Wednesday, 31 December 2014

वो ही दिन वही सुबह..मौसम का मिजाज भी कुछ वैसा ही है...वो दिन भी तुमहारा था..

यह आज भी तुमहारा है..आते रहे गे साल दर साल...रिशतो का नाम वही होगा...ना

बदले है ना बदले गे कभी..यादो को फिर ताजा करे गे..हमेेशा यह आते जाते साल...
कभी खोया कभी पाया..कभी यादो को झुठलाया...शिददत से जिसे चाहा,उसे पाया तो

दिल बोला..मुहबबत एक नियामत है...जब उसे खोया तो दिल बोला...मुहबबत सिरफ

बगावत है..ना पाना है ना खोना हैै,मुहबबत मे जो मिट जाए..खुदा के आदाब मे इबादत

का खजाना है...

Monday, 29 December 2014

हजाऱो परिनदे उडा दिए हम ने,पर तेरी यादो को ना उडा पाए हम..हजारो शहरो मे घूमे

पर इक तेरे ही शहर मे बस नही पाए हम..गली गली ढूॅडा तुझे,पर तेरा ही ठिकाना नही

ढूॅड पाए हम..यह दुनियाॅ बहुत बडी है लेकिन....तेरे कदमो के वो निशाॅ ही ढूॅड नही पाए

हम....
वो एहसास ही था तेरे पयार का,जो हमे जीवन दे गया... वो विशवास था तेरे जनून का,

जो हमे कायल कर गया...थके कदमो से जब भी य़ह सफर तय करते है,तेरे कदमो की

आहट तेरे होने का एहसास देेती है..तू शामिल है मेरी हर साॅस मे, यह मेरी धडकन हर

बार तुझे यही पैगाम देती है...

Friday, 26 December 2014

मुददत बाद उस का मिलना,हमे दीवाना कर गया..वो हलकी सी खलिश तेरे पयार की,

वो मुहबबत का जनून मेरे हिसाब का..कया कहे..सब बेजुबान कर गया..कहने को बहुत

कुछ था,पर निगाहे-इशक ने सब कमाल कर दिया...वो पहलू मे बैठे थे हमारे,पर हम....

खुद के सितम से जखमे-बेहाल हो गए....

Thursday, 25 December 2014

जिनदगी मुसकुरा रही थी हम पे..और हम..हम उन की अदाओ पे कुरबान हो रहे थे..

खुली अधखुली आॅखो से उन को निहार रहे थे..पयार का यह जजबा पाया था हम ने

बरसो बाद..बहुत मुशकिल से नसीब हमारे दऱवाजे पे दसतक दे रहा था..इबादत मे जब

सजदे किए हम ने,तो मुहबबत मुसकुराई और दामन मे हजारो फूल बिखर गए....

Wednesday, 24 December 2014

MERRY CHRISTMAS.....WITH BES WISHES....
गुजर रहे थे फूलो के बगीचे से..खुशबू ने तुमहारी यादो को दोहरा दिया...काॅटा जो चुभा

हाथो मे,तेरी बेवफाई ने रूला दिया...फूूलो और काॅटो के इस एहसास ने जीने का मकसद

समझा दिया..आॅसूओ के इस सैलाब ने,जितना तोडा हमे...उतना ही मजबूत बना दिया.

Tuesday, 23 December 2014

वो थामे थे अपने हाथो मे दौलत के अमबार..लुटाना चाहते थे हम पे ऐशो आराम के

अधिकार..हम हॅस दिए उन पे,कया करे पा कर हम यह अधिकाऱ..जो चाहा हम ने   वो

ही दे ना सके तुम..इक पयार का लमहा,जिस को पाने के लिए सह गए हम कितने ही

सितम..तुम कमाते रहे दौलत..और हम अपनी हसरतो को गिनते ही रहे.........

Friday, 19 December 2014

तू मुझे भूल जाए,कोई गम नही..तू मेरा दामन छोड दे,तो भी कोई शिकवा  नही....बस

डरते है उस तनहाई से,जो तेरे बिना हमे डस जाए गी..डरते है उन तमाम यादो से,जो

तेरे बिना इन जखमो को नासूर बना जाए गी....तडप तडप कर भी इन साॅसो से आजाद

नही हो पाए गे,रूखसत तो दुनियाॅ से तभी हो पाए गे..जब तेरी बाहो मे आखिरी साॅस ले

पाए गेे....

Thursday, 18 December 2014

तू मेरे साथ है...या मेरे पास है...फरक जयादा नही...मेरी रूह मे समाया हुआ मेरा ही

वजूद है...तू जहाॅ भी रहे,मेरी दुआओ मे शामिल है...कतऱा कतऱा बहते इन आॅसूओ की

जुबान मे शामिल है....मिल नही पाए गर इस जीवन मे,फिर भी हर चलती साॅस मे तू

शामिल है....

Friday, 12 December 2014

तुझे देखा नही कभी पर खवाबो मे पाया है..तुझ से मिले नही कभी,पर इन नजाऱो मे

पाया है..इबादत जब भी की है खुदा की हम ने,उन के चरणो मे झुक जाने के बाद,तुझे

ही नवाजा है..यह मुहबबत है मेरी तेरे लिए या फिर सदियो का नाता है,नही जानते..

पर अभी तक जिसे भी देखा है,तेरा अकस कही नजर नही आया है...

Thursday, 11 December 2014

तमनना जिस की,की थी बहुत शिददत से..उसी को आज अपनी मरजी से खो दिया

हम ने..खुशियाॅ दसतक दे रही थी दर पे हमारे,पर हम ने खुद ही वो दरवाजा बनद कर

दिया..बरस रहे है आॅसू आज झरने की तरह,याद आ रही है उस की खवाबो की तरह..

समझ नही पा रहे,कयूॅ किया हम ने ऐसा..शायद इसी मे उस का भला था,यही सोच कर

हम ने अपनी खुशियो को कुरबान कर दिया..

Tuesday, 9 December 2014

बहुत उदास.बहुत ही तनहाॅ है हम...जिनदगी को जीने के लिए जऱा तैयार नही है हम..

जब सोचते है कि तेरे बगैर तो अभी और जीना है,बरसो जीना है...तो आॅसूओ से यह

दामन भीग जाता है..खौफ मे जीते है कि यह सफऱ तेरे बिना कटे गा कैसे...अकसर

अकेले मे खुदा से दुआ करते है,कि तुझ से मिलाने के लिए हमारी साॅसे बहुत कम कर

दे..
जब जब भी तेरी राहो से गुजरे है हम,तब तब तमाम यादो के तूफाॅ से गुजरे है हम..

कोशिश ही नही की तुझे भूल जाने की,कोशिश ही नही की तेरी यादो सेे बाहर जानेे की..

जानते है हम और जानते हो तुम,इस दुनियाॅ से परे एक दुनियाॅ और भी है...जिसे कहते

है जननत,जो पयार यहाॅ नही मिलते..अकसर जननत की वादियो मे मिलते है..

जुसतजू जिस की थी,उसे ही पा ना सके हम..बरसो से बस उसी की य़ादो मे जी रहे है

हम..ऐसा नही कि जिनदगी की इन राहो मे,कोई नही मिला हमे..पर आप जैसा कोई

और दिखा ही नही हमे..जीने को तो यह जीवन जी रहे है हम,पर जीने की कोई वजह

खुद को ही बता नही पा रहे है हम..

Monday, 8 December 2014

आज फिर जिनदगी ने हमे उदास कर दिया,पुरानी यादो ने हमारे जखमो को फिर से

ताजा कर दिया..भटक रहे है दर ब दर उस पयार को पाने के लिए,जिस पयार ने हमे

इस दुनियाॅ से ही बेगाना कर दिया..

Tuesday, 2 December 2014

सपनो की दुनियाॅ मे जाने से पहले,हम हकीकत से मिलने चले आए..उस खूबसूरत सी

जननत मे जाने से पहले,हम अपने गरीबखाने चले आए..सुना था जननत मे बेपनाह

खूबसूरत नजारे होते है,लौटे जो अपने आॅगन मे तो मासूम हॅसी के फववाऱे देखे.....

जननत को तो भूल गए,बस मासूम हॅसी मे अपना जीवन सवाॅरने चले आए....

Saturday, 29 November 2014

जहाॅ धोखा मिला अपनो से,फरेब दिखा लाखो मे..ना सोचा ना जाना,बस खुदा का

दामन थाम लिया..दौलत के तराजू मे,रूतबे के हिसाबो मे,जब तोले जाते है रिशते..तो

अकसर इनसानो का चेहऱा देखना भूल जाते है लोग..यह दुनियाॅ है उन इनसानो की..

जहाॅ कागज के टुकडो मे बिक जाते है लोग..खुदा से बाते करते है तो कहते है..तेरी

दुनियाॅ मे इनसाॅ तो बहुत है..पर तेरी सचचाई कितनो मे है..............
जिनदगी गुजरती रही और हम इनतजाऱ करते रहे..वकत चलता रहा और हम उस के

आने की घडियाॅ गिनते रहे..कया वजूद है मेरा उस के बिना,इसी कशमकश मे जवानी

अपनी बरबाद करते रहे..आज मोड पे है जीवन के उस पहलू मे,जहाॅ इनतजार आज भी

है....पर अब उस का नही..साॅसे खतम कब होगी..यह सवाल खुद से करते है...

Thursday, 27 November 2014

 दौलत रूतबा जेवरात,इन से सजाई थी तुम ने दुनियाॅ मेरी..जहाॅ जहाॅ कदम रखे मैने

वहा वहा फूलो की बारिश कर दी तुम ने..वो सपना था या हकीकत गहरी,यह तो मै जान

नही पाई...पर जान लिया इतना कि कही मुहबबत नही मिली मुझ को तुम से..आज

दौलत के उस महल मे रहती हूॅ,जहाॅ हर पल निगाहे बस तुमही को ढूढती है..

Tuesday, 25 November 2014

आप दासताॅ सुना रहे थे हमे अपनी,और हम भरी निगाहो से आप को निहारते रहे..

अशक निकले जब छोड कर दामन इन आॅखो का,तो आप की दुआओ ने उनहे थाम

लिया..कसूर आप की दासताॅ का था या फिर हमारे अशको का,नही जानते..बस जानते

है इतना कि आप मुहबबत का वो मकाम है,जहाॅ आने के लिए सजदे किए है हम ने

सदियो से...

Monday, 24 November 2014

वो शाम थी एक पयारी सी,जो दिल को छू गई वो मुुहबबत थी या खुमाऱी थी..हम ने

अकसऱ लोगो को मुहबबत मे बरबाद होते देखा  है,कभी खुद को तो कभी दूजे को खफा

होते देखा है..मुहबबत इक नाम नही हासिल कर पाने का,यह तो जनून है अपने पयार

के लिए..खुदा से दुआए करने का..वो खुश रहे अपने जहान मे,ऐसा फऱमान खुदा के

सामने पडते देखा है...

Saturday, 22 November 2014

पायल बज उठी तेरे आने से,चूडियाॅ खनक गई तेरे पास आने से..खुशबू बिखर रही है,

फिजाओ मे..चहचहाने लगे परिनदे इन खामोश हवाओ मे..यह गुलिसता है तेरे पयार

का,मेरी नजरे जब मिली तेरी नजऱो से...इबादत मे झुक गए हम,तुझे पाने के खयाल

से....ओ
हम ने तुमहे,ना किसी रिशते से बाॅधा ना किसी वादे से..तुम जिओ अपनी मरजी से,बस

आजाद कर दिया सारे नातो से..पयार किसी बधॅन का मोहताज नही,जबरदसती साथ

जीने का नाम भी नही..कयो रहो तनहाॅ तुम,यह जिनदगी यह साॅसे तो कब से तुमहारे

नाम कर चुके..जानते है इतना,गर ताकत होगी हमारी पाक मुहबबत मे..तो हमारी

साॅसे टूटने से पहले तुम हमारे पास लौट आओ गे...

Thursday, 20 November 2014

तुम पयार कर ना सके,हम पयार पा ना सके..वादो की दुनियाॅ बसाते रहे,पर वादा एक

भी निभा ना सके..मिसाल देते रहे मुकममल मुहबबत की,पर मुहबबत कभी कर ना

सके..टूट टूट कर इतना टूटे कि जिनदगी को जीना भूल गए..यादे है इतनी,कि उनहे

साथ रखने के लिए..इन साॅसो को चलाना ही भूल गए..

Tuesday, 18 November 2014

तूफाॅ बता कर नही आते,उन की तबाही ही आने को बयाॅ करती है..बिखर जाते है कितने

 आरमाॅ,बिखरने के बाद ही जुबाॅ दे पाते है..तनहाॅ हो जाती है जिनदगीयाॅ कितनी,यह

तो जीने वाले ही जान पाते है..तडपते रहते है इनसाॅ कितने,यह जो तडप रहे है वो ही

जान पाते है...
वकत गुजरता रहा और यह जिनदगी चलती रही...कभी खामोश रही तो कभी पयार

को तरसती रही..कभी वादे मिले तो कभी धोखे..कही मिला आसमाॅ की बुलनदियो को

छूने का खवाब..तो कही दौलत की चकाचौध मे बसाने का वो ऱाज...आज जी रहे है तो

बस अपनी ताकत मे..जहाॅ खुदा दे रहा है आवाज..हमे इन सब से दूर..सिरफ उस की ही

पनाहो मे...

Friday, 14 November 2014

जिनदगी ने हॅस कर पूछा मुझ से....कया खफा हो मुझ से..कभी कुछ कहा नही मुझ

से..कुछ शिकायत है मुझ से...........मुसकुराए हम,सोचा कि कया बोले.....बस धीमे

सेे कहा........तुझ से नाराज नही जिनदगी....बहुत खुश हूॅ...तुम ने जो दिया,जितना

दिया.....उसी को पा कर बहुत सनतुषट हूॅ......
खामोशी ने दासताॅ मेरी बयाॅ कर दी,कभी खुशी तो कभी गम,यह इनतहाॅ भी बयाॅ कर

दी...छिपाए जजबात कई सालो से,वकत मिला तो हौले से मुहबबत हमारेे नाम कर दी..

अकसर दरद छिप जाते है खामोशी मे,वकत गर अलफाज दे जाए इस को...मुहबबत

बयाॅ कर जाती है इनतहाॅ अपनी...

Thursday, 13 November 2014

हवाओ ने खबर दी है तेरे आने की..फिजाओ मे महक है तेरे आने की...फूलो ने खुशबू

बिखेरी हैै आसमाॅ तक,कलियाॅ इनतजार मे है तुझे पाने की.....पर मेरी रूह ने कब से

पहचान ली है आहट तेरे आने की...तुझे मिलने के लिए ना जरूरत है मुझे,सजने की

सॅवरने की...सदियो का रिशता है,तू जानता है कीमत इसे निभाने की....

Wednesday, 12 November 2014

सुनदर सपनो का सॅसार सब की राहो मे हो,कुछ माॅॅगने से पहले..मननत बाहो मे हो...

रूखसत सभी हो जाए गे इस दुनियाॅ से बारी बारी,ना रहे गे रिशते उन से,जिन पे आज

है वारी वारी...जिनदगी बहुत कुछ देती है,पर बहुत कुछ छीन भी लेती है...तकदीरो के

फैसले आप सब के हक मे हो,यह दुआ दोसती के चलते आप सभी को हो...शुभ रात्री.....
जुबाॅ खामोश थी,पर इन नैनो ने सब कह दिया..तुम जो मुसकुराए,पलकेे भीगी और

यह नैना बह गए...फिर उठे कई हाथ दुआऔ के लिए,मननते हुई पूरी और जीवन सॅवर

गया...जीवन की राहो मे आते रहे कितने मकाम...जुबाॅ तब भी खामोश थी...पर नैनो

ने दामन नही छोडा...हमेशा मुसकुराते रहे.....

Monday, 10 November 2014

कोई गरीब भूखा इनसान जब हमारे सामने हाथ फैलाताा है,तो मन दरद से भर जाता

है..पर जब हम उस को भर पेट खाना खिलाते है,उस केे बाद जो चमक उस की आॅॅखो मे

होती है...बस उसी मे हमे रब..खुदा..भगवान् सब दिख जाते है...बस एक कदम इनही

रब के बनदो की और बडा दीजिए.....एक खुशनुमा सुबह आप सब के लिए.....

Saturday, 8 November 2014

हाथ जुड गए मेरे,इबादत मे ऐ मेरे खुदा...जो दिया है तुम ने,वो मेरी उममीद से कही

जयादा है मेरे खुदा....हसरतो का तो कोई अनत नही होता,आज गाडी है तो कल बॅगले

का खवाब होगा..तेरे सजदे मे यह सर झुक गाया मेरे खुदा.....अब यह जान भी तू माॅग

ले..ना करू गा इनकार ऐ मेरे खुदा....

Thursday, 6 November 2014

आसमाॅ से तारे तोड लाए गे,तेरे कदमो मे सारे जहाॅ की खुशियाॅ बिछा दे गे...हम हॅस

दिए थे तब तेरी आसमानी रूमानी बातो पे,ना कोई लाया आज तक सितारे आसमानो

से,ना खुशियो का भरपूर खजाना जुटा पाया...रिशतो की यह दुनियाॅ हकीकत से चलती

है,दौलत से नही-सोने चाॅदी के सिकको से भी नही...दिलो के तार मिलनेे से चलती है....

Wednesday, 5 November 2014

हर सुबह हमेशा खुुशी का पैगाम ही ले कर आए..ऐसा होता तो नही..पर हर सुबह उदासी

लाए,ऐसा भी होता नही...खुशी हो या गम,यह दोनो तो जिनदगी के पहलू है..खुशी मिले

तो आसमाॅ मे उडना नही,गम आए तो रो कर थकना नही..कयो कि जिनदगी सिरफ

जीने का जिनदा दिल नाम है...नई सुबह की नई किरण आप सब के लिए शुभ हो...

Tuesday, 4 November 2014

तुझे खोने के बरसो बाद,यह जाना कि आज हम इस जिनदगी से ही बेगाने हो गए है...

हर धरम निभाने के बाद,यह जाना कि इसी जिनदगी से ही दूर हो गए है...वो तेरे दूर

जाने का गम,तेरे करीब होने का एहसास दिलाता है...मिले गे जननत मे,उस बात को

याद कर के तुझ से मुलाकात होने का एहसास दिलाता है..इस से परे इक दुनियाॅ और

भी है,यह सोच कर यह मन गुनगुनाने लगता है.....

Sunday, 2 November 2014

तनहाॅॅ होते है जब भी,यह सोचते है अकसर...कितने ही इलजामो से घिरा है जीवन

अपना...ना बना पाए किसी को अपना,ना किसी के जीवन मे उतर पाए बन के अपना...

गुलामी करते या खुद का वजूद ही मिटा देते,तो सुनहरा जीवन जीते..पर उसूलो को ना

तोड पाए ना वजूद अपना मिटा पाए..हाॅ खुद को तनहाई से दूर रखते है..अपने आप मे

जी कर खुशी और सकून के पल जीते है...

Tuesday, 28 October 2014

चलना फिर रूकना,रूक कर फिर चल देना..बरसो से यही तो करते आए है...किसी के

लिए जीना, किसी के लिए मरते रहना..सदियो से करते आए है..चुपके चुपके रोना,पर

जमाने के लिए बिॅदास जीना..यह तमाशा तो हमेशा से करते आए है..पयार किसी से

कभी ना ले पाए,फिऱ भी सब के चहेते होने का नाटक..सदियो से करते आए है.जिनदगी

से पयार कभी था ही नही,फिर भी जिनदगी को जीते आए है.....

Monday, 27 October 2014

कुछ यादे कुछ वादे,और गुजरती रही जिनदगी...थोडी खुशी थोडा गम,देती रही यह

जिनदगी..जब भी सकून माॅगा हम ने,लापरवाह हो गई यही जिनदगी..अललाह से

चाहा मौत दे दो हमे,तो भी आडे आ गई यही जिनदगी.....

Sunday, 26 October 2014

खनक चूडियो की अकसर रूला जाती है हमे,पायल की रूनझून उदास कर जाती है हमे..

जब भी देखते है आसमाॅ मे उडते हुए परिनदो को,अपनी बेबसी पे रो देते है हम...

खुली हवाओ मे जीने को तरस गए है हम,बात बात मे खुल कर हॅसना भूल गए है हम..

यू तो दुनियाॅ सलाम बजाती है हमे,पर इसी दुनियाॅ से दूर हो गए है हम....



पीछे मुड कर देखा तो गहरा अॅधेरा था,दिल को चीरती हुई खामोशी थी...जानते थे फिर

जो देखा मुड कर पीछे,तो मर जाए गे...बडा रहे है कदम उस रौशनी की तरफ,जो रासता

दिखा रही है उजाले की तरफ...यह मॅजर तो होगा उस सिॅहासन का,जहाॅ पहुच कर
नजारा होगा जननत का...


Friday, 24 October 2014

जहाॅ जहाॅ कदम पडे तेरे,वो ही रासता चुन लिया हम ने..मुहबबत की मनिजल वही

होगी,जहाॅ इबादत के लिए तुमहे चुन लिया हम ने...खामोशियाॅ बहुत कुछ कह जाती

है मुहबबत मे,समझने के लिए जमीर को खुदा का फरमान चुन लिया हम ने...फूलो ने

फिजाओ ने फैसला जो बताया,तो तुमही को मुुकददर मान लिया हम ने.....

Thursday, 23 October 2014

जजबातो की आॅधियाॅ जो चली,मुहबबत की बेपरवाह निगाहो की तरह..तूफान  किनारा

कर गए किशतियो की तेज रफतार से...अकसर जजबात बिखर जाते है,मुहबबत की

लापरवाहियो से..कौन कहता है पयार मे कशिश नही होती..टुकडो मे बॅटी जिनदगी

पयार उडा ले जाती है...
जलते है दिए इस उममीद मे,कि रौशन जहाॅ को कर जाए गे....रात गुजर जाती है और

ना जाने कितने पहर....जलाते है खुद को आखिरी कतऱे तक,पर भूल जाते है सब कि

कितना जलाया होगा उस ने,दूसरो को उजाला देने के लिए...यही दुनियाॅ का दसतूर है,

मिटने वाले मिट जाते है,दूसरो को खुशी देने के लिए...और यह दुनियाॅ उस के दरद को

ना जान पाती है...
कुछ नही कहा मैने,फिर भी तुम ने सुन लिया..यह ऱाज मेरे दिल का,कयूॅ रूह तेरी ने

सुन लिया....आॅखे जो मेरी डबडबा गई,हथेलियो ने तेऱी कयूॅ उनहे समेट लिया...सच

कहते हो तुम,जमीर से जो निकले गी दुआ...इबादत मे खुदा ने उसे सुन लिया...
आप कहते रहे और हम सुनते रहे,मशवरो का दौर चलता रहा...फूलो की खुशबू से बाग

महकता रहा,पर काॅटो ने दामन तार तार कर दिया...वजूद अपना बना रहे थे हम,किसी

शखसियत की राहो को अमलदराज कर रहे थे हम..काॅच के टुकडो पे चल रहे थे हम,

लहू बहा तो लगा..आज भी परवरदिगार की पनाहो मे बस रहे है हम...

Saturday, 18 October 2014

दुनियाॅ दीये जलाए गी,फूल मालाएॅॅ भी चढाए गी,देर रात तक पटाखो की गूॅज सेे पूरे

जमाने को जगाए गी..खुदा से पूछते हैै हम, कया सच मे इन रसमो से खुश होते हैैै आप.

रात भर जितने दीये आप की इबादत मे जलते है,पर एक तरफ जब कितनी झोपडियो

मे घोर अनधेरा होता है.कितने मासूम पटाखो की गूॅज को तरसते है.पूजा की करोडो ही

थालियाॅ परसाद से भरी आप को भेॅट की जाती है.पर हजारो गरीबो की भूख तरसती है

खाने को..कया तब भी खुश होते है आप..................

Friday, 17 October 2014

नही जानते कि तनहाई कया पैगाम ले कर आए गी..हमारे सारे खवाबो को तोड जाए

गी या खुुशियो का नया पैगाम लाए गी..कल सुबह फिर होगी..फिर किरणे तेज उजाला

लाए गी..उनही उजालो केे साथ यह तनहाई भी साथ आए गी...कदम अपने बडा रहे है

मनिजल की तरफ..यकीॅ है खुद पे कि तनहाई हम से हार जाए गी..और यह जिनदगी

उजालो से भर जाए गी......

Thursday, 16 October 2014

तुझ से मिलते है जब भी,तेरी उस नजऱ को सलाम करते है..जिस ने हमे आम से खास

बनाया हैै..हमारी कमियो को भी हमारी ताकत बनाया है...जब जब ठोकर खाई है हम ने

तेरी पनाहो ने हमे सॅभाला है...कया याद रखे,कया भूल जाए..यह तूने ही समझााया है

रिशतो के नाम नही होते..जो तुम ने दिया वो सात जनमो का साथ भी नही देता.इबादत

करे तेरी या खुुदा से माॅग ले तुझ को,फैसले के लिए भी याद किया है तुझ को....

Wednesday, 15 October 2014

यूू तो यह जिनदगी कभी भी भायी नही हमे..जिस जिस को चाहा,मन से पयार किया,

वो ही दगा दे गया हमे...बेइनतहाॅ पयार करने की कीमत कया होती है,इस जहान मे

ना जान सका कोई..बहुत तडपे,बहुत रोेए...खुद को तबाह करते रहे...जब खुद को खुद

के जमीर से मिलवाया,तो यह सोच कर हॅस पडे कि जिस से पयार सब से जयादा करना

था,उस को कयू भूल गए.बस अब खुद से पयार करते है बेइनतहाॅॅ..बेइनतहाॅ..बेइनतहाॅ.

Tuesday, 14 October 2014

दरद जब हद से गुजरने लगता है,तो यह जमाना खूबसूरत लगने लगता है..गमो के

बीच रिशते जब बिखरने लगते है,तो एहसास टूटने लगते है...हर मनिजल बेहद पास

आ कर,बहुत दूर चली जाती है...फिर कोई मुहबबत नाकाम हो जाती है..आॅसू जब

बह बह कर सूख जाते है..फिर कोई दुआ पूरी होने से पहले ही अधूरी रह जाती है..बहुत

कुछ बदल जाता है...पूरा दरद खुद मे समेटे...तब यह जमाना खूबसूरत लगता है.........

Monday, 6 October 2014

मुददत हो गई तुम से जुदा हुए,पल फिर दिन,फिर महीने और अब बरसो बीत चुके है...

पर उस मुहबबत को,उस चाहत को आज भी भूल नही पाए है...बातो की वो खनक....

जजबातो की वो महक..दिल मे बसी है आज तक...तेरी यादो की कसक..आज भी इस

दुनियाॅ मे रह कर,हर रिशते से दूर है....कौन समझे गा,तेरे बिना यह जीवन कया है...

Friday, 3 October 2014

तबियत नासाज थी,वो दूर थे मुझ सेे...खवाबो मे देख रहे थे उन को,पर रूबरू नही थे वो

मुहबबत मे यह दूरी सह नही पाए हम,पुकारा जो शिददत् से उनहेे करीब बुला लिया

उनहे..कौन कहता है पयार मे दूरियाॅ होती है,गर होती तो यह शिददत काम नही आती..

Thursday, 2 October 2014

बदल रही है जिॅदगी एक नई सुबह की तरह,जो वकत गुजर गया उस को भुला कर एक

नई राह की तरह.. वो भी एक शाम थी..यह भी एक शाम है...पर सूरज जो आज ठल

रहा है,एक नए पैगाम की तरह..वजूद मेरा जो आज है,वो सिरफ मेरा हैै..तेरी मेरी

पाबनदियो का गुलाम तो नही....
फूूलो से महकना सीखा था..कलियो से सवॅरना..बीच बगीचे मे रहे,तो जीना सीखा..

राह मे काॅटे भी मिले..चुभन देने के लिए..पर खुशबू से महक रहा था तन मन इतना

कि सारे काॅटो को समझ कर नजराना अपना,मनिजल तक पहुच गए ले कर साहिल

अपना..
शायरी ...कहानियाॅ लिखना मेरे जीवन का एक उददेेशय.....चाहती हू मेरी यह हाॅबी,

मेरी जीविका का एक माधयम भी बन जाए....कया कोई सॅसथा या कोई इनसान है,

तो मुझे मेल से,या मेरे बलाॅग पर,या फेसबुक पर सूचित करे...अपनी पूरी जानकारी के

साथ.....धनयावाद....ममता वधावन
कुछ पाया कुछ खो दिया...पर यादो को साथ ले लिया...मुहबबत कहती है मै नूर हूॅ तेरी

जिनदगी का...तू उदास मत होना मै सकून हूॅ तेऱी उन यादो का...जो महका रही है तेरा

आॅगन...कही चोट खाई तो कया हुआ...वकत अभी और बाकी है...जिनदगी जीने के

लिए साॅसे भी अभी बाकी है...
 हसरतो का तो कोई अनत नही होता...बेपरवाह सी चली आती है...जीवन का सकून

तबाह कर जाती है...वो मोड ही कया जहाॅ सकून ना हो....चलते चलते यह खयाल आया

जिनदगी तू खूबसूरत तो बहुत है,,हाॅ तेरे साथ चलने के लिए...सीने मे खलिश हो...

मुहबबत का वो जजबा हो..मरनेे का हौसला हो....जीनेे की तमनना हो.......

Tuesday, 30 September 2014

आज तो है,पर नही होगेे कल....दुनियाॅ तब करे गी याद आॅसू के मोतियो के साथ.....

लमहे जो आज है,वो कल नही होगेेे....फुरसत जो आज है वो कल नही होगी...

रफता रफता साॅसे थम जाए गी....यह रूह जो आज मेरी है,कल किसी और के जिसम

मे समा जाए गी.....यह सूरत जो पहचान है हमारी,एक दिन ऱाख के ठेर मे बदल जाए

गी....

Sunday, 28 September 2014

तुझे ला कर इस दुनियाॅ मे...मैने तुझे जीने का अधिकार दिया..पयार दुलार की दौलत

से तुुझेे मालामाल किया...तेरे जीवन का हर फैसला तुझी को चुनने का अधिकार दिया..

तुझे हर मौके पे सममान दिया...पर तू अपनी मनमानी हर जगह ना करे...डाॅट-फटकार

केे इस अधिकार को मैने इसतेमाल किया....मै ना रहू जब दुनियाॅ मे,तो मेरे उसूलो पे

अमल करना..मेरे दुलार को याद रखना,पर मेरी फटकार को ना भूूलना...

Saturday, 27 September 2014

जिनदगी ने हर मोड पे,हर मोड पे....इतना सताया है,इतना रूलाया है....कया कहे इस

जमाने को...इस जमाने ने ही हमे हर मोड का गुनाहगार बताया हैै....आज सब को

निकाल चुके है अपने जेहन से,अपनी यादो से....ना पयार का वो जनून है,ना किसी की

बातो पे यकीॅॅ....बस कागज के पननो पे लिखते जा रहे है दासताॅ अपनी.....जिस जिस

ने कहाॅॅ कितनी ठेस दी...इनही पननो को गवाह बना रहे है जाते जाते......

Friday, 26 September 2014

दरद अपनेेे मेे जीना...आसाॅ तो नही..दरद से खुद को आजाद करना.......एक चुनौती

है खुुुद के लिए....यहाॅ दरद देेनेे वाले तो बहुत मिल जाए गे...पर इस दरद के जखम

बस कुछ विरले ही भर पाए गे....

Wednesday, 24 September 2014

पयार का मतलब कुछ नही इस दुनियाॅ मे.....लोग खुद को बचानेे केेे लिए दूसरो का

जीवन भी दाॅव पर लगा देेते है....पर फिर भी उसी इनसाॅ से पयार का ....बेेइनतहाॅ

मुहबबत का दावा करते है...यह दुनियॅा सच मे गोल है....आज इस ने दगा दी पर  कल

उस की बारीी भी हो सकती है.... 

Sunday, 21 September 2014

वो सुबह की हलकी धूप..माॅ की गोद मे सिर रख कर मीठे सपने देखना..याद है बाबू जी

की वो डाॅट..झट से भाई के पीछेे छिप जाना ..कोई गलती करना और माॅ की फटकार

खाने से पहले..मनुहाऱ कर के माॅ को मना लेना..ना कोई दुख ना तकलीफ का एहसास

था,आजाद परिनदो सा जीवन था.आकाश मे उडने की वो हसरत,वो खुली साॅसे..हर मोड

पे हौसलो का वो जजबा..आज फिर मन है जी ले उसी जीवन को..जहाॅ झरनो नदियो की

सी ऱौनक थी..

Saturday, 20 September 2014

कोई वादा ना कर मुझ से.....निभा ना पाए गा.....रूह अपनी मे बस मुझे बसा के रख

....इसी से मुझे सकूूून मिल जाए गा....सदियो से तुझ से एक नाता है....जनमो जनमो

तक निभा जाए गे...तुझ से जो कह दिया,वो साॅसो के मिट जाने के बाद भी निभा जाए

गे.....

Friday, 19 September 2014

इन ऱिशतो की कहानी बहुत अजीब है....जितना समभालो बिखरते है उतना....दिल से

नकारो मचलते है उतना......दिल और दिमाग की जॅग मे.... कौन जीता कौन हार जाए

गा यहाॅ.....साॅसे जब रूखसत होगी....तो रिशतो का जहाॅ उजड जाए गा यहाॅ.....

Wednesday, 17 September 2014

जिनदगी कब कहाॅॅ दसतक देती है...और किस मुकाम पर....कोई नही जानता....

पर वकत कहता है समभल जा...इमतहान तो अभी बाकी है...साॅसे कब कहाॅॅ साथ

छोड दे यह भी कोई नही जानता....परिॅदो की तरह उड जाना....वकत और जिनदगी

कया सोचे गे....यह भी कोई नही जानता..... 

Tuesday, 16 September 2014

दौलत से गर सब खरीदा जाता,तो हर बादशाह भी सकूून से जी पाता....हर दरद से

दूर होता हर दुख से निजात पा लेता....पैैसा बहुत कुछ है पर हर मोड  पे जीत नही देता

...पयार दुलार का मोल किस ने जाना,,गर जाना होता तो यह जहान बहुत खूबसूरत

बहुत अमीर होता....
बरस पेे बरस निकल गए तुझे रूखसत हुए....पर तेरी रूह ने मेरा साथ नही छोडा.....

दुनियाॅ हमे तेरा दीवाना समझती है....पर हम ने दुनियाॅ को कुछ नही माना....वो

दुनियाॅ जिस ने हजारो जिललते हमे दे डाली....पर तेरी रूह ने हमे अपनी रूह मे बदल

डाला....डरते नही किसी मुसीबत से,कि तेरे लिए अब यह रूह भी दाॅव पे है....
दोसतो.....मेरी शायरी को बेहद पसनद करने का ......तहेदिल से शुकरीया....
कभी कभी मन यह सोच कर,बेहद उदास हो जाता है....दौलत और रूतबा गर हमारे पास

होता तो इन दुनियाॅ वालो की सोच हमारे लिए कुछ और होती....हमारी गलतीयो को

हमारा रूआब माना जाता....हमारी नाऱाजगी पे भी हमे पैगाम दिए जाते....हमारी

खिदमत की जाती....हम भी अपनी जिनदगी,अपनी शऱतो पे जीते.....पर आज बेहद

शुुकरगुजाऱ हैै अपने भगवान् के,कि अगर दौलत होती,रूतबा होता तो सब के असली

चेहरे कहाॅ देख पाते....

Monday, 15 September 2014

हमारे जाने के बाद....हमे याद रखने की कोई वजह,किसी के पास नही होगी....

ना कोई रोए गा....ना पूजा के मनत्रो मे हमे याद कर पाए गा....हाॅ इनही कागज के

पननो मे,गर चाहो तो ठूूॅॅठ लेना....अपनी दासताॅ लिख जाए गे....और यही इक यादगार

बन जाए गे....

Sunday, 14 September 2014

हर आरजू पूरी हो ऐसा होता तो नही....पर हर खववाहिश का भी दम निकल जाए....

ऐसा भी होता नही.....चनद दिनो की  जिनदगी हमारी....पर यादे छोड जाए गे इतनी....

कि हर पुशत याद करे गी....कि कौन था ऐसा जिस ने बना दी जिनदगानी हमारी.........
पयार तुझे इतना किया..कोई ना कर पाए गा......वजूद अपना भी तुझ पे लुटा दिया....

जो कोई ना कर पाए गा......फिर भी जो जखम तुम नेे दिए...दिल मेरा तोड कर...

बह रहा है खून इतना.....कि यह जखम ना भर पाए गा अब उमर भर...
इतना तडपे,,इतना तडपे कि अब तडपना ही भूल गए...समझौते इतने किए..बहुत

किए...कि अब समझौता करना ही भूल गए....आॅसू इतने बहाए कि सैलाब ही सूख गए...

मौत को इतना नजदीक से देखा कि जिनदगी जीने का मकसद ही भूल गए....
हर रासता खुुद बना रहे है...किसी के सहारे के बिना....ना रजिॅश है ना पयार है...ना

वो तडपने वाली मुहबबत है...अकसर सोचते है कया मिला हमे पयार की बेपनाह दौलत

लुटा कर....ना कदर थी ना कदर होगी...हमारे जजबातो की....फिर किस लिए तडपे...

किस के लिए रोए...आॅसू बहा कर भी कया मिला....आज सकून है इस बात का कि

जिनदगी को जी रहे हैै अपनी शरतो पे....

Friday, 12 September 2014

कोई वादा नही किया तुुम सेे...फिर भी हर रसम निभा जाए गे...दुनियाॅॅ कया कहती है

हम को..हर दीवार को तोड जाए गे...वो रिशता ही कया जो डर जाए तूफानो से....यह

जनून है एेसी दासताॅॅॅ का....जो रूह की बुुलनदियो तक पहुॅच जाए गा......
पयार मे तेरे ताजमहल तो नही बना पाए....पर अपने पयार को इतना बेशकीमती

जरूर बना जाए गे......कल अगर इस दुनियाॅ मे ना भी रहेे....तो हमारे पयार को याद

करो गेे इतना कि उस पयार मे बहने वाले आॅसूओ से कितने ही ताजमहल कुरबान हो

जाए गे....

Tuesday, 9 September 2014

रात का हर पहर खामोश नही होता..कभी दरद तो कभी आॅसू का फरमान लाता हैै...

कभी चूडियो की झनकार इस खामोशी को तोड जाती है...तो कभी हॅसी की आवाज

पहर को खूबसूरत बना जाती है...जिनदगी हर पहर की पहचान है....कभी आॅसू तो

कभी हॅसी...यही जिनदगी की दासतान है........
जाती हुई बहारो को कभी रोका नही हम ने..तेरे जाते हुए कदमो को भी रोका नही हम

ने...जानते है हम....हमारे पयार की ताकत तुमहे हम तक फिर ले आए गी....और तुम

जब लौट आओ गेे...तो यह बहारे भी तुमहारे साथ ही लौट आए गी.....

Sunday, 7 September 2014

उसूलो सेे जोडी है जिनदगी..मलाल इस का नही है...इन उसूलो को कोई समझ नही

पाया,दरद तो इस बात का है....हम उसूलो को तोड नही पाए....इसलिए इस दुनिया मे

जी नही पाए....पर इस दुनिया से दूर हो गए इतना..जो भी ठूूठे गा ना जान पाए गा कि

हम वीरानो मे खो गए कितना.....

Saturday, 6 September 2014

तेरा मेरा पयार कोई कहानी तो नही..सदियो का नाता है...हर उलझे सवाल के साथ

कभी ना टूटने वाला एक जवाब भी है...वादियो मे बिखरे है हमारे पयार के अफसाने

जिसे ना दुनियाॅॅ समझी ना यह जमाने वाले...
हर रात से पहले खवाब बस तेरा ही है..पलके जो भीगी उन मे पानी भी तेरी यादो का

है....हर करवट पे तेरी पनाहो का एहसास होता है...तू साथ है मेरे..मेरी जिनदगी को

एहसास होता है....सुबह भी आए गी...तेरी शोख नजऱो की तरह...हम फिऱ से जी उठे

गे तेरी मुहबबत मे एक खुशबू की तरह......
छलक गए आॅसू इन नैनो से,जब भी याद तुम को किया..टुकडो मे बॅट गई जिनदगी..

जब जीने और मरने का फैसला किया...दिल कहता है तुुम पास हो मेरे...और दिमाग

बस तेरे खवाबो मे डूब कर रह गया है....लोग कहते है यह पयार नही..जनून है मेरा..

पर कया यह जनून पयार नही होता ..............
लिखना छोडा हैै पर सोचना नही छोडा..चल रहे है तेरी यादो के साथ,तुझे भूलना नही

छोडा...बरसो पहले साथ छूटा था तेरा....पर साथ तेरे चलना आज भी नही छोडा....

लोग कहते है हम आज भी दीवाने है तेरे नाम के....पर लोगो के तानो से तेरा नाम

लेना नही छोडा

Tuesday, 19 August 2014

दिन वही लमहा भी वही,पर वकत बदल गया हैै कितना..रिशतेे बदले हालात बदले

जिनदगी बदल गई कितनी..इसी लमहे से जुडी है यादे कितनी..हर याद के साथ

गुजर रही है जिनदगी....

Monday, 18 August 2014

वो ही धरती वो ही आसमान है..वो ही सूरज वो ही चॅदा..

ना ही राते बदली है..ना बदला है सवेरे का उजाला..

अकसर जीवन की दौड मे..बदल जाती है ऱिशतो की महक..

दौलत शोहरत के लिए..रिशते भी दाॅव पे लगा देतेे है लोग..

इनही को पाने के लिए..रिशते ही गॅवा देते है लोग....

हर खवाब हकीकत मे तबदील हो,ऐसा होता तो नही..पर हर खवाब मिटटी मे मिल

जाए,ऐसा भी होता नही..लिखा है ईमान की किताबो मे,शिददत से जो चाहो वो मिलता

है हकीकत बन के जीवन मे.....

Friday, 15 August 2014

       -----AK UJJALA AISA BHI----
kahte hai ki manav jeewan bahut mushkil se milta hai aur ishwar ki yeh anmol dain tab aur bhi sukhad hoti hai jab manav sampuran roop se jeene layak hota hai..swasth sharir mai hi swasth man ka waas hota hai.sar se paav tak jitne bhi angh hote hai,un mai se koi ak bhi teek se kaam na kare ,to who shirsti ki rachna ka ya yu kahe ki who hamari shirsti ka ankaha pahlu ban jata hai..likhne mai yeh jitna mushkil ho raha hai,us se kahi jauda mushkil hota hoga yeh jeewan...
              sudhir aur nisha ki pahli santaan jab paida hui to un ki khushi ka koi thikana na raha..har mata pita ki tarah un ke sapno ki purti hui thi.''REENA'' sudhir aur nisha ke naam ka ak ansh pyari si beti.ghar mai sub bahut khush the.goad mai lete hui nisha ka matartav mahak udha tha.aur sudhir who to ladli hi chate the..reena kis pe gaye hai....kaise rothi-hasti hai,yeh ghar ke logo ka mudda ban gaya..nisha ghar aaye to us ko yu laga ki aaj ki subah to kuch khas hai..har chese par use rangatt nazar aane lagi..ak khubsurat rangatt..do teen mahine rango ki khubsurati badate gaye.sudhir nisha ko intejaar tha ki kab reena bari ho aur apne kadmo se chal kar un ke paas aaye.

...mahine dar mahine yu hi nikalte rahe...reena jitni khubsurat thi,utni hi masum.nisha chati thi ki un ki ladli jald se jald sub kuch sikh jaye..dher sare khilono aur kapro se ghar bhar gaya....ak saal pura hone ko tha,reena ke janamdin ki tayariyo ko soch kar sudhir nisha behad utsahit the..koi kasar na rah jaye...bus....ak din dopahar ko reena ko,dher sare khilono mai bitha kar--nisha us ko rango ki pahchaan karana chati thi..reena chatur thi,hoshyari ki satah se kahi upar thi. ''meri lado yeh dekho lal rang..red..yeh peela rang..yellow...''nisha bahut dher tak red-yellow ka fark reena ko shikhati rahi,par reena to hah faila kar red-yellow ko dhund rahi thi..reena samne pare red yellow ko kyu nahi udha pa rahi tthi ? nisha ke dimag mai ak idea aaya ..kyu na chuppa chuppi ki game kheli jaye..nisha palang ka piche chip gaye aur apni lado ko bulane lagi..reena ko yeh pata tha ki maa kahi chip gaye hai...par kaha? maa ke baar bulane par reena bebus baithi rahi..achanak nisha ne samne aa kar ...reena ko haairaan kar dena chaha..par reena to maa ko samne paa kar khus hone ki bajay rone lagi...nisha hairaan thi ki use kya hua ? gale se laga kar chup karaya..phir yeh dekho''red ball beta''--par ree
par reena ab bhi ball na dekh kar sunay mai dekh rahi hi.nisha ghabra gaye..us ko laga ki reena ki tabiyat kharab ho gaye hai..par kya hua hai ??? yeh nisha samajah nahi paa rahi thi..us sham sudhir ke sath who doctor ke paas gaye..purey check-up ke baad jo doctor ne bataya.....who kisi khufnaak sapne se kam na tha.//''AAP KI BETI JANAM SE HI DEKH NAHI SAKTI..us ki ankhe behad khubsurat hai,lekin andar se dekhne ki shakti nahi hai'' kisi bhi maa baap ke liye itni khufnaak baat ka sunna kitna dardnaak ho sakta hai,es ka andaja to who h
i laga saktte haijo bhugat rahe hai....sudhir nisha bilakh bilakh kar ro pare.aasuo ka sailaab tha ki thamne ka naam hi nahi le raha tha...kyu---akhir kyu ???? bhagwan ne aisa kyu kar diya ? phir to bhagwan se shikayato ka tana bana shuru ho gaya...kahte hai na ki jab bhagwan ak takat chin lete hai,to us ke badle mai na jane kitni niyamate de dete hai...aise hi reena thi..khobiyo ka bhandaar le kar paida hui thi.pata nahi reena ko kis ne yeh sandesh  diya tha ya kudrat ka ishara ki who ab apne mata pita ko bilkul tang nahi karti thi..maa ki goad mai jor jor se kilkariya mari...pita ki ladli un ke seene se chipak jati jaise kahna chati ho ki haarna nahi hai,chahe halaat kaise bhi rahe...
            sudhir nisha ne reena ke janamdin ko waise hi manana chaha jaise socha hua tha..ladli to hamari hai,phir duniya se kya lene dena..kuch logo ko pata tha,kuch ko nahi...par yeh sach to duniya ke samne aana hi hai,aaj nahi,to kal..janamdin aaya ...kuch ne jee bhar kar duai de,to kuch ne kanafusi ke beech reena ko taras bhari nigahe de.reena bahut khush thi kyu ki mata pita ne us ka janamdin man-aatma se manaya tha..es din se sudhir nisha ne apni beti ka bhavishaye naye sire se basana shuru kar diya,,taki un ki lado ko kahi koi nirasha na ho.din mahine aur mahine saal mai badalte gaye.baal manorog aur doctors ki dekh rekh mai aur apne palan poshan ki barikiyo se sudhir nisha ne reena ki parai ko naya aayaam diya..bare hone par brain lipi ki madad se reena bahut aage nikal gaye.ab parne ke liye who kisi par nirbhar nahi thi...nakhud ke kaamo ke liye kisi ka aasharya chiye tha..ak aisi shakti,ak aisa aatm-vishwas ki reena dusro ka sahara lene ki bajay,mata pita ko salah deti thi,sahara deti thi.
un ko yeh batati thi,ki who kamjor nahi hai--kyu ki un dono ne us ko behad pyar se pala hai..us ke andar ke wishwaas ki neev majbut ki hai,,,,itni majbut ki who ak aisi nari shakti ban chuki hai jo apne erado ko akash ki bulandiyo tak le jaye ge...
        class mai top,phir college mai top----yeh kudrat ka koun sa   karishma tha ,gharwalo ki samajah se  bahar tha..ak din reena ne maa ko kaha ..maa mai c.a. banna chahu ge...pita haairaan the.par maa--maa bahut wishwast thi..''ha meri lado ab tak sub kar paye to ab kyu nahi ? '' log kahte hai pyar mai bahut takat hoti hai..agar who khare sone jaisa khara hai,aur duao mai utna hi dum--jitni maa ki dili duao mai...phir yaha to mata pita dono ki duao ka bejor mail tha.reena ne kab pariksha di aur kab us ka parinaam aa gaya...dekhte hi dekte reena ke paas noukriyo ke bare bare parstaaw aane lage..kise chune kise na chune...log dang the,sari duniya haairaan ki jis bhagya vithata ne ankho ki roshni nahi di,who kis tarah apni mehnat se apni rahe safal bana rahi hai..kaise kaam kar paye ge ? aur bhi bahut kuch--- waqt ki dour mai ,mehnat aur bhagwan ke sath mai subb saral hota gaya.aaj reena ke paas sub kuch hai,jo aam logo ke bus mai nahi hota..doulat shohrat aur dher sara pyar karne wale mata pita..reena ko to hosh sambhalne tak pata hi nahi chala ki jeewan ka andhera hota kaisa hai ???? har kadam mata pita ak sacche marg darshak ban kar ak ak pal us ke sath rahe.ha ab un ko es baat ki fikar thi ki reena ka ghar bus jaye..ak aise insaan ki talash...jo un ki bei sara sach jaan kar us ka humsafar bane...daya kar ke nahi ya doulat dekh kar nahi..ak din reena ne apne mata pita ko bataya ki usi ke sath kaam karne wale ak nihayat sharif aur sanskari yuwak ne us ka sath dene ka wada kiya hai,us ko sache man se apna humsafar banna chata hai,,daya ka patar maan kar nahi
          mata pita ki sahmati aur aashisho se--samaj aur rishtedaro ki sahmati se --reena ka vivah ritesh sr ho gaya..-------waqt ki gati chalti rahi.ab reena ke mata pita es duniya mai nahi hai--reena un dono ke bina kud ko aduhara manti hai  ,,, par pati ritesh ka sath pa kar who behad khush hai ---aaj who apne tamam andhero se nikal kar ak naye roshni mai aa gaye hai,jaha sakun hi sakun hai.......

Wednesday, 13 August 2014

इनतजाऱ कीजिए..मेरी नई कहानियो का....

       मेेरा साथ देनेे का बहुत बहुत शुुकरीया...

Tuesday, 12 August 2014

हमारी कोई बात समझने के लिए,जजबातो को समझने के लिए..वकत ही तुमहारे

पास ना था..दिल और दौलत का फऱक समझने के लिए एक लमहा भी तुमहारे पास

ना था.. आज राहे हो गई है जुदा हजारो गलतफहमियो मे...वकत और किसमत कब

बदल जाते है...यह जानने का हिसाब भी तुमहारे पास ना था...
तेरी उन बचकानी हरकतो को याद करतेे है हम..वो मुझ से रूठना फिर मना लेना.

नही भूूल पाए है हम...आज ना वो बचपन है ना ऱिशतो की वो बाते...ना वो झरने ना

वो बहती लहरे..पर नही भूल पाए है तेरी गुलाबो सी महकती बाते....
आॅॅचल से हवा दी तो कुछ याद आया,कदमो की जो आहट आई तो कुछ खयाल आया..

बारिश के इस मौसम से,तेरी यादो का तूफान आया..यादो केे पिॅॅजरे मे हैै..पर तुुझेे

भूले नही....यह खयाल फिर याद आया....

Monday, 11 August 2014

सुबह की हलकी किरणो मेे,जब भी देखा है तुझे..ना सोचा ना समझा,बस दिल से

बुलाया हैै तुझे..आज जीवन के उस पडाव पेे हम है,जहाॅॅ हर फैैसला हमारा है..

जिनदगी और मौत को चुनने का फैसला भी हमारा होगा..दौलत शोहरत के पननो को

बरसो पहलेे ही फाड चुके हैै हम..बहुुत दूूर निकल आए है उन बनद दऱवाजो से,जहाॅ

जिनदगी ने कभी बसाया था हमे...

Sunday, 10 August 2014

इस भरी दुनियाॅॅ मे हर राह,हर मोड पेे मिलते रहे गे ऐसे लोग..

 जो कभी तोडे गे तुुमहे,कभी बातो मे उलझाए गेेे..तुमहारे राजदाऱ बन कर तुमहे

अपनेे पयार का यकीन करवाए गे..यही दुुनिया है दोसतो...यहाॅ ना खुद टूटना,ना

बिखरना,अपने आप मेे जीना और कागज के पननो पे जिनदगी को सलाम लिख जाना....
जिनदगी कभी किसी के लिए नही रूकती..अपना आतमविशवास ही होता है जो

साथ चलता है..विशवास खुद पर इतना करो कि कोई तुमहे हरा ना सके...

और जिओ ऐसे कि यही जीवन का आखिरी पल है....
ना कह पाए ना कह पाए गे..दिल मे छुपी बात कया कभी समझा पाए गे..

रफता रफता गुजरती जा रही है जिनदगी..जो लमहे गुजर गए वो लौट कर ना आए गे

इक दिन चले जाए गे इस दुनियाॅॅॅ से..पर जो कह नही पाए वो सब कागज के पननो

पर लिख कर छोड जाए गे..मिलेे जो कभी तुझ से जननत मे..आॅॅसूओ का सैैैलाब बहा

जाए गे..
उसूूलो से बॅधे है..उसूलो को ना भूल पाए गे.सहारे माॅगे नही,अपना बोझ खुद ही उठा

जाए गे..जीवन देने का नाम है..सो दुआए बाॅटते जाए गे...नशतर जो चुभोए दुनिया ने

वो तो ना भूल पाए गे..पर अपने उसूूलो से जीवन अपना बिता जाए गे...पर एेसा कर

जाए गे कि हर किसी की इबादत मे बस जाए गे....

Saturday, 9 August 2014

किसी केे लिए खुद को मिटाना. दरद सहना और रो रो कर किसमत से शिकवा करना..

जब मोल नही जजबातो का..जब सममान ही नही खयालो का..

फिर टूट कर कयू जीना,जिओ अब खुद के लिए.सपने चुनो अब खुद के लिए..

दुनियाॅ बहुत बडी है दोसतो,अभी भी इनसानित कायम है यहॅा दोसतो..
मेेरी मासूम हॅसी को तुम ने..खिताब दिया जननत का..

वादियो मे खो ना जाए कही,मुहबबत का हवाला दे कर रोक लिया..

आज धरती पे नही,आसमाॅॅ मे उड रहे है हम....

तेरेे दिए खिताब से,अब तेरी इबादत मे झुक गए है हम..
तेरी मेरी मुहबबत को यह जमाना कया जान,कया समझ पाए गा....

इस दौलत की दुनिया मे,कौन हमारे जजबात समझ पाए गा..

जहाॅॅ खरीदे जाते है लोग,अपने गुनाहो को छिपाने के लिए...

फिर हमारी मुहबबत की इबादत का कया है जनून..कहाॅ कोई समझ पाए गा..

Thursday, 7 August 2014

तू मेरी जिनदगी मे इस कदर शामिल है..कि हर साॅस तेरे ही नाम की आनी जानी है..

सदियाॅ बीत जाए गी तेरे पयार मे..साॅसे भी खतम हो जाए गी इस जिसम जान से..

रूखसत नही हो पाए गी तेरी रूह मेरी रूह से..गुजर जाए गी फिऱ से सदियाॅ तुझे पाने

की इनतजार मेेे.....
जिकऱ तेरा जब भी चला..हम मुसकुरा दिए..

बाते जब तेरी चली..हम बेवजह हॅस दिए..

लोग कहते है हम तेरे पयार मे पागल हैै..

पर हम इसे अपनी मुहबबत का जनून कहते है...

Tuesday, 5 August 2014

रिशते कितने और कयूॅॅ होने चाहिए...इस का हिसाब तो किसी के पास नही होता...

पर रिशतेेे जितने भी हो..उन मे जिनदगी और पयार कायम रहना चाहिए..

खोखले रिशते तो कभी भी दम तोड देते है...
THANKSSSS to all my friends .....for supporting me....


       pl,wait for my new stories...on my this blog..

                     again waiting for your response...


                                                     mamta wadhawan
इक मिसाल बन के जाए गे,इसी दुनिया के लिए..

जितनी मारी है ठोकरे,उस सेे जयादा सममान पाने के लिए..


वकत ना रूका है,ना रूके गा कभी किसी के लिए...

दौलत यह शोहरत कमाना,फिर भी आसाॅ होता है..

मगर जो अपनेे पयार सेेे,सारी दुुनिया जीत ले..
वो ही इस दुनिया का खुदा होता है.....

Saturday, 2 August 2014

मेरे मिशन मे मेरे साथ जुुडने का तहेदिल से शुकरीया.....

                     अपने सभी दोसतो को सलाम.....
                 
जो दिया जिनदगी ने,उसे मुकददर मान लिया.बहुत खोया पर कुछ पाया...

उसे भी तकदीर का करिशमा जान लिया...पर जब जखम मिले अपनो से...

तो अपने ही सममान के लिए दिल दरद से भर आया..आज साथ चल रहे है वो लोग..

जिन से कोई नाता तो नही,पर साथ देने के लिए रिशता बनाना जरूरी तो नही..

सहारे ना माॅगे थे,ना माॅगे गे कभी,पर दोसतो के साथ अपने मिशन को एक नाम दे

जाए गे.....
अपना सब कुछ कुरबान किया जिन के लिए,जीवन की राहो पे चलना सिखाया..

कभी तडपे,कभी रोए..उन की सलामती के लिए..वो ही आज सिखाते है हमे कि...

जिनदगी को जीने का सलीका कया है...

Friday, 1 August 2014

बनद पलको मे ना जाने कितने सपने देख लिए..

पर खुली आॅखो से भी ना भूल पाए है..

कहते है हर सपना कुछ कहता है..

पर हम अपने हर सपने को उस का मुकममल मुकाम दे जाए गेे..
वो दिल के आसपास है मेरे,पर हम वादियो मे उसे ठूठते ही रहे...

कभी दिन कभी रात,उस की तलाश मे भटकते ही रहे...

बारिश की बूदॅो ने जब भी भिगोया चेहरा मेरा...

उस की यादो का वो तूफान,रुह मेरी को भिगोता ही गया....
कही दूर से यह आवाज़ आये,की तेरे पास है हम,फिर लगा की शायद यह ख़्वाब होग…आइने मई खुद को देख कर यह अहसास हुआ,की जिस ने यह कहा हु तो खुद मेरा जमीर है……।

Sunday, 27 July 2014

पैसा है,रूतबा है..तो यह दुनिया सलाम करती है..उन की खाामियो को नजरअनदाज

करती है..कितने इनसान है इस धरती पे,जो पैसो मे बिक जाते है..जान कर बुराई को

हवा देते है..हाॅॅ..पर अभी भी कुछ लोग ऐसे मिल जाए गे,जो उसूलो से जुुडे हैै,और

ईमान के रिशते से बधे पैैसो से ना खरीदे जाए गे.दोसतो जाने का रासता एक ही है,

देर सवेर सब वही चले जाए गे,रूतबा पैसा यही छोड जाए गे.....

Thursday, 24 July 2014

फिर आई है एक नई सुबह..यह बताने के लिए..

पूरा आसमाॅ अपना हैै..पॅख अपने फैलाने के लिए..

धूप भी आ जाए गी..यह समझाने केेे लिेए..

डरना नही अधॅेेऱो से,मै रोज आऊ गी..उजाला देने के लिए..

           

Wednesday, 23 July 2014

चनद सिकको के लिए कभी,ईमान नही बेचा हम ने..

भूखे भी सोते रहेे पर,किसी की भरी थाली पे नजऱ नही डाली हम ने...

भरोसा था अपनी इबादत पे,और आज भी हैै..

सहारे नही माॅगे थे कभी,ना माॅगे गे..एक थोडा सा साथ चलने के लिए..

अपनी ऱाहो पे अपने खुदा को,साथ ले कर दूर निकल जाए गेे....

Tuesday, 22 July 2014

बिखरे है,पर पूरी तरह टूटे तो नही..हारे है पर वजूद अपने को तोडा तो नही..

लौटे गे जरूर अपनी उन राहो पे,देखतेेे रहे सपना जिस का कई सालो से..

जब सलाम करे गी यही दुनिया,जिस ने गिराया था हमे कई सालो से...
एक कोशिश कर रहै है,जिनदगी को फिर सेे जीने की..

जो दरद मिले उन को भूूल कर,खुद मे खुद को समाने की..

यकीन खुद पे है इतना,कि निकल जाए गेेे उन झमेलो से...

पर यह नही भूल पाए गेेे,कि गुनाहगार बना दिया खुद अपनो ने..

Sunday, 20 July 2014

जीने के लिए कया दौलत काफी है ..जीने के लिए कया शोहरत काफी है..

सवााल ही सवाल उठतेे है,इस जीवन को जीने के लिए...

पर कभी कोई जाना कि जीने के लिए...ईमान भरी सचची मुहबबत ही...

   काफी है......
खामोशी वो जुबान है..वो ताकत हैैै..वो अनकहा जजबा है...

जो वकत आने पर,उन सब को एहसास दिलाता है...

कि जिस खामोशी को वो हमारी कमजोऱी मानते रहे...

असल मे वो ही हमारी ताकत और मुहबबत है...

Wednesday, 16 July 2014

सब कुछ खोने केे बाद,जो किसमत देती है....

वो जीवन का वो वकत होता हैै..

जब हम सिरफ खुद पर य़कीन करते है..

और खुद को खुद के लिए चुन लेते है....

Tuesday, 15 July 2014

जिदॅगी सब को सब कुछ नही देती...

पर जो भी देती है,उसी मे जीना ही.....

खुद एक जिदॅॅगी हैै.......
kabhi din,kabhi raat...zindagi chalti rahti hai...

kabhi aasu,kabhi khushiya...zindagi phir bhi chalti hai..

khuda tab bhi sath tha mere...khuda aaj bhi sath hai mere.....

har saans ke sath aaj bhi kahte hai......

  SUKHRIYA MERE KHUDA

Monday, 16 June 2014

जखम जो हम को मिले,उस का हिसाब किसी के पास ना था..दरद की इनतियाँँ मे

कैैैसे जिए,यह मलाल भी किसी को ना था..छाले हाथो मे हमारे भी पडे,पर उन के

फटने का एहसास किसी को ना हुआ..हम गुनाहगाऱ बने उनही नजऱो के,जिन के साथ

बरसो का आशिय़ाना रहा.....

Sunday, 15 June 2014

रासते बनाए जाते हैं अपने ईमान से,किसी के रासतों को काट कर नहीं...

डूबते सूरज को सलाम कोई नही करता,कया उस का वजूद नही होता..

रात ढलती हैं,एक नई सुबह को फिऱ लाती हैं..लेकिन इस बार उसी सूरज को..

यही दुनियाँ सलाम करती हैं..कयो कि यही ढलता सूरज एक नई रौशनी लाता है..

Saturday, 14 June 2014

नया सफर,नई ऱाहे..हर कदम है नया..कितना चलना हैै अभी,मालूम नहीं..

किसी के साथ नही,किसी के बाद नही..परवरदिगार के कदमोंं मे खत लिखा है..

किसी से कुछ सुनना नही,किसी से कुछ कहना भी नही..

बस अपने ही जमीऱ की आवाज सुने गे,औऱ अपने सफर को अनजाम दे जाए गे..
मनिजल की तरफ बढ रहे हैं,अपने मजबूत इरदों से..सब कुछ भूल कर...

जो  बरसो पहले खोया था,वो मुकाम हासिल करना है..सब कुछ भूल कर..

कोई भी मुकाम पाने केे लिेए,उमर का बँधन तो नही..

खुदा को साथ ले कर,अकेले निकल गए है अपनी ऱाहो पे..सब कुछ भूल कर..
हसरत थी उन रासतों पे चलने की,जिन का सपना हम देखते ही रहे...

कभी उस की कभी इस की खवाहिशों पे,वकत बरबाद करते ही रहे..

आज सजा रहे है उन सपनो को,खुद के खयालों से..

सहारे ना माँगे थे कभी,पर साथ दुनिया के चलते ही रहे...
जमीं पे पाँव रखा था,आसमान की बुलनदियों को पाने के लिए नहीं..

चल रहे थेे हकीकत में,राहों की धूल बनने के लिए नहीं..

मकसद था सही और इरादेे भी सही...

मनिजल आ गई खुद सामने,हम ने तो बुलाया भी नहीं..


उस ने कहा मै ही तेरी पहचान हूँ..तुझ से जुडी आईने की अह्म तसवीर हूँ...

तू जहां जहां रखे गी कदम..मै तेरा साए की ही तकदीर हूं..

मैने कहा बेशक तेरे साथ सात फेरो का साथ हैैं ...

पर वजूद तो मेरा..मेरी खुद की पहचान के साथ है....

Friday, 13 June 2014

हर जऱरा आफताब नही होता..तो हर सपना भी हकीकत मे तबदील नही होता..

हर कदम जो बढता है तरककी की तरफ,वो भी पूरा नही होता...

हम चल दे बेशक आसमाँ की तरफ,आसमाँ हम को बुला ले....

हकीकत मे एेसा नही होता.......

मेरी जिनदगी पननो पे लिखी एक दासताँ ही तो थी..

तुम आए और इन पननो को फाड़ दिया..

एक दसतक,एक साए ने पुकारा हम को..

यह बताने के लिए,कि हकीकत इन पननोे से कही आगे है.

Wednesday, 11 June 2014

बरसों के बाद तेरा मुझ को फिऱ से पुकारना,एक खूबसूरत एहसास ही तो हैं..

हम पे यकी करना,एक नए रिशते् को जताना यह पयार ही तो हैं...

तुम पे मिटने के लिए,अभी भी हम में जान बाकी है..

तुमहें पयार करने के लिए,अभी भी जजबात बाकी हैं...
हा तेरे बचपन की पयार की झलक आज भी मेरे आँगन में है..

उस मिटटी् मे तेरे चलने की खनक आज भी हैं..

हम औऱ तुम बचपन की उस नादानियों से आज दूर निकल आए है..

पर तेरी मेरी पाक मुहबबत को आज भी नही भूल पाए हैं..

Tuesday, 10 June 2014

फिऱ सुबह आई है..रात के अधेँरे को विदा कर के आई है..

कोयल की कूक सजा रही है इस नए सवेरे को...

देखो जगा रही है नींद मे सोने वालो को..

कौन इस कूक से जाग पाए गा,या सुुबह की नियामतो को हासिल कर पाए गा....
पल पल जो याद आए,हर चलती साँस जिस से पयार करे..

बेवजह ही जो जीने की वजह बन जाए..

बरसों पहले भी तू वजह था,और आज इस मोड पे भी..

जीने की वजह तू है...
 जीवन मे हमेशा दुखो मे जीते आए है,हर छोटी खुशी के लिए मोहताज होते आए है..

जब कभी खुशी आई तो साथ मे दुखो ने घेर लिय़ा,मेरे जजबातों को कही धकेल दिया..

जब कभी हँसी ने दसतक दी,जमाने ने हम से मुह फेर लिया...

अब थक गए है इतना कि खुद ही राहे बना कर..खुशी को ठूठ रहे है इतना...
हर दरद दुआ मे अगर बदल गया होता,तो खुदा की इस दुनिया मे कही दरद नही होता.

पर दरद की इनतिहाँ रही इतनी,कि इनसान ही पतथर का बन गया..

चाहने से गर खुशी मिलती,अपनों का पयाऱ मिलता,तो यह जहाँ इतना बुरा ना होता.

Monday, 9 June 2014

हर लमहा कुछ कहता है,तेरे मेरे पयार की दासताँ को गुनगुनाता हैं..

बहारें शिददत से फूल बरसाती हैंं,रोशन जहाँ को करती हैं...

बरसों बाद भी यही बहारें यही लमहें,दासताँ हमारे पयार की दोहराए गी..

तब पयार के पननों मे,यहीं मुहबबत फिर से मुसकुराए गी...
समनदऱ मे डूब जाए,ऐसा एहसास तो नही देखा..नदियों मे सिमट जाए ऐसा पयार

नही देखा..जिनदगी की दौड मे पयार हो जाए,ऐसा बहाव नही देखा..
फिजा मे तेरे पयार की महक आज भी है,यकीँ तेऱे पयार पे मुझे आज भी है..

तनहाईयाँ कितनी भी चली हो साथ मेरे,पर तेरे पयार का,तेरे खवाब का..

              साथ आज भी हैं....
किसी के पावोँ की आहट ने,सुबह की नींद से जगा दिया हम को..

एक एहसास किसी के आने का,सकून से भर गाया हम को..

पर नींद से जाग कर,हम ने तो मुहबबत को ही जगा दिया...

Sunday, 8 June 2014

बहुुत पास मत आना मेरे,कि जल जाओ गे..

बहुत दूर भी मत जाना,कि मर जाओ गे..

हर आहट पे देखना कही मेरा साया तो नही...

साए के पास मत जाना कि हर हाल मे मिट जाओ गे..

LAHAR...

Ak bahut bara sach hai ki sehat aur zindgi ka aapas mai bahut gahra sambandh hai.par aksar log es satya ko jaan kar bhi nahi jaan pate..par mayak ke liye yeh satya to us ke samne tha.janam se who viklang tha.dono pairo mai itni takat nahi thi ki who chal paye.us ka ak aur bhai tha,ak bahan,dono us se bare the..aur puri tarah sawasth the.mata pita aur bhai bahan ne behad pyar diya-seva ki.pita ka kahna tha,us ko kamjor mat hone do,es liye unho ne mayak se na sahanubhuti dikhai,na hi alag se pyar ka sailaab lutaya...mayak bahut acchi tarah janta tha ki pita ka maksad us ko uchai tak puchna hai.maa ke pyar ne hamesha us ka hosla baraya.pita har roj us ko ak cycle riksah se khud chorne jae.phir dopehar ko lene bhi jate.ghar mai sub se yahi kaha ki yeh dayitaw sirf whoi nibhaye ge..mayak par bhagwan ki itni kirpa thi ki who parai mai behad hoshiyaar tha-sawbhav mai itni namrata-sub se apnepan se bolna..ersha to dur dur tak us ke paas nahi thi..who har namumkin chese ko -apni mehnat aur apne ghar walo ki khas kar pita ki mehnat aur pyar ko --mumkin raasto mai badal dena chata tha.jeewan ka ak hi maksad le kar chalta ki who mata pita ka naam roshan kare ga.un sub ke pyar aur wishwaas ko duniya ki nazro mai itna roshan kar de ki yahi duniya us ke aage sar jhuka de ge..
                     Mayak ki didi ka janamdin tha.par sath sath ak khushi ka din aur bhi tha ki didi bahut acche anak le kar college mai utrin hui thi..zindgi  ki es khushi mai -mayak apni aur se didi ko kuch gift dena chata tha.par who to abhi parai kar raha tha aur us ki pocket money bhi itni nahi thi..ki who apni didi ke liye kuch khried sake.par dena to hai.....who bhi aisa ki subb hairaan ho jaye.kahte hai ki koshish aur himmat karne walo ki kabhi haar nahi hoti.us ne jo socha who kisi ashcharya se kam nahi tha.who unhi bejaan pairo se apni didi ke liye kuch karna chata tha.bus phir kya tha-----us ke paas sirf 9 din the.who raat ko akant mai baith kar apne pairo ko dahl bana kar -board par aari tirche linea khichta.do ghante ki apaar mehna ke baadwho apne bejaan pairo   se -jin mai sirf halki jaan thi,ak pyari se painting bannane mai safal ho gaya.jab who painting puri hui to khud mayak ki khushi ka koi thikana na raha..char din bache the--us ne ak aur koshish ki aur didi ke khayal ko man mai rakhte hue us ne ak khubsurat se painting banai aur sath mai neeche apna naam bhi likha.ab to mauak ko who char din bhi bahut jayda lagne lage.
                          Phir who din bhi aa gaya.ghar mai sub ne mayak ko us ki parai ke liye shabhashi de.par mayak ka dil to ander hi andar khushi se dhark raha ttha--jab didi ke liye birthday cake katne laga to mayak apni wheel chair par jaise bhagte hui apne kamre mai gaya aur sundar se paper mai lipti who painting-sub ke sam,ne behad pyar aur samman se apni didi ko bhet ki.didi aur sub log hairaan the ki mayak ne kya diya hoga ? mata pita bhai bahan ki utsukta dekhte hi banti thi.didi ne behad pyar se use khola.jab mayak ne un ko bataya ki who painting us ne apne inhi bezaan pairo se banai hai ---''par kaise ?'' subhi ak sawar mai bole.''aise'' kah kar mayak ne paas pare hui apne board  par apne pairo mai colour brush le kar sub ko yeh dikhaya ki us ne kaise yeh sub kiya,mata pita ke charan chu kar mayak ne un ka aashish to le liya-par sath mai mata pita ki ankho se bahte hui khushi ke ansu-us ko tohfe ke roop mai mile.aaj zindgi ka who sach samne ha ki mehna aur koshish ki jaye o sub aasan ho jaa hai.mayak ka bhvishaya un subhi se jayda ujjawal tha-jo sadharan insano ko bhi naseeb nahi hota.
                         Aaj mayak ki paintings desh videsh mai bikti hai--jis bacche ko log,rishteydaar bojh maan kar sire se nakar rahe the-whoi aaj man se us ki khushi mai shamil the.jaha tum agar haar maan lo,to yeh duniya tumhe neeche dhakel kar dubara dekhe ge bhi nahi.-------meri yeh kahani aap subhi ko yeh sandesh deti hai ki kabhi bhi apne us bacche ki bekadri mat karo,jo janam se viklang hai.majbur hai----aap pyar se,man se sath de ge,to yeh viklang bacche bhi ---aap ka naam roshan kar sakte hai.---teak mayak ki tarah-------------
चलते चलते बहुत दूर तक आ गए है हम..

हर पगडणडी,हर बहाव से दूर निकल आए है हम..

जब थक कर टूट चुके थे हम....

एक इशारा मिला देख तेरे पास है हम...
कागज के फूलों सा नही था इशक मेरा,हद से जो गुजर जाए सैलाब भरा इशक था मेरा

जहाँ जहाँ कदम पडे तेरे,वहा वहा हुसन ने जुदा किया अकस तेरा.....

Saturday, 7 June 2014

Blog pe mere sath jurne ka THANKSSSS









         Regargs
खुशी का मतलब यह तो नही कि सारे जहाँ पे जाहिर कर दे..

किसी ने जननत,इस धरती पे सकून का रासता बताया...

उस के वादे ने पयार का मतलब समझाय़ा...

या खुदा आज तो तेरी खुदाई पे ही पयार आ गया....
फिऱ वो चेहरा उस का वो हसँना,मुझे उसी पयार का एहसास दिला गया..

वो मिला मुझे बरसों बाद,पर जिनदगी का मतलब बता गया..

अब ना तोडू गा अपना वादा,खुशनुमा साँसें दे कर चला गया..

अब तो इनतजाऱ है उस का,जो मेरा हमदम बन कर रासता बता गया...

मौत एक एेसा सच,कि जिनदगी उस के साथ जुडी हैं..

जब भी जिनदगी चलती हैं,मौत बगल मे अपना लिबास पहने खडी रहती हैैं..

फिर भी इनसान यह यकींं करता हैं कि मौत का फरमान उस के लिए बहुत अरसे

के बाद आए गा..शुभ रात्री.कल सुबह हो या ना हो....आमीन
कोयल की कूक ने सुबह को रँगीन बना दिया..

रात भर की उदासी को खुशनुमा माहौल ही बना दिया..

चपपे चपपे पे छाई है,मिठास की वो बोली..

मुहबबत ही सजा गई चहकती हुई वो बोली...

Friday, 6 June 2014

दोसतों....मेरे मिशन मे मेरे साथ जुडने का शुकऱीया..

मेरी कहानियाँ,मेरी शाय़री,

मेरे जीवन का अह्म मिशन है....
जो किया..जितना भी किया.

अपने मन और आतमा से किया..

यह बात और है कि हमारी किसमत ने हमें ही..

गुनाहगार बना दिया..
कदऱ हो हर जजबे की,ऐसा कहाँ होता है..

अकसर इस दुनियाँ मे,मन से किए इन जजबातों को..

सिरे से नकार दिया जाता है.....
टुकडों मे बँट रही है जिनदगी..सुबह शाम की तरह,कही धूप कही छाँव बन रही है...

जिनदगी..रिशतों का मोल नही रहा यहा,कोई मिट रहा है तो कोई  मिटा रहा है....

 जिनदगी को यहाँ..बस  मायने बदल गए है यहाँ......

सिरफ दो वकत की रोटी का जुगाड भी ना था,तब भी साथ थे..

अपनी छत भी ना थी,तब भी साथ थे..औलाद का सुख भी ना था,तब भी साथ थे..

आज रोटी है,मकान है,औलाद है..तब भी साथ है...

पर कया आज ऐसी मुहबबत है..कया इन सब के बगैऱ रिशतेे टिक पाए गे .

       


पैसा सब कुछ तो नहीं इस जीवन मे,फिर भी तिजोरियाँ भरते है उमर भर लोग..

रूतबे को बनाने के लिए ,जीते है उमर भर लोग...पर अकसर भूल जाते है लोग...

कि मौत के फरिशते कभी रिशवत नही लेते....

Thursday, 5 June 2014

तेरी बेवफाई पे अब रोते नही है हम,किसी जख्म के नासूऱ बनने पर दुखी नही होते है

हम..जब से जाना है,तू वो शीशा है जो हजाऱो बारिशों मे रहता है...

पर किसी की सूरत का वजूद बनता ही नही है...
दुनियाँ मे बहुत कुछ एेसा होता हैं,जो दिखाई दे कर भी दिखाई नही देता..

हजाऱो परदो मे लिपटा,वो सच जो पता हो कर भी पता नही होता..

पर एक आँख है जो देखती है सब,वजूद पहचानती है सब..

तेरे मेरे करमों का लेखा जोखा,जानती है सब.....
जो दोसत दूर तक साथ दे,हर दरद मे हो साथ..दौलत शोहरत की बातों मे..

ना हो उस का विशवास,बस मन के दरद को जो पढ ले अपनी आँखों से..

कया इस जमाने मे मिलते है..एेसे सचचे दोसत..
मौत कब ले जाए गी हमे....

आऔ दोसतों आप सब को यह पैगाम दे जाए....


इनहीं पननों मे हमे याद करना,वकत कितना भी कय़ू ना गुजर जाए....
पलट कर देखना उस का,हमारी जिनदगी का कसूरवार हो गया...

धडकनों का यू चलना,दिल के बीमार होने का कसूरवार हो गाया...

एक दिल ही तो था,जो उस की एक नजऱ का तलबगार बन गाया...

Wednesday, 4 June 2014

किसी के डर से यह कलम ना रोक पाए गे,जब तक जिए गे हर मुददे पे लिखते जाए गे

ना जाने कब तक इन साँसों को चलाया जाए गा,जो यह कलम अकेले ना कर पाई..

वो इन टूटती साँसों का साथ कर जाए गा..
उसूलों से जो ना जोडते,जिनदगी अपनी,हर रिशता हमारा होता...

चाशनी मे भिगो कर लफजो को बनाया होता,तो जीवन कुछ और होता..

दौलत के दरवाजों पर,सर झुका देते गर हम...

तो यह जीवन हमारा,बादशाहों का खजाना होता.....
हर बार तो धोखा खाय़ा है,किसमत की लकीरों से हम ने...

पर अब हर बार नही खाए गे,दुनिया मे आने से पहले...

तेरा नाम अपने नाम के साथ हीं लिखवा कर लाए गे....
नजऱे झुका दी उस ने,मेरे दिल की उस आहट पर....

जहाँ जहाँ कदम पडे उस के,सजदे किए हमारी नफासत ने...

यह मुहबबत ही तो है साहिब,कि नजऱे तो आप की झुकती है....

पर दिल हमारा धडकता हैं.........
चापलूसी की दुनियाँ मे,मिलते रहते है एेसे बहुत से लोग...

जो बोलते है पय़ार के इतने मीठे बोल...पर मकसद तो है अनदर से...

कि आ तुझे बता .दू......तू है कौन....

Tuesday, 3 June 2014

 जहाँ मोल ही नही जजबातों का,जहाँ दरद ही मिल रहा है पुरानी बातों का...

दरद जब हद से गुजरने लगे,तब तनहाँ जीना ही नही...

निकल रहे है नई राहों पे,अपने अकेलेपन के सकून को साथ लिए....

मेरे दोसतों---आज फिर आप सब का शुकरीया करती हू----

मेरा साथ देने के लिए----

     हर गुजरते लमहे के साथ कहते है--हम ने तो राह चुनी थी,पर दोसतो..आप सब ने

तो इन राहों पे हमें चलना सिखा दिया---
                                 सलाम
                   
टुटते हुए सपनों को खाक नही होने दे गे अब हम..

कतऱा कतऱा कर के इस मुहबबत को फिर लौटा लाए गे अब हम..

सपनों को हकीकत मे बदलना,नामुमकिन तो नही अब..

पर हकीकत को खबाबों मे सजा लेना,यह जान गए है अब हम...
दो बूँद पानी की पयास ही,हमें उस कुए तक ले आई है.

जहाँ पे बँजऱ है यह जमीं,और ठेरों पतथर खाई है..

वजूद तो सिरफ पयास का है,कुआँ तो नाम की दुहाई है..

Monday, 2 June 2014

वो सामने था मेरे,पर जुबाँ तो खामोश थी..

हवाएँ थम सी गई थी,पर तूफान तेज था...

कहना चाहते थे दऱदे-ए-बयां...

कि दिल था बस खामोश था.....
इस दुनिया के लोग पयार का दम भरते है....

पर उसी की पीठ पीछे,उस के मरने की दुआ करते है....

नफरत को दबाते है,अपने आदाबों से.....

पर अपनी मुसकुराहट मे जहर का फन रखते है.....
 मेरे जाने से,मेरे राहों को बिखरने मत देना....

उन पे फूल चढा कर,उन को सजा मत देना....

रूह ने बना दी है,पननों पे सयाही की लकीरें....

टूटेगे कई दिल,पर अनजाम तो खुलने देना......... 
खामोशी ने तोडा है,दामन भीगी रात का..बूंद बूंद ओस ने बिछाया है बिसतर भोर का..

कुछ फूल बिछाए है रजनीगँधा की साँसों ने,सब मिला कर साथ दिया है.....

सुबह की बरसात ने......
एक आहट जिनदगी की फिऱ लौट आई है,किसी को खबर भी नही बस..

बिन बताए लौट आई है,साँसें चल रही है धीमे धीमे...

पर बहारे खुशी से लौट आई है......

SHITEEZ KE US PAAR...........

Jaha dur dur tak ghatiyo mai ---na koi halchal thi,na kisi jeewan ke hone ki asha...kudrat ke es faisale par samajah nahi aa raha tha ki jaha kal tak hasti khelti wadiyo mai ----jeewan mahak raha tha,jharno mai jal ka dhimaa parwah apni gungunati aahat ka sandesha de raha tha...hum aksar bhul jate hai  ki anat ak nishchat parkriya hai..jeewan ka who satya-----jaha par pahuchana ----jaha tak samajahna-----har kisi ke liye sambhav nahi hai....jeewan ka moh tor kar-----us se juri tamam zindgiyo ko chor kar ----aage barna---bus barte hi jana---ak lakshay ko pane ke liye---lagan sheel hona----sakalap sheel hona----ak insaan ki pahchaan hai.....aise insaan ki pahchaan----jise us ke apne bhi es liye chor dete hai ki ab who doulat heen hai,un ke hisab se who ab buddi heen hai----aur sub se bara who ab umar heen hai-----matlab yeh ki who yani us ki umar ko jhelna un sub ke liye ak trasadi hai---- 
                                    Ha --har subah hum sub ke liye hamesha se ak sandesh le kar aati hai ki udho-------
jeewan ki chunotiyo ko savikaar karo----un se dar kar jeena nahi choro----un se dar kar bhago bhi nahi-----bus behad khamoshi se en ko apnao...jo shakti,jo takat moun mai hoti hai-----who jayda bolne mai nahi----kisi se uljahne mai bhi nahi----hamare antarman ki takat who takat hoti hai--jo hamare shant rahne par----hume sari pareshaniyo se nikalne ki---un se bahar aane ka raasta dikhti hai....kahte hai sache pyar mai bahut takat hoti hai-sirf sache pyar mai.who pyar jaha na lalach hota hai paiso ka ---na jameen jaydaad ka---par kya pyar aur chahat waha kaam aati hai,jaha hume neeche dhakalne wale insaan mojud hai----jaha hume kadam kadam parbeizzat karne wale shaksh mojud hai---yaha par sirf koshish ki ja sakti hai...par sirf utni jaha par hume lage ki who es chahat,es pyar ke layak hai bhi ya nahi -- 
                                      Phir ak mukaam aisa aa jata hai ki enhe bilkul chor dena hota hai--ak dum sire se nakar dena hota hai--Bhagwan ko diye har vachan ko nibhana--hamare andar ke insaan ki parakh hoti hai.ak aisi parkh,jo hume acche bure ki pahchaan dikhati hai..jeewan sirf khana peena sona hi nahi-----jeewan ka taatparya sub ke liye alag alag haikisi ki galat soch ko badalna--us ko jeewan ka mulay samjahna--khud apne liye kisi bevkufi se kam nahi hai. aaj adhikaansh logo ke jeewan ka mulay paisa hai,,jeewan kiwho  who tamam sukh suvidhai hai,,jin se who apne apne rishto ka mulay aaktey hai..Geeta aur Ramayan ke who tamam path-tamam shalok ab simit jagah,simit aasthao par aa chuke hai..bus en logo se taal mail tabhi baraya ja sakta hai,jab hum un ki haa mai haa,naa mai naa,aur un ke isharo par udh baith sake..
                                        Bachpan ki masum dahleej par-bau jee ki who parathanai-satsang mai ja kar veer jee ke who saaf suthre parvachan-jaise man ki diwaro par chipak kar rah gaye hai...veer jee ka kahna aaj tak yaad hai aur khas kar en halato mai,man ke andar shor dalta hai..ki agar tum sahi ho-sache ho,to ak dum moun rahna.khamoshi se jee lena-munasib ho jaye ga..insaan ki sahan shakti ka faisla,inhi halato mai hota hai-jab whoi log jinhe hum apna hone ka dawa karte hai-who hi hume dukh dard dete hai,aur khud ko sahi hone ka dum bharte hai....geeta ka sach--ramayan ke bol------jeewan ka sach sub kuch bhula kar,khud ko ishwar ke samarpan mai hai---dher ya saber----sub ko wahi jana hai.jaha sub ke karmo ka khata khola jata hai--jaha sub ke paap punay ki file kholi jati hai
                                         Paisa aur rutba--chalaki aur dagabaziya---sirf insaano ki farebi duniya mai hoti hai...jo jeewan jiya-jitna jiya--jo man aur aatma se en ke liye kar diya---who sub bhul kar aage bar chuke hai...jeewan ka shaswat satya hai yeh----jis jagah aaj hum hai-kal yaha koi aur tha--aur ab jo jagah hum chor de ge,who phir kisi aur ki ho jaye ge...bus fark sirf soch ka hai...
                                             Maan sammaan dusro ne diye,es samaj ne diye----par apno ne nahi diye,to kya hua ????? hum shayad un ki soch mai shamil nahi the--hum un ki soch mai ab shamil hona bhi nahi chate.kuch aise hai,jo kahne ko apne to nahi hai,par unho ne hamare ashisho ko,hamari duao ko apni zindgi bana liya hai...bus kahi dur ---bahut dur koi hume bula raha hai---bahut pyar se------shiteez ke us paar.....

Sunday, 1 June 2014

सुबह का वादा .. जो चल रहा है उस को चलने दो..

ठीक वैसे जैसे कोई चाहे...

पर तुम वो करना जो अातमा से वादा किया है........

औऱ जिस वकत तक किया है......
                                              आमीन
mujhe har haal mai,aage jana hai....

bachpan ke es shook ko pura karna hai...

koi hai jis ko wada kiya hai,es khawab ko pura karne ka...

phir yeh karwa bhi to ab sath mere hai....

              sukhriya dosto....

RUFTAAR..... .

Gilee reth par pavo ke nishan..dur tak chalne ke nishan....vibha un pavo ke nishno ko bahut acchi tarah pahchanti thi...kyu ki who us ke wajud ko acchi tarah ander tak janti thi..barso ke ahsaas se--barso ki yaddo ke--phir barso ki apni aatma ki awaz mai dabe hui--us chare ko andar tak janti thi..koi kuch bhi kahe--who ak aurat ke sath sath --ak who shakshiyat thi--jise khud se--khud ke liye insaaf karna atta tha.ha..who gilee reth par pairo ke nishan ------vibha beman se udhi aur baramade mai aa kar baith gaye..barish ke jane ke baad us ke gilee ahsaas ko mahsus kar rahi thi...aaj puranmasi hai...ha us din bhi puranmasi thi..kaise bhul sakti hai,jeewan ka who sach-------vivek-- us ka sarvang,jo us ke liye jeewan ka who sach tha,jo us ko vibha ko,us ki kamjori ke bawjud bhi pyar karta tha..achanak vibha ki ankho se ansu chalak aaye.apne sharir ke ander ke chipe sach--chipi kamjori ko mahsus karti hui,who din yaad aaya,jab who sach un dono ke samne aaya tha....
      Vibha ne vivek se prem vivah kiya tha.pyar ka iijhaar vibha ne mandir ki dalheej par kiya tha.kaisa sanyog tha || vivek aksar mandir atta tha aur vibha to roj hi jai thi.na jaan na pahchan,par shayad kudrat ke khel kaha kab kis ko mila de,koun jane....yaad kiya mandir mai puranmasi ki aarti ke waqt ,dono paas paas khare he.bhir bahut jayda thi,logo ki dhakka mukki ke beech---who dono kab sath khare ho gaye,kisi ko pata nahi chala dhayan tab tuta,jab pandit jee ne aarti ke waqt dono se yeh kah diya ki bhagwan satyanarayan tum dono ki jori banai rakhe.bahut pyari jori hai.aur vibha ke sar par hath rakh kar us ko sada suhagan hone ka aashirwaad de dala.achkacha kar vivek ne vibha ko dekha to vibha ka chara sakte mai tha.parsaad le kar jab who bahar nikle,to pahli baar dono ne ak duje ko dekhaphir dono apni apni ruftaar se gujar gaye.ha par dono ke dimag mai ak kashamkash thi.dono raat bhar so nahi paye.phir es ke baad kuch din vibha mandir nahi ja paye. apni car se chalte hui ,ak nazar mandir ko bahar se dekh leti.aur vivek us ka dimag to suhnay tha..par itna sachet jarur tha ki who vibha ko dundh raha tha..kyu ? kis liye ? udhar vibha ka dimag bhi suhnaytha--par sachet itna jarur tha ki vivek se milne se katra raha tha..par kudrat ka faisla kab kaha de jaye---- koi nahi janta...kai dino baad dono phir mile..mandir ki sarak jaha khatum hoti thi waha..dono aamse samne the----nishaband....bahut dher ke baad --vivek hi bola...''kaisi ho' vibha ne bahut dher baad soch kar kaha 'mai teek hu,aap kaise hai ?' phir ither uthar ki baato ke baad,vivek ne us se mandir na aane ka karan pucha.'' tabiyat teek nahi hi '' vibha ne palke jhuka kar kaha...'' kyu kya hua ?'' vivek chintit tha. '' yu hi kuch khas nahi '' vibha phir chup ho gaye....ghar aa kar dono hi samajah nahi paye ki koun si dor hai,jo un ko kheech rahi hai..par waqt ki aisi ruftaar ki pandit jee ne--vivek ki mata jee ko shikayat ki----ki aap ne apne bete ki shadi mai mujhe nayota kyu nahi diya ???? maa choki ''pandit jee abhi shadi kaha??? ladki to aap ko dhundni thi '' ''phir who koun thi '' pandit jee ne sari baat vistaar se batai..maa ki anbhavi ankhe us ladki ko dekhna chati thi..kisliye ?? waqt ki ruftaar ne kadam badai aur pandit jee ki galatfahmi ne maa ko un ki bahu dila di..aur vivek ko pa kar vibha nihal ho gaye..shadi ke do saal kab udh gaye,pata hi nahi chala..maa chati thi ghar mai kilkariya gunje.waqt ki ruftaar ak baar phir gujar rahi thi..char saal phir nikal gaye.maa nirash ho chali thi..vivek maa ke kahne par vibha ko le kar doctor ke paas gaya..''yah kabhi maa nahi ban sakti'' doctor ki awaz ne un dono ko hila diya..vivek es liye dukhi nahi tha ki vibha maa nahi ban sakti.bus who to vibha ko dekh kar hi dukhi tha...aur maa us ka kalejakaap udha..waqt ak baar phir ruftaar se udha aur phir dus saal baad ja kar ruka..maa es douraan es duniya se chal basi.vivek vibha ki duniya mai maa bahut aham thi.phir un ka who intejaar ----kilkariyo ka  intejaar ----vivek aur vibha ko rula rula jata...vivek ko vibha se koi shikayat nahi thi...bus who to hamesha ki tarah --us ke jeewan mai--khushiyo ke rang bharna chata tha--par vibha ke andar ka tufaan --us ko kachot raha tha..who vivek ki maa ka sapna pura jo nahi kar paye thi...so aksar udas ho jati thi..panch saal ka lamba waqt phir nikla.vivek ke paas sub kuch tha...vibha--ak pyari se patni--ak safal gharani...who kisi bhi kimat par vibha ko khush dekhna chata tha...aur vibha bhi apni kamjori --apne dukh ko khud mai dafan kar--vivek ko har tarah khush dekhna chati thi.
              phir ak baar vibha ki nazar,us gelee reth par pare pavo par pari...ansu ki bunde us ke galo par latak aaye.ha who barish ki bundo ke ander apne ansuo ko milati rahi..itna milati rahi ki kab us gelee reth par ---ak baar phir pavo ke nishan aate dikhe..par ab barish ki ruftaar tez ho rahi thi.aur es ruftaar ke sath sath us gelee reth par---who pavo ke nishan ---jo us ke vivek ke the...aa kar us ke pavo se mil gaye..ak masum se puchi--us ke galo pe hui---par who vivek ki nahi thi....vibha ki nazre udhi aur who haairaan thi...waqt ki es ruftaar ne  un dono ke pariwaar ko pura kar diya tha.vivek ka yeh chokane wala waqti ruftaar us ko,us ki vibha ko-----masum bacchi dila gaya... jo vivek us ke liye anathalaya se laya tha...
              vibha waqt ke faisle se bahut khush thi.bahut khush....Bhagwan ka sukhriya ada karti hui,,,who vivek aur masum kali ke sath jeewan ke rangeen sapne bunne lagi.....
वो एहसास तेरे छूने का,रूह मे अब तक कायम है....

बरसों बीत गए है साहिल,दरद आँखो मे अब भी कायम है....

कौन कहता है तू दूर है मुझ से....

एक जहान् औऱ भी,जहाँ तेरा इनतजार अाज भी कायम हैै...
वो एहसास तेरे छूने का,रूह मे अब तक कायम है....

बरसों बीत गए है साहिल,दरद आँखो मे अब भी कायम है....

कौन कहता है तू दूर है मुझ से....

एक जहान् औऱ भी,जहाँ तेरा इनतजार अाज भी कायम हैै....
उस चेहऱे मे कुछ था एेसा,कि दिल ने कहा....य़ही है वो.....

उस आवाज मे ऐसी थी खनक,कि दिल ने कहा....यही है वो.....

रूह से निकली यह सदा,तू मिल गया है मुझे एक अरसे के बाद...

दुनिय़ा ना पहचाने,मगऱ मेरी रूह ने कहा....यही है वो......

Saturday, 31 May 2014

वो भी एक शाम थी,यह भी एक शाम है..

तब आँखों मे नमी थी,पर आज आँखो मे खुशी है..


वो वकत कुछ औऱ था,य़ह वकत कुछ और है...
सिरफ बदल चुकी है,नजरो की फसल....


हम अकेले ही चले थे अपनी ऱाहो को सवाँरने के लिए,

कुछ दोसत बनाए थे,राहो के निशाँ बताने के लिए,

वकत का रूख कुछ बदला एेसे कि हम ने तो बस बताए थे निशाँ,

पर इन दोसतो ने हमारी राहो को ही आसाँ कर दिया
मै तहेदिल से उन सब का शुकरीय़ा अदा करती हूँ,जो सचचे मन से मेरा साथ दे रहे है

और सचची दोसती का फरज निभा रहे है......

      एक खूबसूरत सी दुआ अपने इन सभी दोसतो के लिए.....
कया पता कल यह सुबह हमारी हो...ना हो...

बस तुम खुश रहो दोसतो...यह जिनदगी फिर हो...ना हो...

          शुभ रात्री.....
मेरा दिल कहता है,तू मेरे आस पास है,कभी जिसम मे तो कभी जान मे साथ होता है.

किसी का साथ नही चाहिए,कयो कि तेरे साथ के बाद अब कोई नाम नही चाहिएो
हर दुआ कबूल हो,एेसा होता तो नही...पर हर दुआ मे शिददत का असर हो,

तो वह दुआ कबूल हो जाती है,परवरदिगाऱ के पास लेखा जोखा होता है हमारे

करमो का,जहाँ इनसान ने हर शिकन हटाई,कुदरत ने इनसाफ की चादर बिछाईओ

Thursday, 29 May 2014

एक वजह हम थे,एक वजह तुम थे,जीवन जीने के लिए...तुम नही तो जिनदगी कुछ

भी नही..कई तूफान बिखरे है इनही राहो पे..पर चलने के लिए रासते मिलते ही नही...
पहले खुदा----भगवान् का दरजा देते है लोग,पावोॅ को छू कर आसमान पे बिठा देते

है लोग..उन के इशारो पे चलो तो मुहबबत बना देते है लोग,लेकिन जब अपनी पनााहो

मे जिओ,तो धऱती पे गिरा देते है------यही लोग

Wednesday, 28 May 2014

तुमहारे रूखसत होते ही,बहुत टूटे है हम.जिस जिस पे भरोसा किया,उन सब ने तोडा है

हमे.हर रिशते को हम मे खामिया नजर आई है,इलजाम हम पर लगा कर,खुद ही

धोखा देते है लोग.अब तो किसी रिशते पे यकीं करते ही नहीं..इतने दरद के बाद,डरते

है इतना कि अपने साए पर भी यकीं नही करते

Tuesday, 27 May 2014

THANKSSSSS... for supporting me...





SUKRIYA.........mera sath dene ke liye
रासते बनते नही बनाए जाते है,

काफिला एक से नही बहुत लोगो से बनता है

खुद चलने की ताकत हो तो काफिले

भीड मे बदल जाते है

JEEWAN DHARA ..

Sham ke dhundlake mai reena baramade mai baithe the..apne attet ki yaddo mai lipti--us ka beeta hua kal us ke aaj par bhari na ho jaye,who satarak rahti thi..par barso ki who yaadey,who dukh sukh ke hazaro pal---
satish aaj us ka pati hai,,us ka wartmaan..aur nikhil us ka bhutkaal..par nikhil ke pyar aur sambandh ki ak
kari---neetu..ankhe bhar aaye reena ki....aur attet ke panne dar-b-dar khulte chale gaye...
         college ke pahle saal mai us ki mulakat nikhil se hui,,who mulakat achanak pyar mai badal gaye ho,aisa to nahi hua..par roj roj ki mulakate jarur use nikhil ke karib le aaye who B.A.first year ki student thi,aur nikhil second year mai tha.apne apne lecture attend karte karte ...apne apne room jate aate who dono kab pyar karne lage..reena nahi jaan paye.college ki parai ke who teen char saal uddan bharte beett  gaye.nikhil  aage ki parai ke liye videsh jana chata tha...par reena apne pyar ko--bandhan ka roop dena chati thi.nikhil apne mata pita ki akloti santaan tha--aur reena teen bahno mai sub se bari..pita busniessman.maa ak safal gharani.nikhil ke pita sahar  ke jane mane wakil the--maa doctor.reena ne nikhil se shadi ka parstaw rakha.who chati the ki nikhil videsh jane se pahle us ki maang ka sindur ban jaye.ak aam  bhartiya nari ki tarah,who bhi ak sukhi pariwar ki kalpana kar rahi thi.nikhil aur reena bhavishaya ke sapno mai dubna chate the..nikhil ne reena ko ashwasan diya ki who mata pita ko shadi ke liye mana le ga..reena ki umeede puri hui,
aur nikhil ne ak din apne mata pita ke sah reena ke ghar aa kar,us ke mata pita se us ka hath maag liya.reena hairaan thi ki who sapna---jo who soch rahi thi---ak dum sakaar ho raha tha...
           Hazaro duao aur band bajo ke beech reena apne nikhil ki dulhan bani us ke ghar aa gaye nikhil ke mata pita ne use man se savikara.who behad khush thi.zindgi ka who safar itna khubsurat laga ki reena khud ko duniya ki sub se jayda bhagyashali aura manne lagi....''Madam aap ki chai' noukrani ne reena ko sham ki chai de.to reena ki vichar shirkakhla tuti..par man to phir se aeet ke panno mai gum ho gaya.nikhil ke sath who saat mahine kaise nikal gaye,pata hi nahi chala.ak din reena ko ahsaas hua ki who maa banne wali hai.who khushi sare ghar ko mahka gaye.nikhil ko laga us ki videsh yatra ko safal bannane ka sandesha aa gaya hai.nikhil ko jab jana tha tab reena ki delivary ka waqt tha,par us ka jana jaruri tha.us ko videshi company bahu accha offar de rahi thi.who bhi sirf do saal ke karyakaal ke liye...
              Nikhil chala gaya,par jate jate reena ko hazaro hidayate de gaya..reena khush to thi  ki nikhil ko ak bahut bari videshi company ka offar aaya hai,who bhi reena ki maa banne ki khabar ke sath..par do saal..reena udas ho gaye..-------- waqt kabhi kisi ke liye nahi rukta..reena ne waqt aane par ak sunder si pyari beti ko janam diya..naam neetu....nikhil reena ki masum neetu...nikhil behad khush tha...who din mai bahut baar phone karta.apni beti ke har pal ko camere mai kaid karne ki hidayat deta...----- ateet ke bure panne reena ki ankho mai ghum gaye..... dhirey dhirey nikhil ke phone aane kam ho gaye...neetu ke liye us ka utsah dhumil hone laga..kyu ?? pahle to sub ko laga ki nikhil jayda wayasat ho gaya hoga..par jab us ki awaz ka roop badalne laga to reena ko,us ke mata pita sub ko ajeeb laga.neetu ki dekhbhal karte karte reena ki ankhe bhar aati...ak anjani aashanka ke sath. neetu ka pahla janamdin tha...reena ne phone kar ke nikhil ko yaad dilaya ki neetu hamari ak saal ki ho gaye hai.par nikhil ki awaz mai who jadu,who khanak nahi thi .KYU????
mata pita dukhi the----sambandho ki dor par ----dhage khisak rahe the.do saal do mahine baad nikhil wapis lout aaya...par ak anjaani videshi mahila ke sath.maang mai sindur,kimiti sari pahne--who aurat nikhil ki patni thi..reena jaise andhe kuai mai gir pari.kya ak rishta itni jaladi khatum ho sakta hai ??? us ka nikhil kisi aur aurat ke sath..pyar vishwaas ke rishto ke dhage chor chor ho gaye.nikhil  ke mata pita sakte mai he....apni beti neettu ko goud mai lete hui who nikhil ke haaw bhaw bhi nahi dekh paye...who ab es ghar mai nahi rah sakti.ak drir nishchai kar ke who apne mata pita ke paas lout aaye.jeewan ka karwa sach akdum samne tha.tute hui sapne the.par apni beti ka moh......apne tute hui sapno aur bhari man ke sath reena apni neetu ki parwarish mai jut gaye..aur khud ko us ki masum hasi mai samait liya...din mahino mai,mahine saalo mai--waqt gujarta gaya.reena ne apni maa ki dekh rekh mai neetu ko chor kar ak noukri shuru kar lee.yaha kismat ne us ka sath diya aur who jaladhi ak uchee pad par niyukat ho gaye.us ki kismat ne ab tak jitna dhoka dena tha,diya..par ab,,office mai ab boss ke roop mai satish,jo us ki manodisha janta tha....har kadam par us ke sath thabehad shaleenta aur sabhayta ke sath satish us se baat karta.pata nahi kab aur kaise dono mai pyar ho gaya.par yeh pyar ak jimmedari se jura pyar tha.ak baar phir satish us ke ghar ki chokhat par khara tha,,reena ka hah magne ke liye...maa hairaan thi aur pita satambh...aur reena khud apni kismat par bharosa nahi kar pa rahi hi...maa ne neetu ko apne paas rakhne ka bharosa diya.par es se pahle ki reena kuch kah pati,,satish ki awaz aaye----neetu ab meri beti hai.meri lado...reena ki ankho se ansu bahne lage.satish ki baho mai who khushi ke ansu baha rahi thi.ansuo ka sailaab bah raha tha....
        Ateet ke darwaje se reena nikal aaye.ab bhi cheraansu se tar batar tha.jaise who ak chalchitar dekh rahi ho....''mumma aaj ka din bahut khubsurat tha--mai apni interview mai safal rahi...papa is great----my papa is very great...satish ka bharpur pyar paa kar neeu behad khush the....aur reena subb kuch bhul kar zindgi ke sukhad rango mai jeewan jee rahi thi.......

Monday, 26 May 2014

अपने तमाम शुभचिनतको को .. दुआऔ भरा सलाम....

नई सुबह मुबारक हो......
तू साथ है मेरे तो हर दरद से गुजर जाए गे हम,वकत और हालात की मार को भी सह

जााए गे हम...ऱिशते फकत एक नाम ही नही,हर कदम जो साथ चले,

दूरियो को मिटा दे,उस पयार की परवान चढ जाए गे हम....

UDDAN

Mandira ki umar mahaj saat saal the,jab us ke pita ka nidhan hua tha.pariwar mai us ki       maa ke elawa ak chota bhai tha..pawan..umar mahaj panch saal.garibi se jhugta hua yeh pariwar…jaha pita majduri karte the aur maa gharo mai bartan maaj kar pariwar chalati the..do waqt ki roti ka jugar karte karte,mata pita ke samne apne dono baccho ke liye sapne itne utche the,ki shayad aise sapne kisi samrith pariwar ne hi apni aulad ke liye dekhe ho.un ko pura karne ke liye pita din mai majduri karte aur raat ko chokidaari ki noukri karte.par itne kaam ki thakaan ka itna bhogh…pita ka sahrir sah nahi paya aur akdum jo morchit ho kar gire,to hosh mai nahi aaye.us din ko yaad kar ke mandira ki ankhe bhar aaye.chote bhai ko sota dekh kar holey se use pyar kiya,phir maa ko dekha,jis ki ankho ke ansu abhi thame nahi the.kahne ko mandira khud bhi bacchi thi,par kahte hai na ki garibi ki aur dukho ki maar waqt se pahle baccho ko bara kar deti hai..
             Mandira ne khud ko bhula kar ak nirney liya ki who bhi maa ki tarah logo ke gharo mai kaam kare ge.ghar chalane mai maa ki madad bhi hogi aur bhai ki bhvishaya waisa hi banai ge,jaisa maa pita jee ne socha tha.nanhi se jaan yeh bhi jaan gaye thi ki jeewan ka yeh lakshaye hasil karna asaan nahi hai.par jab darah nishaye ho to har namumkin ko mumkin banaya ja sakta hai.garibi aur dukho ki maar ne mandira ko mehnati aur bahadur banne par majbur kar diya.
             Maa ke behad mana karne par bhi,mandira ne kaam karna jaruri samjaha.maa jaha kaam kari thi,usi ke sath wale ghar mai teen baccho ka pariwaar tha.jaha do saal ke bacche ki dekh bhal ke liye kisi ladki ki jarurat thi.baki ke dono baccho ko tution parane teacher aate the.mandira ne bacche ko bakhubi sambhala.us ki kabiliyat se khush ho kar maalkin ne us ko bhi khali waqt mai parne ke liye prerit kiya.mandira apne tej dimag ki wajah se sub sikh jati.par us ke jeewan ka laksahye apne sath sath apne chote bhai ko bhi shikshit karna tha,ghar aa kar pawan ko parati.sath hi use mata pita ke sapne ko pura karne ka nishchai bhi batati..dhirey dhirey pawan bhi bahan ke kahe anusar parai mai dhayan dene laga.par kya sapne purey kar pana itna asaan hota hai,who bhi itni garibi mai…..bahut hi himmat kar ke mandira ne apni malkin ko bataya ki kaise us ke pita hum dono baccho ko uche pad par dekhna chae the.who un ka mahan sapna tha…..par mai akeli kya kar sakti hu ???? maalkin divya bahut nek aurat thi…who mandira mai,us ke bhai mai apne hi baccho ka hi roop dekhti thi.unho ne mandira se wada kiya ki who us ke aur pawan ke liye har bharpur madad aur koshish kare ge..maa khush the ki un ke naseeb mai jo kuch bura tha……who ab ak nek aulad ke roop mai……mandira—pawan the divya ki madad,sahare aur hoasley ne dono baccho ko schooli shiksha dilaye.maa un ki kartagya thi…
               Jaise jaise waqt chalta gaya,mandira aur pawan awwal aate rahe.apni khud ki mehnat se un dono ne apne mata pita ka naam roshan kiya.sochalarship ki madad se dono aage ki parai puri karte gaye.mandira apni malkin divya ko ak maa jaisa sammaan deti thi.aur divya ne bhi un dono ko kisi bhi tarah paraya nahi samjaha.who dono un ka garur the…divya ki mehnat,mandira ka pyar dular,,en sub ne pawan ko itna kabil bana diya ki sarkar ne us ko aage ki parai ke liye videsh bheja..pawan apni malkin,apni maa aur apni bahan ke es balidaan ko mahsus karta tha.teen saal baad jab who apni parai puri kar ke louta to maa us ko pahchan nahi paye.ak khubsurat insaan louta tha,,ak khubsurat seerat ke sath.par pawan maa ke diye sanskaaro ko nahi bhula tha.us ne apni maa aur apni malkin ke charan saparsh kar ke apni maa ka beta hone ka sabut de diya..mandira aur divya ke chare ki chamak un ki mehnat ko darsha rahi thi…

             Kahte hai na ki jab tak here ko gisha na jaye tab tak who sirf ak pathar kahlata hai.par pawan to ab ak tarasha hua heera tha,jis ki chamak ko dur dur tak phalna tha..maa ne apne aur apne pati ke sapno ko pura hote dekh kar santosh ki sans lee.mandira ko to jaise pankh lag gaye,jab divya ne bataya ki pawan ko videshi company mai ak bahut unche pad ke liye select kar liya gaya hai..aaj apne aur pati ke sapno ko uddan bharte dekh kar maa bahut hi khush thiaur es liye bhi ki pawan aaj itna subb mil jane par yah nahi bhula tha ki yeh sub us ko us ki maa ki duao ,divya malkin ki mehnat aur apni bahan mandira ki wajah se mila hai…..pawan ne apne pita ki tasvir kea age parnaam kiya….aur ak baar phir maa ke kadmo se lipat gaya..aur dua lene ke liye……