Monday, 18 September 2017

यह कलम जब जब तेरा नाम लिखती है....आँखों मे आंसू आ जाते है और ज़ुबाँ खामोश हो जाती है

बिखरे है अनगिनत शब्द मेरी लिखी हर किताब मे....गरूर से भरा है प्यार मेरा तेरा, मखमली भरे

किसी अनोखे से जवाब से.....मुस्कुरा देते है जब जब तेरा नाम,सुनहरे सपनो से जोड़ लेते है.....क्या

कहे इस कलम से,कि पास हो हमेशा तेरा वज़ूद और यु ही तेरी ज़िन्दगी को अपनी ज़िन्दगी से जोड़

लेते है...

Sunday, 17 September 2017

कभी हसरते,कभी जलजले,कभी सैलाब बनते है आंसुओ से यहाँ----कही कोई उदास है ज़िन्दगी से यहाँ

तो कही रेत के महल ढह रहे है यहाँ---मुश्किलों के दौर मे रो रो कर बेहाल हो रहा है कोई----तो कही

बेवफा ज़िन्दगी का जश्न मना रहा है कोई----मायने समझ लेते जो जीने के,तो यू तन्हा न रहते---

इम्तिहाँ बहुत बहुत लेती है यह ज़िन्दगी,फिर क्यों न कहे कि ज़िन्दगी तुझ से शिकवा तो कोई भी

नहीं----जीने का अंदाज़ जो सीखा होता तो कोई सदमे मे ना रहता,न ही सैलाब बनते आंसुओ से यहाँ 

Friday, 15 September 2017

छन छन छन छन ----- यह पायल तेरी क्यों सोने नहीं देती ---- बजते है कंगन और चूड़ियाँ... दिल को

चैन लेने क्यों नहीं देती ----- यह बिखरे बिखरे काले गेसू... सुबह को आने क्यों नहीं देते ---- यह तेरी

हॅसी जान ले जाए गी मेरी...फिर ना कहना कि तू तो जान थी मेरी ----कुछ रुके से कदम कुछ बहके से

अंदाज़ ....रफ़्तार तेरे चलने की क्यों मुझे सम्भलने  ही नहीं देती -----

Thursday, 14 September 2017

आप जीने की वजह बनते रहे और हम--- साँसों की मोहलत लिए आप से मुहब्बत करते रहे---हवा के

झोको मे ऐसी कशिश देखी नहीं,बादल जो अब बरसे वैसी बूंदे तो कभी बरसी ही नहीं----किसी ने दे कर

वजह जीने की,मुस्कुराना हमे सिखा दिया----आईना देखते है बार बार,कि सूरत अपनी से ही प्यार करना

सिखा दिया---यू तो ज़ी रहे थे बेवजह,आप के प्यार मे डूबे इतना कि मुहब्बत को मुहब्बत की नज़र से

दीदार बस करते रहे----

Wednesday, 13 September 2017

आ पलट कर देख ज़रा,कि ज़िन्दगी फिर लौट कर ना आए गी---ज़माना क्या कहता है,लोगो की नज़र

क्या कहती है----कोई मुकम्मल नहीं होता,कोई खुदा भी नहीं होता---कदम कदम पे राहे रोक देते है यह

दुनिया वाले,रोने पे कभी भी मज़बूर कर देते है यही ज़माने वाले---उदास ना हो कि खुशिया झोली फैलाए

आज भी मुखातिब है हम से,दिल के आँगन मे रूह से बंधी खुशबुए खड़ी है ज़िन्दगी बन के----तभी तो

कहते है कि पलट कर देख ज़रा....पलट कर देख तो ज़रा------

Sunday, 10 September 2017

पायल बजी भी नहीं,पर झंकार सुनाई दे गई---कंगना पहने भी नहीं,पर आवाज़ क्यों सुनाई देने लगी---

आंखे तो अभी झपकी भी नहीं क्यों सपनो की आहट आने लगी---अज़नबी राहो पे थे क्यों लगा कि

हमनवां कही साथ है---बरखा कही बरसी नहीं बस भीगे है किसी अहसास से,ऐसा गुमा बस होने लगा---

खिल उठे बिन बात के,मुस्कुरा दिए बिना ज़ज़्बात के----यारा क्या यही प्यार है कि कोई बोला भी नहीं

और आवाज़ सुनाई दे गई---

Saturday, 9 September 2017

हवाएं दस्तक नहीं देती,बस बहा करती है----कभी आसमां से सितारों की तरफ तो कभी ज़मी को चूम

लेती है---सर्द हवाएं  अक्सर रिश्तो को पास ले आती है,गर्म सांसो को मुहब्बत मे पनाह दे जाती है----

बदले बदले रुख से ज़माने को बेखबर कर जाती है,यू ही नहीं कहते कि हवाओ के रुख से अक्सर लोग

गुमराह हो जाते है---कभी बेबसी मे तो कभी नशे मे चूर इन्ही हवाओ मे बह जाते है-----