Friday, 13 April 2018

एक कहानी जो तक़दीर ने मेरे लिए लिखी....एक कहानी जो मैंने अपनी कलम से लिखी....फर्क दोनों

मे सिर्फ रहा इतना,तक़दीर की कहानी के आगे सर हमेशा झुकाया मैंने....लेकिन  जब कलम मेरी ने

लफ्ज़ उतारे पन्नो पर,तो किसी के सर झुकाने की आहट तक ना सुनी...कलम तो कलम ही है,जिस

का काम है लफ्ज़ो पे चलना...आहट सुनने के लिए अब कौन रुके,जब टूटे गी कलम,कहानी खुद ब खुद

रुक जाए गी ....
चाँद की चांदनी की तरह आ तुझ मे सिमट जाए....रहे ना फासला कोई,तेरे ही वज़ूद मे ग़ुम हो जाए...

प्यार की इंतिहा कितनी है,यह सवाल तुम ने कई बार उठाया था....जहा जन्मो के बंधन की कोई सीमा

ना रहे,आसमां के खतम होने का कोई अंदेशा ना रहे....जहा रूहों के मिलन मे कोई ग़ुस्ताख़ नज़र ना

बचे,जब तू मेरे सामने हो,तो कोई पत्ता भी ना हिले....तेरे इक इशारे पे यह सांसे रुकने के लिए तैयार

रहे...अब तू ही बता इसे इंतिहा कहे या तेरे सवाल का जवाब कहे....

उस मुहब्बत का क्या करे,जो तेरे साथ साथ तेरी रूह से मुहब्बत कर बैठी है.....इन नशीली आँखों

को कितना समझाए,जो तेरे लिए अपनी पलकों का आशियाना बनाए बैठी है...चूड़ियों की खनक

जानती है,कि यह इंतज़ार बहुत जल्द खतम होने को है....इन लबो की मुस्कराहट बरक़रार हमेशा

रहने को है....तेरी दुल्हन तेरे लिए क्यों ना सजे,कि मेरे मन के मीत के आने की खबर बस आने को

है....वोही लम्हा,वोही दस्तक,वो तेरे छूने की अदा...तेरी ही दुल्हन अब तेरे लिए बाहें फैलाए बैठी है  ...

Thursday, 12 April 2018

हा .. फिर से तेरे साथ जन्मो जनम साथ रहने का वादा करते है...उन्ही तमाम कमियों के साथ,एक

बार नहीं करोड़ो बार साथ निभाने का वचन देते है....ग़ुरबत भी हो या दौलत के ख़ज़ानों का अंबार

प्यार कहा देखता है इन इशारो का हिसाब....जीने के लिए इक छोटा सा घर,उस मे बसी हो तेरी मेरी

सांसो की महक...सुबह उठू तो तुझे देखु,रात तेरी आगोश मे बसे...तेरी सूरत पे मै जाऊ वारी वारी,और

तू मेरी हसी की इक पहचान रहे...काफी है यह सब हर जनम साथ निभाने के लिए...

Tuesday, 10 April 2018

ज़िंदगी चलती रही,हम भी उस के साथ साथ चलते रहे...वो कभी सुख देती रही,वो कभी दुखो का

रैला भी देती रही...भगवन से सिर्फ इतना कहा..तू जो भी दे...ख़ुशी हो या गम...सब कुछ मंजूर

हमे...उसी के नाम से बहुत कुछ हासिल किया,उसी के आदेश से दुखो मे भी जीवन जी लिया....

हर घडी खुद को यह सन्देश देते रहे,तू जो रुक गया तो ज़िंदगी भी थम जाए गी...हिम्मत का

दामन थाम ले,देखना सारी मुश्किलें भागती नज़र आए गी....
सजा रहे है नन्हे से आशियाने को,इस एहसास के साथ कि मुकम्मल होना है आज भी तेरी उन्ही

हसीन बातो के साथ.... तेरे लिए ही सजना है,तेरे लिए ही सवारना है....वादा जो दिया था तुझ को

कभी,उसी वादे के तहत हौसला-अफजाई से जीना है अभी....तेरे रूठ जाने से आज भी डर लगता है

तेरे लिए अपनी नज़र उतार ले,उन्ही होठो को आज भी वैसे ही मुस्कुराना है....दुनिया से दूर बहुत दूर

हो चुके है हम....तेरे सिवा इतना प्यार कौन लुटाए गा हम पे ,कोई भी नहीं...यह अच्छे से जान चुके है

हम.....

Monday, 9 April 2018

बहुत दूर तक यह नज़र जहा जाती है....तेरी तस्वीर मुझे वहां तक नज़र आती है....फासले ही फासले

और एक लम्बी दूरी...नज़र जब जब भी भर जाती है,उदासी मे नैनो को झर झर भिगो जाती है....फिर

ना कोई सुबह और ना कोई शाम ही नज़र आती है....आंखे जो मूंदे क्यों तेरी तस्वीर साफ़ नज़र आती

है....प्यार कोई खेल नहीं,जन्मो का इक बंधन है.....दुनिया की नज़र मे हम  भले कोरा कागज़ ही सही,

पर तेरे नाम से खुद की दुनिया सतरंगी ही नज़र आती है....