Tuesday, 30 September 2014

आज तो है,पर नही होगेे कल....दुनियाॅ तब करे गी याद आॅसू के मोतियो के साथ.....

लमहे जो आज है,वो कल नही होगेेे....फुरसत जो आज है वो कल नही होगी...

रफता रफता साॅसे थम जाए गी....यह रूह जो आज मेरी है,कल किसी और के जिसम

मे समा जाए गी.....यह सूरत जो पहचान है हमारी,एक दिन ऱाख के ठेर मे बदल जाए

गी....

Sunday, 28 September 2014

तुझे ला कर इस दुनियाॅ मे...मैने तुझे जीने का अधिकार दिया..पयार दुलार की दौलत

से तुुझेे मालामाल किया...तेरे जीवन का हर फैसला तुझी को चुनने का अधिकार दिया..

तुझे हर मौके पे सममान दिया...पर तू अपनी मनमानी हर जगह ना करे...डाॅट-फटकार

केे इस अधिकार को मैने इसतेमाल किया....मै ना रहू जब दुनियाॅ मे,तो मेरे उसूलो पे

अमल करना..मेरे दुलार को याद रखना,पर मेरी फटकार को ना भूूलना...

Saturday, 27 September 2014

जिनदगी ने हर मोड पे,हर मोड पे....इतना सताया है,इतना रूलाया है....कया कहे इस

जमाने को...इस जमाने ने ही हमे हर मोड का गुनाहगार बताया हैै....आज सब को

निकाल चुके है अपने जेहन से,अपनी यादो से....ना पयार का वो जनून है,ना किसी की

बातो पे यकीॅॅ....बस कागज के पननो पे लिखते जा रहे है दासताॅ अपनी.....जिस जिस

ने कहाॅॅ कितनी ठेस दी...इनही पननो को गवाह बना रहे है जाते जाते......

Friday, 26 September 2014

दरद अपनेेे मेे जीना...आसाॅ तो नही..दरद से खुद को आजाद करना.......एक चुनौती

है खुुुद के लिए....यहाॅ दरद देेनेे वाले तो बहुत मिल जाए गे...पर इस दरद के जखम

बस कुछ विरले ही भर पाए गे....

Wednesday, 24 September 2014

पयार का मतलब कुछ नही इस दुनियाॅ मे.....लोग खुद को बचानेे केेे लिए दूसरो का

जीवन भी दाॅव पर लगा देेते है....पर फिर भी उसी इनसाॅ से पयार का ....बेेइनतहाॅ

मुहबबत का दावा करते है...यह दुनियॅा सच मे गोल है....आज इस ने दगा दी पर  कल

उस की बारीी भी हो सकती है.... 

Sunday, 21 September 2014

वो सुबह की हलकी धूप..माॅ की गोद मे सिर रख कर मीठे सपने देखना..याद है बाबू जी

की वो डाॅट..झट से भाई के पीछेे छिप जाना ..कोई गलती करना और माॅ की फटकार

खाने से पहले..मनुहाऱ कर के माॅ को मना लेना..ना कोई दुख ना तकलीफ का एहसास

था,आजाद परिनदो सा जीवन था.आकाश मे उडने की वो हसरत,वो खुली साॅसे..हर मोड

पे हौसलो का वो जजबा..आज फिर मन है जी ले उसी जीवन को..जहाॅ झरनो नदियो की

सी ऱौनक थी..

Saturday, 20 September 2014

कोई वादा ना कर मुझ से.....निभा ना पाए गा.....रूह अपनी मे बस मुझे बसा के रख

....इसी से मुझे सकूूून मिल जाए गा....सदियो से तुझ से एक नाता है....जनमो जनमो

तक निभा जाए गे...तुझ से जो कह दिया,वो साॅसो के मिट जाने के बाद भी निभा जाए

गे.....

Friday, 19 September 2014

इन ऱिशतो की कहानी बहुत अजीब है....जितना समभालो बिखरते है उतना....दिल से

नकारो मचलते है उतना......दिल और दिमाग की जॅग मे.... कौन जीता कौन हार जाए

गा यहाॅ.....साॅसे जब रूखसत होगी....तो रिशतो का जहाॅ उजड जाए गा यहाॅ.....

Wednesday, 17 September 2014

जिनदगी कब कहाॅॅ दसतक देती है...और किस मुकाम पर....कोई नही जानता....

पर वकत कहता है समभल जा...इमतहान तो अभी बाकी है...साॅसे कब कहाॅॅ साथ

छोड दे यह भी कोई नही जानता....परिॅदो की तरह उड जाना....वकत और जिनदगी

कया सोचे गे....यह भी कोई नही जानता..... 

Tuesday, 16 September 2014

दौलत से गर सब खरीदा जाता,तो हर बादशाह भी सकूून से जी पाता....हर दरद से

दूर होता हर दुख से निजात पा लेता....पैैसा बहुत कुछ है पर हर मोड  पे जीत नही देता

...पयार दुलार का मोल किस ने जाना,,गर जाना होता तो यह जहान बहुत खूबसूरत

बहुत अमीर होता....
बरस पेे बरस निकल गए तुझे रूखसत हुए....पर तेरी रूह ने मेरा साथ नही छोडा.....

दुनियाॅ हमे तेरा दीवाना समझती है....पर हम ने दुनियाॅ को कुछ नही माना....वो

दुनियाॅ जिस ने हजारो जिललते हमे दे डाली....पर तेरी रूह ने हमे अपनी रूह मे बदल

डाला....डरते नही किसी मुसीबत से,कि तेरे लिए अब यह रूह भी दाॅव पे है....
दोसतो.....मेरी शायरी को बेहद पसनद करने का ......तहेदिल से शुकरीया....
कभी कभी मन यह सोच कर,बेहद उदास हो जाता है....दौलत और रूतबा गर हमारे पास

होता तो इन दुनियाॅ वालो की सोच हमारे लिए कुछ और होती....हमारी गलतीयो को

हमारा रूआब माना जाता....हमारी नाऱाजगी पे भी हमे पैगाम दिए जाते....हमारी

खिदमत की जाती....हम भी अपनी जिनदगी,अपनी शऱतो पे जीते.....पर आज बेहद

शुुकरगुजाऱ हैै अपने भगवान् के,कि अगर दौलत होती,रूतबा होता तो सब के असली

चेहरे कहाॅ देख पाते....

Monday, 15 September 2014

हमारे जाने के बाद....हमे याद रखने की कोई वजह,किसी के पास नही होगी....

ना कोई रोए गा....ना पूजा के मनत्रो मे हमे याद कर पाए गा....हाॅ इनही कागज के

पननो मे,गर चाहो तो ठूूॅॅठ लेना....अपनी दासताॅ लिख जाए गे....और यही इक यादगार

बन जाए गे....

Sunday, 14 September 2014

हर आरजू पूरी हो ऐसा होता तो नही....पर हर खववाहिश का भी दम निकल जाए....

ऐसा भी होता नही.....चनद दिनो की  जिनदगी हमारी....पर यादे छोड जाए गे इतनी....

कि हर पुशत याद करे गी....कि कौन था ऐसा जिस ने बना दी जिनदगानी हमारी.........
पयार तुझे इतना किया..कोई ना कर पाए गा......वजूद अपना भी तुझ पे लुटा दिया....

जो कोई ना कर पाए गा......फिर भी जो जखम तुम नेे दिए...दिल मेरा तोड कर...

बह रहा है खून इतना.....कि यह जखम ना भर पाए गा अब उमर भर...
इतना तडपे,,इतना तडपे कि अब तडपना ही भूल गए...समझौते इतने किए..बहुत

किए...कि अब समझौता करना ही भूल गए....आॅसू इतने बहाए कि सैलाब ही सूख गए...

मौत को इतना नजदीक से देखा कि जिनदगी जीने का मकसद ही भूल गए....
हर रासता खुुद बना रहे है...किसी के सहारे के बिना....ना रजिॅश है ना पयार है...ना

वो तडपने वाली मुहबबत है...अकसर सोचते है कया मिला हमे पयार की बेपनाह दौलत

लुटा कर....ना कदर थी ना कदर होगी...हमारे जजबातो की....फिर किस लिए तडपे...

किस के लिए रोए...आॅसू बहा कर भी कया मिला....आज सकून है इस बात का कि

जिनदगी को जी रहे हैै अपनी शरतो पे....

Friday, 12 September 2014

कोई वादा नही किया तुुम सेे...फिर भी हर रसम निभा जाए गे...दुनियाॅॅ कया कहती है

हम को..हर दीवार को तोड जाए गे...वो रिशता ही कया जो डर जाए तूफानो से....यह

जनून है एेसी दासताॅॅॅ का....जो रूह की बुुलनदियो तक पहुॅच जाए गा......
पयार मे तेरे ताजमहल तो नही बना पाए....पर अपने पयार को इतना बेशकीमती

जरूर बना जाए गे......कल अगर इस दुनियाॅ मे ना भी रहेे....तो हमारे पयार को याद

करो गेे इतना कि उस पयार मे बहने वाले आॅसूओ से कितने ही ताजमहल कुरबान हो

जाए गे....

Tuesday, 9 September 2014

रात का हर पहर खामोश नही होता..कभी दरद तो कभी आॅसू का फरमान लाता हैै...

कभी चूडियो की झनकार इस खामोशी को तोड जाती है...तो कभी हॅसी की आवाज

पहर को खूबसूरत बना जाती है...जिनदगी हर पहर की पहचान है....कभी आॅसू तो

कभी हॅसी...यही जिनदगी की दासतान है........
जाती हुई बहारो को कभी रोका नही हम ने..तेरे जाते हुए कदमो को भी रोका नही हम

ने...जानते है हम....हमारे पयार की ताकत तुमहे हम तक फिर ले आए गी....और तुम

जब लौट आओ गेे...तो यह बहारे भी तुमहारे साथ ही लौट आए गी.....

Sunday, 7 September 2014

उसूलो सेे जोडी है जिनदगी..मलाल इस का नही है...इन उसूलो को कोई समझ नही

पाया,दरद तो इस बात का है....हम उसूलो को तोड नही पाए....इसलिए इस दुनिया मे

जी नही पाए....पर इस दुनिया से दूर हो गए इतना..जो भी ठूूठे गा ना जान पाए गा कि

हम वीरानो मे खो गए कितना.....

Saturday, 6 September 2014

तेरा मेरा पयार कोई कहानी तो नही..सदियो का नाता है...हर उलझे सवाल के साथ

कभी ना टूटने वाला एक जवाब भी है...वादियो मे बिखरे है हमारे पयार के अफसाने

जिसे ना दुनियाॅॅ समझी ना यह जमाने वाले...
हर रात से पहले खवाब बस तेरा ही है..पलके जो भीगी उन मे पानी भी तेरी यादो का

है....हर करवट पे तेरी पनाहो का एहसास होता है...तू साथ है मेरे..मेरी जिनदगी को

एहसास होता है....सुबह भी आए गी...तेरी शोख नजऱो की तरह...हम फिऱ से जी उठे

गे तेरी मुहबबत मे एक खुशबू की तरह......
छलक गए आॅसू इन नैनो से,जब भी याद तुम को किया..टुकडो मे बॅट गई जिनदगी..

जब जीने और मरने का फैसला किया...दिल कहता है तुुम पास हो मेरे...और दिमाग

बस तेरे खवाबो मे डूब कर रह गया है....लोग कहते है यह पयार नही..जनून है मेरा..

पर कया यह जनून पयार नही होता ..............
लिखना छोडा हैै पर सोचना नही छोडा..चल रहे है तेरी यादो के साथ,तुझे भूलना नही

छोडा...बरसो पहले साथ छूटा था तेरा....पर साथ तेरे चलना आज भी नही छोडा....

लोग कहते है हम आज भी दीवाने है तेरे नाम के....पर लोगो के तानो से तेरा नाम

लेना नही छोडा