Sunday, 10 December 2017

भरी नज़र पूछती है ज़िंदगी तुझ से,आखिर ख़ुशी के मायने क्या है----क्या दौलत या कदम कदम पे

बिखरती खूबसूरती की चमक....कभी नकाब ओढ़े हुए झूठे रिश्तो की हसी,तो कभी आंसू पलकों मे

छिपाए मुस्कुराती सी छवि....ना चाहते हुए भी साथ जीने की सजा,तो कभी साथ हो कर भी अलग

होने की खता...टूटे दिल भी अक्सर जुड़ने की बात करते है,तो कही दिल जुड़ कर सदा के लिए जुदा

हो जाते है---अब तो जवाब दे ज़िंदगी,इस दुनिया मे आखिर ख़ुशी के मायने क्या है----

Saturday, 9 December 2017

राज़ कभी जो खोले दिल के हम ने,तेरी ज़िंदगी की तस्वीर बन जाए गे---ना कर इल्तज़ा बार बार मेरे

खामोश लब गुस्ताखियाँ कर जाए गे----मुहब्बत बेजुबान होती है,किसी राह पे कोई मिल जाए तो दूर

कही शहनाइयों की गूंज दस्तक पे दस्तक दे जाती है----मेरी हर अदा पे खुद की अदाएं कुर्बान करने

वाले,तुझे पाने के लिए ज़मीं-आसमां हम एक कर जाए गे-----

Thursday, 7 December 2017

हवाओ की रुखसती और यह बरसता पानी----कुछ मीठी कुछ खट्टी यादो के साथ ज़िन्दगी की प्यारी

सी मेहरबानी---तेरे आने की खबर से हर तरफ रौनक क्यों है----तेरे कदमो की आहट से पहले खामोशिया

गुनगुनाती क्यों है----शाखों से टूट कर यह फूल तेरी राहो मे बिछने के लिए राज़ी क्यों है----अरे..खिल

गई है यह धूप,तुझे मेरे घर का रास्ता दिखाने के लिए......बादलों को चीर कर तेरा ही सज़दा करने बस

आई है यह धूप----

Wednesday, 6 December 2017

आप के लफ्ज़ो की अदायगी का वो जादू....कलम लिए हाथ मे,बस हमी पे नज़म लिख देने का वो जादू....

हमारे चलने पे,हमारे ही कदमो पे निसार होने का यही तेरा जादू....हमारी ही हसी पे,हम को ही लूट लेने

का तेरा यह कातिलाना जादू....कौन हो तुम......गर्दिश मे सितारे आप के है,पर आसमां की बुलंदियों पे

हम को ले जाने का तेरा जादू.....कहे क्या आप से.....फरिश्ता हो या ज़िंदगी का रुख बदलने का कोई

नामचीन जादू.....

Tuesday, 5 December 2017

हटा दे अपने गालों से इन गेसुओं को,बस यू ही लहरा दे इन्हे खुले आसमां के दायरे मे ज़रा ----पलके ना 

झुका नज़रे तो उठा,कही  दूर बजती शहनाइयों की गूंज मे मेरे लफ्ज़ो का मतलब तो बता----कब तल्क

हा..कब तल्क तेरे इंतज़ार मे तेरे आने की घड़ियां मै गिनू----क्या वक़्त से कहू कि रुक जा ज़रा,मेरे

मेहबूब मे अब तक प्यार का ज़ज़्बा ही तो नहीं जगा---लबो को अब तो खुलने दे ज़रा,ज़िंदगी के इन

लम्हो को अब तो ज़ी ले ज़रा----

बहुत नरम सी चादर है तेरी यादो की तन्हाई की---कही दूर कोई बेखबर है,उसी की यादो की तन्हाई से---

बड़ी मुश्किल से नींद कभी जो आ जाती है,तेरा फिर मेरे खवाबो मे आ कर मुझे जगा जाना...यही तो

तेरी मुहब्बत की कातिलाना रुसवाई है----मेरे पास से तेरा ख़ामोशी से निकल जाना,और अपनी ही

मुस्कराहट को होठो मे दबा जाना----किस से कहे कि यही अदाएं तेरी मेरी रातो की तन्हाई है-----

Monday, 4 December 2017

धड़कनो को आहिस्ता से सुना तो तेरे नाम की आवाज़ आती है----आँखों को जो बंद किया तो तेरी ही

तस्वीर उभर आती है------बरबस नज़र पड़ी जो खुद की हथेलियों पर,इन्ही लकीरो मे मुझे अक्स तेरा

ही नज़र आया है --लोग कहते है कि मांगो तो खुदा भी मिल जाता है,पर हम ने  तो तुझी मे अपना खुदा

पाया है --पायल बजती है बेखबर रात भर,चूड़ियाँ खनक खनक जाती है बार बार----जो धड़कनो की सुने

तो आवाज़ सिर्फ तेरे ही नाम की आती है----