पे कहर ढा गए--भीगेे है पूरी तरह कुछ बूॅॅदो मेे तो कुछ चाहत के ऐतबार मे--दिल तो

बुला रहा है उस अजनबी से पयार को,पर लब है कि खुलते नही इस इकरार के इजहार पे

दुआ है खुदा तुम से..बरसे है जैसे बदरा,बरस जाए वैसे खुल के सनम का पयार हम पे---
वादियो मे फैली है खूबसूूरती इतनी..यह आॅखे फिर भी बेवजह कयू भर आई है--चेहरे

का नूर है बरकरार उतना..मन के किसी कोने मे यह उदासी कयू घर कर आई है--कोई

शिकवा नही ऐ जिॅॅॅदगी तुझ से..फिर यह अजनबी सी परेशानी कयू दिल पेे छाई है--घुल

रही है साॅसो मे खुशबू इतनी..फिर भी किस की चाह मे यही साॅसे कयू थम सी आई है--

Monday, 6 June 2016

निखर गए है तेरे पयार मे इतना..आईना भी देखते है तो शरमा जातेे है इतना--लगता है

तेरी निगाहे बॅद दरवाजो से निहारती है मुझ को--कि सरसराहट से ही खुद मे सिमट

जाते है कितना--रूबरू तुझ से होने की ताकत जुटाए कैसे..सज के सॅवर के तेरे ही

नजदीक आए कैसे--मिलन की घडिया तो बस आने को है..घबरा कर पसीने पसीने होते

जा रहे है कितना--

Sunday, 5 June 2016

यही कही आस पास तेरे..मेरी धडकने बसती है--तू मिलता है जिस तरह मेरी पहचान

बन कर..मेरी रूह को सकून मिलता है--वादो की दुनिया से अलग..हमारी इक दुनिया है

जहा बसता है वो पयार..बेपनाह इबादत की जहा मॅजूूरी है--तूने कुछ कहा नही..पर मैने

तो सब सुन लिया--आॅखे तो बॅद थी मेरी..पर सपनो को रॅग तूने दे दिया---

Saturday, 4 June 2016

कही जिॅदगी की वो खता..कही मौत की सुलझी सी इक वफा...दरमयाॅ रही तेरे मेरे बीच

समझौतो को निभा देने की वो अदा....हजारो रॅॅग दिखाती रही यह वफाए-जिॅदगी की

सजा..कभी तनहाॅ हम रहे तो कभी तुम ने सही उदासी के रॅगो की वजह...टुकडो मे बटी

मुहबबत की वजह..कभी हम जुदा तो कही बदल गई तेरी राहे-वफा.....

Friday, 3 June 2016

हमारे एक आॅसू पे कभी जान लुटा देने वाले..हमारे चेहरे पे दरद की लकीरो को पढने

वाले..खामोशी की वो बिखरी सी जुुबाॅ समझने वाले..कभी हलकी सी हॅसी मे मेरी तमाम

 खवाहिशो को जिॅदगी देने वाले..आज बिखरे है मेरे आॅसू चारो तरफ,दरद की चादर मे

लिपटा है तेरा नूरे-बदन..लौट आओ लौट आओ..मेरी साॅसो को मुझ से जुदा कर देने

वाले..

Thursday, 2 June 2016

मुुहबबत नाकाम नही..तेरी मेरी--फिर भी कयू इस जिॅदगी से डर लगता है--बहके है

कदम सॅग साथ तेरे..फिर भी सॅभलने मे कयू डर लगता है--बात बात पे रो देते है..तू है

खफा फिर भी आॅसू पी लेते है--यह रसम है कौन सी..कभी रोते है तो कभी आॅसू ही पी

जाते है--बेवफा नही हो तुम..जानते है--फिर भी तेरे लौटने की इॅतजाऱ करते करते कयू

डर जाते हैै---
बहुत सोचा-बहुत चाहा..तुझ से दूर चले जाए--बस जाए कही दूर-जहा ना तू हो..ना तेरी

यादे हो--उदास हो जिॅदगी बेशक..पर सकून खुद के साथ हो--मिलने के लिए ना कोई

तकदीरे-खास हो..ना गुफतगू के लिए कोई रूहे पाक हो--इनितहा तो तब हुई जब दिल

ने कहा.. मिले गा तुझे कब कहा सकूने दासताॅॅ..जब तेरी रूह से जुडी है तेरे पयार की

रूहे-दासताॅ---