Monday, 26 December 2016

तेरी मासूम हँसी है या बहता हुआ झरना--लोग कहते है तेरी हँसी से सुबह होती है,तू जो खोले यह आंखे

तो रौशन यह ज़मी होती है---बंद कर ले जो यह पलके,शाम तन्हा होती है---गेसुओं को जो खोले,रात पूरे

शबाब पे हो जाती है---खुल के जो मेरे दिल मे समा जाये,मुहब्बत परवान की सीमा से  परे होती है---अब

यू अठखेलिया ना कर मेरी शोख अदाओ से, कि ज़िन्दगी बार बार तेरी ही बाहो मे फ़ना हो जाती है----
तुझे खोने के डर से,तुझी से प्यार करने से बचते रहे--ताउम्र बिन तेरे जीना ना पड़े,इस ख़ौफ़ से तुझ से

मुहब्बत करने से डरते रहे---भूल कोई ना कभी हो जाये हम से,बस तुझे छूने से भी डरते रहे..डरते रहे---

यू अचानक तेरा आज मुझ से टकराना,सारे ख़ौफ़ दूर कर गया...तेरी ही बाहों मे,तेरी ही आगोश मे,यू

सिमटना मेरे सारे खवाब पूरे कर गया--

Saturday, 24 December 2016

दोस्तों...यह ज़िन्दगी आप को हर दिन एक नया अनुभव देती है..अच्छे  अनुभव आप को आत्मविश्वास से भरते है और बुरे अनुभव आप को अंदर से बेहद मज़बूत बना देते है...जो बातें कभी आप को दुःख पहुँचाती थी,वह अब आप के लिए कोई मायने नहीं रखती..दोस्तों..परेशानिया,दुःख कितने भी क्यों ना हो...हर हाल मे अपना मानसिक संतुलन बनाये रखे..अच्छे बुरे हर इंसान के शुक्रगुज़ार रहे,यह वही लोग है जिन्हों ने आप को जीने की एक दिशा दी..चुप्पी को,ख़ामोशी को अपने जीवन का हिस्सा बना लीजिये,भले ही  लोग इस ख़ामोशी को आप की कमजोरी माने या आप की अंदरूनी ताकत..यह उन की अपनी सोच पर है..अपना अपमान बार बार मत सहे...अपने फैसलो पर किसी की भी भावनाओ को हावी मत होने दें...हर फैसला अपने आत्मसम्मान  सामने रख कर ले...लोग इस को आप की ईगो माने या फिर अहंकार..पर अब खुद को दुसरो की नज़रो से ज्यादा अपनी नज़रो मे सम्मानित करे..ताउम्र आप ने सब के लिए बहुत किया,अब तो अपने लिए ज़ी ले...जीवन के इस पडाव पर,जहा आप की अपनी भी खुशिया है,अपना भी सम्मान है...किसी की भी चिकनी-चुपड़ी बातो मे आ कर अपने फैसले ना बदले.आंखे मूंद कर किसी पे भी भरोसा मत करे...याद रखिये जो आप को सच मे प्यार करते है,वो आप के हर फैसले को मन से स्वीकार करे गे,जो ना करे उन को अपनी ज़िन्दगी मे कोई जगह ना दें..यही आप के व्यक्तित्व की सही पहचान है...खुश रहने की एक आदत बना लीजिये...भागवान मे आस्था बनाये रखे,वो हर पल आप के साथ है...शुभ प्रभात और शुभ कामनाये ---सब के लिए...

Friday, 23 December 2016

वो तेरी बातो की खलिश,वो तेरी सांसो की महक....मुझे सर से पाव तक खुशबू मे जैसे नहला जाती है...

गौर करते है जो अपने चेहरे पे,तेरे बेबाक इरादों की कहानी दिख जाती है----तेरे इश्क की दास्ताँ सुने या

अपने हुस्न के चरचे सुन ले..हर मोड़ पे बस तू है और मेरी तन्हाई है---लोग कहते है कि तू मेरे प्यार मे

पागल है..पर खुद के दिल की सुनु तो लगता है कि रातो के हर लम्हे मे तू ही तू शामिल है.....
तेरे खवाब देखे या तेरे साथ,,तेरी राहो पे चल दे---तुझे इंकार करे या तेरे साथ प्यार का इकरार कर

ले---तेरी हर खूबसूरत अदा पे मर जाए या तेरी हर खता से नाता तोड़ ले---इतनी कशमकश मे डूबे

तेरे साथ सातो वचन क्यों न निभा दे---रंगत चेहरे की है तेरे नाम से,शाम गुलाबी है तेरे पैगाम से...

आ चल हर रस्म निभा दे या दुनिया की हर ज़ंज़ीर ही तोड़ दे.....
टुकड़े कर दीजिये दिल के मेरे,,चाहे जितने---हर टुकड़ा तेरे ही प्यार की दुहाई दे गा--खून की हर

बून्द पुकारती है बस नाम तेरा..और नाम तेरे से जुड़ा है नाम मेरा---पाव की पायल बजती है जब जब..

ज़मी को छू कर घुघरू बजते है तब तब---आँखों का काजल है या तेरे नाम का जलता दिया..हाथो की

चूड़िया है या तेरे प्यार के बंधन की वजह..सब कुछ दे के तुझे,जवाब देने के लिए दिल फिर भी पुकारे

गा तुझे ....

Thursday, 22 December 2016

तेरा छूना लगा जैसे..ओस की बूंदो की तरह---महका है बदन मेरा,गुलाब की पंखुड़ियो की तरह--तेरा

शबनमी अहसास ज़न्नत की फ़िज़ा लगता है--देखा तो नहीं हम ने ज़न्नत को,पर अहसास तेरा इबादत

की तरह लगता है---पूजा के धागों  मे पिरोया है,मैंने तेरी पाक मुहब्बत को...तेरी जगह मेरे दिल मे नहीं,

रूह के वज़ूद मे है---फिर पास आ जा मेरे,खुदा के रहमो-करम की तरह---
लफ्ज़ जो निकले लब से तेरे...एक दुआ बन गए--इन्ही दुआओ मे डूबे हम तेरी ही आरज़ू बन गए---

फलसफा प्यार का यह कैसा है,चाँद तो नहीं है...पर तेरी यह चांदनी आज भी प्यार मे तेरे पागल है---

आँखों के इस शराबी हुस्न पे,कभी तुम मिटे...कभी हम मरे---आगोश मे तेरी आने के लिए,सुहानी रात

के इंतज़ार मे,कभी हम सुलगे..तो कभी तुम तपते रहे---इश्क़ के इस सफर मे आखिर तुम मेरे बन गए--

Monday, 12 December 2016

कहने को हमराज़ नहीं मेरे..पर दिल का हर राज़ है पास तेरे....बेवफा है यह दुनिया लेकिन,पर तेरी वफ़ा

का नायाब खज़ाना है पास मेरे....लहू का हर रंग जताता है,मुहब्बत की हर दौलत को....तू पास रहे या

दूर मेरे,फर्क हदो का सिर्फ है शायद....ज़माना क्या कहता है अब मुझ को,उस दौर का नाम भी याद नहीं

मुझ को...आज नहीं तो कल लेकिन,चलना है तुझे साथ मेरे और मुझे साथ तेरे......

Monday, 5 December 2016

न टूट के चाह मुझे किसी फ़रिश्ते की तरह... ना लुटा प्यार इतना मुझ पे किसी मसीहा की तरह...मै

खुद को तेरी पनाहो मे महफूज़ पाती हूं...हर गम को तेरी बाहो मे आ कर भूल जाती हूं...ज़माना क्या

कहता है,उन की बातो को अब यह दिल ना समझता है...खुशबू जो बिखेरी है तेरे इश्क ने,मेरे हुस्न के

आँचल मे...बहकने के लिए यह वजह काफी है,बस लुटा दे प्यार अपना इसी फ़रिश्ते की तरह....

Sunday, 4 December 2016

ना मिले है कभी..ना मिले गे शायद कभी..कुछ दर्द तेरे बाटे है मैंने...बहुत दर्द को हवा  मे  उड़ा दिया

मैंने....यह ज़िन्दगी बहुत हसीं है लेकिन,ज़िन्दगी को जीना दुश्वार ज़माने ने कर दिया लेकिन...जब

जब चेहरे पे शिकन आई है,एक दर्द की लहर सांसो के आर-पार आई  है...बस नाम याद किया तेरा,

और ज़िन्दगी फिर से कमाल कर पाई है...रिश्तो का नाम कुछ नहीं शायद,फिर भी लफ़्ज़ों की तहजीब

साथ साथ चली आई है...
टुकड़ो का हिसाब ना कर..बस बेहिसाब हो कर चले आओ----हर मन्नत,हर दुआ,हर पहलु से बंधे

मेरे पास चले आओ---रात है गहरी,सितारों की चमक से वाकिफ है..चाँद को ढूंढने के लिए,यह

चांदनी भी आज घायल है---बेवफा ना कह मुझ को,वफ़ा के नाम से खुद को भिगोया है---तेरी ही

इंतज़ार मे यह दिल ज़ार ज़ार रोया है---पलकों पे बिछा है,शर्म का शामियाना...बस ज़िद ना करो

मेरे पास चले आओ---
रूह ने रूह को पुकारा,और यह ज़िन्दगी फ़ना हो गई----ज़िस्म को  छूने की कोशिश मे,दो दिल क्यों

जुदा हो गए---दर्द की इंतिहा क्यों अक्सर इबादत मे ढल जाती है---दिल को बचाने के लिए,क्यों

पलकों को भिगो जाती है----सैलाब ज्यादा न रिसे,इस से पहले यह रूह ज़िस्म से क्यों निकल जाती

है----फिर यही रूह रूह को पुकारती है,और यह ज़िन्दगी बार बार फ़ना हो जाती है-------

Saturday, 3 December 2016

बहुत खूब ए ज़िन्दगी..तूने फिर मुझे सपनो के संसार मे उलझा दिया....बेवजह फिर से पन्नो के हिसाब

मे बसा दिया...लफ्ज़ जो बंद थे,दिल के दरवाजे मे..सपने जो रुके थे,पलकों के इस मयखाने मे....ना

चाहा था कि सब को बेनकाब करे...कदम दर कदम चले,ना किसी को साथ ले ...स्याही जिस जिस ने

बिखेरी है मेरे वज़ूद,मेरे अल्फ़ाज़ पे...पन्नो की कहानी मे उलझ जाये गे नाम सभी गुनाहगार के....

Wednesday, 30 November 2016

यह हवाओ की सरसराहट अक्सर किसी की याद दिला जाती है..सुबह का यह खामोश सा सन्नाटा कही

दूर कुछ याद दिला जाता है...आइना देख कर आज खुद पे प्यार आ गया...कुछ भूली हुई हसरतो का वो

ज़माना याद आ गया...बेबाक से वो मेरी हँसी,तेरी बाहो मे सिमटी मेरी खूबसूरत वो ज़िन्दगी...कौन

कहता है कि ख़ुशी अब पास नहीं मेरे,रूह को जो सकू दे..आँखों मे जो चमक दे..वो सब कुछ है आज भी

पास मेरे....
देते रहे आवाज़..जाती रही नज़र जहा तक---ज़ुल्फो को बिखराया वहां तक..कि अँधेरा हो जाये जहा तक-

खामोश ज़िन्दगी को आज फिर कह रहे है..कि फ़िज़ा मे लौट आओ---बहारे कभी तो आए गी,यह उम्मीद

रखे गे आखिरी सांस तक---तेरे ही कदमो क़ी चाप आज भी सुनाई देती है मुझे..रातो क़ी तन्हाई आज भी

बुलाती ही तुझे---सजे गे सवरे गे,दुल्हन के लिबास मे करे गे इंतज़ार...साँसे इज़ाज़त दे गी जहा तक---

Sunday, 27 November 2016

कहानी अपनी ज़िन्दगी की लिख कर...तेरे जहाँ मे लौट आये गे---जिए गे जब तलक,तेरी ही इबादत

मे खुद को देते जाये गे----क्या सही था,क्या गलत...अर्ज़ी बस तेरे ही दरबार मे लिखते जाये गे---ना

कोई अपना मिला,ना मिला शाहे-वफ़ा---तेरी ही इस दुनिया मे रंगों का एक बाजार दिखा---गर रहा

मे तेरा गुनाह-गार,तेरी हर सजा का हक़दार हू---तेरे पास आने से पहले,हर लफ्ज़ पन्नो पे लिख के

ज़िन्दगी का शुक्रगुजार हू------

Saturday, 26 November 2016

दोस्तों--ज़िन्दगी का लंबा सफर और आप..बहुत कुछ खोया..कुछ ऐसा जो दिल को  छू गया..और बहुत कुछ ऐसा जो दिल को अंदर तक तोड़ गया...ग्रंथो मे लिखा है की अपने कर्म करो और फल ईश्वर पर छोड़ दो..आप ने किसी के लिए अच्छा किया यह आप का कर्म..दूसरे ने अपनी ही सोच से उस को गलत माना यह उस का कर्म...कोई बार बार अपमान करे तो अपना रास्ता ही बदल लो..अपने बारे मे किसी को कोई सफाई पेश मत करो..क्यों की कोई भी इस दुनिया मे पाक साफ नहीं है..लोग सिर्फ वही देख पते है जो उन को दिखाया जाता है..वही सुनते है जो उन को सुनाया जाता है...बस खुद को इन बेमानी बातो से आज़ाद करने की कोशिश करे..मुश्किल तो है पर नामुमकिन नहीं...सहारो की तलाश न करे ..जो मर्जी से साथ देना चाहे तो ठीक....दुसरो के दवाब मे आ कर अब कोई फैसला न करे..लोग खुद को बचाने के लिए कोई भी चाल खेल जाते है.और आप को मिलता है जीवन भर का तिरस्कार और गहरा अपमान....सिर्फ अपने ज़मीर की ही सुने..याद रखिये दुःख और सुख,अपमान और सम्मान..यह आप को अपने कर्मो के हिसाब से मिलता है...बस खुद को अंदर से मजबूत बनाये...शुभ प्रभात..शुभ कामनाये...

Thursday, 24 November 2016

यह हवाएं जब भी तेरे दामन को छू कर आती है....मुझे हल्के से सहला जाती है---वो नशा तेरे

प्यार का,वो खुमारी मेरे प्यार की..यह सब कानो मे मेरे बता जाती है---रहते है तेरी यादो के उन

रोशन चिरागो मे,इक परछाई की तरह---महक रही है मेरी दुनिया जैसे परियो के किसी जहाँ की

तरह---कोई शिकायत ही नहीं कि तू पास नहीं मेरे---तेरी मुहब्बत हर पल मेरे जहाँ को सजा रखती है..

Wednesday, 23 November 2016

वो बचपन के खिलोने,वो गुड़ियों का हसीं चेहरा....कही शतरंज की मोहरो पे,गुलामी का वो सहमा

टुकड़ा...टूटते खिलोनो की आवाज़ से आज भी डर लगता है....उन को फिर से पाने के लिए यह दिल

आज भी धड़कता है ....बिछाते नहीं उन शतरंज  की मोहरो को आज भी उन राहो मे..जहा से निकलने

के लिए आवाज़ भी दे..तो डर लगता है........
कही किसी की दुआ थी..तो कही कोई किसी का खवाब ----नज़र भर देखने के लिए तरसती रही कही

कोई ज़िन्दगी की उदास शाम ---पलके जो भीगी तो बस भीगती चली गई,कुछ अधूरे जज्बात तो कही

अधूरे से ख़यालात ----सोचा क़ि कभी पूछे किसी से,अधूरे खवाबो के साथ यह ज़िन्दगी है कैसी ---खुद

को जो टटोला तो जाना क़ि ज़िन्दगी किसी के प्यार के बिना----है कितनी अधूरी कितनी बेमानी -----

Saturday, 19 November 2016

मुझे मिलने की इजाजत देने वाले..मुझ पे बला का यकीं करने वाले...कदम दर कदम साथ देने वाले...

तुझे मसीहा कहे या मुहब्बत का खुदा----दुनिया की रुसवाई से आज़ाद कराने वाले...तू मेरा राहे-वक़्त

है या मेरी किस्मत का कोई बुलंद सितारा---शुक्राना करते है तेरा उस खुदा के बाद...नवाज़ा है तुझे

दुआओ से भरी सलामती के साथ---जो किया है मेरे लिए..उस के लिए यह तमाम सांसे करते है आज

तेरे नाम...

Thursday, 17 November 2016

हर बात पे रोने के लिए,कोई वजह तलाश नहीं की मैंने---बस जो मिल गया,रहमते-करम मान कर

ज़ी लिया मैंने---बेवजह क्यों मुस्कुराते है ,आज यह राज़ भी जान लिया मैंने---मुकद्दर की लकीरो

 मे जो नाम नहीं लिखा मेरे,उसी को याद कर के बस जीना सीख़ लिया मैंने---ज़िन्दगी की जंग लड़ते

लड़ते,मौत को भी प्यार करना अब सीख़ लिया मैंने---

Wednesday, 16 November 2016

इक दिन और गुजरा इस ज़िन्दगी का... ऐ खुदा तेरे सज़दे मे हम फिर से झुक गए---अब मिले गा

कौन सा गम,तेरे कदमो मे भीगी पलकों से, यह सवाल फिर से पूछ लिया---चलना है अभी और कितना,

बेबसी मे तनहा सा यह हिसाब क्यों मांग लिया तुझ से----जाना तो है इक दिन  इस दुनिया से,फिर ना

जाने क्यों तेरी इबादत मे....बुझे मन से उस दिन का नाम क्यों पूछ लिया---
समंदर की लहरो को जो छुआ आज हम ने...तो आँखों से आंसू क्यों  बह निकले---खुद को भिगोया जो

पानी मे,क्यों तेरी यादो के अंकुर फिर फूटे इन्ही आँखों से----दुनिया समझती है कि तेरी जुदाई को कबूल

कर लिया है मैंने---तेरी यादो से परे,जीना भी सीख़ लिया है मैंने---अक्सर तन्हाई मे दुनिया की कहानी

पे गौर करते है..कफ़न बांध कर सर पे क्यों ज़िन्दगी को हँस कर जिया करते है----
मंज़िल न मिली..न मिला राहे-कदम-----लेती रही यह ज़िन्दगी मेरे इम्तिहाँ हर बरस,हर तरफ----

कभी रही नमी इन आँखों मे..कभी ज़ख़्म हुए नासूर,किन्ही बातो से----चलना तो था फिर भी इन्ही

राहो पे,सो मुस्कुराते रहें बेवजह .....बेवजह सी बातो पे----टूटते रहें सपने,टूटी हर आशा..टूट गया

हर रिश्ता..हर नाता...ज़िंदा है आज भी खुदा की रहमत से..बस फर्क है अब इतना कि मुकम्मल तो

जहाँ नहीं मेरा--पर दिल तो ज़िंदा है शायद चारो तरफ ------

Friday, 11 November 2016

यूं तो रात गुजर ही गई तन्हाई मे.....सपने हज़ारो देख डालें,अधखुली इन आँखों से....उठे सुबह तो

नम थी यह आंखे... आईना जो देखा खुद पे प्यार आ गया...यह सोच कर क़ि आज भी तू ही रहता

है मेरी रातो की तन्हाई मे....यह जिस्म,यह जान ..आज भी है तेरे कदमो क़ी परछाई मे...दुनिया

रहे या न रहे..हम तुम आज भी है...सपनो क़ी उन्ही गहराई मे....
आसमाँ मे उड़ने लगे तो ख्याल आया, कि ज़मी तो अपनी है--उसी ज़मी पे एक मेहरबाँ हमारा भी

है---दौलत मिली शोहरत मिली..सपने आँखों मे हज़ारो लिए...ज़िन्दगी की हर ख़ुशी मिली--लोग

कहते है किस्मत हमारी बुलंद है...सितारों से झिलमिल, दामन मे लिपटी हर दुआ हमारे संग है----

किस से कहे,कैसे कहे...दुखो का रेला भी साथ चलता है मेरे...यह बात और है कि रखते है याद कि

ज़मी पे एक मेहरबा हमारी इंतज़ार मे है---

Thursday, 10 November 2016

ज़माना देता रहा हज़ारो ही ज़ख्म...देता रहा दर्द ही दर्द----कुछ अनकही कुछ अनसुनी...कुछ रह

गई इस सीने मे,किसी गहरे नासूर की पहचान बन कर----कभी रो लिए तन्हाई मे,कभी फूटे ज़ख़्म

रात के अंधेरे मे----ज़ी हल्का हुआ तो याद आया..यह सारी दुनिया तो बेमानी है---खुद ही खुद मे

मुस्कुरा दिए..ज़िन्दगी नाम है बस जीने का..यह सोच कर खुदा की इबादत मे झुक गए----





Wednesday, 9 November 2016

झील से गहरी आँखों मे डूबने के लिए....इजाजत क्यों मांग रहे हो---पलकों के इस शामियाने पे क्यों

जीवन भर..साथ चलने का  वादा मांग रहे हो---यह ज़िस्म,यह ज़ान,सर से पाव तक महकती हुई वफ़ा

की पहचान ---जरुरी तो नहीं हर वादे पे लफ़्ज़ों की मोहर ही लगाए गे हम--कुछ अनकही बाते,कुछ

झुकी पलकों की सदाए,इशारा समझो---अब भी कहे गे यही..जानम इज़ाज़त क्यों मांग रहे हो---

Sunday, 6 November 2016

न तुझ से पहले,न तेरे बाद...दिल के आशियाने मे एक घर है बस तेरे ही नाम.....हर दरवाजा,हर खिड़की

जब भी खुलती है,बस तेरे ही पाव की आहट से वो हवाएँ लेती है.....कभी बहुत सर्द है यह मौसम,तो कभी

झुलसती हुई तन्हाई है.....बंद कर दे यह घर,तो भी बाहर तेरी ही यादो के सख्त पहरे है.......रोशन जब

भी यह सुबह होती है,जुल्फों की खुली वादियो मे तेरे ही आने की खबर मिलती है...
वो हम पे ग़ज़ल लिखते रहे,और हम खुली आँखों से उन्हें निहारते रहे----वो मशगूल थे हमारी ही

मुहब्बत की दासताँ लिखने मे,और हम ज़ुल्फे बिखराय उन्ही पे मेहरबां होते रहे----कहे कैसे उन से

कि दिल धड़कता है बस उन के दीदार से,पर ख़ामोशी से अपने ही दिल की धड़कने सुनते रहे---ज़ुबाँ

चाहती है कि सब कह दे उन से,एक वो है जो पास बैठे हम को नहीं..हमारी तस्वीर को बस निहारते

रहे..निहारते रहे----

Saturday, 5 November 2016

हसरतो का ज़माना आया,तो उम्र ही निकल  गई ....पाँव मे पायल जो मिली तो पाँव की थकन से

यह जान ही निकल गई...कंगन का तोहफा जो पाया हम ने,बेताबी से रिश्तो की वो खनक ही

छूट गई..सहमे सहमे से जो मिले तो आँखों से आंसुओ की वो धार बह गई..अब यह आलम है

कि मुहब्बत है चारो तरफ पर मुकद्दर की वो लकीर ही हाथो से मिट गई...
लबो की ख़ामोशी को तोड़ने वाले...हर बात पे मेरी खफा होने वाले----टूटे साज़ को एक नई आवाज़

देने वाले...सितारों से दामन भरने का वादा करने वाले------कभी महजबी तो कभी शहज़ादी का नायाब

सा खिताब देने वाले..कौन हो तुम----बदलता है यह मौसम,किसी लापरवाह आशिक की तरह---टूट के

न चाह मुझे किसी शहंशाह की तरह...न बन पाऊ गी मुमताज़ तेरी,कि सांसे तो अटकी है किसी और

शहंशाह के ताजमहल की तरह----
दामन जो हुआ खाली,कभी फिर भर नहीं पाए....सिसकते रहे उम्र भर, पर तेरी जगह फिर किसी

को कभी दे ही नहीं पाए...हुस्न और इश्क का वो सुलगता तूफा,यादो के उन पन्नो पे लिखते चले

गए..खनकती हुई वो हँसी,झंकार वो पायल की...न सुनने को तैयार,नटखट सी वो जवानी की

पुकार...वो लम्हे थे या फिर रिश्तो का ताजमहल,समझ कर भी कभी समझ ही नहीं पाए.... 

Friday, 4 November 2016

मैं कुछ लिखू या न लिखू...मेरी याद हर जगह कायम है....मेरे हर लफ्ज़ की ताकत दुनिया मे सब को

वाकिफ है...छिपता है चाँद जब जब बादलों के उस झुरमुट मे,इंतज़ार फिर भी होता है उस के दीदार

का सब को बेसब्री से...कही कोई  शमा जलती है अँधेरे के उस कोने मे..रोशन जहाँ बेशक न हो,पर

सुलगती है एक याद फिर भी चाहने वालो के सीने मे...

Wednesday, 26 October 2016

चलते चलते इस ज़मी पे तेरी...ए ख़ुदा मेरे...मेरा यह जिस्म तो थक आया....इस दुनिया मे देखे

जो नज़ारे ऐसे कि तेरी खुदाई से ही दिल भर आया....शिकवा नहीं,शिकायत भी तो नहीं...लेकिन

दुबारा फिर यहाँ न आने के लिए,तुझ से गुजारिश करने का मन हो आया....खूबसूरत होता जो यह

जहाँ तेरा,तो यक़ीनन रूह से साँसों को आज़ाद करने के लिए...हर रोज दुआ का दिल न किया होता...
सूनी सी यह ज़िन्दगी---और कहर है उस पे तेरी यादो का --- संभाले तो खुद को संभाले कैसे,वो

इश्क का रंग आज भी है कितना गहरा--नूरे-हुस्न को चाहने के लिए कोई शहंशाह तेरे जैसा इस

दुनिया मे अब कहा होगा---जो कदर करे मेरी चाहत की,ऐसा कद्रदान अब कहा होगा ---एक फरिश्ता

तेरे जैसा पैदा नहीं दुबारा होगा,मुझे प्यार करे जो ज़ी भर के--खवाबो के इलावा और कहाँ होगा----
कभी टूटे सपने,कभी टूटे अरमाँ...टूटा कभी मेरे दिल का जहाँ....यह किस्मत क्यों हो जाती है

बार बार  धुंआ ही धुंआ ....ना अब रो  पाते है,ना इस दुनिया को खुद की दासताँ सुना पाते है...

कौन है यहाँ जो दर्द मेरा बॉट पाए गा,कौन है जो बिखरी कहानी को पूरा कर पाए गा...छू लेना

चाहते है आसमाँ की बुंलदियो को,पर यह साँसे रुक ना जाये बेवजह यूं कभी ना कभी ..सितारों के

झुरमुट मे यह अधूरा सा चाँद ना छिपता है,ना नज़र आता है किसी तमन्ना की तरह...

Tuesday, 25 October 2016

खुशबू का डेरा भरा है बातो मे तेरी..तू पलट कर देख सही,तेरी ही राहो मे रखा है यह दिल मेरा....

हज़ारो नगमे बिखरे है फिजाओ मे जैसे,कभी ज़न्नत कभी शोखी निगाहों मे भरी जैसे...हर दिन

तेरे ही इंतज़ार मे डूबा हुआ जैसे,कहते है जिसे खवाब वो देखा तेरी ही आँखों मे मैंने....टीका लगाते

है खुद को तेरी नज़रो से बचाने के लिए,क़ि अहसास क़ी महक है बस बातो मे तेरी....
तुझ से तेरी ही हद मे जीने के लिए..हज़ारो वादे निभा दिए मैंने...तू कही खफा न हो,इस डर से तेरी

बदनामी को अपना लिया मैंने...राह चलते लोगो से बेरुखी जो मिली मुझ को,तहे दिल से सर आँखों

पे रख लिया उस को....आंसुओ को छिपाया खुद की पलकों मे..तू कही बेज़ार न हो,इस डर से आँखों

से मुस्कुराना सीखा मैंने...बेवफा हो चुका है तेरा दामन,फिर भी तेरे नाम से खुद को अब तक जोड़ा

है मैंने.....

Tuesday, 18 October 2016

कुछ अरमान रहे..कुछ पैगाम रहे तेरे नाम....सजने के लिए,संवरने के लिए..तेरी ही बाहो मे टूट के

जीने के लिए..रातो को तेरी ही आगोश मे सोने के लिए..तन्हाई होती है क्या..धड़कनो की ज़ुबाँ कहती

है क्या..सब कुछ तेरे नाम,तुझी को देने के लिए..इंतज़ार करते रहे,करते रहे......जन्मो जन्म...सदियो

तलक ..रिश्ते का नाम अब कुछ नहीं लेकिन,मेरी रूह ने आज भी भेजा है यही पैगाम...तेरे नाम....

Thursday, 13 October 2016

तू कहे तो आसमाँ को धरती पे उतार लाए हम..कितने सितारों को तेरे दामन मे सजा दे हम...तेरे

लबो पे हँसी लाने के लिए,कितनी ही मुस्कुराहटें क़ुरबान कर दे गे हम...न जाने किए थे कितने वादे

तुम ने हमारे संग..तेरी वफ़ा के कायल रहे न जाने कितने जन्म...होश तो तब आया जब तुझे देखा

तेरी महज़बी के संग..बिखरे नहीं,टूटे भी नहीं..पर तेरी ख़ुशी के लिए अब कोई दुआ भी नहीं दे गे हम... 

Wednesday, 12 October 2016

बहुत दूर चलने के बाद,यह ख्याल आया ....बहुत दूर चलने के बाद,यह ख्याल आया ...

बहुत दूर चलने के बाद,यह ख्याल आया क़ि राहे-इश्क मे कही किसी की मुहब्बत को छोड़ आये है...

अपने पीछे जो देखे निशा किसी के कदमो के,खुद के हसीं होने का गुमान हो आया...लौट सकते नहीं

राहे-इश्क मे अब पीछे,बस किसी के कदमो के आगे होने का अहसास साथ साथ हो आया..पर्दानशी

इंतज़ार करे गे ताउम्र तेरा,इबादत मे रखे गे खुदा के बाद बस नाम तेरा..इन लफ़्ज़ों की याद मे फिर

से यही ख्याल आया,कोई है आज भी जिस के लिए यह सारी दुनिया छोड़ आये है...
हर राज़ खोले गे,तो बिखर जाओ गे....कही है धुँआ तो कही है दरिया पानी का....बहुत ही मुश्किलो से

रखा है खुद को जीने के काबिल...सब कुछ बता दे गे तो हमारी तक़दीर पे मायूस हो जाओ गे...वो मंज़र

जो गर देखा होता तुम ने..बिखरते सपनो का टूटा हुआ जहाँ मेरा, जो देखा होता तुम ने...मुस्कुराते हो

कम क्यों इतना,यह खामोश सा सवाल न पूछा होता तुम ने..

Monday, 10 October 2016

 ना जुबाँ ही खुली,ना इशारा आँखों ने दिया..बात बनने के लिए साथ तेरी वफ़ा ने दिया....य़ू तो बिखरे

है ज़ज्बात हज़ारो सीने मे मेरे,लिखते है लफ़्ज़ों की कहानी धड़कन की जुबानी...फिर कोई दुआ दी है

किसी अपने ने मेरी सलामती के लिए...मेरी ही ख़ुशी को मुकर्रर करने के लिए....मुहब्बत मेरी राहो

मे बस चली आई है..तूने जो समझा है मुझे अपनी तकदीरे-वफ़ा बनाने के लिए...

Saturday, 1 October 2016

दुख,दर्द,परेशानिया..और इस से जुड़ा एक खास शब्द सकूंन..दोस्तों,जीवन के पथरीले रास्तो पे चलते चलते एक मोड  जरूर आता है जहा एक छोटी संकरी पगडण्डी नज़र आती है..बस इस संकरी पगडण्डी पे सावधानी से चलिए..यक़ीनन सब दुःख भूल जाये गे..डर कर मत चले..पथरीली रहो से ज्यादा सुरक्षित यही पगडण्डी है--मौत और ज़िन्दगी दोनों तरफ है..दोस्तों जिस दिन आप अपने मन से मौत के ख़ौफ़ को पूरी तरह निकल दे गे तभी आप इस जीवन को सकून से जी पाए गे..जो लोग आप को प्यार नहीं करते,पसंद भी नहीं करते..उन की परवाह मत कीजिये..है खुल कर हँसे,खुल कर जिए,भरपूर जिए..उन के साथ जो आप की कदर करते है,आप को पसंद करते है और प्यार भी करते है..हर किसी को खुश करने के चक्कर मे खुद को बर्बाद मत करे..खास कर तब जब आप जीवन के उस मोड पर आ गए है,जहा जीवन का आखिरी सफर बचा है..अकेले रह गए है या फिर साथी के साथ है..अब जरूर खुल कर जिए..किसी का बुरा मत सोचे...शांत रहे---बहार से ही नहीं,अंदर से भी..सकून आप के साथ साथ चले गा...शुभ प्रभात दोस्तों--मंगल कामनाये....

Wednesday, 28 September 2016

आसमाँ को छू ले या पायल की खनक से दुनिया को उठा दे..या फिर सूरज से कहे क़ि सुबह को अब

जल्दी से रोशन कर दे..देख ए ज़माने तूने गिराया था मुझे हद से हद तक जलालत क़ी तरह.मेरी साँसों

को दबोचा था किसी मुर्दे क़ी तरह..कभी न उठ पाए गे किसी पत्थर क़ी तरह..ताउम्र निभाए गे गुलामी

तेरी,रोये गे मर जाये गे,किसी बेवफा आशिक क़ी तरह..ए ज़माने फिर भी करे गे शुक्रिया तेरा ..जो मिला

है मुकद्दर से,उस का मान रखे गे हमेशा..पाँव ज़मी पे होंगे पर बुलंदियों से आसमाँ को छू जाये गे..
एक ही पल मे बदल जाए गा सब कुछ..सोचा न था...आज की सुबह दे जाए गी क्या..कभी सोचा भी

ना था .....कल तलक थे इस ज़िन्दगी से खफा,बिखरे बिखरे थे यादो के निशा...हाथ उठा कर कुदरत

से दुआओ मे क्या माँगा था..पलकों की भीगी कोर से रब से क्या कहते रहे..हिम्मत से बंधे,खवाबो के

टुकड़ो मे बंधे..मिला है क्या आज....सोचा भी न था...
बार बार ताकीद न कर क़ि हर रस्म,हर रिवाज़ को तोड़..तेरी दुनिया को बसाने आ जाए...तेरे जहाँ को

बसा दे,तेरे खवाबो को इक रंगत दे दे...पाँव मे बजती रहे पायल,चूड़ियो की खनक से तेरी राते महक

जाए..कुछ खलिश सी है इस मौसम मे..कुछ हवा भी है आवारा सी..बादल भी बस तैयार है बूंदो को

रुखसत करने के लिए..और हम भी तैयार है तेरी इस ताकीद को सलाम बजाने के लिए...
वो तेरी बस ज़िद्द थी  कि तेरे जहाँ से दूर चले जाए...न तुझे याद आए न तेरी यादो मे बस के रह जाए..

उस पे क़यामत यह कैसी कि तेरे बिना कभी न जी पाए..फासले तो सिर्फ मीलों के थे,पर दिल के पास

तो तेरे पहरे थे...तेरी इस ज़िद्द का मान रखा हम ने..तेरी राहों मे तुझे बर्बाद करने कभी नहीं आए..

आज ज़िद्द है तेरी..मुहब्बते-जश्न बन कर तेरी दुनिया को मुकम्मल कर जाए..

Tuesday, 27 September 2016

शब्बा ख़ैर कहने के लिए ...बहुत दूर से आये है हम..सलामे इश्क फरमाने के लिए..तेरे दर पे चले आये

है हम..मन्नत का जहाँ पाने के लिए..खुदा की इबादत मे झुक गए है आज.हर उस राह से,उस मोड से

निगाहों को बचाते आये है आज..जिन पे कभी तूने मैंने मुहब्बत की कसमे खाई थी खास...मंज़िले-खास

सब को नहीं मिलती,इसलिए उस खुदा का शुकराना देने आये है आज..
परदे मे रहे,पर्दानशी कहने लगे यह लोग--फिजाओ मे बहकने लगे तो महजबी क्यों बोल देते है लोग...

आँखों की चिलमन को जो झुकाया,सजदे मे झुक गए जहाँ के लोग..पाँव की पायल मे बंधी,जिस्म की

हरकत मे छिपी,खुले खुले गेसुओं की बदली मे बसी..फिर से सजने की आज तबियत क्यों बनी...मेरे

दीदार के लिए बैचैन,लबो के खुलने के इंतज़ार मे बैचैन..बहुत दूर से क्यों चले आये है यह लोग...
हाँ...बहुत बहुत उदास है आज..हर सांस का बोझ लिए मरने  को तैयार है हम..गद्दारी का जामा पहने

लोगो के चेहरे से,नफरत करते है हम...वही जिस ने दुलार से महका दिया,उस के लिए दुआओ का

खज़ाना लुटा देते है हम...बहुत ही बेपरवाह हो चुके है रश्क की रंजिशों से अब..खुद से खुद के पास

लौट आये है अब...सांसो को दफ़न करने के लिए,बेमौत मरने को तैयार है हम...
शाम जब जब ढलती है..तुम याद आ जाते हो...रात का अँधेरा गहराता है जब,आंसुओ से दामन को

भिगो जाता है..दूर बहुत ही दूर हो चुके है,हर रिश्ते से...दुनिया की रंगीनियो से नफरत करते है अब..

लोग कहते है कि तुम कभी लौट कर नहीं आओ गे..वो क्या जाने कि जान बन कर तुम आज भी मेरी

रूह मे बसते हो..छोड़ कर हर रिश्ते को,तेरी यादो का ताजमहल बना कर तुझ से हर बात करते है हम...
 कोई सजा तो दो हम को--किसी रंजिश के तहत ही आ जाओ---नफरत का सिला ही दो हम को..पर

नज़र भरने से पहले ही आ जाओ..ढूंढते है तुम्हे उन तमाम गलियो मे,महकती हुई फूलो की मदहोश

वादियो मे...जहा तक उठती है निगाहे आसमाँ की तरफ,भीग जाती है यह आंखे पलकों की गहरी कोर

तलक..बेवजह बाते न बना दे दुनिया इस रिश्ते की खबर,क़ि लौट आओ किसी मन्नत की तहत....

Monday, 26 September 2016

मुकर्रर नहीं होती कभी मुहब्बत की तारीख...कब ढलते है जज्बात तन्हाई मे,कोई खबर ही नहीं होती...

गहरी नींद के सौदागर जब उठते है रातो मे,प्यार हो गया है कब..कोई खबर ही नहीं होती..दिल जब  भी

धड़कता है किसी की मीठी यादो मे,साँसे कहा ग़ुम हो जाया करती है..कभी खबर नहीं होती..शर्म हया को

ताक पर रख कर,जब सनम के दीदार को यू दिल चाहने लगे..खुदा कसम खुद को भी खबर नहीं होती..

Saturday, 24 September 2016

राज़ खोले धीरे धीरे..तेरी पनाहो मे आ कर..लब थरथराये तेरी आगोश मे आ कर..दिल ने धड़कना सीखा

पहली बार...तेरी बाहो मे आ कर..नजरे  झुकी,पलके उठी...पहली ही बार तेरी मुहब्बत पा कर...पाँव अब

ज़मी पे टिकते ही नहीं,ख़ुशी की इतनी सौगात पा कर..खिल गया है यह चेहरा तेरे प्यार की महक पा कर.

दौलत की चाह नहीं तुझ से,की बेशुमार प्यार की दौलत मिली है पहली बार तेरी दुनिया मे आ कर..
कोई नज़्म तो लिख मेरी नूरानी सूरत के लिए..कोई कहानी तो सजा मेरी वफाए-ज़िन्दगी के लिए...

दुनिया कहती है तेरी सूरत पे लिखा है,मेरी मुहब्बत का नशा ..तेरी रातो पे टिका है मेरे ही पहलु का

सिला...मेरी हँसी को न बना खुद की तक़दीर का नशा..कभी हो गए रुखसत जो इस दुनिया से ..तेरी

रूह से रूह का तार बन जाये गे...बस एक गुजारिश मेरी तुझ से,लिख दे कोई नज़्म इस नूरानी सूरत के

लिए...

Friday, 23 September 2016

यादो का लंबा पिटारा ले कर..रात रात भर पन्नो पे लिखते है..लफ्ज़ जब जब अल्फ़ाज़ बन कर इन पन्नो

पे ढलते है,तब तब तेरी बाहों मे जिए उन तमाम लम्हो को याद करते है..तेरे बिना कुछ ऐसा भी जिया,जो

इस दिल को नामंजूर रहा..तेरी इस महजबी को समझने के लिए,कोई शख्स कही भी न मिला..कोई भी

ख़ुशी न आये गी अब मेरे लिए..तेरी मेरी कहानी का आखिरी लफ्ज़ जब अल्फ़ाज़ मे ढल जाये गा..तभी

इन सांसो का बंधन आज़ाद हो कर,तेरी बाहों मे सिमट जाये गा...
कहा कैसे कितनी दूर चले आये..तेरे बिना...हर याद हर सांस लेते रहे बस तेरे बिना..बस यही रहा

जीवन क़ि लम्हो को,सालो को बस काटना है अब तेरे बिना...कभी रोये,कभी ज़ार ज़ार आसुओ के

सैलाब मे  खुद ही खुद मे बस बहते रहे,बहते रहे..न कह सके दर्द अपना,न ज़ी सके किसी के साथ इतना..

तेरे बिना यहाँ अपना कोई नहीं,कोई भी तो नहीं..ज़ी रहे है अकेले तनहा इन रहो पे,चल रहे है अकेले बस

वीरान रहो पे..एक दिन तेरे पास लौट आये गे..सकून से तुझे सब कुछ बता पाए गे..

Monday, 19 September 2016

छोटी सी कहानी थी लेकिन..ज़ख़्म गहरे बहुत दे गई...अल्फ़ाज़ थे कम इतने लेकिन..आँखों  मे

आसुओ का गहरा सैलाब दे गई..तिनका तिनका जोड़ा था ज़ज़्बात की लिखावट का..आंधिया जो

चली गेसुओं मे रेत का गुबार भर गई..संभलते संभलते बीती कितनी सादिया..पर सदियो के हर लम्हे

पे तेरी यादे इबादत बन कर मेरी सांसो,मेरी धड़कनो मे प्यार बन कर बहुत कुछ समझा गई ...
बहुत तन्हाई है..दिल को तड़प देने वाली तेरी बातो की याद आई है..बरसा है जब जब बारिश का पहला

पानी..तेरे साथ ऐसी ही बारिश मे भीगने की पहली रात याद आई है...बहुत अकेले है आज..बहुत मज़बूर

भी..तेरी ही बाहो मे बहकने की वो कहानी क्यों याद आई है..बदल चुका है आज ज़माने की निगाहों का

मिज़ाज़..तू ही नहीं तो इस ज़माने की रंजिशों से दूर रहने की बात आई है....

Thursday, 15 September 2016

 अपनी ज़िन्दगी की कहानी लिखते लिखते...उम्र कहाँ गुजर गई ----तेरी तलाश मे यूं भटकते भटकते

जवानी कहाँ निकल गई---बहुत दर्द है सीने मे मेरे..बहुत थकन है जिस्म मे मेरे---लाइलाज़ है मर्ज़ मेरा

तेरे वज़ूद के बिना जीवन का कोई अर्थ नहीं मेरा---लोग कहते है हम तबाही के उस मोड पे है...जहाँ

चलती है साँसे..दिल भी धड़कता है...पर तेरी राह देखते देखते यह आंखे ही बस पथरा गई है----
मेरी खूबसूरती की तारीफ इतनी भी न करो क़ि लोग तुम्हे शायर कहने लगे...लिखो न नज़्म कोई

ऐसी क़ि दुनिया तुम्हे दीवाना ही समझने लगे..आँखों क़ी गहराई पे जान इतनी भी ना लुटाओ क़ि

बदलती नज़रो का ईमान ही ना डोल जाये...सर से पाँव तक तेरे ही लफ़्ज़ों के शिकंजे मे है..कहाँ जाये

किधर जाये...ऐसा ना हो क़ि ज़माने के धोखे के शिकार ही हो जाये...
सितारों को गिनते गिनते..रात भर हम सो नहीं पाए...तेरी बेवफाई की कहानिया याद करते करते

हम तो रो भी नहीं पाए...ज़माना समझता है की हम बहुत खुश है तेरी मुहब्बत मे..दुनिया जलती

है तेरे मेरे अफसानो की..फसानो की दुहाई दे कर...लब तो हॅसते है मेरे पर दिल बेबसी मे रोता है..

साथ साथ हमकदम है तेरे..पर जीने के लिए सांसे ले ही नहीं पाए...

Tuesday, 13 September 2016

तेरी बातो का सरूर कुछ दिल पे  छाया है ऐसा..दुनिया कहती है क्या,नज़र आता नहीं अब ऐसा....

कभी सजते है तो कभी सवरते है..कभी गेसुओं को खुला छोड़..हवाओ  मे बहकते है..ख़ुशी के यह

लम्हे तेरी मुहब्बत ने दिए..दिल की धड़कनो मे साज़ तेरे अंदाज़ ने भरे..बस बहुत खुश है...हद की

इंतिहा तक..पर रहते है ऐसे की अब नज़र न लगे ज़माने की जैसे....

Monday, 12 September 2016

बहुत अरसे बाद उन का पैगाम आया..एक लंबी ख़ामोशी के बाद लबो के खुलने का वक़्त आया...

इंतज़ार तो बहुत देर से है..उलझनों को सुलझाने का ख्याल कब से है..मुहब्बत का इज़हार करे कैसे

वह लौट के आये तो बात बने कैसे...कशमकश मे बंधे सोच नहीं पाते..दिल नादाँ को अब समझाए कैसे..

काश अब यह वक़्त गुजरे..लब उन के खुले..रिश्तो को डोर मे बाधने का वक़्त आया ...

Sunday, 11 September 2016

जिक्र हुआ जब भी तेरे बारे मे..हम दिल ही दिल मे रो दिए..आंखे न छ्लके कही भूले से...

तेरी यादो मे कही दूर तक बस खो गए..ज़िन्दगी नाम बस जीने का है..याद इस बात को रखते है.

इस नूरानी चेहरे पे किसी की नज़र न लगे..सज़दे मे तेरे तेरी मोहब्बत को याद करते है...

बात तो है पर बात कुछ भी तो नहीं..यह सोच कर ज़िन्दगी की राहो को तुझे याद कर के चलते है..
बहुत कुछ जो था ऐसा..कह नही पाए है--छलकेे जो अशक आॅखो से..पूरी तरह बह ना

पाए है--दरद की इॅतिहा रही इतनी..सॅभल कर भी सॅभल ना पाए है--यादे जो टीस देेती

रही..किसी को ना बता पाए है--यह आॅसू,यह आहे..दरद का बहता हुआ सैलाब..यादो की

तॅॅॅहाई...कागज के पननो पे लिख कर,सब के लिए पैगामे-दरद बन कर छोड जाए गे---
बेवजह रूठने की वजह...कया बताए गे आप--किस बात से नाऱाज है..कुछ ऱाज बताए

गे आप--चॅद साॅसे जो बचा के रखी है हम ने..आप की चाहत के नाम--इन साॅसो की

रूखसती से पहले..कोई नाम तो दे जाईए आप--भुुला दीजिए अब सारे शिकवे..अपना

लिया है आप ने हम को..इतना इकरार तो कर दीजिए आप--

Saturday, 10 September 2016

बस यू ही हॅसी हॅसी मे..हम तेरा पयार बन गए--नजऱे मिली नजऱे झुकी..हम तेरा ही

ऐतबार बन गए--मुहबबत मे कोई शरत होती नही..और हम बिना पूछे तेरे दिल की

खामोश धडकन बन गए--पायल बजी,कॅगन सजे..चूडियो की झॅकार मेे....रिशते बने--

दुनिया बेवजह जलती रही..पावन मधुर बेेला मे हम तेरी नई दुनिया मे बसते गए....

बसते गए---
हर तॅहाई तेरी याद से जुडी हो..हर उदासी तेरे नाम पे बसी हो..कभी जो छलका दे आॅसू

इन आॅॅखो से...दिल बार बार रोए हर आहट हर आवाज पर...तो किस को कहे..किस को

सुनाए ऱाज मुहबबत  केेे सारे...आ जाओ लौट कर ऐसे,परिॅदो की रवानगी हो जैैसेे...हा

खिल जाए गे तेरे आने से ऐसे,दुआओ मे असर आ गया हो जैसे....

Friday, 9 September 2016

हर मुमकिन कोशिश की तुझे पा लेने की..पर तकदीर ने साथ छोड दिया--तूू अब जिस

भी राह सेे गुजरे..तेरी राहो मे आना छोड दिया--तेरी बेेरूखी से अब समझे..तेरे हमराज

बने,यह गवारा नही तुझ को--बेवजह अब तुझ को नजऱ आए..तेरे पीछेे भटकना छोड

दिया---मुुहबबत पाक है मेेरी..तभी तो तुुझे अब देखना ही छोड दिया---

Wednesday, 7 September 2016

कुछ तो बोलो...आप की खामाशी से अब डर लगता है---कही बिखर ना जाए जजबात..

सॅभालो खुद को कि अब डर लगता हैै---जिॅदगी मिलती नही बार बार जानम..पलको मे

बॅद हम को कर लो कि जमानेे की रूसवाई से बस डर लगता है---कुछ कदम साथ चलो

मेरे..कुछ कदम हम भी साथ चले तेरे...जिॅॅदगी अब तनहा ना हो..इस बात से कयू डर

लगता है---
आज पास मेरे नही है तू..पर तेरे खतो मे तेरा वजूद पा लेते है--हर लिखे लफज मे तेरे..

अपनी धुॅधली सी तसवीर ढूॅढ लेते है--जी चाहता है तेरे सॅग फिर..उन खुशनुमा पलो को

जिए--तेरी बाहो मे सिमट कर..रात भर सकून से सो जाए--अपनी खिलखिलाती हॅसी से

तेरे दिल के तारो को छू ले--पर यह अॅधेरा बहुत गहरा है..कि आज पास मेरे नही हैै तू---

Wednesday, 31 August 2016

मैै मुहबबत हू तेरी..तेरी वफाओ का सिला--मेरे नूरानी चेहरे मे बसी है तेरी किसमत की

ऱजा--तू चाहे मुुझे यह होगी तेरी मासूम अदा...मै चाहू तुझे तो मिले गी मुुझे खुदा के

रहमत की वजह--मुहबबत पाक है गर..तेरी भी और मेरी भी....तो इबादत की रसमो मे

जुडे गी किसमत मेरी भी और तेेेरी भी----

Sunday, 28 August 2016

मेॅहदी रचे हाथो मे लिखा है बस तेरा ही नाम--एक बार नही हजारो बार देखते है बस

तेरा ही नाम--उलझनो को सुलझा रही है, यह तेरे नाम की मेॅहदी--दुनिया जलती हैै तो

जलती रहे,वफाए-जिॅदगी की शाम को महका रही है यह मेॅहदी--रात मिलन की आने तो

दो,फिर जानो गे कया गुल खिलाए गी तेरे नाम की यह मेॅॅहदी---

Saturday, 27 August 2016

तुझे भूले कि तुझे याद करे....तुझे चाहे या सजदे मे शामिल कर ले....तेरी खामोश अदा

पे मर जाए या निगाहो मे अपनी तुझे कैद कर ले.... कशमकश मे है इतना कि यह भी

तुझे बता दे या बेताबी को खुद केे सीने मे छुपा ले....लोग कहते है तेरा अकस मेेरे चेहरे

पे झलकता है..अब तू ही बता दे तेरे हो जाए या तेरी बॅदिगी पे कायल हो जाए....
वकत को गुजरने दिया हम नेे..आजाद पॅछी की तरह--ना दरद बताए अपने,ना किसी

तकलीफ का इजहाऱ किया हम ने--मासूम सी हॅसी चेहरे पे लिए,कदम दर कदम चलते

रहे--हाथो की लकीरो मे साथ उस का पाने के  लिए,तेरी मेहरबानियो को भी नही चुना

हम ने--किसमत की दासताॅ का शिकवा कहे कयू कर,कि खुद को भी आजाद कर दिया

हम ने उडते पॅॅछी की तरह---

Monday, 22 August 2016

महजबीॅॅ होने के लिए..तेरे साथ तेरा होने के लिए...जरूरी तो नही कि रब से तुझे माॅगा

जाए---शिकवो का दौर चलाने के लिए..तेरे इॅतजाऱ मे रात भर जगने के लिए...जरूरी

तो नही कि सात फेरो का साथ माॅगा जाए---तुझे हर पल देेखने के लिए..रूखसती के

खयाल सेे जब दम घुटने लगेे..आॅखे बार बार भरने लगे...तो भी यह जरूरी तो नही कि

तुझ सेे तुझी को ही माॅॅग लिया जाए---

Friday, 19 August 2016

तेरे एक इशारे पे दुनिया छोड दी हम ने--रासते तो मिलते रहे मगर मजिॅल तुमही पे

रोक दी हम ने--वजूद तेरे मे सिमटने के लिए अपनी पहचान भुला दी हम ने--यकीॅ है

तुझ पे अब इतना कि अपने पे यकीॅ करना छोड दिया हम ने--शिददते-मुहबबत की बात

करे कैसे तेरी ही बाहो मे सारी जननत ढूॅढ ली हम ने----

Thursday, 18 August 2016

सूखे फूलो को जो देखा..पाक मुहबबत का वो जमाना याद आया--छोटी छोटी खुशियो मे

जिॅदगी जीने का वो दीवानापन याद आया--कभी रूठना तेरा..कभी मचलना मेरा....फिर

बेबाकी से खुल कर हॅसना...कयू उन पलो को पलको पेे सजाना आज याद आया--यादो

के झरोखो से जो मन को टटोला..तेरा मासूम सा नूरानी चेहरा इबादत मे कयू नजर

आया----

Wednesday, 17 August 2016

बदरा जो बरसा तो हम मुसकुरा दिया--बूॅदो ने छुआ जो बदन मेरा,तेरे छूने की सिरहन

से मन मचल मचल गया--यादो मे तेरी जो खोने लगे,पाॅव की पायल ने धडकनो को ही

बढा दिया---हाथो की लकीरो मे जो नाम तेरा दिखा,खुदा की खुदाई पे सिर झुका दिया -

रफता रफता तेरी मुहबबत की जॅजीरो मे जो जकडे,आजादी के नाम को रूखसत कर

दिया---
जुलफो का सॅवरना..सॅवर कर फिर से बिखरना---यह शरारत है तेरी या जुुलफो तले

छुपने की अदा---कॅगन को मेरी बाहो मे सजाना..सजा कर पलको से छू लेना--यह

शिददते-मुहबबत हैै या मुझे बहकाने की मासूम खता---मुड मुड कर मुझेे देखते जाना

और पलट कर मुझे बाहो मे भर लेना..मिलन की घडिया याद दिलाने की इक वजह तो

नही---------
यू ही हॅसी हॅसी मे कह दिया उन से..चले जाओ जिॅदगी से मेरी---तामील करते है आप

के हुकम की,यह कह कर...जिॅदगी से मेरी वो चले गए---अरसा हुआ उन की रूखसती

को--बेहाल है..बदहवास हैै..इॅतजाऱ मे परेशान है---रूह की कशिश मेे बॅधा यह पयार तेरा

पाॅवो की जॅजीर बना साॅसो का बिखराव मेरा---अब तामील करो इस हुकम की,बस लौट

कर आ जाओ---आ जाओ--

Monday, 8 August 2016

धडकनो की गर बात सुने तो बस तेरे ही हो जाते हैै...आॅखे जो हकीकत बयाॅ करती है

यकीकन कदमो दूर चले जाते है...लिबास पहने जो तेरे एहसासो का,तो बिलकुल ही

बदल जाते हैै...पलट कर देखे जो राहेे-किसमत को बस बिखर बिखर जाते है...पूछते है

तुम से..अॅदाजे-बयाॅ कहने के लिए तेरे रूबरू हो या सब सीने मे दफन कर तेरी जिॅदगी

मे शिरकत कर जाए...

Sunday, 7 August 2016

पलके ना गिरा..आॅखे ना झुका...हाथो को दुपटटे मे ना छिपा....धडकने दिल की

सॅभालने के लिए,बॅद दरवाजो मे ना जा...ऐ नूरेेे-जहाॅ मेरी..बस अब तडप के मेरी बाहो

मे आ...मिलन की घडिया अब रह गई थोडी,मेेरी पाक मुहबबत को आजमायश की

परतो मे ना जला...महजबीॅॅ मेरी..दुलहन के लिबास मे सजनेे के लिए खुद को मेरी

पनाहो मे ले आ...

Monday, 1 August 2016

पलके जो भीगी..बस भीगती चली गई--तूने जो बाहो मे भरा..आॅखे छलकती चली गई--

इतने इॅॅतजाऱ के बाद तेरा आना..धडकने बढा गया--गहरी साॅसे लेना फिर खुद मे खुद

को समेट लेना..जैसे रिशते का एहसास दिला गया--लौट जाओ गे तुम मुझे छोड कर..

इसी बेबसी मे मन फिर से घबरा गया--
दोस्तों..मेरी शायरी के हर रूप को पसंद करने का शुक्रिया..

Saturday, 30 July 2016

कहर है इस मौसम का..या तेरी तूफानी अदाओ की सजा--दिल के अरमान बने है फिर

हवाओ मे बिखरने की वजह--यह गेसू है या घने बादलो का अॅधेेरा,यह चेहरा है तेरा या

मखमली धूप का साया--निखरा निखरा सा तेरा बदन,हो जैसे बरसती ओस की बूॅदो की

खता--तुझे छू लेे या इबादत के पननो मे छुपा दे..बता दे तेरी कया हैै ऱजा---
कभी दिल टूटा तो तुम कयू याद आए--कभी बरसा यह नीर तो कयू दिल के छाले उभर

आए--मुहबबत को कभी बदगुमान नही होने दिया,पर तडपते तडपते बस बेबसी के यह

आॅसू छलक आए--राहे-उलफत मे बहुत ही अॅधेरे है,चिराग ढूॅढने के लिए पथरीली राहो

पे ही निकल आए--तुुम हो जहा,मेरी आवाज सुनो..अब तो उमर के उस दौर से भी बहुत

आगे निकल आए---
यादो के भॅवर मे आज फिर उलझे और  जी भर कर रो दिए...तडप ने फिर इतना

तडपाया कि सीने के जखम फिर उधड गए..आॅखे बरसा रही है आॅसू और हम गालो पे

अशको को महसूस करते रहे..करते रहे...दरद जो इतना जानलेवा है कि बताने के लिए

किसी काॅधे का इॅतजाऱ करते रहे...अकेले है बहुत ही तनहा है..यादो को सीने से लगा

कर मौत को बुलाते रहेे..बस बुलातेे ही रहे...

Thursday, 28 July 2016

रिवाजो की इस दुनिया से बेजाऱ है हम..जो उठाते है हर बात पे सवालात,उन नादानो से

नाऱाज है हम..खुदा की बनाई दुनिया मे,बिखरे है हजारो अफसाने...कभी सूरज की तेज

किरण सेेे जमाना जल जाता है..कभी चाॅद की आशनाई पे गजले हजारो लिख देता हैै...

इशक की राहो मे खलल डालने के लिए,दसतूरो की इॅतिहाई है..तेरे मेरे सपनो को तोडने

के लिए हर रॅजिश आजमाई है..तभी तो जमाने के रिवाजो से नाऱाज है हम....

Wednesday, 27 July 2016

बरसो बाद भी..कयू मुहबबत तेरी दिल के दरवाजे पे दसतक सी दे जाती है--उन तमाम

यादो को आज भी सीने मे छुपाए..कयूू पलको को भिगो ही जाती है--हॅसते है खिलखिला

कर इस जिॅॅदगी को जीते है..पर तेरे साथ बिताए वो शाही लमहे दरद से दिल को तार

तार कर जाते है--मिलो गे गर किसी मोड पे,तो सवाल पूछे गे...टूटन यह साझेदारी की

कया तुम को भी टीस टीस जाती है--

Sunday, 24 July 2016

ना रहे गेे हम,ना रहो गे तुम---हवाओ मे महके गी तेरी मेरी मुहबबत की खुशबू--बीत

जाए गी सदिया हजारो, पर गूजे गी फिजाओ मे पयार की कहानिया..तेरी मेरी--यह

इशक तेरा दीवाना सा,यह हुसन मेरा अफसाना सा...दे जाए गा पैगाम पयार मे बहकने

वालो को--मिसाल दे गी यही दुुनिया हमारे रूहे-जजबात की...जब ना रहे गे हम और ना

रहो गे तुम--

Tuesday, 19 July 2016

खुद को खुदा समझने की गलती  कयू करते हो--बात बात पे..दुनिया है मेरेे बस मे..यह

कहने की हिमाकत कयू करते हो--बेवफाई तो की तुम ने,पर बेवफा मुझे कह कर हमारी

मुहबबत को बरबाद कयूूू करते हो--यह जिॅदगी अमानत है ऊपर वाले की,साॅसे चलती है

बस मेरे नाम से..यह जता कर कयू मुझे खुद से दूर कर बैठेे हो---

Sunday, 17 July 2016

बरसा आज इतना पानी--कहर बन कर बरसा,पननो पे मेरे--हजारो पननो को भिगोया..

सयाही को गहरी बूॅदो नेे अलविदा कह दिया--लफज जो ढले थे जजबात की तॅहाई मे...

जजबात जो लिखे थे खून की सयाही से--कही था दरद लिखा,कही मुहबबत की कहानी

थी--आगाह करते है ऐ बरसाती मौसम तुझ को,पननो को भिगोया है तुम ने...पर दिल

रूह इबाबत को ना मिटा पाओ गे..महबूब मेरा बसता है यहा,उस की जगह तुम कभी ना

ले पाओ गे---

Saturday, 16 July 2016

तेरा आना जिॅदगी मे मेरी..एक खुशनुुुमा एहसास था---बरसो तेरा घर को महकाना..एक

इबादत..शाही रूतबे का पैगाम था--वो चेहरा,वो आॅखे..वो बेहद मासूम सी तेरी शरारते--

कभी लिपटना,कभी घॅटो मेरी नजऱो से ओझल होना..फिर अचानक गोद मे मेरी सिमट

जाना--तेरी जगह आज भी वैसी है..तेरा वजूद आज भी कायम है--सीने मे आज भी वही

तडप कायम है--हा तू कही गया ही नही,मेरे वजूद-मेरी रूह मे अब भी शामिल है---

Tuesday, 12 July 2016

हवाओ मेे घुल रहा है तेरे पयार का नशा...तभी तो महकी महकी है यह फिजा...छू कर

मेरे बदन को जब जाती है,और लौट कर जब आती है-तेरे बदन की वो खुशबू ले आती है

हजारो चिॅगारिया कौॅॅध जाती है..तडप कहती है अब इॅतजाऱ खतम करो.रातो को जगाने

का यह सिलसिला अब बस भी करो...आ जाओ शाही नवाब बन कर,कि घुलता जा रहा

है तेरे पयार का गहरा नशा....
रूहे-साथी हो मेेरे,खयाले हमराज नही--दिल की धडकन मे बसे,सरताज हो वैसे ही मेरे--

तनहाॅ जो हुए गमे-तनहाई मे,खाई चोट जब जब जमाने की आजमायश मेे--रोए है तेरे

उसी काॅधे पे,जखमो को दिया आराम तेरी उनही आॅखो ने--कौन कहता है कि तू दूर है

मुझ से,पुकारा जब जब शिददत से तुझे..दिया है साथ मेरा रूहे-साथी मेरा बन के---
वो दूर तक तेरे साथ चलने का वादा..उसी धूप मे फिर से नॅगे पाॅॅव भटकने का वोही

वादा..तपते रेगिसतान मेे हाथो मे हाथ थामे,खिलखिलाने का मासूम सा वादा..तुम ने

जो कहा..आ भीग ले बारिश की तेज फुहारो मे,हम हॅस दिए आॅचल को भिगो के, तेरी

तसलली का वो भीगा सा वादा..हाथो मे लिए तेरे चेहरे को,ताउमर तुझी पे मरने का यह

इबादती वादा...

Sunday, 10 July 2016

इजाजत कयू माॅग रहे हो, मेरी दुनिया मे आने के लिए...कयू थके हो इतना कदमे-खाक

मेरी बाहो मेे आने के लिए..जमाना रॅजिशे लेता है तो लेता ही रहे,डर कर ना जिओ साॅसे

लेनेे के लिए...मुहबबत होगी पाक तो जमाना खाक हो जाए गा...हजारो ताने देते देते ,

 खुद ही खुदा के दरबार मे जवाब-देही के लिए मजबूर हो जाए गा...आ जी ले अब खुल

के जरा..ना माॅग इजाजत अब मेरी दुनिया मे आने के लिए....



उदासी कहती है कोई नही तेरा...बरसता पानी कहता है बहा दे नीर,कि अब कोई नही

अपना...धडकने जुबाॅ दे रही है,आगे सफर पे चलने के लिए...कदम जो भरे थे थकावट

से इतना,वो जिॅदगी की तेज रफतार पे अब राजी है चलने केे लिए...ना अब आगे है कोई

ना पीछे मुडना है कभी...बस मॅजिल को पाने के लिए चलना है....चलना है अभी....
राहे बॅद होती है जहा..रिशतो का दरद जहा देता है धुआ..आॅसू जहा बरस बरस कर देते

है सदाॅ..दौलत की चकाचौॅध से दम घुटता है जहा..दिल की तडप जब बनने लगती है

खुद ही के जीने की वजह.....हम तब पाॅव रखते है खुदा की इस जमीॅ पे,खुद से खुद को

मॅजिले-ताकत की तरफ..लौट कर ना जाए गे उन दागदार राहो पे,बस पननो पे बसा ली

अब दुनिया ही यहा......

Saturday, 9 July 2016

शहजादी हू तेरी..इॅकार नही अब मुझ को--ले चल सात समॅदर पार..कही इॅकार नही अब

मुझ को--हर रसम निभाए गेे सॅग तेरे..कोई देखे ना तुझे बस इस दिल मे छुपा ले गे

तुझ को--हसरते जो उठती है तेरे मेरे सीने मे मुहबबत बन के..ताउमर निभाए गे रिशते

की इॅतिहा बन के--आॅखो से जो कभी बरसे आॅसू..कलश पूजा का समझ पलको पे बिठा

जाए गे--
शौक नवाबो के है,पर सॅग फिर भी तेरे चलने को राजी है--आदी ही नही गुरबत की इन

वीरान रातो के,पर मुहबबत मे तेरी सब सहने को राजी है--लोग कहते है दुनिया जो सज

गई सॅग तेेरे,मौत की बरबादी फिर लाजिमी है--इबादत के रॅगो मे हर बार देखा है चेहरा

तेरा,फिर कयू ना माने कि सात जनमो का सफर तेरे ही सॅग बाकी है--
मै ना भी कहू तो तुम समझ जाओ गे---दिल धडकता है कयू देख कर तुमहे...पाॅव भी

टिकते नही कयू देख कर तुमहे....बारिश की तेज फुहारे भिगोती है बदन को मेरे,पर कयू

जलता है यह बदन फिर भी आसमाॅ के तलेे..जुबाॅ बस खामोश है,पर लफजो की कहानी

कयू गुसताख है....हा मै ना भी कहू तो यकीकन तुम समझ जाओ गे---

Wednesday, 6 July 2016

हर बात पे इन आॅखो से सैलाब बहा दे..ऐसे भी नही रहे हैै हम---तेरी आगोश मे आने के

लिए पहले की तरह तडपे...वैसे जाॅ-निसार अब नही है हम---तेरी गुसताखियो पे खुद

को ही सजा दे..वो गुलामे-अॅदाज से बरी हो चुके है हम---दरद तूने दिए बेइॅॅॅतिहा जो हमेे.

उसी का नतीजा है कि रिशते-खास से महरूम हो चुुके है हम----

Tuesday, 5 July 2016

मुझे जिॅदा रखने के लिए...खुल के साॅसे लेने के लिए...तेरा वजूद काफी है---मैै जीवन के

जिस रासते से गुजरू..तेरा एहसास काफी है---बहुत कुछ जो बिखरा है तेरे जाने से..उस

को सॅवारने के लिए तेरी इक तसवीर का होना ही काफी है--लोग मुझे तेरा दीवाना कहते

है..तू माने ना माने....महजबीॅ तेरी होने के लिए..बस तू शॅहशाह है मेरा...इतना काफी है
विशवास की डोरी मे बॅॅॅधा,सीने मे लहूू बन कर बहा...कभी रोकेे सेे ना रूका,आॅॅॅखो मे इक

जजबाती सा सवाल बना....तेरे मेरे रिशते की कामयाबी का धुुआधार नशा...लोग उठाए

गेे आवाज किसी अधूरी सी कहानी की तरह...कभी बिखेरे गेेेे अलफाज फकीरी-अॅॅदाज

की तरह...फिर भी रहे गा यह नशा राजसी ठाट की शोहरत की तरह..... 
यू तो यह जिॅदगी बहुत इॅतिहान लेेती हैै..कभी देे कर खुुशी हवाओ मे उडा देती है..जीने

की राहो मे खुशनुुमा रॅग बिखेर जाती है...मै हू रॅगीने-वफा तेरी यह एहसास दिला खुद

से जोड लेती है...यकीॅ होता है जब इस की मासूम गुसताखियो पे..तभी सीने को चीरने

की सजा देती है..रूह को रूलाती है...बेखबर बन कर होश पे होश उडाती है..

Saturday, 2 July 2016

हर बरसती बूॅद मे लिपट कर आया है पैगाम तेरा..मोती की तरह सॅभाल कर रखा है हर

इबादती पैगाम तेरा....कोई छू भी ना ले इशके-पैगाम को,महफूज रखा है दिले-दरबार मे

शाही ईमान की तरह...तेरे आने से पहले पढ चुके है हर लफज बूॅदे-महबूब की तरह..अब

बचा है सॅवरना मुमताजे-शहॅॅशाह की तरह....
नासाज है मगरूर नही..हुसने-यार है पर दगाबाज नही...परछाई की तरह साथ रहते है

तेरे..पर शक के दायरे मे बॅधा यह पयार नही.....तलाश मे बिता दी सदिया कई हम ने..

तू रहे ऱाजदार मेरा,इस से जयादा खवाहिश भी नही मेरी.....रिशता तो जनमो जनमो

का है..पर सात फेरो से जुडा हो साथ...यह जरूरी तो नही.....

Wednesday, 29 June 2016

जिॅदगी की तलाश मे जो निकले..तो तुम मिल गए--साॅसे जो उखडी उखडी सी थी..उन

मे धडकन बन के तुम समा गए--आॅखे जब जब नम हुई..तेरी पलको ने इनहे थाम

लिया--थके थके कदमो से जो ढूॅढने लगे खुशी..तेरी बाहो के सहारे ने मेरे आॅचल को

दुआओ से बाॅध दिया--अब समझे जननत तो तुम मे थी..हम बेवजह वीराने मे भटकते

रहे--

Sunday, 26 June 2016

हर बेताब तमनना की तरह कयू दिल मे उतर गए हो तुम--इक बेमौसम बरसात की

तरह अकसर इन आॅखो से बरस जाते हो तुम--कभी खिलखिलाती हॅसी बन कर मेरे ही

जीवन मे उतर जाते हो तुम--ना याद करना चाहू तुमहे तो भी मेरे खवाबो मे दुआ बन

कर छा जाते हो तुम--अब कहते है शुकरीया हमदम..गुलिसता  बन कर साॅसो मे घुल

गए हो तुम---

Saturday, 25 June 2016

वो पूछते है हम से अकसर..मुहबबत की इतॅिहा है कहा तक--वजूद मेरा जो ना रहा कभी

चाहत का दौर रहे गा कहा तक--जमाने के डर से किसी और के हो जाओ गे या पयार मे

मेरे तडप कर रह जाओ गे--यह जिॅदगी है अब अमानत बस तेरे नाम की..ना तडपे गे ना

किसी के हो पाए गे..रूह मे रूह को समेटे तेरी दुनिया मे चले आए गे--

Thursday, 23 June 2016

इतने बेगैरत तो नही कि बिन बुलाए तेरे दर पे चले आए...दौलत की चकाचौॅध मे खुद

के वजूद को ही झुठला जाए--इबादत की रसमो से जुडा है इस दिल का आशियाना--दूर

दूर तक नही है जिॅदगी के उलझे सवालो का ताना बाना--वो मुहबबत ही कया जो चॅद

सिकको मे बिक जाए--कभी तेरे दिल से उठे गर इशक का पाक दरिया..तो मेरे इॅतजाऱ

को दुलहन का लिबास पहना जाना--
मै ना भी रहू जब इस दुनिया मे..मेरे लफजो मे मुझे पाओ गे--जब भी ढूॅढो गे नाम

मुहबबत का..मेरे चेहरेे पे लिखा पाओ गे--रूह को छूने के लिए पास आना ना मेेरेे..रूह

की तनहाई से परेशाॅ हो जाओ गे--दरद के आॅचल मे बिताया जीवन सारा..खुशी की इक

लहर के लिए इन हवाओ मे कही गुम हो जाए गे--आॅख नम हो कभी तो मेरेे लफजो मे

ही मुझे पा जाओ गे---
कलम जब भी लिखती है कागज के पननो पे..टुकडे दिलो के हजार कर देती है--सूखती

है सयाही जब तक..तब तक कितने दिलो को जोड भी देती है--हर पल बिखरेती है ना

जाने कितने ही अफसाने..हवाओ मे गुम रिशतो को ढूॅढ लाती है--पल पल खिलते हुए

सॅसार को बॅधन मे बाॅध जाती है--हा यह कलम जब भी लिखती है..पननो पे गजब ढा

जाती है---
 कहने को तेरी मासूम अदा ही सही..पर हम तो उस पे वारी वारी है---खॅजर कितने भी

चुुभा सीने मे मेरे..लहू से भीगा यह दिल तेरे नखरो पे वारी वारी है---बुझते है दिए तेज

हवाओ से बेशक..पर तेरे हुसने-अदा को साथ लिए यह जमाना तुझी पे ही भारी हैै---हॅसी

को यू ना छुपा आॅचल मे ऐसेे..तकदीरे-फरमान को हथेेली मे लिखा यह दीवाना आज भी

तुझ सॅग राजी राजी है---

Tuesday, 21 June 2016

फूल बरसा दिए हम पे..यह कह कर--मेरा बनने के लिए रिवाजो की कया जरूरत है---

नरम ओस की बूॅदे हम पे बिखरा कर..खोला इक सच ऐसा कि इस हुसने-हसीॅ को गहनो

की जरूरत कया है---हाथो को चूमा और कहा..कलाईयो को सजाने के लिए अब कॅगन

की जरूरत कया है--माशा अललाह इॅतिहा पयार की जब है इतनी तो इस दुनिया की

जरूरत कया है--- 

Monday, 20 June 2016

इकरार करो ना अपनी मुहबबत का मुझ से..कब तक हमे यू तरसाओ गे---रेतीली

वादियो मे भी,अब बरस गए है बादल..हमे जानम तुम कब तक सताओ गे---पल पल

का यह इॅतजाऱ तो मार डाले गा हमे..साॅसे जो रूकी तब आए कया जिॅदगी मेरी लौटा

पाओ गेे---हॅसी हॅसी मे मुहबबत को खेल मानने वाले..यह तो इबादते-इशक है,खुदा के

दरबार से भी माॅॅगो गे हमे..खाली हाथ लौट आओ गे--- 

Sunday, 19 June 2016

चलने के  लिए कोई राह तो नही..बस तेेरे कदम काफी है--सुनू किस की कहा कितनी..

तेरेे दिल की धडकन ही सुनने के लिए काफी है--शहनाईया बजती है कहा कैसे..बिन

रिशते तेरे हो कर जिए,इतना ही मेरे लिए काफी है--तेरी रूह से जुडा है वजूद मेरा..दिल

के एहसास से बना है सॅसार मेरा..फिर कयू ना कहू तू मेरा है..जमानेे को जलाने केे लिए

मेेरा नूूरे-नशीॅॅ होना काफी है--

Friday, 17 June 2016

ना देख शोख निगाहो से मुझे..दुनिया से बेखबर हो जाए गे--ना उठा नाज इतने मेरे..

तेरी इस आदत के मशगूल हो जाए गे--तेरी चाहत मे तडपना सीखा है मैने..दूर जाना

नही बिखर जाए गे--हर ऱाज तेरा है मेेरे सीने मे,मेरी हर खता को छुपाया है तुम नेे--वो

पल जो भीगे है मुहबबत के शाही रॅगो मे..बाॅध ले रूहे-वफा मे अपनी..कि जुदा हो कभी

इस से पहले....मर जाए गे...हा मर जाए गे---
चाहत मे उलझे है तेरी इस कदर..कि चेहरा कोई और दिखता नही--तू गुजरता है जिन

राहो से..उन तमाम राहो से ऱशक होता है मुझे--यह हवाए जब जब छूती है तुझे..पूरी

फिजाओ से खौफ होता है मुुझे--जी चाहता है छुपा के रख लेेे सीने मे तुझे..पर यहा भी

तेरे दिल का हुकम चलता है--आ बॅद कर ले अब इन आॅखो मे तुुझे..पर आॅसूओ की इन

ऱवानगी से..तुझे कयूू खोने का डर लगता है----
मेेरे लिए तेरी इक नजऱ ही काफी है..फिर तकरार की साजिश कैसी--सजदे करते है तेरेे

आने पे हर बार..फिर सजा पाने के लिए यह जुलम अब भारी है--ताकते-इशक से तेरे

बेहाल रहते है..फिर हुसनेे-वफा पे पहरे की  आजमायशे कयू आई है--तडपते है मुहबबत

की आग मे दोनो..फिर खतावार कहलाने केे लिए हम ही कयू गुनहगारी है--
कलाईया जो पकडी तुम ने..कयू जजबात निखर गए--बेशक टूटी है चूडिया..पर खवाब

तो तेेरे साथ तेरी ही आगोश मे सिमट गए--हर टुकडा टूटा हुआ,तेरी मेरी मुहबबत को

जोडता जाए गा--हर सपना हर टुकडेे मे तबदील होता जाए गा--दुनिया इसे तेेरे मेरे

पयार की नाकामी समझे गी..हम खुश है कि दुनिया की बुरी नजऱ से हमारा इकरार

सॅवर गया---- 
हसरते कहा खामोश रहती है..जिॅदगी को जगाने के लिए चुपके से कदम रख जाती है---

महकने के लिए दिल का आॅगन है बहुत..फिर भी जमाने को हवा दे जाती है---मुहबबत

के निशाॅॅ जहा दिख जाते है..आग को चिॅगारी की खबर बता जाती है---बहकने दो..अब

सॅवरने भी दो..साजन के आने की खबर,उस के आने से पहलेे ही दे जाती है--- 

Tuesday, 14 June 2016

बादल बरसे तो फिर बरसते ही चले गए..एहसास दिला के किसी के पयार का,तूफाॅ बन

हम पे कहर ढा गए--भीगेे है पूरी तरह कुछ बूॅॅदो मेे तो कुछ चाहत के ऐतबार मे--दिल तो

बुला रहा है उस अजनबी से पयार को,पर लब है कि खुलते नही इस इकरार के इजहार पे

दुआ है खुदा तुम से..बरसे है जैसे बदरा,बरस जाए वैसे खुल के सनम का पयार हम पे---
वादियो मे फैली है खूबसूूरती इतनी..यह आॅखे फिर भी बेवजह कयू भर आई है--चेहरे

का नूर है बरकरार उतना..मन के किसी कोने मे यह उदासी कयू घर कर आई है--कोई

शिकवा नही ऐ जिॅॅॅदगी तुझ से..फिर यह अजनबी सी परेशानी कयू दिल पेे छाई है--घुल

रही है साॅसो मे खुशबू इतनी..फिर भी किस की चाह मे यही साॅसे कयू थम सी आई है--

Monday, 6 June 2016

निखर गए है तेरे पयार मे इतना..आईना भी देखते है तो शरमा जातेे है इतना--लगता है

तेरी निगाहे बॅद दरवाजो से निहारती है मुझ को--कि सरसराहट से ही खुद मे सिमट

जाते है कितना--रूबरू तुझ से होने की ताकत जुटाए कैसे..सज के सॅवर के तेरे ही

नजदीक आए कैसे--मिलन की घडिया तो बस आने को है..घबरा कर पसीने पसीने होते

जा रहे है कितना--

Sunday, 5 June 2016

यही कही आस पास तेरे..मेरी धडकने बसती है--तू मिलता है जिस तरह मेरी पहचान

बन कर..मेरी रूह को सकून मिलता है--वादो की दुनिया से अलग..हमारी इक दुनिया है

जहा बसता है वो पयार..बेपनाह इबादत की जहा मॅजूूरी है--तूने कुछ कहा नही..पर मैने

तो सब सुन लिया--आॅखे तो बॅद थी मेरी..पर सपनो को रॅग तूने दे दिया---

Saturday, 4 June 2016

कही जिॅदगी की वो खता..कही मौत की सुलझी सी इक वफा...दरमयाॅ रही तेरे मेरे बीच

समझौतो को निभा देने की वो अदा....हजारो रॅॅग दिखाती रही यह वफाए-जिॅदगी की

सजा..कभी तनहाॅ हम रहे तो कभी तुम ने सही उदासी के रॅगो की वजह...टुकडो मे बटी

मुहबबत की वजह..कभी हम जुदा तो कही बदल गई तेरी राहे-वफा.....

Friday, 3 June 2016

हमारे एक आॅसू पे कभी जान लुटा देने वाले..हमारे चेहरे पे दरद की लकीरो को पढने

वाले..खामोशी की वो बिखरी सी जुुबाॅ समझने वाले..कभी हलकी सी हॅसी मे मेरी तमाम

 खवाहिशो को जिॅदगी देने वाले..आज बिखरे है मेरे आॅसू चारो तरफ,दरद की चादर मे

लिपटा है तेरा नूरे-बदन..लौट आओ लौट आओ..मेरी साॅसो को मुझ से जुदा कर देने

वाले..

Thursday, 2 June 2016

मुुहबबत नाकाम नही..तेरी मेरी--फिर भी कयू इस जिॅदगी से डर लगता है--बहके है

कदम सॅग साथ तेरे..फिर भी सॅभलने मे कयू डर लगता है--बात बात पे रो देते है..तू है

खफा फिर भी आॅसू पी लेते है--यह रसम है कौन सी..कभी रोते है तो कभी आॅसू ही पी

जाते है--बेवफा नही हो तुम..जानते है--फिर भी तेरे लौटने की इॅतजाऱ करते करते कयू

डर जाते हैै---
बहुत सोचा-बहुत चाहा..तुझ से दूर चले जाए--बस जाए कही दूर-जहा ना तू हो..ना तेरी

यादे हो--उदास हो जिॅदगी बेशक..पर सकून खुद के साथ हो--मिलने के लिए ना कोई

तकदीरे-खास हो..ना गुफतगू के लिए कोई रूहे पाक हो--इनितहा तो तब हुई जब दिल

ने कहा.. मिले गा तुझे कब कहा सकूने दासताॅॅ..जब तेरी रूह से जुडी है तेरे पयार की

रूहे-दासताॅ---

Saturday, 28 May 2016

वो कहते है नजऱ तो मिला लो हम से..गरूर मे डूबे हो इतना कभी हमारी खबर भी ले लो

मुहबबत इमतिहान लेती है..और यह हुसने-अदा कभी कभी जान भी ले लेती है..जिद है

तेरे पयार मे फना हो जाए गे..मरते मर जाए गे पर किसी और के ना हो पाए गे..आमदा

है बस तेरे बनने के लिए..अब तो हमनशीॅ मेरे नजऱ मिला लो हम से..

Friday, 27 May 2016

तुम बदले तो बदली दुनिया..मेरी नजऱ मे बदले यह चाॅद सितारे..लुटा कर पयार तुझ पे

बिखर गए कयू जजबात मेरे...अशक है कि अब बहते ही नही..पतथर की मूरत बने बस

खामोश है बरसो के लिए...ना है शिकवा ना शिकायत करे गे कभी..जिसम मे बसी रूह

के अरमाॅ ही कुचल गए...

Thursday, 26 May 2016

कभी बहक जाऊ तो सॅभाल लेना मुझ को--गहरी साॅसे जो लेने लगू तो समझ जाना

मुझ को--मेेरे हुसन की तपिश मे कही खुद ना जल जाना--गेेसूओ की घनी छाॅॅव मे जरा

खुद को बचा लेना--आगाह कर रहे है..मुहबबते-दसतूर से..बरबाद ना हो जाओ बता रहे

है उसूल से--दरिया है सुलगते जजबात का..दिल कहा ना माने फिर भी सॅभाल लेना

यकीकन खुद को----

Wednesday, 25 May 2016

रॅजिशे मिटा दे अब दिलो की..कि पास मेरे आजा--बारिश की बूॅदो मे छिपे हैै एहसास

कई..जरा नजदीक तो आजा--थम जाए गा यह तूफान भले लेकिन..अॅदर के तूफान को

समेटने जलदी आजा--मेरी शोखी मे छिपी है मेरी मासूम हॅसी ..इस उजली सी धूप मे

बहकने केे लिए ही आजा--परदे मे छुपाया है नूरानी चेहरा..झलक इस की पाने के लिए

तू लौट के फिर आजा...फिर आजा---
रात की चादर मे लिपटा,वो रौशन सा सवेरा--बादलो की झुरमुट मेे सिमटता,चाॅद वोही

पयारा पयारा--बिखरी है हवाओ मे मदहोशी की ऱजा..है घनेरी जुलफो की महकती वो

खता--पास आने का कोई बहाना तो बना..खवाबो की चाहतो का कोई ऐसा निशाना तो

बना--टूटे तेरी बाहो मेे..निखरी सुबह को अॅदाजे-मुहबबत तो बना--- 
ऱाज है दिल मे इतने गहरे..कि मौत के साथ दफन हो जाए गे--कुछ ऱाज रहे है ऐसे जो

कागज के पननो पे हमारी अमानत बन कर रह जाए गे--चलती साॅसो के साथ जो जुबाॅ

पे ना आया..वो लफजो की कारागरी मे यकीकन जमाने को बता जाए गा--गुनाहो की

नगरी मे गुनाह करने वालो..अब सब दुनिया मे हकीकत मे सामने आ जाए गा----
गुजरती रही यह जिॅदगी,और हम तनहाॅ होते रहे--तेरी हर याद को साथ लिए,हम हर

सॅजीदगी राहो से गुजरते रहे--हर नजऱ के धोखे को,सिरे से नकारते रहे---यह तनहाई

तो बस हमारी है,गैरो को खुद से हजारो कदम दूर रखतेे रहे--सूूरत की मासूमियत पे

हमे कमजोर समझ,दुनिया के नापाक इरादो को हम दूर झटकते रहे----

Friday, 20 May 2016

मौसम की तरह बदल तो नही जाओ गे--जवानी की पनाहो मे जो ना रहे,कही दूर तो

नही हो जाओ गे--बिखरते काले गेसूओ मे जो भरा रॅग चाॅदी का,कही पास हो कर भी दूर

तो ना हो जाओ गे--कभी तेरी खिदमत के काबिल ना रहे,तो अपनी इस दुलहन को सजा

तो ना दो गे--मासूम हो,दिलरूबा मेरी,जननत से उतरी शाहे-परी हो मेरी--कहना है बस

 इतना तुम से..आसमाॅ कायम है जब तक,तेरे साथ रहू गा......तब तक------
उन रॅगीन सपनो की डोर आज भी तेरे साथ जुडी है--तू पलट कर आ या ना आ...पर

खामोश मुहबबत की वो कसक दरदे-दिल मे आज भी बसी है--आॅसूओ को पलको मे

दबा कर रखते है..डरते है यादो को तेरी मेरे दामन से बहा कर ना ले जाए--मिलते है

हजारो हमसफर साथ चलने के लिए..पर हम है कि अब भी तुझी से जुडे है-- 
खामोशिया तेरी जान ले ले गी मेरी--कुछ तो बोल कि यह उदासिया बेजाऱ कर दे गी

मुझे--यू तो यह दुनिया कभी कभी बहुत खामोश लगती है,इतने शोर-शराबे मे बेवजह

परेशाॅ सी लगती है--तेरा यू उलझे उलझे रहना,यकीकन मेेरी जान पे बन आया है--अब

उदासी छोड यू मुसकुरा देना,आगाज है किस बात का--कुछ तो बोल,कुछ तो बोल-------
तेरे साथ छोड देने से खफा नही तुझ से--तेरी लापरवाहियो के लिए परेशाॅ भी नही तुझ

से--अकेले चलना रहा फितरत मेरी,सहारो के लिए उममीद का दामन नही थामा मैने--

जब खुदा रहा हर पल साथ मेरे,फिर दुनिया वालो की औकात पे रोते कैसे--दुआ है आज

भी तेरे लिए कि जिन राहो पे कदम पडे तेरे,बस खुदा मेहरबाॅ रहे तुझ पे---

Thursday, 19 May 2016

ननहा सा दिल यह मेरा..रखना सॅभाल के--बेताबी भरी हैै कितनी..ना खोना कभी इसेे

खुमार मे--धडकने हैै शामिल इस की हर पुकार मे..सुनाए गी ऱाजे-वफा कभी तडपो गे

जब रात मेे--कोई आए गा ना अब मेरी जिॅॅदगी के इस बाजाऱ मे--रह गया है अब यह

बेजान जिसम दौलतो के अॅबार मे--कल कहा ले जाए गी किसमत मेरी,बस सॅभाल कर

रखना ननहा सा यह दिल मेरा--
एक वो पयारी सी हॅसी..दिल को बहकाने वाली मुसकुराहट  वो तेरी..निगाहो मे निगाहे

डाल कर सीना चीर देने की अदा..पायल को खनका के नीॅद उडाने की तेरी वो खता..फिर

कभी ना मिलने का वादा कर के,मेरेे खवाबो मे आने की तेरी यह ऱजा..कया भूले और

कया याद करे..बस दिले-जिगऱ को बरबाद कर गई तेरी मासूम सी वजह.....
भरी आॅखो से वो बोलेेे..भूल जाओ मुझे तो बेहतर होगा--ना साथ जीने दे गी यह दुनिया

दूर हो जाए तो बेहतर होगा--जो दिए लमहे मुहबबत के तुम ने..रहे गे बन के तोहफा मेरे

जीवन का--हम मुसकुरा दिए आॅखो मे..भूलना तो फितरत नही मेरी..तुमहेे छोडे यह

होगी खता मेरी--रूह को मेरी मुकममल किया है तुम ने..अब रूह मे बस जाओ यही

बेहतर होगा--

Wednesday, 18 May 2016

अॅदाज तेरा छू लेने का..जैसे कही दिल मे एहसास जगा गया--भर कर निगाह मुझे यू

देखना..जिसम मेे हलचल मचा गया--आलम है यह,रखते है पाॅव धरती पे..उडते है दूर

आसमाॅ मे--खुद ही को निहारते है बार बार आईने मे--बदला घिरेे या बरसे गगन,होती

रहे शामो सहर--खवाबो मे आना तेरा,दुलहन मुझे जैसे बना गया--

Tuesday, 17 May 2016

दरद जो आॅखो से बहा,उतरा सीधा दिल मे तेरे--जखम जो मिला जमाने से,हुआ गहरा

सीने मे तेरे--जुडे हैै तार जब रूहो के..मिले है दरद जब दोनो के..खाक की है जिॅदगीया

जब जमाने ने--फिर रजिॅशो का यह मातम कैसा..कशमकश का यह सिलसिला कैसा--

आ भिगो दे यह गम सारे मुहबबत मे..कि यह रूहे पयार ही तो हैै जो सिमटा है सीधा

ठीक दिल मे तेरे--

Monday, 16 May 2016

वो मेरी नजऱ का कोई धोखा था या किसमत की कोई रजिॅश..बेवफाई के नाम पर तेरा

हर बार वफा जताना मुझ से..पयार का कोई पैमाना नही होता..पर बेवफाई के लिए कोई

नाम मुहबबत मे कुरबान भी नही होता..कहने के लिए अब और कुछ भी नही बाकी..कि

दुनिया मे मुहबबत के नाम को डुबो दिया तुम ने....
मुददत बाद मिली है फुरसत,तुमहे यह बताने के लिए...वफाए-उलफत की राहो मे बॅधे

थे तुमहे सताने के लिए..दिल को यह शिकायत थी कि तुम किसी और के हो..नजऱो को

इनायत थी कि तुम गैरो के ना हो..कशमकश मे रहे बरसो यू ही बिखरे बिखरे..आज

जब लगे हो बिछुडने हम से तो यह ऱाज खोल रहे है तुमहे सब बताने के लिए...
बहुत तनहाॅ है आप के बिना..जिॅदा रह कर भी जिॅदा नही है आप के बिना..हर तडपती

शाम देती है एहसास जुदाई का..शिकवा करे तो कया करे..मुहबबत खामोश थी,फैसला

था आप का..सुन कर भी सुन नही पाए धडकनो की वो आधिॅया..हम ने जलाए रातो को

मुहबबत केे हजारो दिए..पी रहे है खून के आॅसू आज भी..आप केे बिना..आप के बिना..
छूटे जो हाथ फिर मिल नही पाए..तकदीरो के फैसले जुड कर भी जुड नही पाए..उस की

ऱजा मे खुद की ऱजा को इक लकीर माना मैने..जिस राह को मुकममल माना उस ने,

उसी मे मॅजिल को ढूॅढा मैने..वफाए दी तुम ने बेवफाई मैने भी नही की तुम से..दौलत

को खुदा भी नही  माना मैने,फिर भी तेरी राहो से कयू जुड नही पाए...

Saturday, 14 May 2016

दोसतो--यह जिॅदगी हर दिन हर पल..नया अनुभव देती है..जो हमे अॅदर से बदलते है..जीवन के लिए हमारा नजरिया बदलते हैै..अरसे बाद हमे लगता है कि शायद अपने लिए तो कभी सोचा ही नही..बहुत कुछ ऐसा जो पीछे ही छूट गया..रह गया..दोसतो..
अभी भी समय है..जिॅदगी चल रही है..साॅसे चल रही है...वो सब कीजिए जो आप का सपना था..जीवन का एक बडा हिससा खुद को दीजिए..अपनी रूचिओ से जुडिए..खुद से पयार कीजिए..खुद मे इतने उलझे कि कुछ फालतू बातो का समय ही ना मिले..हा भगवान् को हर पल शुकरीया कीजिए..आप की हर मुशकिल घडी मे वो आप के साथ थे.हमेशा ही रहे गे..बस विशवास बनाए रखिए..किसी का बुरा करना तो दूर..बुरा सोचिए भी मत..देखिए फिर जिॅदगी का सकून आप के साथ है..आज की सुबह आप की जिॅदगी मे सकून और खुशिया लाए..इसी मॅगलकामना के साथ...खुश रहे..खुशिया बाॅटे
छुए गे तुझे यकीकन जल जाए गे--बाहो मे जो भर लो गे तो कसम से,बिलकुल पिघल

जाए गे--तेरी चाहत का नशा है गहरा इतना कि सॅभलना चाहे तो भी ना सॅभला जाए गा

चाॅद से कहते है कयू आते हो रातो मे,मेहबूब को देखने के लिए तेरी रौशनी का नशा

कम लगता है--बिछाते है जुलफे गहरी कि अपने सनम को छुुपाने के लिए यह अॅधेरा भी

कम लगता है--
यकीॅ नही आता कि तेरी बाहो मे है--नजारो मे है कितनी शोखी कि हम तो बस तेरी ही

पनाहो मे है--लग रही है जिनदगी कयू इतनी खूबसूरत कि पूरी कायनात तो जैसे तेरी

निगाहो मे है--किस से कहे कैसे कहे..ऐ मेरे खुदा पास है हमसफर हमनशीॅ मेरा...अब

तो दोनो जहाॅ मेरे हाथो मे है---

Friday, 13 May 2016

निगाहो के जादू से बच कर कहा जाओ गे--पहनाई है पैरो मे बेडिया अब बच कर कहा

जाओ गे--रिशता जो दिया है बाहो का,इन नगमो की गूॅज से कितनी दूर निकल पाओ गे

रौशनी मिलती नही हर किसी को,इशक के इस रूप मे--हम मिले तुम से कभी,चाॅदनी के

सरूर मे--हवाले खुद को कर दिया तेरे..अब बताओ तुम कहा जाओ गे---
मजबूर तो वो हो जाते है..जो गमे-हालात से डर जाते है---कहने के लिए जब जुबाॅ ना

खुले तो अशको का सहारा लेते है---किशती जो भॅवर मे डूबी है,किनारे अब ढूॅढे गे कहा...

रूखसती को अपना लेते है---यह जिनदगी तो बहारे-जशना है...टूटो गे तो बस तोडे गी..

दम भरने को जो लो गे साॅसे..तेरे आॅगन से यह गम डर कर भागे गे---
आ करीब मेरे...तुझ पे लुटा दे आज वो पयार,जिस के लिए इनतजाऱ किया...कभी मैने

कभी तूने हर सुबह हर शाम...राहे तकलीफ भरी रही बेशक,पर वफा की लौ जलाई रखी

हम ने हर तनहाॅॅ शाम...दुनिया देती रही ताने,साॅसे लेने के लिए भी होते रहे परेशान...हा

मुकरे नही कभी उन वादो से,जो तुम ने किए मैने किए...इस मुहबबत के नाम....
टूट जाने के लिए नहीं बनी है यह ज़िन्दगी..क्यों उदास है पगले की तेरे हर कदम पे तेरे साथ चल रही है

यह ज़िन्दगी..तेरी मेहरबानियों की कदरदान मेरी साँसे आज भी है..तेरे दर्द की दास्ताँ सुनने के लिए यह

मुहब्बत कायम आज भी है..जहां लगे तुझे सब ख़त्म हो गया अब,वही से शुरू हो जाये गी...मेरी यह

मुहब्बते ज़िन्दगी की यह जंग...
हसरतो का जनाजा निकालने से पहले,हम को तो पुकारा होता--बिखरे बिखरे अॅदाज मे

रूखसती से पहले,इक बार तो बुलाया होता--नजऱ-अॅदाज ना करते तेरी मुहबबत को,हर

मोड पे थाम लेते तुझ को--जिॅदगी को सलाम करने से पहलेे,जिसमो-जाॅ को कुरबान

करने से पहले....इक बार हमे आजमाया तो होता--

Thursday, 12 May 2016

आ नजऱ उतार दे तेरी,कि यह दुनिया बहुत बुरी है--लगा दे तुझे टीका काला,कि राहो मे

अॅधेरे बहुत गहरे है--चुरा ना ले तेरे चेहरे की रौनक,बेरौनक मुसीबते बहुत भारी है--तेरी

मासूमियत ने हिला रखा है जमाने को,कया कहे तुझ से कि तेरी हर अदा इस जमाने को

कहा लुभाती है--आ लग जा गले मेरे,कि तेरे सदके मै तुझ पे वारी वारी हू--
दरद से हलकान हो रही साॅसे यह मेरी..दम तोड दे गी कब  बिखरती हुई साॅसे मेरी--

इॅतजाऱ है आज भी उन तमाम लमहो का,जिस ने यह सजाई फूलो की तरह साॅसे मेरी--

कौन आया कौन चला गया,सब से बेखबर चल रही थी तब भी साॅसे यह मेरी--चुपके से

आजा फिर दुबारा जिॅदगी मे मेरी,महकने के लिए आज भी बची है चॅद साॅसे मेरी--
जनून तेरी मुहबबत का,कहा ले जाए गा पता नही--बहकना हर बार तेरे ही साथ,कब

कहा ले जाए गा पता ही नही--ऱाज कितने ही चुराए है तेरी जिॅदगी के मैने,गर खोले गे

इसे..तू कहा जाए गा पता नही--मेरी ही हॅसी मे छिपे है अफसाने हजारो,बताए गे तो

कया होगा...यह भी तो पता ही नही--

Wednesday, 11 May 2016

सिलसिला जो तेरी बातो का खतम होता,तो मुकामे-मॅजिल को छू लेते--करते ना तुझ

से कोई शिकवा,बस बहारो मे खो जाते--माशाअललाह तेरे यह नखऱे ना सहे होते,तो

यकीकन जनूने-जिॅदगी को पा लेते--बेखबर रहते जो तेरी रूसवाईयो से,कभी हद से भी

जयादा हवा मे ना उडते--अब तो यह आलम है कि तू नही तो मै नही,तेरे बगैर अब यह

साॅसे भी नही ले पाते--
खामोश रहे तो वो जीने नही देते..कुछ बात करे तो कहने ही नही देते..अजीब कशमकश

मे है,तुझे भूले या तुझे सीने से लगा ले..तुझ से नजऱे चुराए या फिर नजरो मे ही बसा ले

तुझे कहे बेेवफा या तेेरी वफाओ को जिॅदगी ही बना ले..तेरी हर मासूम अदा मे देखा है

मैने नटखट सा बचपन,शरारतो से भरे तेरे जजबात मुझे कही जाने नही देते....
दोष दुनिया को दिया तो खुद तनहाॅ हो गए..खुद को दागे-दार किया तो परेशाॅ और हो

गए..जीने की खवाहिश मे कभी मरते रहे तो कभी मर मर के जीते रहे..लगे जब बाॅटने

खुशिया तो दुखो से यह आॅचल भरता गया..भरता ही गया...अजीब शै है यह मुकददर

भी कि कुछ करने की कोशिश मे..बरबाद होते चलेे गए...बस होते चले गए...

Tuesday, 10 May 2016

जिसमो-जान कयू महक रहे है आज..तेरे आने की इक खबर से ही,बस बहक रहे है आज

पिजॅरे से आजाद कर दिया इन मासूम परिॅदो को आज..खुली वादियो मे खुद को छोड

कर,बस खुदी पे इतरा रहे है आज..कुछ घडिया और..फिर खुले गेसूओ मे तेरी ऊगलियो

की हरकत को महसूस करे गे आज...
नजऱ के आगे इक नजऱ और भी है..तेरी हर वफा को सलाम करने के लिए..दुआ के

आगे इक दुआ और भी है..मुुहबबत तो करते है हजारो इस दुनिया मे..पर मुहबबत को

आखिरी दम तक निभाने के लिए..इनायत की यह नजऱ कुछ और ही है..कदमो को

बढाया है मैने तुझ से रिशता पानेे के लिए..पर तेरे कदम बढाने की अदा कुछ और ही है

Monday, 9 May 2016

तेरे कदम पडते है जहा,मेरी जिॅदगी का सफर शुुरू होता है वहा--सजदा करने के लिए

खुदा के बाद,बस तेरे ही पास आते है हम--तेरे हर सवाल का जवाब बन कर,तेरे ही दिल

मे उतर आए है हम--जीने की वजह देने के लिए,तेरे हर अॅदाज पेेे कुरबान होते जा रहे है

हम--तू जिन राहो से गुजरता है,वो ही है मेरी किसमत की लकीरो की जगह--
कुछ ऱाज है दिल मे ऐसे,जो मौत के साथ दफन हो जाए गे--ऱाज है और भी ऐसे जो

कागज के पननो पे लिख कर छोड जाए गे--बरसो से दबाए बैठे है इन सारे ऱाजो का

दरद खुद के सीने मे--बताए गे किसी को तो गददारी कर जाए गे अपनेे जमीर के हवाले

को--बेजान जिसम जब जल जाए गा,तो रूह को तमाम राजे-बॅदिशो से आजाद कर जाए

 गा--

Sunday, 8 May 2016

अकसर खनक जाती हैै यह पायल,रात के अॅधेरे मे--हजारो बिजलियाॅ कौॅध जाती है..

तपते जिसम के वीराने मे--सरहद के उस पार इक घर है तेरा,जिॅदगी से परे कुछ अजीब

सा आसमाॅ है मेरा--करते है हर बार इकटठा उन झुरमुट मे छिपे सितारो को,रफता

रफता इॅतजाऱ करते है तेरा--ना जाने फिर भी कयू खनक जाती है यह पायल रातो के

अॅधेरे मे--
तेरा आना..मुझ से मिल कर फिर चले जाना..मुझ मे अपने पयार का वो एहसास भरना

कितना कहे शुकरीया तुझ को..कितनी वफाए देते रहे तुझ को...रॅग भरे है मेरी रूह मे

तेरी रूह के वजूद ने..कौन समझे गा यहा तेरे मेरे इस पयार को...यह दुनिया है वो जो

चलती साॅसो मे ठुकराती है..फिर रूहे-जशन को कौन पहचाने गा यहा...
डर डर कर जिए गे तो बेमौत ही मर जाए गे..तेरी सितम जो सहे गे,कया मुहबबत का

दम भर पाए गे..आजाद कर दे मुझे इन वीरान गलियो से..जिसम मे भर ले मुझे अपना

एहसास बना के..मत भूल कि मै हू तेरी शहजादी-वफा,नसीब हू तेरा खुशियो से भरा..

धडकन हू बनी तेरे दिल की,गर थामे गा नही... साॅसे कैसे लेे पाए गे... 

Saturday, 7 May 2016

दोसतो..आप कितने अचछे है या कितने बुरे..इस का फैसला दुनिया के लोगो पे मत छोडिए.. जो लोग आप के सामने आप की जम कर तारीफ करते है,अकसर पीठ पीछे वही आप की बुराई करते हैै..चापलूसी करने वालो से सावधान रहे..जब जब आप परेशान हो,अपनी मन की बात किसी से ना कह पाए तो एक डायरी के पननो पर सब लिखते जाइए,मन का बोझ बहुत कम हो जाए गा..इन पननो को सुरक्षित रखे और कुछ अरसे बाद इनहे पढे..आप खुद ही महसूस करे गे कि उस परेशानी से आप खुद कैसे निकल आए है..याद रखे यह जिॅदगी हर पल आप का इमतिहान लेने के लिए तैयार बैठी है..खुद पे भरोसा रखे..अपना साथ ना छोडे..अपने जमीर की आवाज सुने..वो कभी गलत नही होता..किसी का बुरा मत सोचे..और हा..मौत के खौफ से जीने मत छोडे..हर सुबह इक नया सॅदेश लाती है..सुने..महसूस करे..शुभकामनाए सब के लिए...
रिशतो की बेवफाई मे टूटा है दिल का दामन बार बार..अब ना कीजिए मुहबबते-इजहाऱ

रातो के अॅधेरो मे बार बार..जनमो जनम वादा साथ देने का कर के,आखिर कर दिया दूर

वफा की राहो पे हम को मेरे सरकार..तोडा है चाहत का नशा,अब फिर उसी चाहत को

पाने के लिए ना आईए मेरे पास बार बार..
हरदिल अजीज रहे तुम..फिर कयू राहे बिखर गई--जिॅदगी तो चुपचाप चलती रही..बस

किसमत कही थम सी गई--हाथो की लकीरो मे था नाम तेरा..पर लकीरे अचानक मिट

कयू गई--दिन चले,बदली तारीखे कई..पर तलाश थी जिस शाम की...वो कयू कही

मिलती नही--जुडे दिल तो बार बार..पर धडकन कयू बॅद होती गई--
कहते है तुम से..वो मेरी जिॅदगी की खुशिया लौटा दो..वो हॅसती सी दुनिया,वो सकून की

राते लौटा दो..बरफ की वो चादर ओढे,सरद हवाए ही लौटा दो..बेजुबानी से कही सारी

गुफतगू की मुसकुराहटे तो लौटा दो..अकेलेपन की तनहाई को किसी बदिॅश मे ना बाॅधे..

इस इजाजत को सीधे ना सही,किशतो मे ही लौटा दो--
कही एहसास टूटे..कही इस दिल के हजारो टुकडे हुए--रोए बहुत रोए..दुखो के बोझ से

कभी तडपे,कभी रातो को भी ना सोए--गुनाह कया इतने बडे थे कि इबादत के बाद...

पाक साफ कुरबानियो के बाद..बरी तो फिर भी नही थे--किया खुद की खामोशी ने तार

तार..आज आलम है यह कि बन चुके है बुत इक पतथर का..जिस मे ना अब साज है ना

किसी के आने की आवाज है--

Friday, 6 May 2016

रेत बन कर यह वकत,कब कहा निकल गया..तेरी मेरी जिॅदगी से--सपने रह गए अधूूरे,

मॅजिल रह गई पीछे..बहुत पीछे--चाहा था समॅदर को हथेलियो मे भरना,यह जाने बगैर

कि यह समॅदर कब कहा हुआ किस का--पलके है नम,आॅखे भीगी है तेरी यादो से जब

जब..फिर रेत पे पाॅव रख कर तपे है कब कहा और कितना-- 

Thursday, 5 May 2016

दिल मेरा कोई खिलौना तो नही,जो हर दफा पैरो के नीचेे कुचलते जाओ गे--शीशे की

तरह उजला जो रहा मन,उसे कितनी बार सताओ गे--भूल तो सब से हो जाती है,गुनाहो

का बोझ समझ कब तक ठुकराओ गे--जमाने की रूसवाईयो से बार बार,इन जखमो को

आखिर कयू  कब तक कुरेदते जाओ गे--कब तक---
पननो पे लिखी,लफजो मे ढली..किताब बन कर, बनी है जिॅदगी यह मेरी--कुछ है मेरी

खुशी के लमहे,कुछ यादो की बिखरी शाम--दरद के अलफाजो ने बनाया है इसे,देने के

लिए दुनिया को कुछ पैगाम--गुजर चुका वकत जो कभी लौट कर ना आए गा..मेरी हर

खामोशी.. सादगी मे ढल कर बन जाए गी....यह मेरी तनहाॅ यादगार-- 
शाही जिॅदगी के लिए..राजसी ठाट के लिए..खुदा को सजदे नही किए हम ने---खुद के

ईमान को बेचा नही..बेशक दरद के घूूॅट पी लिए हम ने--दुुनिया के हिसाब से जो चल ना

 पाए..वीराने को ही आशियाना बना लिया हम ने--नसीब अपने पे रोए नही कभी..बस

अपने एहसासो को,दुनिया के रॅगो मे कभी भिगो नही पाए--

Wednesday, 4 May 2016

अपनी बेेेगुनाही का कोई सबूत नही है पास मेरे..तबाही से भरे उस मॅजर की कोई भी

तसवीर नही है पास मेरे..धुॅधली सी परछाईयो मे खोया है खुद का वजूद मैैैने..टुकडे

किए है हजारो बार उन रॅगीन सपनो के मैने..ऱाज छुपे है गहरे, दिल मे कही अॅदर तक..

बताए तो बताए किस को,अब सब सुनने के लिए कोई नही है पास मेरे....

वो पूछते है हम से..मुहबबत कर केे हम से..हमी को तो नही भूल जाओ गे--राहे जो

दिखाई है तुम ने हमे..उन पे फिर से भटकने के लिए..अकेला तो नही छोड जाओ गे--

इन आॅखो मे जो सपने सजाए है तुम ने..उनहे पूरा किए बगैर हम को वीरान तो नही

कर जाओ गे--टपक पडे है आॅसू तेरी बातो से जानम..कहे गेे तुझेे सिरफ इतना..धडकन

हू तेरे दिल की,है जब तक दिल तेरा..रहे गे बन के धडकन तेरी--