Saturday, 21 October 2017

तूने जो दिया ज़िंदगी मुझे,वो क्यों मुझे रास नहीं आया....हर तरफ है धुआँ धुआँ,हर इंसान पाक साफ़

क्यों नहीं दिया...चाहतें है बहुत महगी,प्यार दुलार किसी को समझ क्यों नहीं आया....हर बात से बात

निकालने वाले,मन की अनमोल कथा को इन्हे पढ़ना क्यों नहीं आया...बूंद आंसू की क्या कहती है,दर्द

की परिभाषा इन की किताब मे शायद कभी कोई बयां कर ही नहीं पाया...कभी पत्थर,कभी दौलत तो

कभी बेजान सवालो का हिसाब खतम ना हो पाया..सच मे ज़िंदगी,यह सब मुझे बिलकुल रास नहीं आया...

Friday, 20 October 2017

फूलो की वादियों मे जो धरा आज पाँव हम ने,ज़िन्दगी के खुशनुमा होने का एहसास ताज़ा हो गया---

गुजरे जब महकती खुशबू के पैगाम से,खुद के खूबसूरत होने का एहसास हो गया----वो कहते है कि

निकला ना करो सर्द मौसम मे,यह वादिया कभी कभी बहक भी जाती है----छू ले गी मेरे महबूब को

और इलज़ाम किसी के नाम कर बैठे गी----हम तो यह सुन कर भी मदहोश है,कि हमारे कदमो की

चाप भर से उन्हें हमारी फ़िक्र का एहसास तो हो गया---- 

Monday, 16 October 2017

दोस्तों...हमारी हिन्दू संस्कृति मे त्योहारो का बहुत महत्व है..दीपावली राम जी के आगमन की ख़ुशी के लिए मनाई जाती है...क्या अब इन त्योहारो के मायने सच मे हमारी संस्कृति या भगवान के नियमो के अनुसार होते है..कदापि नहीं...अब यह त्योहार रुतबे और दौलत को मद्देनज़र रख कर निभाए जाते है...तोहफे भी दिए जाते है तो दूसरे इंसान के रुतबे के हिसाब से कि जो हम दे गे उस के बदले मे वो कितना लौटाए गा...लोग खूब खरीददारी कर रहे है,खुद को दुसरो से बेहतर जताने के लिए पैसो को बहाया जा रहा है....उस मे कही भी संस्कारो की छाप नज़र नहीं आती..आप दुकान पे है और एक गरीब भूखा इंसान गिड़गिड़ा कर आप से कह रहा है कि कुछ खिला दो..हम मे से कितने लोग होंगे जो उस गरीब को भरपेट बढ़िया सा खाना खिलाये गे ??या सम्मान से उस को पैसे ही दे दे गे ? दोस्तों..मेरी नज़र मे उस गरीब को भरपेट खाना खिलाना ही त्योहार मानना है..बजाय इस के कि उन लोगो को तोहफे बाटे जाये जहा सिर्फ और सिर्फ दिखवा भरा है..झूटी हसी मे जलन भरी है..एक दूसरे की बुराइओं मे वक़्त और त्योहार मनाया जाता है...दोस्तों..मेरी बातो से किसी को बुरा लगा हो तो माफ़ी चाहती हु ...आप जो मर्ज़ी कीजिये बस मेरी गुज़ारिश है आप सब से कि कम से कमएक गरीब को भरपेट भोजन जरूर खिलाये...इतना काफी है इस समाज को ऊपर  उठाने के लिए...शुभ रात्रि दोस्तों..शुभ कामनाये ...

Sunday, 15 October 2017

हमारी शोख अदाओ पे उन का यह कहना कि उर्वशी बन कर मेरी जिंदगी मे आ जाओ अब----रातो की

नींद उड़ा चुकी,अब दिन का चैन उड़ाओ मत---तन्हा तन्हा रहते है,कुछ खुद से खफा खफा भी रहते है---

तेरे कदमो की चाप अक्सर दिल मेरा घायल कर जाती है----फूलो की खुशबू तेरे जिस्म की गंध याद दिला

जाती है---देखी अपनी सूरत जो आईने मे,खुद पे ही प्यार आ गया----यक़ीनन तेरी जिंदगी मे उर्वशी बन

आने का वक़्त भी आ गया-----

Saturday, 14 October 2017

कह दिया ज़िन्दगी तुझ से,तेरी नियामतों के हम तो कायल हो गए....करते है शुक्रिया तुम को,कि लफ्ज़

अब और ज़ेहन मे ख़तम हो गए.....हर सुबह होती है जब,नई साँसों के आगाज़ से....खिल जाता है

तन-मन और इबादत मे जुड़ते है हाथ खुद-ब-खुद  विश्वास से.....बहुत है दर्द-बहुत परेशानिया भी है

लेकिन दाद देते है तुझे फिर भी ज़िन्दगी,देती है कुछ ऐसा खूबसूरत कि कहना पड़ता है..तेरी नियामतों

के हम तो कायल हो गए....

खुदा तो किसी इंसा मे फर्क नहीं करता....मुकम्मल बनाता है सभी को,इबादत का हक़ भी सब को देता है --यह तो इंसा है जो खुद को खुदा से जय्दा उम्दा मान लेता है....गुनाह की आड़ मे खुद को बेकसूर कहता है...ओह ...परवरदिगार मेरे .... रहम कर अपने इन बन्दों पे,दौलत और हवस की आग मे यह भूल जाता है कि आखिर जाना तो एक दिन तेरे ही पास है...दौलत के ढेर पे बैठ कर खुद को शहंशाह मानने लगता है...यहह अल्लाह...ना यहाँ कोई दोस्त है ना अपना कोई साथी है...तेरी दुनिया मे सिर्फ और सिर्फ धोखा है.....

Wednesday, 11 October 2017

बांध ना बंधन मे मुझे,आसमाँ को छूना अभी बाकी है----कुछ खाव्हिशे अधूरी है अभी,कुछ रस्मे अदा

करनी अभी बाकी है---ख़ाली  ख़ाली है यह ज़िन्दगी अभी,कुछ रंग भरने अभी भी बाकी है----इंतज़ार की

हद होगी कितनी,तन्हाइयो मे इस का हिसाब करना बाकी है----सजने सवरने के दिन कभी तो आए गे

उस से पहले किसी की नज़र उतार ले,यह अहम् मौका आने को अभी तो बाकी है-----