Sunday, 27 July 2014

पैसा है,रूतबा है..तो यह दुनिया सलाम करती है..उन की खाामियो को नजरअनदाज

करती है..कितने इनसान है इस धरती पे,जो पैसो मे बिक जाते है..जान कर बुराई को

हवा देते है..हाॅॅ..पर अभी भी कुछ लोग ऐसे मिल जाए गे,जो उसूलो से जुुडे हैै,और

ईमान के रिशते से बधे पैैसो से ना खरीदे जाए गे.दोसतो जाने का रासता एक ही है,

देर सवेर सब वही चले जाए गे,रूतबा पैसा यही छोड जाए गे.....

Thursday, 24 July 2014

फिर आई है एक नई सुबह..यह बताने के लिए..

पूरा आसमाॅ अपना हैै..पॅख अपने फैलाने के लिए..

धूप भी आ जाए गी..यह समझाने केेे लिेए..

डरना नही अधॅेेऱो से,मै रोज आऊ गी..उजाला देने के लिए..

           

Wednesday, 23 July 2014

चनद सिकको के लिए कभी,ईमान नही बेचा हम ने..

भूखे भी सोते रहेे पर,किसी की भरी थाली पे नजऱ नही डाली हम ने...

भरोसा था अपनी इबादत पे,और आज भी हैै..

सहारे नही माॅगे थे कभी,ना माॅगे गे..एक थोडा सा साथ चलने के लिए..

अपनी ऱाहो पे अपने खुदा को,साथ ले कर दूर निकल जाए गेे....

Tuesday, 22 July 2014

बिखरे है,पर पूरी तरह टूटे तो नही..हारे है पर वजूद अपने को तोडा तो नही..

लौटे गे जरूर अपनी उन राहो पे,देखतेेे रहे सपना जिस का कई सालो से..

जब सलाम करे गी यही दुनिया,जिस ने गिराया था हमे कई सालो से...
एक कोशिश कर रहै है,जिनदगी को फिर सेे जीने की..

जो दरद मिले उन को भूूल कर,खुद मे खुद को समाने की..

यकीन खुद पे है इतना,कि निकल जाए गेेे उन झमेलो से...

पर यह नही भूल पाए गेेे,कि गुनाहगार बना दिया खुद अपनो ने..

Sunday, 20 July 2014

जीने के लिए कया दौलत काफी है ..जीने के लिए कया शोहरत काफी है..

सवााल ही सवाल उठतेे है,इस जीवन को जीने के लिए...

पर कभी कोई जाना कि जीने के लिए...ईमान भरी सचची मुहबबत ही...

   काफी है......
खामोशी वो जुबान है..वो ताकत हैैै..वो अनकहा जजबा है...

जो वकत आने पर,उन सब को एहसास दिलाता है...

कि जिस खामोशी को वो हमारी कमजोऱी मानते रहे...

असल मे वो ही हमारी ताकत और मुहबबत है...

Wednesday, 16 July 2014

सब कुछ खोने केे बाद,जो किसमत देती है....

वो जीवन का वो वकत होता हैै..

जब हम सिरफ खुद पर य़कीन करते है..

और खुद को खुद के लिए चुन लेते है....

Tuesday, 15 July 2014

जिदॅगी सब को सब कुछ नही देती...

पर जो भी देती है,उसी मे जीना ही.....

खुद एक जिदॅॅगी हैै.......
kabhi din,kabhi raat...zindagi chalti rahti hai...

kabhi aasu,kabhi khushiya...zindagi phir bhi chalti hai..

khuda tab bhi sath tha mere...khuda aaj bhi sath hai mere.....

har saans ke sath aaj bhi kahte hai......

  SUKHRIYA MERE KHUDA