Tuesday, 23 January 2018

रिश्तो की परिभाषा लिखने के लिए,यह कलम जब भी उठाते है---एक सिर्फ तेरे ही नाम के सिवा हर

रिश्ते को भुला जाते है----प्यार देते रहे हर उस इंसा को,जो मेरे वज़ूद से जुड़ा रहा----उस प्यार मे

सिर्फ और सिर्फ देने का जज़्बा बना रहा----दौलत शोहरत पाने के लिए,कुछ रिश्तो ने मुझ को अपमान

दिया---मेरे वज़ूद को ठुकराया और खुद को ज़माने मे पाक साफ़ नाम दिया---टूटे तो फिर इतना टूटे कि

रिश्तो को सिरे से नकार दिया----खुद की राहें ढूंढी और इस दिल से जज्बातो को अलविदा कहा----आज

जाना कि ख़ुशी होती है क्या---सकूँ से जीने के लिए तेरा नाम ही नाम,बस याद रहा-----

Sunday, 21 January 2018

ज़िंदगी की खूबसूरती को प्यार करने के लिए,तेरा नाम जरुरी है-----तेरे नक़्शे-कदम पे चलने के लिए

उन तमाम वादों को निभाना भी जरुरी है----तेरे दिल ने मेरे दिल को छुआ,इस का एहसास समझना

हम दोनों के लिए कितना जरुरी है----समाज के दायरों को भुलाना और फिर बिंदास जीना,खुद की

ख़ुशी के लिए निहायत जरुरी है----पलके ना भीगे कभी,चमक आँखों मे प्यार की रहे यू ही---आ गले

लग जा कि इस रंगीन सुबह को सलाम बजाना भी तो जरुरी है ------
दूर बहुत दूर...जहां आसमां ख़त्म  हो जाए गा----धरती की वो तह...जहां उस का वज़ूद रुक जाए गा ----

इंसानी फितरत की वो हवा...जहां मुहब्बत का नाम रौंदा जाए गा-----तुझ तक पहुंचने के लिए इन सब

को हर हाल मे पार किया जाए गा-----जिस्म को तो एक दिन इसी मिट्टी मे मिल जाना है----रूह को

तुझ तक आने के लिए,इन सभी को पार कर जाना है---किरदार बदल जाया करते है,पर सवाल रूह पे

कौन उठाए गा----मुहब्बत को पाने के लिए इसी रूह का नाम ज़न्नत मे भी पूजा जाए गा -----

Friday, 19 January 2018

ना कर शर्मिंदा मुझे दे कर दुलार इतना,ज़माना तकलीफ मे आ जाए गा---ना उठा नाज़ मेरे हसीन

नखरो के,मेरा बचपना लौट ना पाए गा----मेरी नींद के हसीन सपनो को अपनी ख़ामोशी का रंग दे

कर,इतना गुमान मुझ पे ना कर..तेरा दिल मुझी को सोचने पे मज़बूर हो जाए गा---शाखाओ से टूट

कर फूल फिर खिला नहीं करते,ना दुलार मुझ से इतना बड़ा कि मेरे खामोश होने से यक़ीनन तू बिखर

जाए गा -----

Thursday, 18 January 2018

बहुत सर्द हवाओ का मौसम है,कंपन से रुक रही है साँसे मेरी----तुम कहती हो जल्द चले आओ,कि

खौफ आता है इस सर्दनुमा मौसम से----कोहरे की गहरी चादर है, और रात है कि स्याही को बिखराए

है----एक आवाज़ उभर कर आई तेरी कानो मे मेरे,मेरे पास आने के लिए इतनी मोहताजी क्यों----चलते

चलो..चलते चलो....जहा तक मेरी गर्म सांसो की गर्म हवा आती है----ना अब रुके गी कंपन से यह सांसे

तेरी,मेरे गेसुओं ने  रोक ली है इन हवाओ की सर्दी------

Wednesday, 17 January 2018

तू कहानी तो नहीं ज़िंदगी की मेरी...मगर एक किरदार है नायाब सा-----खुशिया देती है दस्तक जब

जब ज़िंदगी मे मेरी,दिल के कोने मे आवाज़ होती है तेरी---दर्द बन कर कोई दगा देता है,एक ओस

की परछाई साथ तेरी होती है मेरे----कहते कहते रुक जाऊ जो कभी,लफ्ज़ो को पूरा करती है दूर से

कही आवाज़ तेरी----करिश्मे होते है,यह सुना है मैंने..मगर रूह के दायरे मे भी कोई छुप सकता है

यह अब जाना मैंने---यक़ीनन..एक किरदार नायाब सा तू है ज़िंदगी मे मेरी------
तलाशते रहे जिस मे खुद के वज़ूद को,वो यह कह कर हम से किनारा कर गए----तू मेरी आरज़ू नहीं

ना मेरे दिल का करार है --- हसरते तुझे देख कर दम तोड़ देती है,तेरे साथ मेरी ज़िंदगी की कोई ख़ुशी

कोई इकरार भी नहीं----तपती रेत की तरह बस झुलस कर रह गए हम---आँखों के समंदर मे खुद को

फना कर गए हम---यह कौन सा मक़ाम है,जो जल कर भी रोशन ना हो सकी..यह ज़िंदगी की कौन सी

शाम है----वो तो किनारा कर गए,हम मगर आज भी टूटे हुए दिल की कोई बेबस आस है-----