Thursday, 31 December 2015

नया साल आप सब को बहुत बहुत मुबारक हो--शुभकामनाए सभी के लिए----दोसतो

किसी के अहसानो का करज अगर आप चुकाना चाहते है तो उस के दिल के खाते मे---

अपनी दुआए जमा करवाते जाईए---कर के देखिए -- बहुत सकून मिले गा--नई सुबह

मुबारक हो----
तेरी चाहत के लिए-वही रॅगत वही शोखी-वही चेहरे का नूर--कुछ नही बदला है,ना कुछ

बदले गा--तेरे जाने के बाद----खुद की सलामती मे गुजारा है यह वकत मैने--तेरे जाने

के बाद----दुनिया कया कहती है मुझे,फिकर नही इन बातो की आज---आना है तेरे पास

तेरी वही सदाबहार जानम बन कर--वादा जो तुझ को दिया मैने,निभा रहे है आज भी---

तेरे जाने के बाद-----

Monday, 28 December 2015

खवाब तो टूटते रहे,बिखरते रहे---पर तुझे याद करना नही भूले---जिललते जमाने की

सही,फिर भी तुझे सलाम करना नही भूले---हजारो हसरतो को सीने मे दबाए,बेचैन होते

रहे-पर तेरी मुहबबत को आबाद करना फिर भी नही भूले----आज तुम नूर हो किसी और

की दुनिया का,पर अपनी नीॅदे आज भी उडा देना--नही भूले-नही भूले----

Sunday, 27 December 2015

बॅधन तो नही,पर साथ हू तेरे---बात कुछ भी तो नही,पर हर खामोशी  मे गुफतगू होती

है तुझी से----वफा तूने कभी की ही नही,पर बेवफाई मैने तुझ से की नही कभी---दौलत

की दीवारे सदा साथ रही तेरे,पर मेरे पास खुले आसमाॅ से जयादा और कुछ भी नही----

साॅसे दी तुझे हर पल मैने,पर साथ मेरे चलने के लिए तेरे पास मुहबबत ही नही----

Friday, 25 December 2015

धडकते दिल से--तेरे दिल की धडकने सुन रहे है हम---मदहोशी का आलम है-फिर भी

तेरी खिदमत को मुकददर अपना मान रहे है हम---खनकती चूडियो मे छिपा है-तेरे

पयार का ऐतबाऱ----फिर कयू ना महके मेरा जिसम-ए-सॅसार----मचल मचल कर कह

रही है मननते मेरी-तेरे साथ रह कर जिनदगी की तमाम खुशिया बटोर रहे है हम-----

Wednesday, 23 December 2015

तेरी बेबाक बातो से,नजऱ कयू भर आई है--फिर कभी यू देर ना हो जाए,यह परेशानी

फिर कयू चली आई है-- दऱदे-दिल तुझे दे कर,यह खुशी की लहर कहा से साथ चली

 आई है---इनही लमहो मे यादे सजे गी तेरी,फिर सजदे के लिए कयू तेरी ही तसवीर

नजऱ आई है----

Sunday, 20 December 2015

जिसम नही इक रूह हू मैै-खामोशियो की जुबाॅ समझने वाली,इक शहजादी हू मै--दरद

को इनही आॅखो मे समेटे,तेरे ही वजूद से जुडी तेरी ही दासताॅ हू मै---दे पनाह मुझे

अपनी आगोश मे,कि अब डूब जाऊ मै तुझ मे--आसमाॅ मे बहकती थिरकती इक रूह हू

मै-----

Saturday, 19 December 2015

नई सुबह आप सब को मुबारक हो---दोसतो-लोग तब तक समझ नही पाते है कि आप

उन के लिए कया कया करते है--जब तक आप उन के लिए वो सब करना बॅद नही करते

-जो आप बरसो से उन के लिए कर रहे थे---शुभकामनाए सभी के लिए----
बदलते रहते जो मौसम की तरह-तो तेरे न हो पाते--बरस बरस कर जान दुसरो पे लुटाते-तो तेरे आँगन की खुशिया न बन पाते---मुहब्बत की बाज़ी जो जीती है हम ने -गर खुद के अरमानो को तेरा बनने पे मजबूर ना होते --इबादत की,सजदे किये तेरे आने की आहट से हम ने --हा यूँ सज सवर कर तेरे मुकम्मल न बन पाते ---

Thursday, 17 December 2015

किसी कहानी की तरह,तुम कभी ना मुझे भूल पाओ गे---जो गुजर चुके लमहे,उन को

कहाॅ लौटा पाओ गे---बीत गए जो जिनदगी के वो साल,मुहबबत की वादियो मे भी कहाॅ

ढूॅॅठ पाओ गे---तनहा तो नही हैै लेकिन,वो खुशियो की सौगाते कहाॅ से ले कर आओ गे--

इबादत मे झुक गए है हम--शायद खामोशी मे एक दूजे को पहचान पाए गे हम----

Tuesday, 15 December 2015

पायल बजती रही-बजती रही--और घुुुुघॅरू टूटते गए----बदहवासी के आलम मे-साॅसे

घुटती रही---खामोशिया चुराने लगी अलफाजो के बोझ--जुबाॅ थरथराती रही-थरथराती

रही---मौत के खौफ से-जिनदगी बेजाऱ होती रही---किसी के इनतजाऱ मे यह साॅसे फिर

भी चलती रही---कब आए गा वो मसीहा-आॅसूओ के दामन मे वो तसवीर---बदलती रही

बदलती ही रही-----

Friday, 11 December 2015

उन की जुबाॅ से इकरार सुनने के लिए-धडकता रहा दिल---वो कब बनाए गे मुझेे अपना-

इनतजाऱ मे तरसता रहा यह दिल--ना जाने कब तक खफा रहे गे,वो मुझ से--फिर

बेचैन होता रहा यह दिल---आज जब तेरी ही पनाहो मे है-दोनो जहाॅ रौशन भी है----तब

भी कयू----धडक रहा हैै यह दिल---धडक रहा है यह दिल----

Wednesday, 9 December 2015

मेेेरे चेहरे पे लिखी है तेरी चाहत की किताब--हर पनने पे लिखा है तेरे नाम से जुडा मेरा

हर अलफाज--मेरी वफाओ को समभाला है इन पननो ने--कल गर मै ना रहू इस दुनिया

मे,इस किताब के पननो मे मिले गा मेरा नाम तेरे नाम के साथ----मेरी जिनदगी की

आखिरी साॅस को सलाम देती रहे गी--तेरी चाहत की किताब---

Monday, 7 December 2015

आ रही हैै आहट तेरे कदमो की-मुझ को---कशिश तेरे पयार की खीॅच रही है-मुझ को---

अदाओ से मेरी,डोल गया है वजूद तेरा--वफाओ से मेरी,महक गया है सॅसार तेरा---आ

छोड चले इस बेवफा दुनिया को---बसा ले आशियाना उस जननत मे---जहा मिले गी

रौशनी--तुझ को-मुझ से-----

Wednesday, 2 December 2015

कह दीजिए ना अब-कि पयार करते है मुझ से---बोल भी दीजिए कि खामोशी मे भी,बाते

करते है मुझ से---लबो को सी लेने से,मुहबबत वीरान नही होती---आॅखो को बॅद करने

से,मेरी सूरत भूली नही जाती---अब तो आ जाईए,पहलू मे मेरे---यह जिनदगी तो दो

पल की है,तुम तो बस मेरी हो------अब तो कह दीजिए ना मुझ से------
अपनेे सभी दोसतो को सुबह का सादर नमसकार--दोसतो-जिनदगी की परेशानियो से

भागना,जिनदगी तो नही--खुद मे ताकतवर बनिए--किसी पर भी आॅखे मूॅद कर भरोसा

मत कीजिए--अपने पर विशवास कीजिए,आप खुुद मे सक्षम है--अपना सफऱ अपनी

मऱजी से तय कीजिए---साई बाबा तब आप के साथ है---जय साई राम---

Tuesday, 1 December 2015

बदलते मौसम की तरह इशक रहा तेरा--बहकते कदमो की तरह यह हुसन रहा मेरा---

बारिश की बूॅदो मेे नहाई मेरी इजहाऱे-वफा---टुकडो टुकडो मे बटी तेरे इशक की बेवफाई

की वजह--मजबूर ना रहे तुम,ना मजबूर थे हम---हालात-ए-मुहबबत मे यू ही जुदा रही

तेरी मेरी किसमत की राहे-सजा----

Sunday, 29 November 2015

तेरे बगैर यह जिनदगी अब जी नही जाती---हजाऱ कोशिशे के बावजूद,तेरी यादे भुुलाई

नही जाती---यह आॅसू जो बहते है झरनो की तरह,मुसकुराना भी चाहू तो इन लबो की

ताकत साथ नही देती--यह कैसी बेबसी है मेरी, कि जान से मेरी यह रूह निकल ही नही

पाती----

Saturday, 28 November 2015

अपने सभी दोसतो को नई सुबह का सादर नमसकार--यदि अपने जीवन की खुशिया

आप दूसरो मे तलाश करते है तो आप हमेशा अकेले और दुखी ही रहे गे--पर जब इन

खुशियो को खुद मे तलाश करे गे तब यकीकन आप ना तो अकेले होगे ना दुखी--आप

सभी को मेरी शुभकामनाए----

Friday, 27 November 2015

आज जी भर कर रो लिए,उन से मिलने के बाद---गुफतगू के सिलसिले जो चले,इनितहाॅ

 हुई फिर सिसकियो के साथ----यह दरद जो जानलेवा है इतना,भूलना चाहा उनहेेे तो

याद आ गए वो-तमाम यादो के साथ---यह मुहबबत है या फिर मेरी रूह के जखमी होने

का सिला,मिलते है उन से तो भी उदास है--और ना मिले तो बस बेकरार है-----

Tuesday, 24 November 2015

मेरी हॅसी मे छिपा है,मेरी जिनदगी का अनदाजे-बयाॅ---खुदा की रहमतो का सिला,

मुहबबत की फिजाओ मे छिपा---यू ही नही देती है मेरी आॅखे खुशियो के पैगाम--कि

जहा जहा रख दू यह पाॅव,वही बस जाए मननतो का सॅसार-हवाए दे रही है दसतक मुझे

छू कर कि भर लो खुशिया---आई हू जहाॅ मे नूरे-खुदा बन कर---

Saturday, 21 November 2015

तेरे इशक का दरिया बहता है आज भी,मेरी रूह के वजूद मे---बेशक दुनिया यह समझे

कि मशगूल हू मै,शाही जिनदगी के ऱसूख मे---दौलत से खरीदे  ना जाने कितने महल,

लुटाया खजाना ना जाने कया सोच कर----पर आज भी हर लमहा तेरी मुहबबत की

गुरबत मे,बहुत तनहाॅ और मायूस हू------

Thursday, 19 November 2015

लबो पे लेते लेते तेरा नाम,बदनाम हो चुके है हम---चाहते चाहते तेरी चाहत के नाम,

खतो को लिखते लिखते बेनाम हो चुके है हम----मत कहना कि बेवफाई की है हम ने

तेरे नाम के साथ--इन चूडियो की खनक मे लिख चुके है तेरे पयार का पैगाम---रातो की

नीॅद उडा दी तेरे कातिलाना अनदाज ने,खुद को तुझ से जोड कर यह जिनदगी कर चुके

है तेरे नाम------

Wednesday, 18 November 2015

बिना नकाब पहने,वो बदलते रहे चेहरे पे चेहरा--हर चेेहरा देता रहा-पैगाम अपना अपना

-खयाल अपना अपना---शमाॅ बुझी तो दीवाना हुआ रौशन--कहा गया वो सुऱख जोडे मे

सिमटा दिलदार मेरा---बहकते कदमो से जो उठाया दुपटटा उस का--हर शखस सामने

आया,बुझे कदमो से सलामी देता हुआ------

Monday, 16 November 2015

रहमत तेरी से,यह आॅखे कयू नम हो गई--जो कहा तुम ने,उस अदा से यह शाम रॅगीन

हो गई---फलसफा तेरी रूसवाई का,मुझे नामॅजूर कर गया--धडका जो दिल,फैसलो को

बदलता चला गया---रात तो अब होने को है,तेरे आने की आहट से ही कयू यह चेहरा

गुलाब हो गया----

Saturday, 14 November 2015

तेरी मुहबबत मे तो कोई बॅदिश ना थी,पर हम ही बॅध नही पाए---तूने तो दी खुली साॅसे

मुझ को,पर हम ही वो साॅसे ले नही पाए-याद करते है आज भी तेरी तमाम मेहरबानिया

,वो मुहबबत-वो दीवानगी--यह साॅसे तो आज भी कायम है,पर भूले तो कैसे भूले कि इन

साॅसो मे महक रही है आज भी-तेरे साथ गुजारी वो बेपरवाह तनहाईया-----

Tuesday, 10 November 2015

अपने सभी दोसतो को दीपावली की शुभकामनाए--दोसतो अपने कीमती समय से थोडा

सा समय़ उन लोगो को दीजिए,जो जीवन की छोटी छोटी खुशियो के मोहताज है--उन

को वो छोटी छोटी खुशिया दीजिए-फिर जो मुसकान आप उन के चेहरे पे देखेे गे,एक

गहरा  सकून आप को मिले गा--इस नेक काम को आज से ही शुरू कीजिए,और अपनी

जिनदगी को नई राह दीजिए--शुभकामनाए सब के लिए---- 
दीपक जले सब की दुनिया मे,अॅधेरा कही ना हो---यह तो है साल का मौसम,पर आप

सब का जीवन-मौसम सदाबहार रहे---ना पी कर घर की खुशिया बरबाद करे,हो सके तो

दूजे के गम को हलका करे---खुदा बैठा है ऊपर-तेरे मेरे करमो का हिसाब करने के लिए-

कर लीजिए शुकराना उस का,कि साॅसो का यह ताना-बाना फिर जुडे ना जुडे---

Sunday, 8 November 2015

मै मुहबबत हू तेरी,तेरा महका सा चमन--ना पाना कभी खुद को तनहा,कि हू मै तेरा

अनदाजे-बया---शाख से टूटा हुआ फूल हू बेशक,पर जिनदगी तेरी से जुडा हू इक परवाने

खिजा---परिनदो की तरह उडना नही सीखा,पर रजा तेरी से जुडा है मेरा शाहे-खुदा----

Friday, 6 November 2015

खौफ का वो मॅजर,वो साजिशो का धुआ-बसर ही नही कर पाए,टुकडो मे बटी वो खामोश

 जिनदगी---मेहमाॅ बने उन तराशे इनसानो के लिए--जहा बगावत भी नही,तकरार का

कोई सिला भी नही---जुबाॅ तो आज भी खामोश है,पर सिसकियो का वो दरद कभी रूका

ही नही----

Thursday, 5 November 2015

बदलते रहे आशियाने कई-पर कहने को अपना कोई भी नही---समनदर की रेत की तरह

-खवाहिशो का दौर बदलता ही रहा---दिलो दिमाग मे बसा वो हमसफऱ कही भी नही--

वजूद मेरा जिनदगी बन ना सका--दौलत शौहरत की दीवारो मे कैद,पर इनसाॅ तो कही

भी नही--अशक बहते रहे बहते रहे--पर मनिजले आशिक तो कही भी नही-कही भी नही

Wednesday, 4 November 2015

अपने सभी दोसतो को सुबह का नमसकार---दोसतो भगवान् को  जब मन की गहराई

से याद किया जाता है,सममान के फूल दिए जाते है-यकीकन आप के जीवन मे,आप वो

सकून पाते है-जो इस दुनिया मे कोई इनसान आप को नही दे सकता--बस मन आतमा

साफ रखिए-जय साई राम----खुश रहे-मसत रहे---

Monday, 2 November 2015

अपने सभी दोसतो को सुबह का सलाम--दोसतो-जिनदगी एक खूबसूरत एहसास है--

मौत के खौफ से इसेे जीना ना छोडे-अपनी जिनदगी अपनी मरजी से जिए--किसी के

दबाब मे आ कर अपनी जिनदगी के फैसले मत करे-सिरफ अपने जमीर की आवाज ही

सुने--भगवान् तब आप के साथ है--शुभकामनाए सब के लिए----
दे कर तुझे यह जिनदगी,खुद से आजाद हो गए है हम--साॅसे भी अब जब लेते है हम--

खुद की बनदगी से भी बहुत दूर हो गए है हम---हजारो चेहरे देखे है राहे जिनदगी मे,पर

चेहरे तेरे की रॅगत से बस रौशन हो गए है हम--वो तेरा देखना मुझे मुड मुड के पीछे से--

इसी अदा पे तेरी कुरबान हो चुके है हम---

Sunday, 1 November 2015

गहरे ऱाज की वो बाते,अब तो बता दो मेरे हमदम---जखम दिल पे लिए कयू बैठे हो,अब

करीब मेरे आ जाओ हमदम---वकत तो रूकता नही किसी के लिए,फिर आज भी कयू

तनहा हो उस जानम के लिए----मै हू ना तेरी उममीद-ए-वफा,अब तो भुला दे दऱद-ए-

सजा--सपने तेरे सजाने के लिए,बन के आई हू तेरी शहजादी-निकाह----

Thursday, 29 October 2015

घुघरू की आवाज पे,ढोलक की थाप पे-जो थिरके कदम--फिर रूक ही नही पाए-------

दरिनदे साज ने जो लूटा,इनसाॅ फिर कभी बन नही पाए---रूह को मुकममल करने की

कोशिश मे,गहरे सैलाब मे डूबते उतरते चले गए---दरबारे-पाक मे जो सर झुकाया--

मुुशिकलो से आजाद होते चले गए--होते चले गए----

Thursday, 22 October 2015

बहुत सकून से बैठे है वो-तनहाईयो से दूर,कही बेखबर बैठे है वो---समनदर की लहरो नेे

जो छु्आ कदमो को मेरे,अठखेलियो से खेलते,खुद मे मशगूल है वो---नजमो के सॅसार

मे,वो गुनगुनाते रहे--यह जाने बिना कि कोई फिदा है उन पर----बहारे दे रही हैै आवाज

उनहे,पर सब से बहुत दूर-ना जाने कयू खोए बैठे है वो--------

Wednesday, 21 October 2015

दोसतो दशहरा मुबारक हो---जिनदगी बार बार नही मिलती-इस से पयार करे---अपना

खयाल रखे-जो आप को मन से सममान दे--पयार करे...बदले मे उन को भी सममान दे

अपना अपमान ना सहे---खुश रहे और खुशिया बाटे--दुख-तकलीफ मे हिममत ना हारे

--हर हाल मे भगवान् का शुकरीया अदा करे---जय साई राम--

Tuesday, 20 October 2015

यह मुहबबत है या फिर छलकता हुआ पैमाना है---कुछ खवाब है अधूरे से या फिर

महकता हुआ नजऱाना है--दिल का यह दरद,जो उठता है यू हौले हौले--कोई साजिश है

या फिर जिनदगी का कोई अफसाना है---कही बस ना जाए तेरी मुहबबत के आशियाने

मे--कि आ रही है सदा तेरे दिली शहखाने से-----

Sunday, 18 October 2015

फूल बिछाए है तेरी राहो मे,हमदम मेरे अब तो आ जा--मिननतो से सजाया है अपना आशियाना

,कि अब तो आ जा---बनिदशे जमाने की लाख हो चाहे,पर मेरी खुशी के लिए सब छोड

के आ जा----यह दुनिया कब कहाॅ किस की हुई है,गर माना है मुझे अपना तो सब भुला

कर आ जा---

Thursday, 15 October 2015

मनिजल तय करने वाले थे,कि तूफाॅ ने बरबाद कर दिया---समभलते तब तक,कि वकत

ने आसमाॅ से धरती पे पटक दिया--थरथराते लबो सेे जो हाथ उठाए दुआ के लिए,मासूम

 सी जिनदगी ने रासता रोक दिया---आज यह आलम है-कि ना जमीॅ पे है ना ही आसमाॅ

की बुलनदियो के साथ---नजऱ भर देखने के लिए सारे नजाऱे दूर कर दिए----

Wednesday, 14 October 2015

बरस रहा है यह बदरा,मेरी आॅखो की तरह--तू पलट कर देख तो,किसी दुआ की तरह---

मनिजले-शाख कभी कभी मिलती है---यह रौशन सी शमा भी कभी कभी जलती है---

ना बदल इरादो को इस मौसम की तरह---कि इनतजाऱ मे बिछी है यह बाहे,किसी

खूबसूरत मॅजऱ की तरह------

Monday, 12 October 2015

मेरी शायरी का हर रूप पसनद करने का शुकरीया---मेरी शायरी उन सब दिलो के लिए--

जो सचची मुहबबत के लिए धडकते है---दोसतो-----तहे-दिल से फिर शुकरीया---
जितना निखारा है  तेरी मुहबबत ने मुझे,कायल है तेरी इसी वफा के लिए--जो बात कही

तूने,धीमे से कानो मे मेरे--वो खनक के उतर गई सीधे दिल मे मेरे-----ना जाना जमाने

की रॅजिशो पे कभी,दरदे-दिल दे जाती है नासूर बन के----यू ही रहना मेरा बहाऱे-जशन

बन के,कि आदी हू तेरी इसी अदा के लिए-----

Thursday, 8 October 2015

कभी उतरा जो तेरी चाहत का नशा,तो इस दुनिया को देख पाए गे---हर सुबह तेरी ही

इबादत है,हर रात है तेरे सजदे मे----घूम रहे है तेरे ही आस-पास उममीदे-वफा को लिए

----जननत से आ रही है दुआए,तेरी ही जिनदगी के लिए---सज-सॅवर कर बैठे है,फिर से

तेरी ही पनाह मे मुहबबत तेरी पाने के लिए------

Wednesday, 7 October 2015

बुझ गए सारे दिए,पर इक सुलगती सी लौ बाकी है---बरबाद हो चुकी वो तमाम खुशिया,

पर इक हलकी सी मुसकान अभी बाकी है----बिखर गए है सभी रिशते,पर उन की महक

कही बाकी है--जिनदगी तो बस अब तमाम होने को है,पर इन साॅसो का चलना आज भी

कही जारी है-----

Monday, 5 October 2015

कही से ढूॅढ के लाओ नसीब मेरा,मुझे खुशियो की हसरत है---कभी नाचू कभी हॅस दू---

वादियो मे झूमने की भी चाहत है---करू यह पलके जब भी बनद,शहनाईया बजती है

कानो मे मेरे--सजदा करते है खुदा तेरे आगे कि इनही कदमो से,पिया से मिलने की

हसरत बाकी है---

Saturday, 3 October 2015

बदनाम हो गए,बेनाम हो गए--जमीॅ पे जो थिरके कदम,हम जमाने से परेशान हो गए--

बेडियो को तोडने की कोशिश मे,सलामती के लिए मजबूर हो गए---हाथ जो उठाए दुआ

के लिए,काॅपते लबो से किसी की रात के अरमान बन गए---उलझे सवालो मे उलझ कर

,साॅसो को जिसम से निकालने की कोशिश मे-हम मशहूर हो गए----

Friday, 2 October 2015

जब आप खुश रहते है,दूसरो की मदद भी करते है-तो इस का मतलब यह नही कि आप

के पास दुख नही है---इस का मतलब यह है कि आप जिनदगी को हर रूप मे जीना

सीख चुके है---खुश रहे और खुशिया बाटे-तब भगवान् आप के साथ है-नई सुबह मॅगल

मय हो----

Thursday, 1 October 2015

आज ना तेरी राहो मे है,ना तेरी बाहो मे है---कुदरत के बनाए जाल मे,आज किसी और

की पनाहो मे है---किसमत के इस मजाक पे,कभी राजी है तो कभी तनहाॅ है---तुझे ढूढने

की खवाहिश मे,दर ब दर भटकते है--किसी मोड पे तू आवाज लगा दे,इस आस मे यह

साॅसे अब भी जिनदा है----

Tuesday, 29 September 2015

सूूरज सी रौशन राहो मे,सफर अपना गुजारा है---चाॅदनी की हसीन रातो मे,मुहबबत का

सकून पाया है---खनकती चूडियो ने पैगाम भेजा है तुझे---दिल तडप कर बस पुकारता

है तुझे---यू ही तो नही गिला करती है मेरी सरद आहे---पयार के इस मुकाम पे आ कर

कयू छोडा है तुम ने मुझे------

Sunday, 27 September 2015

आखिर मनिजल तू ही है मेरी,इस बात से इनकार नही है मुझे----तेरी हर बेवफाई से रहे

है रूबरू हम,इकरार का वादा फिर भी है तुझ से मुझे--बदनाम हुए है पयार मे तेरे,मलाल

फिर भी नही है इस बात से मुझे---दिल का हर कोना सजाया है तेरी यादो से मैने,तू लौट

आए गा पास मेरे-यह ऐतबार आज भी है मुझे---

Friday, 25 September 2015

पायल बजती रही रात भर,पर घुघरू टूट नही पाए---खामोशिया देती रही दसतक,

परिनदे फिर भी उड नही पाए----राजे-इकरार मे छुप गया पयार का वो सिला,दिल

धडकते रहे पर मुहबबत परवान चढ नही पाई----तुम कुरबान होते रहे हम पर,लेकिन

तेरे आज तक हम फिर भी हो नही पाए----

Wednesday, 23 September 2015

सैलाब की गहराईयो से,खुद को बचाते आए है हम---कही था आग का दरिया,कही थे

सरद हवाओ के झोके---कभी टूटे कभी बिखरे,मगर खुद को तनहाईयो से निकालतेे

आए है हम---जजबातो की सुलगती तडपती आग मे तप कर---निखर कर,सॅवर कर

आज इस दुनिया के सामने आए है हम-----

Monday, 21 September 2015

तेरी नजऱ पे रहती है कयू मेरी नजऱ-कही यह मुहबबत तो नही---तेरी राह मे,हर मोड पे

सजदा करते है हम--कही यह मेरी इबादत तो नही---बनद आॅखो मे भी रहते है सपने

तेरे-कही तुझे पा लेने की शिददत तो नही---खयालो मे देते हो दसतक हर लमहा--कया

हर जनम तेरे साथ रहने की दुआ तो नही-----

Saturday, 19 September 2015

खुमारी मे घुल गया चाहत का वो बिखरा सा नशा--पलके झुक गई,बदल गई रिशतो की

अदा--खनकती रही रात भर चूडिया,इबादत मे ढल गई मुहबबत की फिजा---रूठने-

मनाने की इस खूबसूरत जननत मे,बिखर गई चारो तरफ कहकहो की निशा

Thursday, 17 September 2015

अपनी पूजा मे जब आप दूसरो की खुशिया माॅगते है-तो भगवान् आप की खुशियो के

रासते खुद ही खोल देते है-बस मन व् जमीर साफ रखिए--शुभकामनाए सब केे लिए---
वकते-हालात ने गर बरबाद ना किया होता--तो आज हम तुमहारे होते---कतरा-कतरा

बने आॅसूओ के सैलाब मे,हम यू ना बहे होते--रूह मे तेरी तसवीर बसाए,आज भी तनहाॅ

फिरते है----गर साजिशे तबाह ना करती हमे--तो यकीकन तेरी बाहो मे आज सकून से

जी रहे होते------

Tuesday, 15 September 2015

मुकददर की कहानी खुद बनाई थी कभी--हा मिटटी मे खुद ही दफन कर दी थी कभी---

हाथो की चनद लकीरो को किसमत का नाम देने के लिए--गुरबत मे सारी जवानी गला

दी थी कभी---बरसते मौसम ने भिगो दी जननत की सडक--शायद तपते पैरो से दरवाजे

की वो चौखट टूटी थी कभी-------

Monday, 14 September 2015

आॅसू नही,आहे नही---अब कोई शिकायत भी नही---पयार के ताने बानो से बुना उन

रिशतो का कोई वजूद भी नही---रॅजो-गम की सयाही जो दामन से लिपटी थी कभी---

उन के निशाॅ अब दूर दूर तक कही भी नही---जजबातो की वो नाव जो बनाई थी कभी,

उस के बहने का वो मॅजर--दरिया मे अब कही भी नही--कही भी नही-----

Friday, 11 September 2015

जिनदगी हर तूफान मे इमतिहान लेती रहती है-फिर भी तेरी ऱजा मे मेरी ऱजा रहती है--

दुनिया की भीड मे-कही खो ना जाऊ कभी---तेरी रहमत मे ही मेरी साॅसो की वजह रहती

है---मुकाम हासिल करना मकसद नही रहा मेरा--जिनदगी टुकडो मे ना जिऊ-मेरी

इबादत मे बस यही दुआ रहती है------

Thursday, 10 September 2015

यही इक दासताॅ थी हमारी-जो हर बार कहते कहते रूक गए थे हम----फिर चली इशक

की ऐसी हवा,कि समभलते समभलते यू ही फिसल गए हम---ऱाज की वो बाते जो बता

गए तुम को,वही वो शाम थी रॅगी कि फैसला अपना सुना गए तुम को---यकीॅ करना-

नही करना,यह मरजी है आप की--पर कशिश अपने पयार की बता गए तुम को----

Tuesday, 8 September 2015

जब पूजा सचचे मकसद के लिए की जाती है,तो भगवान् साथ जरूर देते है---किसी का

बुरा चाह कर हम अपनी खुशिया हासिल नही कर सकते----सो मन-आतमा साफ रखे--

शुभकामनाए सब के लिए----

Monday, 7 September 2015

हवाओ के झोको से,मिला है पैगाम तेरा---तेरी साॅसो मे बसते है हम-पैगाम मे छिपा है

यह एहसास तेरा-----फूलो मे,फिजाओ मे--तेरी निगाहो के खामोश लफजो मे--ठूठ चुके

है इकरार तेरा---तेरी ऱजा से जुडी है मेऱी भी ऱजा--ना अब दूर रहो इतना,कि शहनाईयो

की गूज से महक रहा सॅसार मेरा-------

Saturday, 5 September 2015

तेरी राहो मे,यू ही बिछते जाए गे--तेरी गुसताखियो को माफ करते जाए गे---तेरी हर

उस नजऱ को,जो पल भर के लिए भी हमे निहार ले गी--सलाम करते जाए गेे----यह

मुहबबत है याऱा---जिस के हर मुकाम पे,तुझे आबाद करते जाए गे------


Thursday, 3 September 2015

रिशता तो कुछ भी नही-कयू दिल मे बस गए हो तुम---दूरिया बहुत है-कयू लगता है

फिर भी-कि बहुत करीब हो तुम---आॅखे जो बनद की हम ने-कयू लगा कि पलको मे

सिमट गए हो तुम----यह मुहबबत नही तो और कया है--कि सोते है हम-कयू खवाबो मे

रोज दिख जाते हो तुम-----

Tuesday, 1 September 2015

कहानी किसमत की हम लिख नही पाए-वकत देता रहा जहा दसतक,हम वही चलते रहे

--दिखी इक उजली सी रौशनी हम को--मुकददर माना उसे,और साथ चल दिए---इबादत

मे सर झुकाया हम ने-रूहानी ताकत मे सिमटे--खुशी खुशी जिनदगी के साथ चल दिए--

Saturday, 29 August 2015

हर  साॅस आने से पहले,तेरा नाम लबो पे आ जाता है--बहुत देर मत करना हमदम मेरे-

कि इनतजाऱ मे यह साॅसे,मुुझे उदास कर जाती है---दुनिया कहती है मुझे,जननत की

परी,मगर तनहाई मे तेरी याद रूला जाती है--ताउमर रहे तेरी ही हूर बन के,बस यही

खुशी की लहर तेरी याद ताजा कर जाती है----

Thursday, 27 August 2015

उन आॅखो मे ना जाने कितना दरद देखा,कि हम अपना दरद ही भूल गए---दरद मे

लिपटी उस की कहानी सुन कर,हम अपनी दरदे-दासताॅॅ ही भूल गए---खुद की चाहत तो

कभी ना पा सके हम,पर चाहत उस की लौटा कर जो सकून पाया हम ने--उस सकून मे

हम अपनी कहानी ही भूल गए------

Monday, 24 August 2015

सजदे जो किए तेरी मुहबबत मे हम ने--वकत खामोशी से गुजऱ गया---तुझे पाने की

खवाहिश मे उमर का वो खूबसूरत लमहा भी गुजऱ गया----हा मुहबबत की कोई उमर

नही होती--वो पाक होती है गर,खुदा की नियामतो को भी खीच लाती है--बैठे है राहो मे

-बेशक साथ रहने का वो लमहा,फिर चुपके से  आज गुजर गया-------

Sunday, 23 August 2015

बह रहा जो दरद बरसो से,इन आॅखो से मेरे--कौन है वो मसीहा जो ले जाए गा मुझे उस

आसमाॅ से परे--इनितहा तो बस इनितहा होती है-कभी खुशी की तो कभी गम की दवा

होती है--परिनदो की भी इक दुनिया होती है,दरद से तडपते है जब तो रिहायश जमी पे

होती है--इनसाॅॅ जब तडप जाता है-उस की रिहायश आसमाॅ से परे होती है-----

Saturday, 22 August 2015

जीवन की  हर अहम् याद-चाहे वो सुख से जुडी हो या दुख से-आप को और मजबूत बना

देती है-बस खुद पे यकीन रखिए-हर हाल मे भगवान् का शुकरीया कीजिए-शुभकामनाए

 आप सभी के लिए-------

Friday, 21 August 2015

जजबात बिखर जातेे है हवाओ मे ऐसे,कि जैसे उन का कोई वजूद ना हो--मुहबबत तो

जैसे इकबाले-ए-जुरम है,खामोशी से सीने मे दबाए जीते है---भटकती राहो मे ढूढते है

अपने मसीहा को,पाॅव के छालो को चादर मे लपेटे रहते है--तडपा के रख दे जो धडकनो

को,खुद को मिटा दे मुहबबत पे-----वही जजबात कहानी बन जाते है-------

Wednesday, 19 August 2015

वो ननहे से लमहे,कब बन गए मेरी जिनदगी-मुझे पता ही नही चला---फिऱ वही जिॅदगी

कब मुझ से जुदा हो गई,मुझे खबर तक ना लगी----पलके खुली फिर कब बनद हो गई--

यह अधूरी सी शाम,कब ढल गई रात मे---यादो के झुरमट मे इतने खोए कि पता ही

नही चला-------

Tuesday, 18 August 2015

कभी भी किसी से कोई उममीद मत कीजिए--जब जब आप उममीदे करे गे,आप की

जिनदगी की उललझने और बडती है--खुश रहे और खुुशिया बाटे--यह पयारी सुबह आप

सब के लिए मॅगलमय हो--इसी कामना के साथ-----
दुआओ मे मेरी आज भी शामिल है तू---जुदाई है फिर भी यादो की परछाई मे रहता है तू

----किसमत की लकीरो मे नही है साथ तेरा--लेकिन हर चलती साॅस मे मेरी धडकता है

तू---खुशिया बरसती रहे सदा आॅगन मे तेरे--दुख की कोई लहऱ छू भी ना पाए तुझे-----

कागज के हऱ पनने पे लिखा है बस तेरा ही नाम--यकीकन दुआओ मे मेरी हमेशा

शामिल रहे गा तू-------

Saturday, 15 August 2015

यू ही हॅसी हॅसी मे,दिल ले कर हमारा वो चल दिए--मुहबबत की बाजी तो हारी हम ने,

वो तो गजब ढा कर बस मुसकुरा दिए---यह मुहबबत भी अजीब शै है,दिल खोता है कोई

जीतने की ऱजा तो किसी और की है---पास आईए तो जऱा,खता पयारी सी कर के,यू

इठला कर कहाॅ चल दिए-----

Friday, 14 August 2015

जय हिनद----भारत माता की जय-----भारत के तमाम शहीदो को हमारा मन से नमन--

Thursday, 13 August 2015

तेरी हर आहट पे चौक जाते है कयो---बरसो बीते तुमहे रूखसत हुुए,फिर भी याद आ

जाते हो कयो----फासले इतने है कि कभी कम ना हो पाए गे,फिर भी तुम से मिलना

चाहते है कयो----बदल गई है दुनिया मेरी,बदल चुकी होगी सूऱत ही तेरी--फिर भी

मेरे खवाबो मे अकसर चले आते हो कयो---आखिर कयो----

Wednesday, 12 August 2015

दुनिया की नजरो मे हम अपनी जगह,अपनी पहचान बेशक ना बना पाए--पर भगवान्

की नजरो मे अगर खुद को सौप दे,तो यकीकन जीवन का मकसद पूरा कर पाए गे--

साई बाबा आप सब पर अपना आशीष बनाए रखे--जय साई राम-----

Tuesday, 11 August 2015

चेहरेे का नूर देखा,तो उनहे हम से पयार हो गया--उलझनो को छोड पीछे,किसी गुफतगू

मे इकरार हो गया----सपनो के ताने-बाने बुने,इक खूबसूरत सा सॅसार बन गया--ढलती

रही---ढलती रही वो शाम,और मुकददऱो का मिलना शाहे गुलजाऱ हो गया----

Sunday, 9 August 2015

खुशिया दी है तुम ने इतनी,कि दामन मे मेरे सिमटती ही नही----माॅग सितारो से भर दी

तुम ने ऐसे,कि अब जहाॅ मे तेरे सिवा कोई दिखता ही नही---खनकती चूडियो मे बस

गया यू सॅसार मेरा,कि जननत की खवाहिश भी अब होती नही-----दोनो जहाॅ पा लिए

मैने.कि अब तेरे सिवा कोई जचता ही नही-----

Thursday, 6 August 2015

खामोशिया कभी गुनगुनाती भी है,जऱा सुन के देखो--यह वादिया कभी कभी रूला भी

देती है,करीब जा कर तो देखो--हवाए कभी बहकती भी है,जिसम की थरथराहट को छू

कर तो देखो--रूह को रूह से मिलाने की कोशिश मे,जऱा पाक मुहबबत के मायने जान

कर के देखो---यह जिनदगी चुपके से फना हो जाए गी--

Wednesday, 5 August 2015

टूटते तारो से कया माॅगे गे कभी-हसरतो का तो कोई अनत ही नही----जिनदगी तो हर

रोज इक नई खवाहिश ले कर आती है-और जनून बन कर खुद पे ही छा जाती है--पल मे

तोला-पल मे माशा बन जाती है---वकती तौर पे खुद से गिला करती है--तारो से अब

कया कहना है-जब हसरतो को अलविदा कहनी ही नही-------

Tuesday, 4 August 2015

किसी के किए अहसानो का करज--अगर आप उतारना चाहते है,तो उस के दिल के खाते

मे,अपनी दुआए जमा करते जाईए---सकून मिले गा----जिनदगी का हर पल आप सब

के लिए बहुत खूबसूरत हो--इसी दिली दुआ के साथ----

Monday, 3 August 2015

हम कितने अचछे है या कितने बुरे-यह साबित करने के लिए आप को,इस दुनिया मे

किसी को सफाई देने की कोई जरूरत नही होनी चाहिए---सिरफ भगवान् को सचचे मन

से याद कीजिए-वही हमारी अदालत है--खुश रहे और खुशिया बाटे-मेरी मॅगलकामनाए

आप सब के लिए---



जमी पे रहते रहते थक गए है अब--आ आसमाॅ की बुलनदियो को छू ले जऱा---वकते-

हालात से जी घबराया है मेरा-आ खुली वादियो मे साॅसे ले ले जऱा---तेरा यकीॅ अब साथ

है मेरे-तो कयू ना फासलो की दूरिया मिटा दे जऱा---जमाना जलता है तो जलने दे-

बेफिकर हो कर पयार के इन लमहो को अब तो---जी ले जऱा--------


Wednesday, 29 July 2015

इनतजाऱ जहा खतम होता है-मेरी हद वही से शुरू होती है--जिनदगी जहा खतम हो

जाती है-बस उसी मोड से यह साॅसे साॅस लेती है--टुकडे टुकडे टूटती यह खवाहिशे जब

भी दम तोड जाती है-उसी दम के छोर से मुहबबत मिल जाती है---हवाओ की रूखसती

जब भी खामोश होती है-नई दिशा की कामयाबी मेरे साथ होती है-----

Tuesday, 28 July 2015

जब तक जिनदा है-किसी इलजाम से बरी नही होगे--कब कहा किस ने हमे-कितना

तनहा किया-इस का खुलासा ना कर पाए गे--पर कागज के पननो पे वो सारे ऱाज लिख

जाए गे--बद से बदनाम हो कर जी रहे है हम-पर फिर भी खुद से किए हर वादे को पूरा

कर के जाए गे हम--उममीदे नही की है-पर खुद की साॅसो के बोझ तले जी रहे है हम--

Sunday, 26 July 2015

कदम से कदम मिला कर,मेरे साथ चल कर तो देखो---दरद सारे भूल जाओ गे--इबादत

मे मेरी शामिल हो कर तो देखो,खुदा का मतलब जान जाओ गे--यू ही नही,यह दुनिया

साथ चल रही है मेरे--दिल के आईने पे जमी धूल हटा कर तो देखो----सारी दुनिया

जननत सी नजऱ आए गी----

Saturday, 25 July 2015

जिनदगी मे मिलने वाली हर ठोकर,हर तकलीफ-आप को--आप के जयादा नजदीक

लाती है--आप पहले से कही जयादा समझदार और ताकतवर बनते है--दोसतो नई

सुबह आप सब के लिए शुभ हो-खुशहाल हो--इसी कामना के साथ----

Friday, 24 July 2015

तेरी गुफतगू ने दिल को छू लिया है मेरे---कभी हॅसा कर,कभी रूला कर रूह को सकून

दिया है मेरे---पयार ना हो जाए कभी मुझ से तुझ को--हॅसी हॅसी मे यू दिल ना चुरा ले

 कभी मुझ से---वादियो मे मशहूर हो जाए गे----दूर रह-----कि कही दिल के हाथो तू

मजबूर ना हो यू मुझ से-----

Thursday, 23 July 2015

जो गुनाह कभी किए ही नही,उस के गुनाहगार भी बन गए है आज--ऱफता ऱफता चलती

इस जिनदगी मे,हर किसी की आॅख का काॅटा बन गए है आज--कहते है मुददतो बाद

कोई मसीहा बन कर आता है,दिल के दरद को दिल से ही खीॅच लेता है---इनतजाऱ कर

रहे है अपनी इबादत मे उसी रौशनी का,जो बन के सितारा निजात दिलाए गा उन  

गुनाहो से हमे----

Wednesday, 22 July 2015

दोसतो--------शुकरीया कहे या मेहरबानिया आप सब की---इतने सममान-पयार-दुलार

से नवाजा है हम को----कल तक जहा अनजान थे,इन रासतो पे----आज------रौशन हुई

है हमारी राहे आप सब की दुआओ से------आप सब का तहे-दिल से धनयवाद-------

Tuesday, 21 July 2015

दीवानगी की हद से चाहना,कोई खता तो नही--हर किसी की खुशी पे,खुद को लुटाना

कोई खता तो नही--बेबसी मे खुद को दबाना,पर शिकवा फिर भी ना करना,कोई सजा

तो नही--सब के इशारो पे खुद को तबाह करना,कोई ऱजा तो नही--बिखर बिखर के फिर

आज खुले आसमाॅ मे उडना--मेरी खता तो नही--------

Sunday, 19 July 2015

कानधे पे सर रख कर किसी के,नही रोए गे हम---अपनी तनहाई है,खुद ही इन

अनधेरो से अब निकल जाए गे हम---यह दुनिया कयू बेचैन है,दरद से हमारे --कयू देती

है सहारो की बैसाखी बेवजह आ के----डरते नही इन बेमानी उलझनो से हम---बने है

गुनाहगार अब सब की नजऱो मे हम---तो कयू ना बागी हो जाए हम,खुद की खवाहिशो

को खुद से आबाद कर ले हम----

Friday, 17 July 2015

हजारो कमिया रही हम मे,फिर भी आप ने हमे अपनाया है--समनदर की लहरो से

निकाल कर,आप की चाहत ने हमे सॅवारा है--खुदा कहे आप को या अपनी दुआओ का

असर,आॅसूओ के भॅवर से आप ने ही हमे निकाला है--शुकराना कहे तो कम होगा,हर

जनम मसीहा आप हो मेरे---इसी सकून के साथ आप को हम ने सराहा है---

Wednesday, 15 July 2015

किस को छोड आए है पीछे,यह खयाल खलता है आज भी हम को---कही कोई याद कर

रहा होगा,तनहाई मे सोचते है आज भी इस को---इसी खयाल ने कलम थमा दी हाथ मे

मेरे,लिखते जा रहे है आज भी जनून की हद तक----धुॅधली सी यादे जेहन मे आज भी

है मेरे,शायद मेहरबानिया उस की बहुत होगी हम पर---जो आज भी खलल डाल रही है

जिनदगी मे हमारी इस हद तक-----

Monday, 13 July 2015

कह तो दिया,आप के लायक ही नही है हम--समनदऱ की लहरो मे फॅसे है,बाहर निकल

ही नही पाए गे हम--हसती तो मेरी इतनी भी नही,कि आप को जनून बना ले अपना---

भॅवर की चपेट मे फॅसे,इक तनहाॅ सा सहारा बना ले अपना---इक बुझती हुई शमाॅ है

ऐसी,कि चाह कर भी आप का सॅसार ना रौशन कर पाए गे हम----

Friday, 10 July 2015

बदलते मौसम के मिजाज की तरह,कयू बदल रहा है मिजाज तेरा---हवाओ के रूख की

तरह कयू बहक रहा है हर सवाल तेरा--गर मजबूरिया जमाने की ना होती,तो सजदा

तुझे करने चले आते---इन हवाओ की खुशबू मे ढले,तेरे दामन से लिपट जाते---मौसम

की तरह यू खुल के ना बरस पाए गे,नाजुक सी किशती है-तेरे तेज झोको से तुझी मे डूब

जाए गे---

Tuesday, 7 July 2015

खनक रही है आज कयू,हाथो की चूडिया मेरी--चमक रही है कयू,माथे की बिॅदिया मेरी--

हवाओ के झोको ने बजाई है शहनाई---दुलहन के लिबास मे कयू महक रही है दुनिया

यह मेरी--बहक रहे है फूलो की वादियो मे---तूने जो छुआ---कयू डोल गई जिनदगी यह

मेरी---
कफन मे लिपटे है मगऱ सकून से है--कुछ मीठी यादे साथ मे है,कुछ पयारे सपने पास

मे है---जिनदगी को तो तनहाॅ जिया हम ने,पर कफन का जामा पहने--मुहबबत का

एहसास लिए---तेरे नाम को सीने मे दबाए बेहद सकून से है-----
खूबसूरती हमारी उन की नीॅद उडा ले गई---हम तो चैन से सोते रहे,वो रात के वीराने मे

हमारी खूबसूरती पे किताबे लिखते रहे---आईने मे कभी अपनी सूरत ना देखने वाले

हम---आज  किसी के रहमो-करम से दुनिया मे मशहूर हो गए-----
तुझ से यू मुलाकात होना,इक हादसा ही तो है---मिल के फिर यू जुुदा होना,इक हादसा

ही तो है----अभी तो तुझे जाना भी ना था,और तेरा यू गायब होना यकीकन हादसा ही

तो है---उखड गई जो मेरी साॅसे,बस गए जो जननत मे--तेरा मुझे वहा मिलना---खुदा

कसम वो भी हादसा ही होगा----

Monday, 6 July 2015

 किसी की नजऱो मे हम इतना उठे,इतना उठे कि आसमाॅ के फरिशते हमे दुआ देने लगे

---देने चले थे किसी को उस की खुशिया,अपनी पाक दुआओ मे उनही को रूला गए---

जमी पे बिखरे है हम इक खामोश कहानी की तरह,किसी ने जो अपना समझा--इबादत

मे खुद को झुका गए----खुशिया बाॅट जाए गेे जहाॅ मे इतनी,कि दुनिया पुकारे गी तो

आसमाॅ मे नजऱ आ जाए गे-----
बहुत बहुत ही उदास है हम--पलको मे भीगी बेइनतहाॅ आॅसूओ की कतार से परेशान है

हम---दिल के इस दरद ने इतना इतना तडपा दिया है हमे कि हर चलती धडकन पर

मौत के लिए तैयार है हम--सजदा करने गर आओ गे मौत पे मेरी,तेरे कदमो की आहट

से  कबर मे भी महक जाए गे हम---------
सादगी पे हमारी कोई फिदा हो गया--आॅखो की गहराई पे हमारी,वो कहाानिया ही लिख

गया--वजूद को हमारे जाने बिना,हमारे वजूद से वो जुडता ही गया--जिनदगी मे हमारी

दऱद है कितने,जाने बिना हमारी परछाई सेे वो जुडता गया---कहते है इतना कि लौट

जाओ अपनी दुनिया मे,चनद दिनो के मेहमाॅ है हम--जीते जी ना आॅसू दिए किसी को,

फिऱ जाते जाते कयू रूला जाए गे-------

Saturday, 4 July 2015

तेरी जुदाई मे तनहा हो कर,आखिर मर ही जाए गे---पर तुझे नजऱ भर जो ना देखा तो

सकून कैसे पाए गे----बन के राख हवाओ मे बिखर बिखर जाए गे ऐसे--कि तू जहा जहा

से गुजरे गा--तेरे कदमो मे राखे मुहबबत का सलाम बजा जाए गे--------
चूडियाॅ जो खनका दे गे,तो नीॅद से जाग जाओ गे--बज जाए गी गर पायल,तो खवाबो

से निकल आओ गे---समभाले बैठे है खुद को दामन मे ऐसे,कि साॅसे भी चले तो आहट

ना हो ऐसे----हो ना कि घुलने लगे तेरी साॅसे मेरी साॅसो मे ऐसे--कि समनदऱ मे किशती

डुबने लगी हो जैसे------
खामोशिया तो साथ खडी है मेरे-खामोशिया तो हमेशा ही जीवन से जुडी है मेरे--बस तुम

ही ना सुन पाए हो---सरल रहे हम इतना,फिर भी तुम मुझे समझ ना पाए हो---बिछाते

रहे फूल तुमहारी राहो मे,पर खुशबू तो उस की ना तुम महसूस कर पाए हो---आज बनद

कर चुके हैै दिल के दरवाजे-पर अब लाख चाहो इसे तुम ना खोल पाओ गे-----

Friday, 3 July 2015

दुनिया मे रह कर भी,दुनिया वालो से जुदा है हम---बॅधे है हर रिशते से,पर फिर भी हर

रिशतेे से बहुत दूर है हम--समझ नही पाए इन ऱिशतो की भाषा,जिस मे रही दौलत और

पतथरो की अजब परिभाषा--दुनिया वालो ने हमे खुदगऱज समझा-उन के मुताबिक ना

चले तो दीवाना समझा--आज सिमट गए है खुदा के दामन मे,खुद को महफूज समझ

रहे है उस की पनाह मे इतना--लौट के ना आना चाहे गे फिर इस दुनिया मे,जहाॅ हसरते

तोडती रहे साॅसे हर पल अपना---
कही धोखे-कही फरेब-तो कही पयार का मायाजाल----कदम कदम पर ले रही जिनदगी

हमारे सबर के इमतिहान---ना शामिल है चाहत की इन रॅगानियो मे-ना शामिल है इन

बगावत की उलझनो मे---इक दुनिया है मेरी,जो जुडी है इबादत मे तेेरी---खामोशियो को

जो समझे,निगाहो के पानी को जो जाने,दिलो को जो जोड कर रख दे----बस इतनी सी

है मेरी कहानी-----------

Thursday, 2 July 2015

कभी पाया कभी खोया-जिनदगी के थपेडो मे यह दिल ना जाने कितनी बार रोया----

बिलख गई आतमा मेरी-दुनिया ने इतना रूलाया--पर साई मेरे तुम सहारा बन कर हर

कदम पर आ गए-मेरे वजूद को टूटने से बचाते रहे--इबादत करू साई तेरी या साॅसे भी

दे दू अपनी---कि अपना रोम रोम तुम को दे दिया मैने---जय साई राम---
तुझ से पहले कोई नही--तेरे बाद भी कोई नही---वकत की आॅधियो मे कायम है वजूद

आज भी मेरा--जमाना लाख चाहे फिर भी हर बार इनकार है मेरा---कभी दामन मे जो

चुभी एक तनहाई भी-तेरी यादो को ना निकाल पाई है---गर बरबाद हुए है तेरी चाहत मे

-फिर आबाद हो जाए-यह भी अब तेरे बाद नही-----

Tuesday, 30 June 2015

ऐ जिनदगी तुझ से शिकवा कया करू--दरद की आॅधियो ने जब जब भी रूलाया मुझ को

---दिल की ताकत ने तुझ सेे जोड दिया मुझ को-----सबऱ को बाॅधा,इतना बाॅधा तूने

वजूद से मेरेे कि जब भी आए तूफाॅ भारी भरकम---इसी सबर ने मुझे ऐ जिनदगी तुझ

से पयार करना और सिखा दिया---आज आजाद हू अपनी सोच से इतना,कि इबादत मे

भी अपनी, सब के गुनाहो को बखश दिया मैने----ऐ जिनदगी----ऐ जिनदगी----

Saturday, 27 June 2015

दिखाए ऐसे खवाब तुम ने कयू हम को,जिन की कोई ताबीर ना थी----हम ने सजा डाली

हजाऱो खवाहिशे अपनी,शोखियो से सजाया रॅगीन सफऱ अपना--आज अनदाज तुमहारे

है कयू बदले बदले,कहने के लिए इतना है काफी--------अपनी राहो से हटाने के लिए

ना बेरूखी अपनाईए,तेरी जिनदगी से दूर बहुत दूर निकल जाए गे--मगरूर अभी है

इतने----

Wednesday, 24 June 2015

मेरे पास तुझे याद करने का इक बहाना ही तो है--ऱिशतो से जुडा तेरा मेरा आशिययाना

भी तो है---बरसो गुजर गए तुमहे रूखसत हुए,पर तेरे कदमो का मेरी रूह मे आना जाना

आज भी है---कही मुकर ना जाए तू मेरे दिल के आईने मे आने से--मेरी चाहत का नशा

तेरी रूह मे ढलना-----इक बहाना ही तो है------

Sunday, 21 June 2015

बज उठी शहनाईया,दिल चुरा ले गई तेरी सारी मेहरबानिया--खुद होश मे नही है,कयू

सता रही है यह तनहाईया--कही बज रही है पायल,कही खनक चूडियो की बजा रही है

दिलो की कहानिया--कब आए गा वो दिन,जब तेरे साथ हो जाए गी मेरे कदमो की

रवानगिया--यू ही नही कहते कि मुहबबत मे मिल ही जाती है महबूब की मेहरबानिया-------

Friday, 19 June 2015

इस जहान से आगे इक जहान और भी है-फिर मिले गे कभी यह गुमान आज भी है--

दऱद मिले है तुम से इतने कि मुहबबत के नाम से दिल मे कडवाहट आज भी है--हो सके

तो खुद के गुनाहो को खुदा से बऱी करवा लेना--कही भटक ना जाओ जनमो के लिए

इतनी इनसानियत तो दिखा देना----हिदायत देते है तुमहे फिर से इतनी,नाम मुहबबत

का अब बदनाम ना करना--इस जहान से आगे इक जहान और भी है-------

Monday, 15 June 2015

बिखरी है जुलफे हवा मे ऐसे,लगता है खवाब निखर गए है फिजाओ मे जैसे--कयू धडक

रहा है दिल इक धीमी सी आहट से,कयू लग रहा है खुशबू फैल रही है तेरी चाहत की---

समभले तो समभले कैसे,तेरी यादो ने नीॅद से उठा दिया जैसे--पाॅव जमी पे टिकते ही

नही,आ जाओ कही दूर-बहुत दूर भटक जाए बारिश की बूदो जैसे-------

Thursday, 11 June 2015

चिलमन मे झुुकी वो निगााहेे जो देखी हम ने,हजारो खवाबो मे ठल गई जिनदगी हमारी

---रौशन सा जो चेहरा नजऱ आया,खुदा की रहमत पे य़की हो गया दुबारा---वो रॅगत वो

शोखी,जुबाॅ से महकते वो अलफाज-नरम कलाईयो मे बजती हुई चूडियो की वो झनकाऱ

--तेरी सूरत मे यकीकन खुदा का अकस देखा हम ने---उस की खुदाई पे खुद को झुका

पाया हम ने--------

Wednesday, 10 June 2015

वकत जखम देता रहा और हम सहते रहे---दिन-ब-दिन यह जखम नासूर बनते रहे---

कहते है जखम भर ही जाते है--पर जो जखम नासूर बन गए वो कया भर पाए गे--जब

जब कुरेदते रहे इन जखमो को--लहूलुहान होते रहे---यादो की दौड मे आॅखे भिगाते ही

रहे--रूह ने कहा इनितहाॅ हो गई ऐ मेरे खुदा--हम ने दिल दे दिया उन तमाम यादो

के साथ खुदा की इबादत मे--और जिनदगी को रौशन करने नई राह पे चल दिए-------

Sunday, 7 June 2015

जेहन मे उठती हुई जिनदगी की परेशानिया भी है-पर इसी जेहन मे मुहबबत की यादे

भी है--यू तो यह जिनदगी हजारो नियामते देती है,पर दे कर बहुत कुछ छीन भी लेती है

--गाहे बगाहे इन यादो को परिनदो की तरह उडा देते है--पर कहते है ना यादो को दफन

कर दो कितना भी-पर इन की एक इमारत बन जाती है जिगऱ के किसी कोने मे------

Friday, 5 June 2015

कभी फूलो मे,कभी बगीचो मे,कभी राहे-गुजऱ मे तुम थे साथ मेरे---परिनदो की उडान

को गिनते,वो सपने भी साथ गिने तुम ने-----हजारो मननते पूरी हो हमारी,उस का

शुकराना भी खुदा से मुकऱऱ किया तुम ने--कभी खुशी होगी कभी गम--राहे जिनदगी मे

साथ देने का वादा भी किया तुम ने--पर आज वकत का वो दौर देखा,जब तुम ने कहा

मुझ से---आप कौन है मेरे--यह सवाल कयू दाग दिया तुम ने मुझ पे----

Tuesday, 2 June 2015

तुम परेशान हो-हम पशेमान है---दूरियो का यह सिलसिला घटता ही नही--समनदर से

उठती इन लहरो का तूफाॅ कभी कम होता ही नही-----पाॅव के छालो के लहू से जमी पे

निशाॅ बनाते जा रहे है---जाने कब कहाॅ कोई फरिशता मिटा दे दरद के यह गहरे निशाॅ--

जी उठे गी यह हसऱते--होगी फिर यह निगाहे मेहरबान-मेहरबान-------

Sunday, 31 May 2015

बजा फरमाया मेरे हजूर---यह कह कर वो मेरी जिनदगी से रूखसत हो गए---हजारो

हसरतो का तूफान मुझे दे कर वो अपनी नई दुनिया मे फना हो गए------मेरे अरमान --

मेरी यह रूह तेरी जागीर तो नही -- चनद सिकको के लिए जमीर का सौदा नही कर पाए

हम-तेरी ऱजा मे खुद को दफना नही पाए हम--

Friday, 29 May 2015

मेरी चाहत के तलबगार ना बनो ऐसे--जाना है मुझे दूर-बहुत दूर इतना----साथ ले जाने

का वादा भी नही कर सकते तुम से---मेरी दुनियाॅ है जहा,तुमहारे खवाब अधूरे रह जाए

गे वहा-----दौलत-शोहरत का नामो निशान है नही जहा--बस मुहबबत का जजबा लिए

जीते है अपनी दुनिया मे----लौट जाओ कि यह साथ तुम नही निभा पाओ गे----ो

Wednesday, 27 May 2015

घुॅघरूओ की आवाज मे,पायल की थिरकती झनकार मे-अपना वजूद ठूठते ही रहे--उस

रूप मे,उस श्रॅगाऱ मे-आईने मे जब भी देखा,अपनी सूरत को तलाशते ही रहे----ठोलक

की थाप से बजती उन तालियो से हम डरते रहे-डरते ही रहे--इतने खूबसूरत कयो है हम

यह बेवजह सा सवाल कुदऱत से पूछते रहे---कब आए गे तेरी पनाहो मे ऐ मेरे खुदा ----

अपनी इबादत मे इन सूनी निगाहो से तुम से पूछते ही रहे------

Monday, 25 May 2015

गुरबत के शिॅकजे मे भी रह कर-तेरी मुहबबत के दिए जलाना नही भूले---हर याद को

सीने मे समेटे-तेरी किसी बात को नही भूले---दौलत शोहरत का साथ नही पाया-पर इस

जिनदगी के अनदाज को मन से जीना नही भूले----हर वो छोटी सी खुशी जो तेरे मेेरे

दरमयान रही-उस का जशन मनाना आज भी नही भूले----दुनियाॅ की नजऱो मे हम कुछ

भी नही-पर तुम मेरे शहनशाह हो य़ह बात खुद की मुमताज को बताना नही भूले---

Friday, 22 May 2015

चलते चलते बहुत दूर निकल आए है हम---कहाॅ ठूठो गे हमे-तुमहारे दायरे से भी बहुत

दूर निकल आए है हम-----रेत पे पाॅव धरते धरते कदमो के निशाॅ भी मिट चुके है अब---

बरफीली हवाओ के झोको मे अब तो खुद को भी झुठला चुके है हम---खुदा का रहम जो

रहा हम पे तो  खुदा के दरबार तक भी पहुच जाए गे हम---------

Wednesday, 20 May 2015

वो एक कहानी जो तेरे नाम से लिख दी हम ने---तेरी खामोशियो से तेरी ही गुफतगू की

दासताॅ लिख दी हम ने--तेरी इन गहरी सी आॅखो मे हजारो सवालात के जवाब ठूठ डाले

हम ने---तेरे कदमो की चाप से मनिजल की तलाश कर डाली हम ने---तू समझे या ना

समझे तेरे बेनाम से रिशते से जनमो का बॅधन जोड डाला हम ने-------

Sunday, 17 May 2015

बेवजह मुसकुराने की वजह ना बताए गे तुमहे--यह ऱाजे दिल के जजबात है ना बताए

गे तुमहे---फुरसत के लमहो मे तुम पास बैठो तो सही--जो टूट टूट कर बिखऱ गए उन

सपनो का जिकरे-हाल ना बताए गे तुमहे----मिलते है जब कभी तुम से-उन गुफतगू के

लमहो को सीने मे छिपाए रखते है हम--पर जिन दिनो के बेइनतहाॅ दरद से गुजरे है हम

उन का हाल कभी ना बताए गे तुमहे-----

Friday, 15 May 2015

बिखरते है जब जजबात-एक कहानी जनम लेती है----टूटते है जब उसूल रिशते बदल

जाते है----ना तब खवाब रह पाते है साथ--ना कोई उममीद लौ दे पाती है---पर साथ हो

जब दुआओ का--कदमो मे अहसास हो जब सजदो का-----तो यही जिनदगी खूबसूरत

सी फिजा नजऱ आती है--------

Wednesday, 13 May 2015

काजल नही-गजरा नही,कलाइयो मे कही कॅगन भी नही----ना माथे पे बिॅदिया है--ना

पाॅव मे पायल है कही--फिर भी महकता हुआ नूऱे-हुसन हैै-इनतजाऱ मे तेरे-----खबर

आई है फिजाओ से कही---तुम आ रहे हो हवाओ मे दूर तक खुशबू बिखरी है कही-----

इबादत करे तेरी या सजदा करे कदमो मे तेरे--दिल है कि तेरी हर खुशामदी पे आमदा है

कही-------

Tuesday, 12 May 2015

लोग कहते है हमारी दुआओ मे बहुत ताकत है--रूह की मॅजर से निकलती हुई कबूले-

ताकत है----बनद आॅखो मे भरी है दुआए इतनी---खोले गे जो इनहे तो यह दुआए बिखर

जाए गी हवाओ मे ऐसे-----इन के वजूद से जो भी टकराए गा -- वो इन की पनाहो मे

खुदा का मेहरबाॅ हो जाए गा-----

Sunday, 10 May 2015

खामोशियाॅ कभी मोहताज नही होती किसी की मुहबबत की--बनद दरवाजो मे खिलती

है धूप,रौशन बन कर निगाहो की---लबो पे आने नही देती किसी अफसाने को--दफन

कर देती है खुद को,बसाए हुए आशियाने मे---तडपे तो कयू तडपे इसी जजबात को

बताने मे,,आखिर मुहबबत ही जुबाॅ बन जाती है-खामोशियो की कहानी मे---------

Saturday, 9 May 2015

हम कहते रहे पयार करते है तुमहे  बेइनितहाॅ बेइनितहाॅ----कैसे जी पाए गे तेरे

बिना -तेरे पयार का कहा शुकरीया------बहारे भर ली है दामन मे हम ने,तुमहारे आने से

----बरसाते थम गई है तेरे घर आने से---यू ही नही गुजारे हम ने यह बरस तेरे इनतजाऱ

मे---कभी रोए कभी तडपे,भीग गई पलके तेरी ही जुदाई मे--अब आए हो तो जाना नही

कि यह बहारे थम जाए गी,तेरे चले जाने से-----------

Tuesday, 5 May 2015

रासते मे बिछी धूल जैसे नही है हम--इमितहान मेरी मुहबबत के कितने भी लो--तैयार

है हम---जिनदगी केे हर थपेडे को भी सहने के लिए तैयार है हम---धन दौलत की

चकाचौॅध को भी तेरे लिए छोड दे गे हम--तेरी बाहो मे दम तोडे-यह खवााहिश भी रखते

है हम--पर मेरा वजूद तू बिलकुल ही मिटा दे--यह तो कभी भी ना होने दे गे हम------

Sunday, 3 May 2015

एक कदम दो कदम फिर चले हम कदम दर कदम---वो कहते रहे हम से कि रूक जाओ

मनिजल है अभी बहुत ही दूर--रूकना तो मेरी फितरत ही नही-फिर चाहे तुम लाख कहो

रूक जाने को----मनिजल इनतजाऱ करे गी मेरा-आखिर जुसतजू उसे भी तो है मेरी----

वही इनतजाऱ करे गे तेरा कि अपने कदमो के निशाॅ छोड आए है तेरी राहो मे---------

Thursday, 30 April 2015

हर बात पे रो दे सिरफ तेरे लिए--ऐसी भी मुहबबत नही मेरी--------तेरी बेवफाई की

कहानियाॅ रोज सुने--फिर भी इबादत तेरी ही करे--ऐसी फितरत ही नही मेरी------टूटते

तारे से तुझे मागूॅ--ऐसा तो मेरे दिल ने कभी सोचा ही नही-----तुम मेरे होने के लिए

बेइनतहाॅ अनदाज बिखेऱो--यकी करने के लिए मुझ मे बदलाव आज भी नही-------

Wednesday, 29 April 2015

चलते चलते इन वीरान राहो पे तेरे ही कदमो के निशाॅ ढूठ रहे है हम---कभी रहमत तो

कभी दुआओ मे तुझे ही खोज रहे है हम----कभी बेजान बनी उस पायल को धीमे से

खनका देते है हम--यह सोच कर कि उस की खनक से शायद लौट आओ गे तुम--आधी

रात को चूडियो को बजा कर तेरी नीॅद को उडाना चाहते है हम------यह जान कर कि

आवाज सुनने के लिए अब कभी भी लौट कर नही आओ गे तुम---------

Sunday, 26 April 2015

इनतजाऱ खतम नही हुआ अभी-रहे गा उमर भर----लमहा लमहा सॅजो रहे है खुशिया --

जिनदगी की सहऱ तक-कोई दसतक,कोई आवाज आज भी आए तो दीवानगी की सीमा

और भी बढ जाती है--पहर पहर---यू ही नही कहते मुहबबत इमतिहान लेती रहती है---

हर पल हर पल रह रह कर----------

Friday, 24 April 2015

बहारे कभी मेरे आॅगन मे आए गी इस तरह--सोचा ना था----वो फिर लौट आए गे मेरी

जिनदगी मे--कही खवाब ना था-----कलियो मे,फूलो मे,हर शाख पे,हर डाल पे--जैसे नूर

आ रहा है----आसमाॅ से जैसे परियो का हजूम आ रहा है---कहने की बात नही है कि तेरे

आने के सनदेशे से ही---यह मन मुहबबत के दिए जला रहा है----------

Thursday, 23 April 2015

मासूम हॅसी-मासूम अदा---वो ही मासूम सा चेहरा भी तेरा----खनकती हुई आवाज मे

छिपी है लहऱो की सदाॅ-----बहके बहके से कदम आ रहे है बस तेरी तरफ----नही रहे गे

जुदा तेरी उलफत की कसम----इन बेडियो से जुदा हो जाए गा तेरे मेरे सपनो का शहर---

Tuesday, 21 April 2015

जिनदगी हर कदम पे एक उलझा सा सवालात कयो है--कभी मिल कर भी इतनी दूर का

खवाब कयो है----कभी इस से बेबसी का एहसास कयो हो जाता है--तो कभी खुशनसीबी

से भी बडा हिसाब नही मिल पाता है--कदम दर कदम यह जिनदगी कयो परेशान करती

है---ना छूटती है ना कभी खतम होने का मुकाम बनाती है---------

Monday, 20 April 2015

हवाओ की रूखसती से पहले अकसर तेरे आने की खबर पूछ लेते है----जिस रासते से

तू गुजरे उसी रासते से तेरा पता भी अकसर पूछ लेते है------तू कही भी रहे मेरी खामोश

जुबाॅ की गुफतगू मे रहता है-----यह आसमाॅ जहा पे खतम होता है उसी मोड के आगे से

मेरी मुहबबत का सफऱ पूरा होता है------------

Wednesday, 15 April 2015

मै हू तो तुम हो--तुम हो तो मै हू------लफजो मे बयाॅ की हजाऱो बार यह बाते तुम ने----

साथ बरसो का नही जनमो का है--यह यकीॅ कई बार दिलाया तुम ने-----हर मोड पे दू

गा साथ तेरा--यह अहसास भी कयू दिलाया तुम ने----ठोकरे जो जमाना दे गा तो खुद

सामने आ जाऊ गा तेरे--यह वादा भी कर डाला तुम ने----आज जब जखमो से भरा है

दामन मेरा--तो तेरे अहसास का साया भी नही है कयू पास मेरे----------------------
बदल गए हो तुम,तो मै कया करू---निगाहे जो चुरा ली तुम ने,तो किस से कहू---बस---

ताउम् इनतजाऱ करे गे तेरी उसी मुहबबत का--जो कभी दी थी तुम ने तोहफे मे हमे----

कही किसी मोड पे जो मिल जाओ गे हमे--तो माॅग ले गे तुमहे-तुम से जिनदगी भर के

लिए-----

Tuesday, 14 April 2015

जाने कब कहाॅ---कैसे इतने मशहूर हो गए-----लोगो की दुआओ मे मशगूल हो गए---

हम जो कभी थे अजनबी--आज सब की मेहरबानियो के सऱताज हो गए---जिनदगी से

पयार होने  लगा है अब कि जिनदगी की वादियो मे---कई साथियो के पैगाम शाामिल

हो गए-----

Saturday, 11 April 2015

जुुबाॅ खोली तो गुफतगू हमारी ने कयू कहऱ ठा दिया-----पलको को जो झुकाया मुहबबत

का अनदाज समझ नगमा बना दिया-----आॅखो नेे दिए इशारे तो जिनदगी हमारी का

अफसाना बना दिया----बाहे फैलाई जो मिलने के लिए-शोखी का अनदाज बता दिया---

सिमटे जो फिर खामोशी मे-तो जमाने ने कहा---यह खामोशी जिनदगी की है या फिर

शऱमिनदगी की----------

Friday, 10 April 2015

आहट कही से आ रही है तेरे कदमो की---ऱिमझिम बरसात की बूॅदे बुला रही है तेरी उसी

आहट को---महक रही है बगिया मेरे पयार की इसी आॅगन मे---सो नही पाए गे अब तेरे

इनतजाऱ मेे-- कि फिर कही यह जिनदगी रूक  ना जाए ------तेरे दीदार मे-----------

Thursday, 9 April 2015

फूलो की वादियो मे,पाया था तुमहे---बेपरवाह हवाओ ने, मिलाया था हमे---जिनदगी

के हर पल मे,खुशबू तेरी ही बिखरी है---कही जननत तो कही,मुहबबत की दुआ फैली है

----दूर ना जाना कभी मुझ से,कि---बहारो ने तुझे-यही रहने की इजाजत दे दी है---------

Tuesday, 7 April 2015

मिले नही कभी तुम से, कयू अफसाने बन गए तेरे मेरे पयार के---कभी देखा नही तुम

 को,कयू हो गए इकरार के चरचे हमारे पयार के---मुहबबत की पनाहो मे नही रहे,फिर

कयू आखिर हम बदनाम हो गए---इबादत तेरी मे कहाॅ जुडे,पर जनमो के कयू गुलाम हो

गए---तनहाॅ भी नही हुए,फिर कयू आॅखो के आॅसूओ से बेहाल हो गए--------------

Sunday, 5 April 2015

मेरी ही जिनदगी पे,उस ने किताब लिख डाली---किसी पनने पे हमारी तनहाई,तो कही

हमारी खुशी बयाॅ कर डाली---पलटते रहे जो हर पनना,मुहबबत अपनी का उस ने हर

मुकाम ही तय कर डाला---मुसकुरा दिए उस की मुहबबत के अफसानो पे,जो हम खुद

को ना समझे--यकीकन उस की लिखावट मे खुद का अकस ही ढूढ डाला-------

Friday, 3 April 2015

शायरी------जिनदगी के हर रूप को बयान करती है-----सुख-दुख---खुशी-गम----हर पहलू को बयान करती है----

     मेरी शायरी के हर रूप को पसनद करने का तहे दिल से शुकरीया---शुकरीया
हम पागल है तेरे पयार मे-लोग कहते है-----हम बेवफा है तेरे इशक मे-लोग तो यह भी

कहते है-----खामोश बैठे है इक बुत की तरह-लोगो के अलफाज सुनते है----मुकऱऱर

दिन तो नही तेरे आने का-पर जुदाई के सबब मे,तेरे आने की उममीद का दिया जलाए

फिऱते है------
उदासियाॅ ही उदासियाॅ---तनहाईया ही तनहाईया---मजबूर जिनदगी की अाधी अधूरी

परेशानिया----कहाॅ जा कर थमे गा यह उलझनो का सफर---कयू नही मिलता कभी इस

जीवन को सकून--राहे मनिजल की तलाश मे ढूढते रहे बस,दर ब दर तुम को--यह जान

कर कि तुम नही हो कही--इलतजा करते है खुदा तुम से-कर दे साॅसो को खतम,एक

दुआ है मेरी---------

Tuesday, 31 March 2015

साॅसो मे घुल रही है तेरे सपनो की महक--वो सपने जो बस तेरे है और मेरे है--हजारो

उममीदो के साथ चल रहे है साथ तेरे-इक नई दुनियाॅ की तलाश मे---वजूद तेरा भी है

वजूद तो मेरा भी है--मनिजल तो तेरी भी वही,मेरी भी वही--रासतो के दरमय़ा कयू है

इतनी उलझने-कयू नही हो पाता तेरा मेरा मिलन-कयू खामोशियो मे घुलती जा रही है

तेेरे मेरे सपनो की सहऱ----------

Sunday, 29 March 2015

लुटा दी पयार की दौलत हर उस शखस पर-जो जुडा रहा किसमत से मेरी--ऱाहे-मुसववऱ

मे तनहाॅॅ जो कभी हुए-ना बताा पाए खुद की उलझनो का सिला--जो बताया कभी रॅजो-

गम अपना-खुद अपनी कशती ही डुबो बैठे--अशको से भिगोया जो दामन अपना-उनही

अशको से फिर बचाया दामन अपना-पाके-मुहबबत ना हासिल कर पाए कभी----बस

लुटाते रह गए पयार की दौलत हर शखस पर-जो जुडा रहा जिनदगी से मेरी---

Friday, 27 March 2015

मेरे मासूम चेहरे को ना देखो-फिदा हो जाओ गे---मेरी मुहबबत को ना परखो-फना हो

जाओ गे---मेरे गुसताख इरादो पे ना हो कुरबान-जिनदगी से ही बेजाऱ हो जाओ गे-----

कभी फुऱसत से जो देखो गे मेरी निगाहो की चमक---अललाह कसम-----मेरा ही बनने

पे मजबूर हो जाओ गे----------

Wednesday, 25 March 2015

हर तरफ फैली हैै तेरी चाहत की खुशबू की लहर--महक रही है मेरे मन की बगिया शामो

सहर---अनजाम नही सोचा इस पाक मुहबबत का--हवाओ के हर झोके से जुडा है तेरी

चाहत का सिला---कदम दर कदम चले है उन चाहत की आवाजो पे-कि---कही लौट ना

जाए तेरी चाहत की नजऱो की वो बेशुमार लहरे------------
खामोशियाॅ सफर करती है-बनद दरवाजो की आहट पे---गुजऱ जाते है कई लमहे इन

बेआवाज अफसानो पे--छू लेती है बहाऱे इशक का फऱऱमान बन के--कभी रो देती है

मजबूर-ए-इशक बन के---आ लौट चले कुदऱत की पनाहो मे--यहा सकून-ए-दिल कभी

हासिल ना कर पाए गे----------

Monday, 23 March 2015

टुकडे दिल केे नही किए तुम ने-पर अरमान जरूर तोडे है---जब हजारो रॅग बिखेर रही

है जिनदगी-तब कयो तेरे जजबातो के लिए रोए है---समभलने के लिए तो वो बुरा वकत

ही काफी है-फिर तेरी ही आगोश मे रोने के लिए कयो तडपे है---बुला रही है जिनदगी

दामन मे मेरे फूल सजाने के लिए-फिर भी ना जाने कयू तेरी बेवफाई के बावजूद-तुझे

ही पाने को कयू मरते है-----

Sunday, 22 March 2015

हम ने तो अपनी हॅसी से उडा दी हर बात तेरी--बेखबर रहे कि हमारी हॅसी ने ही चुुरा ली

रातो की नीॅद तेरी---तेरे मासूम चेहरे पे जो नजऱ पडी मेरी-खोया दिल का चैन-बदल दी

दुनिया ही मेरी---इतनी शिददत से जो चाहो गे मुझ को--तो छोड दे गे यह जहाॅ-बस आ

कर सजा दे गे दुनियाॅ तेरी------------

Friday, 20 March 2015

जिनदगी खतम हो कर भी खतम नही होती-यादे बन कर साॅसो से लिपट जाती है-हर वो वादा पूरा किया है हम ने-जो दिया था तुम को-यकीकन तेरे रूखसत होते ही सब ने --बहुत रूलाया है--यह जान कर कि तुम अब कभी लौौट कर नही आओ गे-दिल बहुत दुखाया है----रूखसती के बाद भी तुम मिलते हो मुझ से-----यह जान जाए गे ----तो कया यकीन कर पाए गे----पर कसम खुदा की---तेरे मेरे मिलन को रोक नही पाए गे--------
वही रॅगत-वही चेहरा-वही मुसकान होठो पे------भूल नही पा रहे है तेरा वो पैगाम-------

कि सदियो मे खिलते है ऐसे फूूल-जो सदाबहार रहते हैै---आओ कभी भी लेने हमे-मगर

हमनवाॅ मेरे-तेरे लफजो का मान रखे गे मरते दम तक------रहे गे सदाबहार यू ही------

कयो कि तेरी किसी चाहत को नकारना रहा है हमारे लिए बहुत ही मुशकिल-------------

Thursday, 19 March 2015

इखतियाऱ ही नही है आज भी अपने जजबातो पे-इनकार नही है फिर भी तेरी उन

बेमिसाल बातो से---रूह तेरी मे समा चुके है खामोश मुहबबत बन कर-यह बात और है

कि तेरे पयार मे शिददत ही नही आज तक---तेरी बातो की नरमाई,मगर निगाहो की

बेरूखाई--समझ नही पाए आज भी कि तुम मुकममल हो या अधूरी सी बेवफाई------

Wednesday, 18 March 2015

मै वो कहानी हूू-जिसे तुम कभी लिख नही पाओ गे--मै वो नगमा हू-जिसे तुम कभी

गुनगुना ना पाओ गे--खामोशी से भरा वो दरद हू-जिस को चाह कर भी कभी महसूस

नही कर पाओ गे--मेरे कदमो की वो आहट-सुन कर भी सुन नही पाओ गे---मगर मेरी

बेइनतहाॅ मुहबबत की चाहत सदियो तक करते जाओ गे----------

Monday, 16 March 2015

कभी तोडा-कभी मोडा-कभी खवाबो को यू रौदा----सिसकते रह गए तनहाॅ मगर- तुम ने

आजमाना नही छोडा--वही आॅसू,वही आहे मगर-तुमहे पयार करना नही छोडा---तुम

करो कितने सितम मगर-तेरी आशिकी करना नही छोडा---तुम लौटो या ना लौटो मगर-

तेरा इनतजार करना नही छोडा--------

Sunday, 15 March 2015

मगरूर नही है तेरे पयार मे,बस मशहूर हुए है तेरी चाहत मे---जमाना दे रहा है दुहाई,पर

वकत नही है पास मेरे जमाने को बताने का--- मुहबबत के परिनदे है,सितम जमाने के

ना सह पाए गे---हजाऱो पाबनदियो के बाद भी अपना मुकाम बनाए गे--इबादत मे फना

की है मुहबबत अपनी,फिर डर जाए जमाने से-यह गुसताखी नही कर पाए गे----

Friday, 13 March 2015

नजऱ भर जो देखा तुझे,कयू नजऱ भर आई मेरी--एक कदम जो साथ चले तेरे,कयू पूरा

सफऱ तय करने की खववाहिश मन मे आई मेरी-दिल के बनद दरवाजे पे दसतक दे रही

है निगाहे तेरी,कयू महसूस कर रही हू तेरी सरगोशियाॅ पनाहो मे मेरी--यह इशक है तेरा

या कशिश मेरी चाहत की,कयू बार बार बुला लेती हैै तुझे निगाहे मेरी------------

Thursday, 12 March 2015

लबो पे मुसकुराहट लिए-हम जमाने मे मशहूर है---अनदर की बेबसी को-अपनी तनहाई

मे समेटे हम मशगूल हैै----जो कभी रो दे गे-तो जमाना उठाए गा हजारो सवाल हम पे--

कयू बिखरे है बेवजह-पूछे गे सब हम से----हमारी मुसकुराहट-हमारी हॅसी-कया कीमत

है इस की--नही जानते---बस खबर है इतनी-कि हमारी हॅसी से जिनदगीयाॅ गुलजाऱ है

कितनी------------

Wednesday, 11 March 2015

रिशता सात कदमो का नही-सात जनमो का है---फिर कभी पास रहो या दूर-इतमीनान

सिरफ फरजो का है---बेवफाई की उममीद ना तुम से है-ना हम ही ऐसा कर पाए गे----

कयो कि मुहबबत का फरमान दोनो का है---खुदा को पुकारे गे तुम से मिलने के बाद--

कि जिनदगी मे इनतजाऱ अब नजारो का है------

Sunday, 8 March 2015

मै जो कहू गी-वो कया तुम दे पाओ गे---मेरी हसरतो का वो सॅसार लौटा पाओ गे,जहाॅ

भारी कदमो से मै चली थी तेरे पीछे--वो रासते लौटा पाओ गे-----ताउमर बाॅटी सभी को

खुशियाॅ-पर अब- कया मेरा दामन सितारो से भर पाओ गे---जुसतजू तेरी ही की थी मैने

पर पाया नही तुझे मैने-कया मेरा अधिकार मुझे दे पाओ गे--मै जो कहू गी वो कया तुम

दे पाओ गे----------------

Saturday, 7 March 2015

तेरा शहर गर हसरतो का शहर होता-तो हम चले आते----अपनी जिनदगी का सकून

तलाशने ही चले आते----रफता रफता जो साॅसो को चलाया है हम ने---तेरे शहर के

मौसम से साॅसो की ऱफतार बढा लेते-----य़की होता गर कि तेरे सीने मे भी इक दिल है--

तो अललाह-कसम अपना वजूद मिटाने ही तेरे पास चले आते-----पर आलम है यह कि

तेरे पतथर दिल की तरह,वीरान है तेरा शहर--वरना् हम तो बेमौत मरने चले आते------

Thursday, 5 March 2015

पलके बिछाए बैठे है तेरी राहो मे--यह इनतजाऱ कोई कम तो नही----तुम ने लगाए

कितने इलजाम मुझ पे--फिर भी तलबगार है तेरे,यह कोई कम तो नही---हवाओ के

रूख मोड कर तुमहे बुलाया है हम नेे--यह बुलावा भी कोई कम तो नही---तेरी बेवफाई

से दिल रोया है जाऱ जाऱ,फिर भी इबादत के लिए-बस-तुमही को पुकारा है-यह भी कुछ

कम तो नही------------

Tuesday, 3 March 2015

कही से लौट के आजा-मेरे हमदम-कि बहुत उदास हू मै---दुनियाॅ बेशक साथ चले मेरे,

पर तेरे बिना बेकार हू मै--कई उलझने,कई बाते-कभी दिल को रूला देने वाली यादे-आज

भी चल रही है साथ मेरे-----कहे किस से दिल के यह ऱाज----बस------कही से लौट के

आजा मेरे हमदम--मेरे हमनवाज----------------

Sunday, 1 March 2015

आप की खामोशी मे छिपा वो ऱाज-जानते है हम----बरसो बाद मिले हो फिर भी-आप

का अनदाज पहचानते है हम---वो आप का यू मुसकुराना-फिर एक अदा से घूम जाना--

जानते है हम--दुनियाॅ की नजऱो मे-आप तनहाॅ है बेशक--पर आप की खुशी का मतलब

----सिरफ------जानते है हम----------

Saturday, 28 February 2015

एक बॅधन ऐसा भी--जिनदगी मे कभी मिले नही तुम से,फिर भी गहरी पहचान है---

कभी गुफतगु नही हुई तुम से,फिर भी बाते हजाऱो हुई है तुम से---कोई रिशता नही तुम

से,फिर भी जनमो का साथ है--मर नही पाए गे तेरे बिना,कयो कि यह सदियो का साथ

है-------एक बॅधन ऐसा भी--------------

Friday, 27 February 2015

तेरे छू लेने से मेरी नस नस मे--बिजली कौधी है----कयो----यह तेरा इशक है या मेरे

हुसन का जादू-----पलके झुकी है तुझे देखने के बाद----आॅखे बरसी है तुझ से मिलने

के बाद---ना सो पाए है ना जाग पाए है--मुहबबत का पाठ जो पडाया है तूने--उस से

तू बेखबर हैै----कयो-----------

Thursday, 26 February 2015

रफता रफता पाॅव बढा रहे है हम--गीली मिटटी पे निशान बना रहे है हम-----जिनदगी

के नाकाम रासतो से भी मनिजल ठूॅठ ले गे हम---कया हुआ जो साथ कोई मेरे नही--

कया हुआ जो किसी को मुझ से वासता नही----यहाॅ तो लोग पयार का मतलब भी नही

जाान पाते है---हम तो इनसाॅ है,लोग तो खुदा को ही भूल जाते है---इसलिए तो जिनदगी
को कामयाब बनाने जा रहे है हम--------

Tuesday, 24 February 2015

खुल रहे है मन के बॅधन धीरे धीरे--यकीॅ कर रहे है तुम पे धीरे धीरे-----इस दुनियाॅ मे

कोई अपना ही ना मिला--सो दूर हो गए सब से धीरे धीरे-----तेरी शराफत के हम कायल

हुए--तेरी मुहबबत पे हम फिदा हुए---पर अब तुमहे जान गए है धीरेे धीरे----जिनदगी

भर के लिए खुदा से माॅॅग ले गे तुमहे--वो भी धीरे ----धीरे------------

Monday, 23 February 2015

ताललुक नही रहा बेशक आज तेरी जिनदगी से-फिर भी जेहन मे तेरी यादे कहती है

कहानी मेेरी तनहाई की--कदम दर कदम चलते रहे,पर बहुत दूर रही मनिजल मेरी--

कभी टूटे कभी हारे,कभी खुद को यू ही बहलाते रहे कि चलना तो अकेलेे है-साथ मेरे

कोई भी नही--मन मे जो बाते है वो किसी को ना बता पाए गे--बस हमनवाॅ मेरे पहुॅचे

गे जब तुझ तक-तभी साऱी खवाहिशे बता पाए गे--------------- 

Sunday, 22 February 2015

कहर बन केे आई है यादे तेरी--अशको से भिगो गई दामन यादे तेरी----बहुत चाहा कि

दूर रहे इन से--फिर भी अकसर टीस जाती है यादे तेरी-----इन अशको से लिख दी है

हम ने--तेरी और अपनी कहानी-----फिर भी तनहाॅ कर जाती है यादे तेेरी------------
धीरे धीरे--ऱफता ऱफता--जिनदगी मे सब कुछ खोते चले गए---कभी अपनो के तो कभी

बेगानो के इलजामो से खुद को घिरा पाते रहे--बेबसी मे बस--तुमहे को याद करते चले

गए--यह दुनियाॅ तेरे बिना मेरे किसी काम की नही--इनतजाऱ है तेरी उस आहट का----

कि कब कहो गे मुझे जरूरत है तुमहारी--मेरी दुनियाॅ मे बस चले आओ------------------

Saturday, 21 February 2015

हर आहट पे ऐसा कयो लगता है कि तुम आए हो...हर दरवाजे,हर खिडकी को खोला कि

तुम आए हो....बाहर नजाऱो मेे देखा,वादियो मे पुुकारा...लगा कि शायद तुम वहाॅ आए

हो...मायूस हो कर घर लौट आए,आॅखे जो मूॅदी तो पाया..खयालो मे मेरे पास आए हो...

यकीॅ हो चला है अब इतना,कि आज आए हो खयालो मे..........तो कल हमे मिलने भी

चले आओ गे................

Friday, 20 February 2015

आप के अरमानो की हिफाजत तो नही कर पाए हम,पर आप की इबादत मे उमर गुजाऱ

दे गे हम....वो लमहे,वो यादे,वो मन को छू लेने वाली बाते...वो तो आप को लौटा नही

पाए गे हम......पर जिनदगी कभी तनहाॅ ना हो आप की,बहारो को कही से भी ला कर,

आप की दुनियाॅ सजा दे गे हम...........

Wednesday, 18 February 2015

एक इशारा जिनदगी ने ऐसा दिया,कि हम मुसकुरा दिए...जिन रासतो से गुजरे थे कभी

तनहाॅ हो कर,उनही रासतो ने आज फूल बिछा दिए... खामोशी की जुबाॅ जो ना समझे

 कभी वो खुद ही सलामे-इशक बन के आ गए....आॅखो ने अशक बहाए जितने,महबूब

की आगोश मे आ कर बहार बन के खिल गए..........

Tuesday, 17 February 2015

तेरे सपनो की दुनियाॅ मे,कोई किरदार नही बन पाए है हम...पर तेरी मासूम हॅसी के

साझेदार तो है हम...जमीॅ पे पाॅव रख कर चले है हम,बस तेरी तरह बिना पॅख आसमाॅ

मे नही उडे है हम..दुआओ से उठेे है जिनदगी मे हम,तेरी तरह दौलत की चाह मे बिखरे

नही है हम....फिर भी हमनवाॅ मेरे तेरे पयार मे मिट गए है हम.......

Sunday, 15 February 2015

दौलत दी शोहरत भी दी..ऐशो-आराम की महकती बगिया भी दी...हम जहाॅ जहाॅ कदम

रखते रहे,फूलो की बरसात भी तुम करते रहे....यकीकन-- दुनियाॅ की नजऱ मे यह

तुमहारा पयार रहा....पर-मेरे वजूद से जुदा रही राहे तेरी...हमे ना वो पयार मिला,जो

खरे सोने सा मुकममल होता...............

Saturday, 14 February 2015

तेरी पाक मुहबबत के मायने समझ आ रहे है आज..तुमहे कयूू ठुकरा दिया हम ने,नही

जान पा रहे है आज..मुहबबत नाम नही सफाई देने का,मुहबबत तो नाम है साॅसो मे

साॅसे जजब करने का...हम पुकार रहे है आज......चले आओ......कि मुहबबत के मायने

समझ आ रहे है आज...............

Friday, 13 February 2015

तेरी खामोशी मे छिपा वो ऱाज,मेरे दिल मे उतर आया है..तेरी धडकनो सेे जो पैगाम

आया,वो मेरे वजूद मे चला आया है...तुम ने तो कुछ भी ना कहने की कसम खाई है....

पर मेरी रूह ने तुमहे अपने वजूद मे मिलाने की कसम खाई है..तुम समझो या ना

समझो,पर तुमहे पाने का खय़ाल इबादत मे सिमट आया है........

Thursday, 12 February 2015

दबे पाॅव जो मिलने आए तुम से,यह पायल बज उठी...खुली आॅखो से जो देखा चेहरा

तेरा,मेरे चेहरे की ऱॅगत गुलाबी हो गई.....तेरी नजरो ने जो छुआ दामन मेरा,हजारो फूल

फिजाओ मे बिखर गए...यह पयार है या मेरा कोई खवाब,चूडियो की खनक मे तुम

बसते रहे कभी सुबह तो कभी रात.......

Wednesday, 11 February 2015

अपने दुखो के मौसम से,कुछ सुख के पल खोज रहे है हम...अपने बहते आॅसूओ मे,ओस

की भीगी शबनम ठूठ रहे है हम...जखम जो नासूऱ बन चुके है अब,उन से ही अपने दरद

की दवा ठूठ रहे है हम...कभी तडपे कभी रोए कभी यादो मे खोए हम,और आज उनही

जजबातो मे अपनी खुशिय़ाॅ खोज रहे है हम........

Tuesday, 10 February 2015

तेरे इनकार से तनहाॅ तो नही,बस उदास है हम...बेवजह जो यह आॅसू छलके है,उन से

परेशान है हम...उममीद का दामन छूटा है ,यही याद कर के खुद से बेजार है हम...तुम

ने नही चाहा हमे,कोई बात नही...पर अपनी चाहत को याद कर के खुद के तलबगाऱ है

हम...........

Sunday, 8 February 2015

आज एक कहानी तेरी है, कल मेरी भी होगी...यही लफज कहेे थे तुम ने,जब बरबाद

हुई थी मेरी जिनदगानी..टुकडो मे बॅटी थी साॅसे मेरी,तो तुमहारी साॅसो ने समभाली थी

राहे मेरी..आज जब समभल चुके है,उन जखमो से...तुम कहतेे हो......बस--मेरी अपनी

भी है एक जिनदगानी................