Monday, 29 February 2016

तेरे दिल मे..हम अपने लिए इतनी नफरत भर जाए गे---कि तुझे जब जब मेरी याद

आए गी..तेरे दिल मे हम खुद के लिए इक तबाही की आग ही नजऱ आए गेेे---जब जब

तुझे मेरा नाम सुनाई दे गा..तब तब इक गहरी तडप से तेरे मन को सुलगा जाए गे---ना

यकीॅ कर पाए गा मुहबबत के नाम को..मेरी मीठी यादो को तू बददुओ मे दफन करता

खुद को पाए गा---

Sunday, 28 February 2016

सवालो की दुनिया मे..वो बेमतलब सा इक जवाब बन गया---खुदगरजी की दौलत को

जो ना समझा..वो दीवाना हमारा कयू कर बन गया--हसरते काबू मे जो रखते..यकीकन

 इस हुसन की सलामी लेते--दिल फेक आशिक ना होते..तो दुआओ मे हमारी शामिल

होते--रूखसत कर दिया उस को खुद से हम ने..अब वफाए जिॅदगी को वो समझे या ना

समझे---

Saturday, 27 February 2016

दोसतो--जब भी किसमत..जिॅदगी तकलीफे..दुख..दरद..परेशानी देने लगे--और आप इन से निकल ना पा रहे हो..तब भगवान् मे आसथा और बढा दीजिए..उन रूचियो को समय दीजिए जिन को आप कभी पूरा करना चाहते थे---खामोशी को अपना लीजिए...धीरे धीरे आप खुद को सहज महसूस करे गे--जिॅदगी बार बार नही मिलती...इस को जीना सीखे--नई सुबह मुबारक हो--शुभकामनाए सब के लिए----

Friday, 26 February 2016

कहानी इक ऐसी हू मै..जिसे तुम कभी ना लिख पाओ गे--दासताॅ हू ऐसी..जिसे तुम

कहा समझ पाओ गे--उलझनो को उलझाती शमाॅ हू ऐसी..उस के परवाने तुम नही बन

पाओ गे--जो साॅसो को मिटा जाए दीवानगी के लिए..उस मिसाल को तुम कहा झेेल

पाओ गे--मुहबबते पाक जो करो गेे कभी..तब ही मेरी जिॅदगी के किरदार बन पाओ गे--
इॅतजाऱ अब इतना भी मत करवाना कि तुझ से फिर दूर हो जाए हम--दरद मे फिर

इतना ना डुबोना कि फिर से बिखर जाए ना हम--इतनी शिददत से जो चाहा है तुझे वो

किसी मननत से कम तो नही---खामोश है पर रोए है बहुत..कभी गुफतगू तो कर --ऐसा

ना हो कि बेमौसम की बरसात की तरह फिर से बरस जाए ना हम---

Thursday, 25 February 2016

हर आॅसू मे इक तसवीर उभरती है..फिर बिखर जाती हैै--यादो के झुरमुट से कोई याद

..बार बार जीने का एहसास दिला जाती है--इसी सैलाब से इक दिन तुझे खोज लाए गे..

अपने अरमानो को तेरी ही आगोश मे सजाए गे--खुदा साथ दे गा..तो पाताल से भी ढूढ

लाए गे--करे गे जिॅदगी का आगाज तुझ से..और अॅजाम भी तेरे साथ दे पाए गे--
मेरी शायरी...सिरफ उन दिलो के लिए...जो पाक साफ मुहबबत के मायने समझते है..पयार..दुलार..मिलन..जुदाई..सुख..दुख..दरद..उलझन..वेदना..तडप..बेबसी..जिॅदगी..मौत..कशिश.....इन सभी को एक नाम दे जाती है....शायरी........

Wednesday, 24 February 2016

तुझे पाने के लिए हर दरद.हर कारवाॅ से गुजर जाए गे--चाहे गे तुझे इतना कि तेरी ही

तकदीर बदल जाए गे--मेरी नूरानी चेहरे पेे फिदा होने वाले..तेरेे सपनो मे आ आ कर

तेेेरा ईमान डगमगा जाए गे--तेरी ही बेेेरूखी को तेरे ही दायरेे से निकाल जाए गे--ना कर

गरूर अपने आप पेे इतना..कि मेरे छूने से तेरे जिसमे-जान बिलकुल ही पिघल जाए गे----
वकत गुजरता जो तेरे साथ..तो यूू शिकवा ना करते--बेमौसम बारिश की तरह यू ना

बरसते-जुलफो को बिखरा कर यू बदरा तो ना बनते--पाॅव जमी पे ना होते..हवाओ मे

कही उडते फिरते---जब नही हो साथ मेरे..तो तनहा हूू--चूडियो को खनका कर यू

उदास ना होते--

Tuesday, 23 February 2016

वो तेरी सॅगनी .. तेरी किसमत है वो .. तेरी जिॅदगी के हर लमहे की साझेदार है वो .. कोई और तेरी जिॅदगी का हकदार ना हो .. तेरे पयार पे किसी और का पहरा ना हो .. जो दिखता है अकसर वो सच नही होता .. दूर रह कर भी कोई दूर नही होता .. कुछ रिशते बनते है फना होने के लिए .. बिना जाने उन को यू खामोश ना हो .. मजबूर हो कर ही कोई दूर होता है .. साॅसो की जिॅदगी के लिए उस से दूर होता है .. आबाद रहे तू हर लमहे मे .. कि कोई रूह से तेरे नाम को सलाम करता है .. दुआ ही दुआ है बस तेरे लिए .. तेरे साथ तेरे हमसफर को भी रूहे-सलाम करता है---
तू मेरा सब कुछ है..फिर भी कयू तनहा हू मै---तेरी जिॅदगी मे शामिल हू..पर कयू साथ

नही हू मै--हर दरद को सीने मे समेटे..बस अब खामोश हू मै---इसी खामोशी को अपनी

मौत के साथ ही ले जाऊ गी--कागज के पननो पे दासताॅ अपनी..लिख कर छोड जाऊ गी

--तब मुझे ठीक से जानो गे..पर धुआ बन कर हवा मे गुम हो जाऊ गी मै---

Monday, 22 February 2016

मुददतत बाद मिला कोई ऐसा..जो हमारे जीने का सबब बन गया---दिल के दऱवाजो को

खोला..आहिसता आहिसता उस के लिए---अरमान जगे हलके हलके मुहबबत की

तपिश के लिए--अललाह मेरे...सह नही पाए वो इलजाम-ए-बेवफाई का--दीवानगी के

आलम मे बदहवास हैै--पलको पे छाए सैलाब के बादल..दिल के नासूर बन गए----

Sunday, 21 February 2016

हर सच को मेरे..झूठ का लबादा पहना कर तुम ने..खुद ही इक दूरी बनाई है---फिर भी

तेरी बेबाकी को..जीने की दुआ बनाई है--दिल टूटा.खुद भी टूटे..हर शिकवा दफन कर के

..खुद की सफाई मे ना कहे गे..और कुुुछ----बस दूसरो की खिदमत मे..फिर से इक बार

..सजाए जिॅदगी बनाई है---

Thursday, 18 February 2016

सदियो मे पैदा होने वाली..तेरी यह दुलहन..कयू उदास है आज--लौटा कर किसी को उस

की जिॅदगी..कयू फिर भी तनहा है आज--मौत को जो देखा इतनेे करीब से..कयू फिर

इस जिॅदगी से पयार हो गया--साॅसो को लुटा कर दूजो के नाम..कयू जिॅदगी का हाथ

फिर थाम लिया--हर वो दरद निभाए गे तेरे लिए..कि तेरी इस बात को काबिले ताऱीफ

कर के लौटेे गे तेरे पास कि तेरे जैसी दुलहन सदियो मे ही जनम लेती हैै--

Wednesday, 17 February 2016

तेरा दिया वो आशियाना,मेरी मुहबबत केे लिए--तेरी इस सौगात पे आज भी कुरबान हैै

तेरे लिए--तू नही साथ मेरे,फिर भी रूह ने तेरी दसतक दी है हर पल..मेरे दिल के लिए--

नही है आज तेरे आशियानेे मे..बेकरारी है बहुत उस मे लौट जाने के लिए--ना रहे तो मर

के रहे गे तेरे उस आशियाने मे---बसाए गे इक नई दुनिया..जो होगी बस तेरे लिए और

मेरे लिए----

Monday, 15 February 2016

दरद की इनितहाॅ जब होती है..तो रो लेते है--वजह कुछ भी नही..फिर भी खुुद को ही

सजा देेते है---आॅसू से भरी यह आॅखे देखे ना कोई..बेवजह कुछ जयादा ही मुसकुरातेे है-

--जिन से यह दरद मिले..उन के नाम बताते हुए भी कतराते है--उममीद केे दामन को

अब दफन कर के..अपनी ही दुनिया मे इक उममीद की लौ खुद ही जला लेते है---

Sunday, 14 February 2016

कही उलझन कही टूटन..कही वो बॅधन बिखरे से----वो छूती सी तपन..वो बहकी सी

अगन..थकतेे से पाॅव बालू पे--- सूरज की तपिश सा यह जलता तन...बरफीली हवाओ

के आॅगन मे---इॅनतजार है अब किस का..मुहबबत का या लॅबी जुुदाई का---पसरा है यह

सननाटा जलती लौ के चिलमन सा..जिए कैसे यह दीपक अब कि सवेरा दसतक देेेने

को है---
वो मुहबबत नही..सिरफ इक खुमारी थी---उलझी हुई बातो मे इक उलझी सी बेकरारी

थी..ना खवाबो मे बसी..ना मुहबबत ही बनी..दो बॅूद आॅॅसू जो बन के ढली..वो छोटी सी

इक कहानी थी--भूली हुुई दासताॅ बन कर जो खतम हुई..वो तेरी मेरी बस इक मेहरबानी

थी--ना रूह से जुडी ना साॅसो मे रूकी..बस बन के खता खतम हुई---

Friday, 12 February 2016

मुुहबबत नाम नही ऐययाशी का..मुहबबत तो किताब है..इबादत केेे पननो का...जिसम

का मिलन गर पयार होता तो ना तेरा वजूद होता..ना मेरा वजूद होता.....पूजा के धागो

मे सिमटता..रूह की ताकत मे बदलता बस खुदा का बेपनाह इकरार होता..जिसम तो

जिसम है..मिट ही जातेे है....रूह को जो जीते..बस वही पयार होता..वही पयार होता....
दोसतो--आप के बोलने का लहजा आप केे अॅदर के इॅसान को साबित करता है..आप के बात करने का रूखा अॅदाज आप के रिशतो मेे दरारे डाल सकता है..किसी का दिल तोड सकता है..किसी को दुखी कर सकता है..किसी की आतमा तक को रूला सकता है..याद रखिए रिशते बॅधन बार बार..बार बार नही जुडते...वाणी पे काबू रखिए..ऐसा ना हो कि उमर भर इस बात का पछतावा रहे कि जीते जी आप ने हमेशा के लिए किसी को खो दिया...शबदो का मीठा जादू आप को भगवान् की नजऱो मे भी उठाता है...नई सुबह आप सब के लिए मॅगलमय हो..शुभकामनाए सभी के लिए....

Thursday, 11 February 2016

इक उदासी जो दिल पे छाई है--बेेवजह किसी की याद आई है--ना नाम था उस रिशते

का--ना मुलाकात ही हो पाई है--दिल को जो टटोला,तो ना कही मुहबबत की कसक आई

है--आॅखो को जो छुआ तो पलको मे नमी आई है--रूह से जो पूछा तो उस ने कहा-यह

तो उस रूह से जुडी तेरी जनमो की तनहाई है----
ना तुम नेे कुुछ कहा..ना मैने कुछ कहा...फिर भी सब सुन लिया....नजऱे मिली,नजऱे

झुकी..और पयार हो गया...दिल को थामे..दिल ही दिल मे इकरार हो गया...यह धडकने

अब कयू बहकती है...शहनाईयो का मौसम आ गया..तेरा मिलन मेरा मिलन यह कहता

हैै..टूट के मेरी बाहो मे आ कि तेरा वजूद मेरे वजूद मे समा गया...
हसीन है,पर बेवफा नही...पसनद है लाखो की,पर कातिल नही...ऱाज करते है लाखो की

चाहत पे,पर गुमाॅ खुद पे जऱा भी नही...इक इशारे पे मेरे,सजदे होते है...पर अपनी राहो

मे घिरे..किसी के कुछ भी नही....मुहबबत को मेरी अपनी जागीर समझने वाले...सपनो

मे मेेरे रॅग भरने के लिए लाखो है..पर हम किसी के भी नही..किसी के भी नही....

Wednesday, 10 February 2016

चुना है तुम ने मुझे..बना कर मुहबबत अपनी..शहजादी हू तेरी..तेरी नूरे वफा..तूने

बुलाया है मुझे अपनी दुनिया मे..कोई खूबसूरत सी कहानी को जनम देने कके लिए..

अब आ ही गए है जब तेरी दुनिया मे..तुझे वो खुुशिया दे जाए गे..तेरे अनदर का जहा

अपने पयार से सजा जाए गे..

Tuesday, 9 February 2016

उदास जिनदगी के मोड पर..इक हसीन शाम मिली...जो धीमे से कह गई.....जिनदगी

अभी इतनी बेेवफा भी नही.....देख...परिनदो ने अभी चहचहाना नही छोडा...हवाओ ने

फिजाओ को दीवाना बनाना भी नही छोडा...यह फूल महक रहे है आज भी तेरे लिए....

इन की खुशबू ने तेरा दामन आज भी नही छोडा...पलके ना भिगो अपनी...कि जिनदगी

अभी भी बेवफा नही इतनी......
किसी ने कहा मेेरे कानो मे हौले से....बनो गी ताउमर मेरी मुहबबत बन के...सजाऊ गा

माॅगा तेरी सिनदूरी शहनाई से..दूू गा दौलत के अॅबार शाही खजाने से...हम हॅस दिए उन

की बातो पे...आॅख भर आई उन की मुहबबत पे..कया करे गे दौलत के खजाने का..कया

करे गे शाही महलो का..बस देना मुझे रूहे मुहबबत..कि तेरी रूह ने ही मुझे पुकारा है...

Monday, 8 February 2016

ऐ हवा जऱा धीरे चल..मेरी जुलफो को ना उडा..महबूब मेरा छू चुका है इनहे अब..मेरी

आॅखो को ऐ सूरज इतना ना जला..कि डूब चुका है वो इन की मदहोशी मे..मेरे जिसम मेे

ना दरद जगा..कि जागीर का मालिक मेरा साजन है अब...जा चाॅद अब तू छुप जा घने

बादल मे..कि मधुर मिलन की बेला मे तू कही नही अब मेरे साथ...
चूडियो की खनक कयू कातिल है आज..बजी जो पायल,परिनदो ने कहा..कि हमससफर

तो है अब तेरे पास...तेरे आॅसूओ मे वो खुद को डुबो जाए गा..तेरी खुशी मे वो अब तेरे

साथ मुसकुराए गा..जिनदगी जो दे गी दगा..तुझे खुदा से भी माॅग जाए गा...किसमत पे

अब अपनी नाज कर कि दोनो जहा की खुशिया..वो तेरे नसीब को लौटए गा....

Sunday, 7 February 2016

कभी जिनदगी कर दी जो तेरे नाम..तो कसम खुदा की मर भी जाए गे..दे कर तुझी को अपनी साॅसे..खुद को खुद से आजाद कर जाए गे...फिर ना कहना कभी कि हम तेरी बातो सेे खौफ खाते है..तुझे किसी और की बाहो मे देख कर कयू डर जाते है..पास नही आते तेरे कि तेरी जुदाई से डर लगता है...तेरा दिल अब किसी और के लिए धडके..बस तब तो हम यकीकन तबाह हो जाए गे..तेरा होने के लिए खुदा की इबादत मे आखिरी साॅस तक झुकते जाए गे..खुददार है बहुुत..अपनी बातो से तेरी आशिकी को रूला रूला जाए गे..सोच कर करना पयार मुझ से..कि जनम लेे कर दुबारा तेरी राहो मे खडे हो जाे गे...
दोसतो---मेरी शायरी...पयार..मुहबबत..इबादत..वेदना..विरह..सजदा..कलपना..पूजा..तडप..मिलन..और उन तमाम  रॅगो को बयान करती है...जिसेे सिरफ सचची मुहबबत करने वाले ही समझ पाए गे....मेरी शायरी के हर पनने को इतना सहयोग देने का..तहे दिल से शुकरीया..शुकरीया----
गुजर रहे है जिस तनहाई से हम..तेरे उस साथ की याद आती है--वो लमहे.वो तेरी

गुफतगू...बाहो मे तेरी सो जाना--वो सकून की राते..वो तेरा हौले से बुलाना..मदहोशी के

आलम मे मेरी पायल को बजा देना--चूडियो को खनका कर..मुझे रातो को जगा देना--

पायल तो आज भी है..चूडिया भी है..पर उन को सजाने के लिए तूूू पास नही है--
राहे वफा मे जो वो मिले..हम ने राहे बदल ली--कब तक करो गे पीछा,हम ने तो निगाहे

ही बदल ली--पयार मे तेरे इबादत ही नही,आधी अधूरी मुहबबत मे यकी रखते ही नही--

आज दम भरते हो मेरी मुहबबत का,कल किसी और की बाहो मे ना हो---फिर जिस

दुनिया से जुडे हो तुम,उस मे मेरी जगह कही भी नही और कुछ भी नही--

Saturday, 6 February 2016

हर चाहत वो नही होती,जो परवान चढती ही--टूट कर चाहे कोई,और अपना बना कर ले

जाए कोई--हसरते आधी अधूूरी ही रह जाती है,टूट के डाल से खुद मे ही बिखर जाती है--

यकीॅ करने के लिए कोई होता ही नही,सपनो मे रॅग देेनेे के लिए आशियाना फिर

मिलता ही नही--जखम देने को हजारो मिलते है,पर सकून देने के लिए फिर खवाहिशे

जुडती ही नही--

Friday, 5 February 2016

वो नूर है किसी की दुनिया का..पर हम है नूर खुद की ताकत का--नवाबो की जिनदगी

के मालिक है हम..पर इशक की गुसताखियो से बहुत दूर रहतेे है हम---चैन उडा देते है

लाखो की नीॅदो का...पर खुद सकून की नीॅद सोते है---मुहबबत से दूर है आज भी उतना.

पर मुहबबत को लफजो मे ढाल जाते है हम---
मेरी शायरी का हर लफज..उन दिलो के लिए..जो सिरफ पाक साफ मुहबबत के लिए ही धडकते है...मेरी शायरी को पसनद करने के लिए...आप सब का शुकरीया...शुकरीया..
बाइजजत बरी कर दिया उस को अपनी जिनदगी से हम ने..दुआए दे कर अपने पहलू से

रूखसत कर दिया हम ने...वो चाॅद है किसी की दुनिया का,यह सोच कर भरी आॅखो से

उस को खुद से जुदा कर दिया...मुहबबत की कीमत कितनी होती है,दिल पे पतथर रख

कर सही फैसला कर दिया हम ने...

Thursday, 4 February 2016

हम खुदगरज नही इतने कि तेरी दुनिया मे बेेवजह ही चले आए--खौफ है खुदा का,कोई

खता ही ना कर जाए--फिजाओ मे तो बिखरे है ना जाने कितने ही सलाम--पर हम हर

सलाम को पीछे छोड कर,अपनी दुनिया मे जीने चले आए--इशक मुुहबबत कोई शै नही,

खरीदने का कोई मोल भी तो नही--फिर खुद से ही पयार करने,खुद के पास फिर चले

आए--हा चलेे आए---
मेरी बेबाकी को उस ने बेवफाई कह दिया..बोलने के खुले अनदाज को दीवानापन ही कह

दिया..उस से जो जुडने लगे तो हमे ऐयायाशी का सामान मान लिया..अकेलेपन को जो

जाना,तो मुझे खुद का मुकददर कयो मान लिया--हम तो खुद सेे ही जुडे है इतने कि

अब तो तेरे हर वादे को हम ने सिरेे से ही नकार दिया--
ठहरा हुआ था समनदर मेरा,कयू आ कर झकझोर दिया--खामोश पडी जिनदगी मे,

कयू आ कर खलल डाल दिया--किसमत अपनी पे नाज करते नही,पर किसी और की

किसमत का नूर बने गे नही--समभलते कदमो से चल रहे थे,कयू तूने कदमो मे मेरे

अपने कदम डाल दिए

Wednesday, 3 February 2016

जो सोचा ना था वो कयू हो गया..जिसे कभी देखा नही..चाहा भी नही...वो कयू यू पास

आ गया--ऱाज बहुत दिल मे छिपे है मेरे..जो कह दे गे उसे तो यकीकन खो दे गे उसे--

डरते है अपनी किसमत से..कि धुआ धुआ हुई मेरी यह जिनदगी पलट कर खाक ना हो

जाए--खुशी के यह थोडे से लमहे कही बरबाद ना हो जाए--
बदल गई कभी जो तेरी निगाहे,ना करे गे गिला तुझ से कभी--उममीदे-वफा का दामन

थामे,यू ही खामोशी से तुझे सजदा कर दूर निकल जाए गे--लोग पूछे गे जब उदासी का

सबब,तो आॅॅसूओ मे तेरा नाम भिगो कर मुसकुराए गे--दरदेे-दिल जब कभी सताए गा,

तो तेरी यादो को सीने से लगा कर इन साॅसो को जीते जाए गे--
खुले जो गेसू..कयू अॅधेरा हो गया--बिखरी बिखरी हवाओ मे..कोहरा सा छा गया--पलके

जो उठाई..सवेरा ही दसतक दे गया--लब जो हिले..इबादत मे सर झुुक गया--मेरी चाहत

का यह असर हुुआ तुझ पर कि देखते देखते तेरी सूरत पे..मेरी सूूरत का नशा ही छा

गया---

Tuesday, 2 February 2016

हम सभी अपनी जिनदगी को अपने तरीके से जीने के सपने सॅजोते है..जब सपने टूूूटते
है,तो बहुत तकलीफ होती है..दोसतो पर जिनदगी हार मान जाने का नाम नही..इसी तकलीफ से.दरद से खुद को आजाद करे..अब इस जिनदगी को दूसरे अनदाज मे जिए..अपनी रूचियो को समय दे..खुद को समय दे..उन लोगो से बहुत दूर रहे,जो आप का सममान करना नही जानते...छोटी छोटी खुशियो मे जिनदगी को तलाश करे..फिर से जिए..जिनदगी किसी के बिना रूकती नही..बस जीने के मायने ही बदल जाते है..याद रखे...यह जिनदगी बहुत खूबसूरत है.......
लिखते जाए गे..लिखते जाए गे..जब तक तेरा नाम खुद के नाम से नही जोड पाए गे..

पननो पे पनने..भर दिए हम ने..हर पनने पे तेरी गुफतगू का सिला छोड दिया हम ने....

कौन जाने किस राह पे..तुम से मिलना हो जाए..खुद को रखते है समभाल कर इतना..

कि लाखो की भीड मे सब से जुदा नजऱ आए..हा..तुझे पहचान जाए गे कि तेरी रूह ने

मेरी रूह के लिए..सदियो से एक पैगाम छोडा है........
जुडे जो उन सेे,बहकते चले गए--पुकारा जो तुम ने,हम तो खिचते चले गए--इजहारे-

पयार तुम ने किया था मुझ से,वरना हम तो अपनी जिनदगी मे मशगूल थे--कयू किया

तनहाॅ मुझे इतना,कि गहरे दरद मे नहला दिया--जा रहे है तेरी दुनिया सेे,फिर लौट कर

ना आए गेे तेेरे दामन मे----

Monday, 1 February 2016

यह आॅसू हैै या गुबार है दिल का--यह समनदर है या सैलाब है किसमत का--जो कभी हो

नही सकता,वो अधूरा सा खवाब कयू देखा हम ने--दामन तो भरा है काॅटो से,फिर कयू

गुलाब की हसरत की हम ने--बाइजजत बरी हो जाए इस दुनिया से,ना हो मलाल कभी

उस चाहत का-जो मेरा नही-फिर भी मेरा है---
ना पाया था कभी उस को,फिर भी खो दिया उस को--ना कभी रहा उस की चाहत का

नशा,फिर भी यह दिल कयू उदास हो गया--कया यह रूह का रिशता है,जो बेवजह ही

तडपा गया--कहानी किसमत की जो खुद लिखते,तो हर पननेे पे तेरा ही नाम होता--

अब यह आलम है,कि तेेरा नाम तो किसी पनने पेे नही--फिर भी पूरी किताब तेरी है--


इतनी बेताबी मेरे पयार की..वललाह..मैने देखी नही--मुझे दिल मे जगह दी..यह जगह

किसी जननत से कम तो नही--आज जिस मुकाम पेे है..तेरी ही दुआओ की सरगोशिया

तो नही--दिल के टुकडे कभी कर ना देना..कि इस घर से जाने की अब खवाहिश भी नही
दामन बहुत बचाया हम ने उन के पयार से-पर यह दिल ही धोखा दे गया--उन की वो

मिननते,वो आॅखो की जुबाॅ..इजहाऱे-पयार की वो दीवानी सी खता--दिल हमारा धडका

गई--रातो की नीॅद उडी तो खयाल आया कि मुहबबत की यह कोई सजा तो नही--करवटे

बदलते बदलते बॅद खुली आॅखो मे खवाब भी तेरे देखे---या खुदा..कयू हुआ यह पयार..

कि खुद को खुद से जुदा कर दिया---